घड़ी (Clock)

घड़ी (Clock)

घड़ी समय को मापने वाला एक यन्त्र है, जो समय को घण्टे, मिनट तथा सेकण्ड में प्रदर्शित करती है।

घड़ी के मुख्य भाग निम्नलिखित हैं—

घड़ी का चित्र
घड़ी का चित्र

➤ डायल

  • डायल घड़ी का बाहरी भाग होता है, जिस पर 1 से 12 तक अंक अंकित रहते हैं।
  • डायल पर अंकित सभी संख्याओं के मध्य की दूरी समान होती है तथा प्रत्येक संख्या एक निश्चित घण्टे का प्रतिनिधित्व करती है।
  • एक घड़ी का डायल कुल 12 घण्टों को प्रदर्शित करता है।
  • घण्टे की सुई को 24 घण्टे पूर्ण करने के लिए डायल के दो पूर्ण चक्कर लगाने पड़ते हैं।
  • घड़ी का डायल वृत्ताकार (Circular) होता है, क्योंकि घड़ी की सुइयाँ अपनी गति के दौरान वृत्ताकार पथ का निर्माण करती हैं।
  • घड़ी की सुइयाँ एक पूरा चक्कर लगाने पर कुल 360° घूमती हैं।
डायल
डायल

चूँकि डायल को 12 समान भागों में विभाजित किया गया है, इसलिए—

  • दो क्रमागत संख्याओं के बीच का कोण = 360° ÷ 12 = 30°
  • अतः घड़ी के डायल पर किसी भी दो क्रमागत संख्याओं के मध्य का कोण सदैव 30° होता है।

❖ घड़ी की सुइयाँ

(1) घण्टे की सुई (Hour Hand) —

  • घण्टे की सुई घड़ी की सबसे छोटी सुई होती है।
  • यह सुई दो क्रमागत संख्याओं के बीच की दूरी तय करने में 1 घण्टा अथवा 60 मिनट का समय लेती है।
  • घड़ी में दो क्रमागत संख्याओं के मध्य का कोण 30° होता है।
  • अतः घण्टे की सुई 30° घूमने में 60 मिनट का समय लेती है।

इसलिए घण्टे की सुई की चाल होगी—

    • घण्टे की सुई की चाल = दूरी / समय
    • घण्टे की सुई की चाल = 30° / 60 = 1° / 2 प्रति मिनट

अतः घण्टे की सुई की चाल = 0.5° प्रति मिनट होती है।

(2) मिनट की सुई (Minute Hand) —

  • मिनट की सुई घण्टे की सुई से बड़ी होती है।
  • मिनट की सुई घड़ी का एक पूरा चक्कर लगाने में 1 घण्टा अथवा 60 मिनट का समय लेती है।
  • एक पूरा चक्कर 360° के बराबर होता है।
  • अतः मिनट की सुई 360° घूमने में 60 मिनट का समय लेती है।

इसलिए मिनट की सुई की चाल होगी—

    • मिनट की सुई की चाल = दूरी / समय
    • मिनट की सुई की चाल = 360° / 60 = 6° प्रति मिनट

अतः मिनट की सुई की चाल = 6° प्रति मिनट होती है।

(3) सेकण्ड की सुई (Second Hand) —

  • सेकण्ड की सुई घड़ी की सबसे बड़ी तथा सबसे तेज गति से चलने वाली सुई होती है।
  • यह सुई घड़ी का एक पूरा चक्कर लगाने में 1 मिनट का समय लेती है।
  • अर्थात् सेकण्ड की सुई 360° घूमने में 1 मिनट का समय लेती है।

अतः— सेकण्ड की सुई की चाल = 360° प्रति मिनट

  • प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रायः घण्टे की सुई तथा मिनट की सुई पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।
  • ऐसे प्रश्नों को हल करने के लिए दोनों सुइयों की सापेक्ष चाल (Relative Speed) का प्रयोग किया जाता है।

➤ घण्टे की सुई एवं मिनट की सुई की सापेक्ष चाल

  • सापेक्ष चाल = मिनट की सुई की चाल − घण्टे की सुई की चाल

अतः— सापेक्ष चाल = 6° − 1°/2 = 5 1/2° प्रति मिनट

अथवा—

सापेक्ष चाल = 11°/2 प्रति मिनट

❖ समय की माप (Measurement of Time)

इकाई (Unit) समतुल्य मान
60 सेकण्ड 1 मिनट
60 मिनट 1 घण्टा
24 घण्टे 1 दिन
7 दिन 1 सप्ताह
30 दिन 1 माह
365 दिन 1 वर्ष (साधारण वर्ष)
366 दिन 1 वर्ष (अधिवर्ष या लीप वर्ष)
12 माह 1 वर्ष
52 सप्ताह + 1 दिन 1 वर्ष (साधारण वर्ष)
52 सप्ताह + 2 दिन 1 वर्ष (अधिवर्ष या लीप वर्ष)

❖ कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

(1) सुइयों की सम्पातीय अवस्था —

    • जब घण्टे की सुई तथा मिनट की सुई एक ही दिशा में होती हैं, तब दोनों सुइयों को सम्पाती (Coincident) कहा जाता है।
    • ऐसी स्थिति सामान्यतः प्रत्येक घण्टे में एक बार आती है।
    • किन्तु 11 से 12 बजे के बीच तथा 12 से 1 बजे के बीच घड़ी की सुइयाँ सम्पाती नहीं होती हैं।
    • हालांकि ठीक 12 बजे दोनों सुइयाँ सम्पाती होती हैं।
    • इसलिए घड़ी की सुइयाँ 12 घण्टों में कुल 11 बार सम्पाती होती हैं।
    • इसी प्रकार 24 घण्टों में यह स्थिति कुल 22 बार उत्पन्न होती है।
घड़ी की सुइयों की सम्पाती स्थिति
घड़ी की सुइयों की सम्पाती स्थिति
  • 11 से 1 बजे के बीच सम्पाती होने की स्थितियाँ
  • यदि घड़ी के आरेखों का ध्यानपूर्वक अवलोकन किया जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि 11 बजे से 12 बजे के बीच घड़ी की घण्टे की सुई तथा मिनट की सुई सम्पाती नहीं होती हैं।
  • दोनों सुइयाँ ठीक 12 बजे एक-दूसरे के ऊपर आ जाती हैं, अर्थात् इस समय वे सम्पाती होती हैं।
  • इसी प्रकार 12 बजे के बाद 1 बजे तक के बीच भी ऐसी कोई स्थिति उत्पन्न नहीं होती, जब दोनों सुइयाँ पुनः सम्पाती हों।
  • अतः 11 बजे से 1 बजे के मध्य घड़ी की सुइयाँ केवल ठीक 12 बजे ही सम्पाती होती हैं।

(2) घड़ी की सुइयों की विपरीत अवस्था

  • जब घण्टे की सुई तथा मिनट की सुई एक-दूसरे के साथ 180° का कोण बनाती हैं, तब दोनों सुइयाँ विपरीत अवस्था में कहलाती हैं।
  • सामान्यतः प्रत्येक घण्टे में घड़ी की सुइयाँ एक बार विपरीत अवस्था में अवश्य आती हैं।
  • किन्तु 5 से 6 बजे के बीच तथा 6 से 7 बजे के बीच ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती जब दोनों सुइयाँ एक-दूसरे के विपरीत हों।
  • यदि घड़ी के आरेखों का अवलोकन किया जाए, तो स्पष्ट होता है कि 5 से 6 बजे के बीच दोनों सुइयाँ विपरीत नहीं होती हैं।
  • दोनों सुइयाँ ठीक 6 बजे एक-दूसरे के ठीक विपरीत होती हैं।
  • इसी प्रकार 6 से 7 बजे के बीच भी दोनों सुइयाँ पुनः विपरीत नहीं होती हैं।
  • अतः 12 घण्टों में घड़ी की सुइयाँ कुल 11 बार एक-दूसरे के विपरीत होती हैं।
  • इसी प्रकार 24 घण्टों में यह स्थिति कुल 22 बार उत्पन्न होती है।

(3) घड़ी की सुइयों की संरेखीय अवस्था

  • जब घड़ी की दोनों सुइयाँ या तो का कोण बनाती हैं अथवा 180° का कोण बनाती हैं, तब वे संरेखीय अवस्था में मानी जाती हैं।
  • जब दोनों सुइयाँ का कोण बनाती हैं, तब वे सम्पाती संरेख कहलाती हैं।
  • जब दोनों सुइयाँ 180° का कोण बनाती हैं, तब वे विपरीत संरेख कहलाती हैं।

अतः घड़ी की सुइयाँ निम्न दो स्थितियों में संरेखीय होती हैं—

संरेखीय अवस्था बनने वाला कोण
सम्पाती संरेख
विपरीत संरेख 180°
  • इस प्रकार 12 घण्टों में यह स्थिति कुल 22 बार उत्पन्न होती है।
  • इसी प्रकार 24 घण्टों में यह स्थिति कुल 44 बार उत्पन्न होती है।

(4) घड़ी की सुइयों की समकोणिक अवस्था

  • जब घड़ी की घण्टे की सुई तथा मिनट की सुई एक-दूसरे के साथ 90° का कोण बनाती हैं, तब वे समकोणिक अवस्था में कहलाती हैं।
  • सामान्यतः प्रत्येक घण्टे में दोनों सुइयाँ दो बार समकोणिक होती हैं।
  • यदि सामान्य गणना की जाए, तो 12 घण्टों में यह स्थिति 24 बार उत्पन्न होनी चाहिए।
  • किन्तु 2 से 4 बजे के बीच यह स्थिति केवल 3 बार उत्पन्न होती है।
  • इसी प्रकार 8 से 10 बजे के बीच भी यह स्थिति केवल 3 बार उत्पन्न होती है।
  • अतः वास्तविक रूप से 12 घण्टों में घड़ी की सुइयाँ कुल 22 बार समकोणिक होती हैं।
  • इसी प्रकार 24 घण्टों में यह स्थिति कुल 44 बार उत्पन्न होती है।

❖ घड़ी से सम्बन्धित प्रश्नों के प्रकार

प्रतियोगी परीक्षाओं में घड़ी से सम्बन्धित प्रश्न मुख्यतः निम्न प्रकार से पूछे जाते हैं—

  1. घड़ी पर आधारित सामान्य प्रश्न।
  2. एक निश्चित समय पर घड़ी की दोनों सुइयों के बीच बनने वाले कोण की माप ज्ञात करना।
  3. एक निश्चित समयान्तराल में एक निश्चित कोण बनने पर समय ज्ञात करना।
  4. घड़ी के तेज अथवा सुस्त होने पर समय की गणना करना।
  5. घड़ी के प्रतिबिम्ब में प्रदर्शित समय ज्ञात करना।

(1)  घड़ी पर आधारित सामान्य प्रश्न—

  • ऐसे प्रश्न जिनके उत्तर सदैव निश्चित रहते हैं तथा जिनमें किसी विशेष गणना की आवश्यकता नहीं होती, उन्हें सामान्य प्रश्न कहा जाता है।

उदाहरण—

  • घड़ी की सुइयाँ 12 घण्टों में कितनी बार 90° का कोण बनाती हैं?
  • 5 से 7 बजे के बीच घड़ी की सुइयाँ कितनी बार एक-दूसरे के विपरीत होती हैं?

(2) एक निश्चित समय पर घड़ी की सुइयों के बीच कोण ज्ञात करना—

  • इस प्रकार के प्रश्नों में एक निश्चित समय दिया जाता है तथा उस समय पर घड़ी की दोनों सुइयों के मध्य बनने वाले कोण की माप ज्ञात करनी होती है।

उदाहरण—

  • 9 बजकर 30 मिनट पर घड़ी की सुइयों के बीच का कोण ज्ञात कीजिए।

➤ कोण ज्ञात करने की लघु विधि—

ऐसे प्रश्नों को निम्न सूत्र द्वारा सरलतापूर्वक हल किया जा सकता है—

अभीष्ट कोण (θ) = 30H ∼ (11/2)M
जहाँ—
H = घण्टे वाला समय
M = मिनट वाला समय
∼ = अन्तर का चिह्न

तथा,  α = 360° − θ

  • θ तथा α में से कोई एक अथवा दोनों प्रश्न का उत्तर हो सकते हैं।
  • अन्तर का चिह्न इस कारण प्रयुक्त किया जाता है कि बड़ी संख्या में से सदैव छोटी संख्या को घटाया जाए।

➤ उदाहरण— 9 बजकर 30 मिनट पर घड़ी की सुइयों के बीच का कोण ज्ञात कीजिए।

हल—

Step 1:-

H = 9
M = 30

Step 2:-  सूत्रानुसार

θ = 30H ∼ (11/2)M
θ = (30 × 9) − (11/2 × 30)
θ = 270 − 165
θ = 105°

Step 3:- दूसरा कोण

α = 360° − 105°
α = 255°

अतः दोनों सुइयों के बीच का कोण 105° अथवा 255° होगा।

➤ उदाहरण— 3 बजकर 30 मिनट पर घड़ी की सुइयों के बीच का कोण ज्ञात कीजिए।

Step 1:-

H = 3
M = 30

Step 2:- सूत्रानुसार

θ = 30H ∼ (11/2)M
θ = (30 × 3) − (11/2 × 30)
θ = 90 − 165
θ = 75°

Step 3:- दूसरा कोण,

α = 360° − 75°
α = 285°

अतः दोनों सुइयों के बीच का कोण 75° अथवा 285° होगा।

➤ जब घड़ी की सुइयाँ पूरा समय दिखा रही हों

  • यदि घड़ी 1 बजे, 2 बजे, 3 बजे आदि पूर्ण समय प्रदर्शित कर रही हो, तो कोण निम्न प्रकार से ज्ञात किया जाता है— θ = H × 30°

उदाहरण— 3 बजे कोण = 3 × 30° = 90°

• दूसरा कोण— α = (12 − H) × 30°

उदाहरण— 7 बजे कोण = (12 − 7) × 30° = 150°

  • θ तथा α में से कोई भी एक अथवा दोनों उत्तर हो सकते हैं।
  • दोनों कोणों का योग सदैव 360° होता है।

(3) एक निश्चित समयान्तराल में निश्चित कोण बनने पर समय ज्ञात करना

  • इस प्रकार के प्रश्नों में किसी निश्चित घण्टे के बीच किसी निश्चित कोण के बनने का समय ज्ञात करना होता है।

उदाहरण— 2 से 3 बजे के बीच घड़ी की सुइयाँ किस समय 60° का कोण बनाएंगी?

➤ समय ज्ञात करने की विधि

  • ऐसे प्रश्नों के लिए निम्न सूत्र का प्रयोग किया जाता है—
    समय (T) = [(H₁ × 30) ± θ] × 2/11 मिनट
    अभीष्ट समय = H₁ बजकर T मिनट

जहाँ—

H₁ = प्रारम्भिक घण्टा
θ = दिया गया कोण

  • इस सूत्र से सामान्यतः दो उत्तर प्राप्त होते हैं।
  • यदि [(H₁ × 30) − θ] का मान ऋणात्मक प्राप्त हो, तो केवल ‘+’ चिह्न का प्रयोग किया जाता है।

➤ उदाहरण – 3 से 4 बजे के बीच घड़ी की सुइयों के बीच 60° का कोण किस समय बनेगा?

Step 1:- दिया है—

H₁ = 3
θ = 60°

Step 2:- सूत्रानुसार

T = [(3 × 30) ± 60] × 2/11
T = (90 ± 60) × 2/11

Step 3:- पहला मान

T = 150 × 2/11 = 300/11 = 27 3/11 मिनट

Step 4:- दूसरा मान,

T = 30 × 2/11 = 60/11 = 5 5/11 मिनट

  • अतः दोनों सुइयों के बीच 60° का कोण— 3 बजकर 5 5/11 मिनट पर तथा 3 बजकर 27 3/11 मिनट पर बनेगा।

➤ जब समयान्तराल एक घण्टे से कम हो

  • ऐसे प्रश्नों में पहले दिए गए समय पर दोनों सुइयों के बीच का कोण ज्ञात किया जाता है।

उदाहरण— 3:30 बजे और 4 बजे के बीच किस समय दोनों सुइयाँ समकोण बनाएंगी?

Step 1:-

  • सर्वप्रथम दिए गए प्रारम्भिक समय 3:30 बजे पर घड़ी की दोनों सुइयों के बीच का कोण ज्ञात करेंगे।
  • अतः 3:30 बजे घड़ी की सुइयों के बीच का कोण—

= (3 – 30/5) × 30 + 30/2
= (3 – 6) × 30 + 15
= 90 – 15
= 75°

Step 2:-

  • वर्तमान में दोनों सुइयों के बीच का कोण 75° है।
  • प्रश्नानुसार बनाना है 90° का कोण।
  • अतः सुइयों को अतिरिक्त चलना होगा—

= 90° – 75°
= 15°

Step 3:-

  • घण्टे एवं मिनट की सुइयों की सापेक्ष चाल = 11/2° प्रति मिनट होती है।
  • अतः 15° चलने में लगा समय—

= 15 × 2/11
= 30/11 मिनट
= 2 8/11 मिनट

Step 4:-

  • अतः अभीष्ट समय होगा—

= 3:30 + 2 8/11 मिनट
= 3:32 8/11

  • अतः 3 बजकर 32 8/11 मिनट पर घड़ी की दोनों सुइयाँ 90° (समकोण) बनाएंगी।

(4) घड़ी के तेज या सुस्त होने पर समय की गणना

इस प्रकार के प्रश्नों को हल करते समय यह समझना आवश्यक है कि—

  • यदि कोई घड़ी तेज (Fast Clock) है, तो वह वास्तविक समय से आगे का समय प्रदर्शित करती है।
  • यदि कोई घड़ी सुस्त (Slow Clock) है, तो वह वास्तविक समय से पीछे का समय प्रदर्शित करती है।
  • ऐसे प्रश्नों में घड़ी द्वारा प्राप्त अतिरिक्त समय अथवा विलम्ब समय की गणना करके वास्तविक समय ज्ञात किया जाता है।

➤ उदाहरण — एक घड़ी प्रत्येक घण्टे में 2 मिनट तेज हो जाती है। यदि मंगलवार की सुबह 8 बजे इसे मिलाया गया, तो बताइये कि रात को जब यह घड़ी 8:00 बजे प्रदर्शित करेगी, तब वास्तव में क्या समय होगा?

विकल्प—

(1) 7:40          (2) 7:46
(3) 7:36          (4) 7:45
(5) 7:56

Step 1: – प्रश्नानुसार, घड़ी प्रत्येक 1 घण्टे में 2 मिनट तेज हो जाती है।
Step 2:- सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक कुल समय = 12 घण्टे
Step 3:-
 अतः 12 घण्टों में घड़ी द्वारा प्राप्त अतिरिक्त समय—

= 12 × 2
= 24 मिनट

Step 4:- अतः घड़ी वास्तविक समय से 24 मिनट आगे चल रही है।
Step 5:- इसलिए वास्तविक समय होगा—

= 8:00 − 24 मिनट
= 7:36

  • अतः उस समय वास्तविक समय 7 बजकर 36 मिनट था।
  • अतः सही उत्तर (3) 7:36 है।

❖ घड़ी के दर्पण प्रतिबिम्ब में प्रदर्शित समय

  • जब किसी घड़ी को दर्पण (Mirror) के सामने रखा जाता है, तो उसका प्रतिबिम्ब दर्पण में दिखाई देता है।
  • ऐसे प्रश्नों में या तो वास्तविक समय दिया जाता है और प्रतिबिम्ब समय पूछा जाता है अथवा प्रतिबिम्ब समय देकर वास्तविक समय ज्ञात करने को कहा जाता है।
  • दर्पण प्रतिबिम्ब में समय ज्ञात करने के लिए निम्न नियम का प्रयोग किया जाता है— अभीष्ट समय = 11:60 − दिया गया समय
  • ध्यान दें कि 11:60 = 12:00 के बराबर होता है।

➤ उदाहरण — यदि घड़ी में 5:45 बजे हैं, तो दर्पण प्रतिबिम्ब में क्या समय दिखाई देगा?

Step 1:- 

अभीष्ट समय = 11:60 − 5:45

Step 2:- 

अभीष्ट समय = 6:15

  • अतः दर्पण प्रतिबिम्ब में समय 6:15 दिखाई देगा।

यहाँ दो घड़ियों के चित्र दर्शाए जाते हैं—

  • वास्तविक घड़ी का समय = 5:45
  • दर्पण प्रतिबिम्ब का समय = 6:15

घड़ी के जल प्रतिबिम्ब में प्रदर्शित समय

  • जब दर्पण को लम्बवत रखने के स्थान पर क्षैतिज रखा जाता है, तब प्राप्त प्रतिबिम्ब को जल प्रतिबिम्ब (Water Image) कहा जाता है।

जल प्रतिबिम्ब में समय ज्ञात करने के लिए दो स्थितियाँ होती हैं—

  • स्थिति 1 : जब वास्तविक समय अथवा प्रतिबिम्ब समय 6:00 बजे या उससे कम हो
    • ऐसी स्थिति में दिए गए समय को 6:30 में से घटाया जाता है।

सूत्र— अभीष्ट समय = 6:30 − दिया गया समय

➤ उदाहरण — यदि घड़ी में 5:50 बजे हैं, तो जल प्रतिबिम्ब में क्या समय दिखाई देगा?

Step 1:-

अभीष्ट समय = 6:30 − 5:50

Step 2:- 

अभीष्ट समय = 0:40

Step 3:- 

        • घड़ी में 0:40 को 12:40 माना जाता है।
        • अतः जल प्रतिबिम्ब में समय 12:40 दिखाई देगा।
        • यदि गणना के बाद घण्टे का मान 0 प्राप्त हो, तो उसे 12 माना जाता है।
        • इसी प्रकार यदि दिया गया समय 12 बजे अथवा 12 बजकर कुछ मिनट हो, तो गणना करते समय 12 के स्थान पर 0 का प्रयोग किया जाता है।
  • स्थिति 2 : जब वास्तविक समय अथवा प्रतिबिम्ब समय 6:00 बजे से अधिक हो
    • ऐसी स्थिति में दिए गए समय को 18:30 में से घटाया जाता है।

सूत्र— अभीष्ट समय = 18:30 − दिया गया समय

➤ उदाहरण —  यदि घड़ी में 7:25 बजे हैं, तो जल प्रतिबिम्ब में क्या समय दिखाई देगा?

Step 1:- 

अभीष्ट समय = 18:30 − 7:25

Step 2:- 

अभीष्ट समय = 11:05

      • अतः जल प्रतिबिम्ब में समय 11:05 दिखाई देगा।
      • इस स्थिति को समझाने के लिए सामान्यतः दो घड़ियों के चित्र प्रदर्शित किए जाते हैं।

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