❖ राजस्थान की बावड़ियाँ व छतरियाँ ❖
❖ राजस्थान की बावड़ियाँ
- बावड़ियों का निर्माण मुख्य रूप से जल संरक्षण एवं जल संग्रहण के उद्देश्य से किया जाता था।
- बूँदी को बावड़ियों का शहर (City of Step Wells) कहा जाता है।
❖ चाँद बावड़ी – आभानेरी ( दौसा )
- इसका निर्माण गुर्जर-प्रतिहार काल में राजा चाँद द्वारा कराया गया था।
- यह राजस्थान की सबसे गहरी तथा सबसे कलात्मक बावड़ी मानी जाती है।
- इसके सम्मान में वर्ष 2017 में ₹5 का डाक टिकट जारी किया गया।
❖ रानी जी की बावड़ी – बूँदी
- इस बावड़ी का निर्माण वर्ष 1699 ई. में बूँदी के शासक राव राजा अनिरुद्ध की रानी नाथावती ने अपने पुत्र बुद्धसिंह के शासनकाल में करवाया।
❖ नौलखा बावड़ी – डूंगरपुर
- इसका निर्माण वर्ष 1586 ई. में डूंगरपुर के शासक महारावल आसकरण की पत्नी प्रेमल देवी ने कराया।
❖ बाटाडू का कुआँ – बालोतरा
- इसे रेगिस्तान का जल महल कहा जाता है।
- इसका निर्माण रावल गुलाब सिंह ने कराया।
- यह संगमरमर से निर्मित है।
❖ हाथी भाटा – ककोंड गाँव ( टोंक )
- यह प्राकृतिक बावड़ी पत्थर की विशाल चट्टान को तराशकर बनाई गई है, जिसमें वर्षभर पानी बना रहता है।
❖ चाँद बावड़ी – जोधपुर
- इसका निर्माण राव चूण्डा की रानी चाँद कंवर ने करवाया।
- इसे चौहान बावड़ी के नाम से भी जाना जाता है।
❖ त्रिमुखी बावड़ी – उदयपुर
- इसका निर्माण महाराणा राजसिंह की पत्नी रामरसदे ने कराया।
❖ पन्नालाल शाह का तालाब – खेतड़ी ( झुंझुनूँ )
❖ पन्ना मीणा की बावड़ी – जयपुर
❖ सेठानी का जोहड़ा एवं पीथाणा जोहड़ा – चूरू
❖ तापी बावड़ी एवं तूर जी का झालरा – जोधपुर
❖ भंडारेज बावड़ी – दौसा
❖ तालाब-ए-शाही – धौलपुर
- इसका निर्माण जहाँगीर के मनसबदार सुलह खाँ ने शाहजहाँ के लिए शिकार स्थल के रूप में कराया।
❖ नौ मंजिला बावड़ी – नीमराना ( कोटपूतली-बहरोड़ )
- इसके निर्माता टोडरमल थे।
❖ हाड़ी रानी की बावड़ी – टोडारायसिंह ( टोंक )
- इसका निर्माण टोडा के शासक राव रूपाल की हाड़ी रानी ने कराया।
❖ काकी जी की बावड़ी, भावलदेवी बावड़ी एवं नागर सागर कुंड – बूँदी
❖ झालरा बावड़ी – सीकर
❖ झालीबाब बावड़ी – कुंभलगढ़ ( राजसमंद )
❖ दूध बावड़ी – माउंट आबू ( सिरोही )
❖ दूध तलाई – उदयपुर
❖ हर्षनाथ की बावड़ी – सीकर
❖ मेड़तणी की बावड़ी – झुंझुनूँ
❖ वीरपुरी बावड़ी – उदयपुर
❖ एक चट्टान बावड़ी – मंडोर ( जोधपुर )
❖ मोराकुंड – गढ़मौरा ( नादौती, करौली )
• मोराकुंड को राजा मोरध्वज की नगरी माना जाता है।
❖ चमना बावड़ी – शाहपुरा ( भीलवाड़ा )
- इसका निर्माण उम्मेदसिंह ने कराया।
❖ लवाण (डाकनियाँ) की बावड़ी – लवाण ( दौसा )
❖ मंदाकिनी बावड़ी – अचलगढ़ ( सिरोही )
❖ देवयानी कुंड – सांभर झील के समीप ( जयपुर )
- इसे छोटे पुष्कर के नाम से भी जाना जाता है।
❖ अमर सागर, जेत सागर, ब्रह्मा सागर एवं कौशिकराम का कुंड – जैसलमेर
❖ धाभाई जी की बावड़ी (धाय का कुण्ड) – बूँदी
- इसका निर्माण विपरीत पिरामिड के आकार में किया गया है।
- इसे जेल कुण्ड भी कहा जाता है।
❖ राजस्थान की छतरियाँ
- किसी व्यक्ति विशेष की मृत्यु के पश्चात उसकी स्मृति में निर्मित स्मारकों को छतरियाँ (देवल) कहा जाता है।
❖ महाराणा प्रताप की छतरी – बांडोली ( चावंड, सलूंबर )
- यह 8 खंभों पर आधारित छतरी है।
- इसका निर्माण केजड़ बाँध की पाल पर किया गया है।
- इसका निर्माण अमर सिंह प्रथम ने कराया।
❖ महाराणा सांगा की छतरी – मांडलगढ़ ( भीलवाड़ा )
- यह 8 खंभों वाली छतरी है।
- इसका निर्माण भरतपुर के अशोक परमार ने कराया।
❖ आहड़ – उदयपुर
- यहाँ मेवाड़ के राजपरिवार की छतरियाँ स्थित हैं।
- इस स्थान को महासतियाँ कहा जाता है।
- अमरसिंह प्रथम के बाद के शासकों की छतरियाँ यहीं निर्मित हैं।
❖ गैटोर की छतरियाँ – जयपुर
- यहाँ जयपुर के शासकों की छतरियाँ स्थित हैं।
- सवाई जयसिंह से सवाई माधोसिंह द्वितीय तक के शासकों की छतरियाँ यहाँ बनी हुई हैं।
- यह नाहरगढ़ किले की तलहटी में स्थित है।
❖ सवाई ईश्वरी सिंह की छतरी – जयनिवास बाग ( जयपुर )
❖ मिर्जा राजा मानसिंह की छतरी – हाड़ीपुरा गाँव ( जयपुर )
❖ मंडोर की छतरियाँ
- यहाँ जोधपुर के शासकों की छतरियाँ स्थित हैं।
- इनमें महाराजा अजीतसिंह की छतरी सबसे अधिक आकर्षक मानी जाती है।
❖ कागा की छतरियाँ – कागा ( जोधपुर )
- यह स्थान ऋषि काग भुशुंडी की तपोभूमि माना जाता है।
- यहाँ जोधपुर के सामंतों की छतरियाँ स्थित हैं।
- जसवंत सिंह प्रथम के प्रधानमंत्री राजसिंह कुंपावत की 18 खंभों वाली छतरी भी यहीं है।
❖ जसवंत थड़ा – जोधपुर
- यह महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय की स्मृति में निर्मित छतरी है।
- इसका निर्माण उनके पुत्र सरदार सिंह ने कराया।
- सफेद संगमरमर से निर्मित होने के कारण इसे मारवाड़ का ताजमहल कहा जाता है।
❖ देवीकुंड की छतरियाँ
- यहाँ बीकानेर के राठौड़ शासकों की छतरियाँ स्थित हैं।
❖ बड़ा बाग
- यह जैसलमेर के भाटी राजपरिवार की छतरियों के लिए प्रसिद्ध है।
❖ पालीवालों की छतरी – जैसलमेर
❖ छत्रविलास (क्षारबाग) की छतरियाँ
- यहाँ कोटा के हाड़ा शासकों की छतरियाँ स्थित हैं।
❖ केसर बाग की छतरियाँ
- यह बूँदी के शासकों की स्मृति से जुड़ी छतरियाँ हैं।
❖ मिश्रजी की छतरी – नैडा ( अलवर )
❖ गंगाबाई की छतरी – गंगापुर ( भीलवाड़ा )
- यह महादजी सिंधिया की पत्नी गंगाबाई की स्मृति में निर्मित है।
❖ जोगीदास की छतरी – उदयपुरवाटी ( झुंझुनूँ )
- इसे शेखावाटी के भीतिचित्रों का सबसे प्राचीन उदाहरण माना जाता है।
❖ जगन्नाथ कच्छावा की छतरी – मांडलगढ़ ( भीलवाड़ा )
❖ 32 खंभों की छतरी – रणथम्भोर दुर्ग
- हम्मीर देव चौहान ने अपने पिता जैत्रसिंह के 32 वर्ष के शासनकाल की स्मृति में इसका निर्माण कराया।
❖ 80 खंभों की छतरी (मूसी महारानी की छतरी) – अलवर
- यह अलवर में स्थित है।
- महाराजा बख्तावर सिंह की पासवान मूसी महारानी की स्मृति में वर्ष 1815 ई. में महाराजा विनयसिंह ने इसका निर्माण कराया।
❖ 84 खंभों की छतरी – देवपुरा गाँव ( बूँदी )
- इसका निर्माण 1683–1695 ई. के बीच राव अनिरुद्ध सिंह के शासनकाल में राव देवा ने कराया।
- यह भगवान शिव को समर्पित है।
❖ आंतेंद की छतरियाँ – अजमेर
- ये दिगंबर जैन समुदाय की छतरियाँ हैं।
❖ पंचकुंडा की छतरियाँ – मंडोर ( जोधपुर )
- यहाँ जोधपुर की महारानियों की छतरियाँ स्थित हैं।
❖ बख्तावर सिंह की छतरी – अलवर
❖ चेतक की छतरी – बलीचा गाँव ( राजसमंद )
❖ टहला की छतरियाँ – सरिस्का ( अलवर )
❖ सेनापति की छतरी – जोधपुर
❖ ब्राह्मण देवता की छतरी – मंडोर ( जोधपुर )
❖ मामा-भांजा की छतरी – मेहरानगढ़ ( जोधपुर ) (छाना-भींवा)
❖ राव मालदेव की छतरी – मंडोर ( जोधपुर )
❖ कीरत सिंह सोडा की छतरी – मेहरानगढ़ दुर्ग ( जोधपुर )
❖ गोरा धाय की छतरी – जोधपुर
- अजीत सिंह ने अपनी धाय की स्मृति में इसका निर्माण कराया।
❖ गोपाल सिंह की छतरी – करौली
❖ गोपाल पालीवाल की छतरी – जैसलमेर
❖ राव चन्द्रसेन की छतरी – सारण की पहाड़ियाँ ( पाली )
❖ बप्पा रावल (कालभोज) की छतरी – नागदा ( उदयपुर )
❖ महाराणा उदयसिंह की छतरी – गोगुन्दा ( उदयपुर )
❖ बंजारों की छतरी (6 खंभों की छतरी) – लालसोट ( दौसा )
❖ पृथ्वीराज सिसोदिया (उड़ना राजकुमार) की छतरी – कुंभलगढ़ दुर्ग
- यहाँ 12 खंभों वाली छतरी स्थित है।
❖ अमरसिंह राठौड़ (16 खंभों की छतरी) – नागौर
❖ अधूरा स्वप्न छतरी – रणथम्भौर दुर्ग
- इसका निर्माण महाराणा सांगा की पत्नी हाड़ी रानी कर्मावती ने कराया।
❖ कुत्ते की छतरी – कुक्कर घाटी ( सवाई माधोपुर )
❖ एक खंभे की छतरी – रणथम्भौर
❖ नटणी की छतरी – जालौर
❖ अमरगढ़ की छतरियाँ – बागोर ( भीलवाड़ा )
❖ संत पीपा की छतरी – गागरोन दुर्ग ( झालावाड़ )
❖ रामगोपाल पोद्दार की छतरी – रामगढ़ ( सीकर )
- इसे शेखावाटी की सबसे बड़ी छतरी माना जाता है।
❖ वीर दुर्गादास की छतरी – शिप्रा तट ( उज्जैन, मध्यप्रदेश )
❖ सार्दूल सिंह एवं महाराजा गंगासिंह की छतरी – बीकानेर
❖ अकबर की छतरी – बयाना दुर्ग ( भरतपुर )
❖ जयप्पा सिंधिया की छतरी – ताऊसर ( नागौर )
