राजस्थान के महल व हवेलियाँ

❖ राजस्थान के महल व हवेलियाँ ❖


एक थम्बा महल / प्रहरी मीनार

  • जोधपुर के मंडोर में स्थित यह महल महाराजा अजीतसिंह द्वारा बनवाया गया था।

एक थम्बिया महल – डूंगरपुर

  • महारावल शिवसिंह ने इस महल का निर्माण कराया।
  • यह गैपसागर झील के किनारे स्थित है।
  • इसके चारों ओर विजय निवास, खुमान निवास, लक्ष्मण विलास तथा उदय विलास महल स्थित हैं।

जूना महल – डूंगरपुर

  • इस महल का निर्माण किले जैसी संरचना के रूप में किया गया है।

अजीत भवन पैलेस – जोधपुर

  • इसे देश का प्रथम हेरिटेज होटल माना जाता है।
  • इसका निर्माण जोधपुर के महाराजा हनुवंत सिंह के प्रधानमंत्री अजीतसिंह ने कराया था।

उम्मेद भवन / छीतर पैलेस – जोधपुर

  • सन् 1929 में महाराजा उम्मेदसिंह ने अकाल राहत कार्यों के अंतर्गत इसका निर्माण करवाया।
  • यह छीतर की पहाड़ी पर स्थित है।
  • इसे भारत का सबसे बड़ा रिहायशी महल माना जाता है।
  • यहाँ घड़ियों का संग्रहालय भी स्थापित है।
  • इसके वास्तुकार हेनरी वॉन लैनचेस्टर तथा स्विंटन जैकब थे।

सिटी पैलेस / राजमहल – उदयपुर

  • सन् 1559 में महाराणा उदयसिंह ने पिछोला झील के किनारे इसका निर्माण कराया।
  • इतिहासकार फर्ग्यूसन ने इसे राजस्थान का विंडसर महल कहा है।
  • परिसर में कृष्णा विलास महल, दिलखुश महल, माणक चौक तथा मयूर चौक स्थित हैं।

अभेड़ा महल – कोटा

  • महाराणा अभयसिंह हाड़ा ने इसका निर्माण चम्बल नदी के किनारे कराया।
  • इसे हाड़ौती का हवामहल भी कहा जाता है।

अबली मीणी का महल – कोटा

  • कोटा के महाराव मुकुन्दसिंह हाड़ा ने अपनी पासवान अबली मीणी के लिए इस महल का निर्माण करवाया।
  • यह हाड़ौती का ताजमहल तथा राजस्थान का छोटा ताजमहल कहलाता है।

गुलाब महल – कोटा

काठ का रेन बसेरा / काष्ठ प्रसाद – झालावाड़

गढ़ पैलेस भवन – झालावाड़

  • सन् 1838 में झाला मदनसिंह द्वारा इसका निर्माण कराया गया।

लालगढ़ महल – बीकानेर

  • महाराजा गंगासिंह ने अपने पिता लालसिंह की स्मृति में इस महल का निर्माण कराया।
  • इसका निर्माण लाल पत्थरों से यूरोपीय शैली में किया गया है।
  • इसका उद्घाटन लॉर्ड हॉर्डिंग्ज ने किया था।

सिटी पैलेस – जयपुर

  • इसका निर्माण सन् 1729 में सवाई जयसिंह द्वारा कराया गया।
  • यह जयपुर राजपरिवार का निवास स्थान है।
  • इसके परिसर में चन्द्रमहल, मुबारक महल, सिलहखाना (शस्त्रागार), दीवान-ए-आम तथा दीवान-ए-खास स्थित हैं।
  • यहाँ विश्व का सबसे बड़ा चाँदी का पात्र सुरक्षित रखा गया है।

चन्द्रमहल – सिटी पैलेस (जयपुर)

  • यह भवन सात मंजिला है।
  • इसके वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य थे।

मुबारक महल – सिटी पैलेस (जयपुर)

  • सवाई माधोसिंह द्वितीय ने अतिथियों के ठहरने की व्यवस्था के उद्देश्य से इसका निर्माण कराया।
  • इसका निर्माण स्विंटन जैकब की देखरेख में कराया गया।
  • यह राजपूत, मुगल तथा यूरोपीय स्थापत्य शैली के समन्वय से निर्मित है।

हवामहल – जयपुर

  • सन् 1799 ई. में सवाई प्रताप सिंह ने राजपरिवार की महिलाओं के लिए उत्सवों तथा तीज की सवारी देखने के उद्देश्य से इसका निर्माण करवाया।
  • इसके वास्तुकार श्री लालचंद उस्ताद थे।
  • इस महल में कुल 953 खिड़कियाँ (झरोखे) हैं।
  • बाहर से इसकी आकृति भगवान कृष्ण के मुकुट जैसी प्रतीत होती है।
  • यह बिना नींव के समतल भूमि पर निर्मित है।
  • यह पाँच मंजिला भवन है।

➤ इसकी पाँचों मंजिलों का क्रम इस प्रकार है—

  1. शरद मंदिर
  2. रतन मंदिर
  3. विचित्र मंदिर
  4. प्रकाश मंदिर
  5. हवा मंदिर

सुनहरी कोठी / शीशमहल / गोल्डन मैनशन – टोंक

  • इसकी प्रथम मंजिल का निर्माण अमीर अली ने प्रारम्भ कराया, जिसे बाद में नवाब वज़िरूद्दौला ने पूर्ण कराया।
  • दूसरी मंजिल का निर्माण इब्राहिम अली ने करवाया।
  • यह अपनी उत्कृष्ट सुनहरी पच्चीकारी तथा मीनाकारी के लिए प्रसिद्ध है।
  • इसके निकट स्थित मुबारक महल में पूर्व समय में बकराईद के अवसर पर ऊँट की कुर्बानी दी जाती थी।

सिलीसेढ़ महल – अलवर

  • यह सिलीसेढ़ झील के किनारे स्थित है।
  • इसका निर्माण महाराजा विनय सिंह ने सन् 1845 ई. में कराया।

विजय मंदिर पैलेस – अलवर

  • इसका निर्माण अलवर के महाराजा जयसिंह ने कराया।

डीग के जलमहल

  • डीग को जलमहलों की नगरी कहा जाता है।
  • इनका निर्माण महाराजा सूरजमल ने कराया।
  • यहाँ के प्रमुख जलमहल हैं— गोपाल भवन, नन्द भवन, हरदेव भवन तथा किशन भवन

खेतड़ी महल – झुंझुनूं

  • इसे शेखावाटी का हवामहल तथा राजस्थान का दूसरा हवामहल कहा जाता है।
  • खेतड़ी के महाराजा भोपालसिंह ने इसे ग्रीष्मकालीन विश्राम हेतु बनवाया।
  • इस महल में लखनऊ की भूल-भुलैया तथा जयपुर के हवामहल की स्थापत्य झलक दिखाई देती है।

➤ नोटखेतड़ी के महाराजा अजितसिंह ने स्वामी विवेकानंद के सन् 1893 ई. में आयोजित शिकागो धर्म सम्मेलन में भाग लेने की व्यवस्था की थी। नरेन्द्र को विवेकानंद नाम भी उन्होंने ही दिया।

बीजोलाई के महल – कायलाना (जोधपुर)

जहाँगीर के महल – पुष्कर (अजमेर)

केसर विलास महल (स्वरूप निवास) – सिरोही

मान महल – पुष्कर

अढ़ाई दिन का झोपड़ा – अजमेर

  • इसके वास्तुकार अबू बक्र थे।

बादल महल – डूंगरपुर

  • यह गैब सागर झील के किनारे स्थित है।
  • महारावल गोपीनाथ ने इसका निर्माण पेरवा पत्थर से कराया।
  • इसकी वास्तुकला में राजपूत एवं मुगल शैली का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।

➤ नोटकुंभलगढ़ किला में भी बादल महल स्थित है, जो किले का सबसे ऊँचा भाग है।

बादल विलास महल – जैसलमेर

जलमहल – जयपुर

  • इसे आई बॉल के नाम से भी जाना जाता है।
  • सवाई जयसिंह ने इसका निर्माण मानसागर झील के मध्य करवाया।
  • यह पाँच मंजिला भवन है, जिसमें चार मंजिलें पानी के भीतर स्थित हैं।
  • इसकी सबसे ऊपरी मंजिल को चमेली महल कहा जाता है।
  • मिर्जा राजा मानसिंह ने गर्भावती नदी के जल को रोककर मानसागर झील का निर्माण कराया।

सुखमहल पैलेस – बूंदी

  • जैतसागर झील के किनारे स्थित इस महल का निर्माण विष्णु सिंह ने कराया।

रंगमहल – बूंदी

  • इसका निर्माण शत्रुशाल (छत्रसाल) ने करवाया।
  • यह अपने आकर्षक भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध है।

मीराबाई के महल – मेड़ता (नागौर)

गजनेर महल – बीकानेर

रेशमा महल – सीकर

चोखेलाव महल – मेहरानगढ़ (जोधपुर)

वीरों के स्मारक स्तंभ – भचूंदला (प्रतापगढ़)

कृष्णा विलास महल – उदयपुर

फूलसागर महल – बूंदी

नेहर खाँ की मीनार – कोटा

अतारकीन का दरवाजा – नागौर

  • इसका निर्माण इल्तुतमिश ने कराया।
  • इसे अकबर के बुलंद दरवाजे की प्रेरणा का स्रोत माना जाता है।

चश्मा-ए-नूर – अजमेर

  • जहाँगीर ने इसे शिकार के उद्देश्य से बनवाया था।

निहाल टावर – धौलपुर

  • इसे राजस्थान का सबसे बड़ा घंटाघर माना जाता है।

धर्म स्तूप – चुरू

  • इस घंटाघर का निर्माण लाल पत्थरों से किया गया है, इसलिए इसे लाल घंटाघर भी कहा जाता है।

लोंगेवाला युद्ध स्मारक – जैसलमेर

  • यह सन् 1971 के भारत–पाकिस्तान युद्ध से संबंधित ऐतिहासिक स्थल है।

लोहारगल तीर्थ स्थान – झुंझुनूं

गदरा शहीद स्मारक – बाड़मेर

  • इसका निर्माण सन् 1965 के भारत–पाकिस्तान युद्ध में शहीद हुए 14 रेलवे कर्मचारियों की स्मृति में किया गया।

हरिश्चंद्र / हाटकेश्वर की गुफा – माउंट आबू

कौलवी की गुफा – झालावाड़

  • ये बौद्ध गुफाएँ हैं।
  • इन्हें राजस्थान की एलोरा के नाम से भी जाना जाता है।

राजस्थान के प्रमुख उपनाम

  • जसवंत थड़ाराजस्थान का ताजमहल
  • रायमलोत का थड़ा (सिवाणा, बालोतरा)राजस्थान का दूसरा ताजमहल
  • अबली मीणी का महलराजस्थान का छोटा ताजमहल
  • काका जी दरगाह (प्रतापगढ़)काठल का ताजमहल

राजस्थान की हवेलियाँ

पटवों की हवेली – जैसलमेर

  • सेठ गुमानचंद बापना ने अपने पाँच पुत्रों के लिए यह पाँच मंजिला हवेली बनवाई।
  • इसे जैसलमेर की सबसे बड़ी हवेली माना जाता है।

सालिम सिंह की हवेली – जैसलमेर

  • इसका निर्माण जैसलमेर के प्रधानमंत्री सालिम सिंह ने कराया।
  • प्रारंभ में यह नौ मंजिला थी, जबकि वर्तमान में इसकी सात मंजिलें शेष हैं।
  • इसकी ऊपरी दो मंजिलें, जिन्हें रंगमहल और शीशमहल कहा जाता था, लकड़ी से निर्मित थीं और बाद में हटा दी गईं।
  • इसकी छठी मंजिल को जहाजमहल तथा सातवीं मंजिल को मोतीमहल के नाम से जाना जाता है।

नथमल की हवेली – जैसलमेर

  • इसका निर्माण जैसलमेर के दीवान नथमल मेहता ने कराया।
  • इसके निर्माण कार्य में लालू और हाथी नामक दो भाई प्रमुख कारीगर थे।

बागोर की हवेली – उदयपुर

  • मेवाड़ के प्रधानमंत्री अमरचंद बड़वा ने इसका निर्माण पिछोला झील के किनारे कराया।
  • यहाँ विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी सुरक्षित रखी गई है।
  • इस हवेली में पगड़ियों तथा कठपुतलियों का संग्रहालय भी स्थित है।

शेखावाटी की हवेलियाँ

  • शेखावाटी क्षेत्र की हवेलियाँ अपने आकर्षक भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • नवलगढ़ (झुंझुनूं) को शेखावाटी की स्वर्णनगरी कहा जाता है।

नवलगढ़ (झुंझुनूं)

  • भगतों की हवेली
  • रूपनिवास
  • जालान की हवेली
  • पोदार की हवेली
  • भगेरिया की हवेली

बिसाऊ (झुंझुनूं)

  • हीरालाल (झुनझुनवाला) की हवेली
  • नाथूराम पोदार की हवेली
  • सेठ जयदयाल केडिया की हवेली
  • सीताराम सिंगतिया की हवेली

डूंडलोद (झुंझुनूं)

  • सेठ लालचंद गोयनका की हवेली

मुकुंदगढ़ (झुंझुनूं)

  • सेठ राधाकृष्ण की हवेली
  • केसरदेव कानोडिया की हवेली

चिड़ावा (झुंझुनूं)

  • बगड़िया की हवेली
  • डलमिया की हवेली

महनसर (झुंझुनूं)

  • सोने-चाँदी की हवेली

झुंझुनूं

  • ईश्वरदास मोदी की हवेली
  • टीबड़े वालों की हवेली

मंडावा (झुंझुनूं)

  • झुनझुनवाला की हवेली
  • मोहनलाल सर्राफ मुरमुरिया की हवेली
  • सागरमल लाडिया की हवेली
  • रामनाथ गोयनका की हवेली
  • गोयनका डबल हवेली
  • रामदेव चोखानी की हवेली

श्रीमाधोपुर (सीकर)

  • पंसारी की हवेली

लक्ष्मणगढ़ (सीकर)

  • चार चौक की हवेली
  • चेतराम की हवेली

सीकर

  • गौरीलाल बियाणी की हवेली

रामगढ़ (सीकर)

  • ताराचंद रुईया की हवेली

फतेहपुर (सीकर)

  • नंदलाल देवड़ा की हवेली
  • महावीर प्रसाद गोयनका की हवेली – इसमें भगवान कृष्ण की आठ गोपियों को एक हाथी के चित्र के रूप में दर्शाया गया है।

चुरू

  • मालजी का कमरा
  • रामविलास गोयनका की हवेली
  • मंत्रियों की हवेली
  • कन्हैयालाल बागला की हवेली
  • सुराणा की हवेली

सुजानगढ़ (चुरू)

  • दानचंद चोपड़ा की हवेली

बड़े मियाँ की हवेली – जोधपुर

  • यह राखी, पोकरण तथा पुष्य नक्षत्र से संबंधित पारंपरिक मान्यता के लिए प्रसिद्ध है।

लालचंद बड्ढा की हवेली – फलौदी

नाटाणियों की हवेली – जयपुर

बादशाह की हवेली – अजमेर

बच्चावतों की हवेली – बीकानेर

  • इसका निर्माण कर्णसिंह बच्चावत ने कराया।

बीकानेर की प्रमुख हवेलियाँ

  • मोहता की हवेली
  • रामपुरिया की हवेली
  • मूंदड़ा की हवेली
  • गुलेच्छा की हवेली
  • सेठिया की हवेली

झालाजी की हवेली – कोटा

जालिम सिंह की हवेली – कोटा

राजस्थान की प्रसिद्ध पहचान

उपाधि स्थान
हवेलियों की नगरी जैसलमेर
हजार हवेलियों की नगरी बीकानेर
भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध हवेलियाँ शेखावाटी

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