राजस्थान राज्य सचिवालय एवं मुख्य सचिव

❖ राजस्थान राज्य सचिवालय एवं मुख्य सचिव ❖


राज्य सचिवालय

  • राज्य सचिवालय सचिवों का वह कार्यालय है, जहाँ राज्य सरकार के सभी विभागों से संबंधित राजनीतिक एवं प्रशासनिक कार्यों का संचालन किया जाता है तथा नीतियों एवं कानूनों का निर्धारण किया जाता है।
  • प्रत्येक राज्य का अपना एक राज्य सचिवालय होता है।
  • यह राज्य प्रशासन प्रणाली के सर्वोच्च स्तर पर कार्य करने वाला प्रशासनिक संस्थान है।
  • राज्य सचिवालय का प्रशासनिक प्रमुख मुख्य सचिव तथा राजनीतिक प्रमुख मुख्यमंत्री होता है।
  • राज्य सचिवालय में विभागों को प्रशासनिक विभाग कहा जाता है, जबकि केन्द्र सरकार में इन्हें मंत्रालय के नाम से जाना जाता है।
  • जयपुर में शासन सचिवालय की स्थापना के लिए द राजस्थान एडमिनिस्ट्रेशन ऑर्डिनेंस – 1949 जारी किया गया।
  • राजस्थान में शासन सचिवालय की स्थापना अप्रैल 1949 में जयपुर में की गई।

राज्य सचिवालय की संरचना

प्रशासनिक संरचना राजनीतिक संरचना
मुख्य सचिव

अतिरिक्त मुख्य सचिव

संबंधित विभाग का प्रमुख शासन सचिव

विशेष सचिव / अतिरिक्त सचिव

उप सचिव

सहायक सचिव / अनुभाग अधिकारी

अन्य मंत्रालयिक कर्मचारी
मुख्यमंत्री

कैबिनेट मंत्री

राज्य मंत्री

उपमंत्री

मुख्य सचिव

  • मुख्य सचिव के पद की शुरुआत 1799 में गवर्नर जनरल लॉर्ड वेलेजली द्वारा की गई।
  • मुख्य सचिव, शासन सचिवालय का प्रमुख अथवा मुख्य कार्यकारी अधिकारी होता है।
  • यह राज्य सचिवालय का सर्वोच्च प्रशासनिक पद है।
  • सभी सचिवों का नेतृत्व मुख्य सचिव के हाथ में होता है।
  • यह राज्य का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी माना जाता है।
  • मुख्य सचिव, राज्य सिविल सेवाओं (नौकरशाही संगठन) का अध्यक्ष होता है।
  • जिस कार्य का आवंटन किसी अन्य सचिव को नहीं किया गया हो, उसका निष्पादन मुख्य सचिव द्वारा किया जाता है। इसी कारण इसे अवशिष्ट वसीयतदार कहा जाता है।
  • मुख्य सचिव को राज्य प्रशासन का किंग पिन माना जाता है, क्योंकि नीति-निर्माण, प्रशासनिक नियंत्रण तथा प्रशासनिक नेतृत्व में इसकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
मुख्य सचिव का चयन
  • नियुक्तिमुख्यमंत्री द्वारा की जाती है।
  • इस पद पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति की जाती है।
  • मुख्य सचिव सामान्यतः मुख्यमंत्री का विश्वासपात्र अधिकारी होता है।
  • वरिष्ठता क्रम को पहली बार मुख्य सचिव मीठालाल मेहता की नियुक्ति के समय तोड़ा गया था।
  • कार्यकालमुख्य सचिव का कार्यकाल मुख्यमंत्री के प्रसाद-पर्यन्त होता है।
  • सामान्यतः यह पद 60 वर्ष की आयु तक रहता है।
  • मुख्य सचिव को पद से हटाने का अधिकार केवल मुख्यमंत्री के पास होता है।
मुख्य सचिव के कार्य

मुख्यमंत्री के सलाहकार के रूप में

  • मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री का प्रमुख प्रशासनिक सलाहकार होता है।
  • यह मुख्यमंत्री तथा राज्य सरकार के विभिन्न सचिवों के बीच समन्वय स्थापित करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है।

मंत्रिपरिषद के सचिव के रूप में

  • मुख्य सचिव राज्य मंत्रिपरिषद का पदेन सचिव होता है तथा इसकी उप-समितियों के सचिव का दायित्व भी निभाता है।
  • यह मंत्रिमंडल सचिवालय का प्रशासनिक प्रमुख होता है।
  • यद्यपि मुख्य सचिव मंत्रिमंडल का सदस्य नहीं होता, फिर भी वह उसकी बैठकों में भाग लेता है।
  • कैबिनेट तथा उसकी उप-समितियों की बैठकों में भी मुख्य सचिव की सहभागिता रहती है।

प्रमुख समन्वयक के रूप में

  • मुख्य सचिव सचिवों की बैठकों की अध्यक्षता करता है।
  • यह सम्भागीय आयुक्तों, जिलाधीशों तथा जिला प्रशासन के विभागाध्यक्षों की बैठकों की भी अध्यक्षता करता है।
  • राज्य लोक सेवाओं के प्रमुख के रूप में मुख्य सचिव वरिष्ठ लोक सेवकों की नियुक्ति, स्थानांतरण एवं पदोन्नति से संबंधित मामलों का संचालन करता है।
  • मुख्य सचिव, सामाजिक लेखा परीक्षा, जवाबदेही एवं पारदर्शिता सोसायटी के शासी निकाय का अध्यक्ष होता है।

अन्य कार्य

  • मुख्य सचिव आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार के प्रवक्ता की भूमिका भी निभाता है।
  • यह राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठकों में भी भाग लेता है।

राज्य सचिवालय के सुधार से संबंधित समितियाँ

समिति अध्यक्ष
प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (1966–70) (1) मोरारजी देसाई (2) के. हनुमन्तेया
सचिवालय पुनर्गठन समिति (1959) एस. डी. उज्ज्वल
राजस्थान सचिवालय पुनर्गठन समिति (1969) मोहन मुखर्जी
राजस्थान की प्रथम प्रशासनिक सुधार समिति (1963) हरिशचन्द्र माथुर
प्रशासनिक सुधार समिति (1992–1995) जे. के. भनोट
राजस्थान वित्तीय प्रशासनिक सुधार समिति (1999) शिवचरण माथुर

राजस्थान की प्रथम प्रशासनिक सुधार समिति (1963) ने मुख्य सचिव के संबंध में कहा कि सरकारी मशीनरी का प्रधान तथा मंत्रिपरिषद का सलाहकार होने के कारण मुख्य सचिव की प्रशासनिक व्यवस्था में विशिष्ट एवं अद्वितीय स्थिति है।

प्रमुख मुख्य सचिव
मुख्य सचिव मुख्यमंत्री
के. राधाकृष्णन हीरालाल शास्त्री
बी. नारायण हीरालाल शास्त्री
बी. जी. राव जयनारायण व्यास, मोहनलाल सुखाड़िया
कृष्ण पुरी मोहनलाल सुखाड़िया
के. एन. सुब्रमण्यम मोहनलाल सुखाड़िया
भगत सिंह मेहता मोहनलाल सुखाड़िया
सांवलादन उज्ज्वल मोहनलाल सुखाड़िया
के. पी. यू. मेनन मोहनलाल सुखाड़िया
आर. डी. माथुर मोहनलाल सुखाड़िया
डी. सी. सामंत वसुन्धरा राजे, अशोक गहलोत
श्रीमती कुशल सिंह अशोक गहलोत
टी. श्रीनिवासन अशोक गहलोत
सलाउद्दीन अहमद अशोक गहलोत
जी. के. मैथ्यू अशोक गहलोत
एम. एम. राजन अशोक गहलोत, वसुन्धरा राजे
राजीव महर्षि वसुन्धरा राजे
ओमप्रकाश मीणा वसुन्धरा राजे
अशोक जैन वसुन्धरा राजे
निहालचन्द गोयल वसुन्धरा राजे
देवेन्द्र भूषण गुप्ता वसुन्धरा राजे, अशोक गहलोत
राजीव स्वरूप अशोक गहलोत
निरंजन कुमार आर्य अशोक गहलोत
श्रीमती उषा शर्मा अशोक गहलोत, भजनलाल शर्मा
सुधांश पंत भजनलाल शर्मा

राजीव महर्षि को मुख्य सचिव के पद पर कार्य करने के बाद भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के पद पर नियुक्त किया गया।

महत्वपूर्ण बिन्दु
  • राजस्थान के प्रथम मुख्य सचिवके. राधाकृष्णन
  • राजस्थान की प्रथम महिला मुख्य सचिवश्रीमती कुशल सिंह
  • राजस्थान की दूसरी महिला मुख्य सचिवश्रीमती उषा शर्मा
  • सर्वाधिक कार्यकाल तक मुख्य सचिव रहने वाले अधिकारी – भगत सिंह मेहता
  • न्यूनतम कार्यकाल वाले मुख्य सचिवएच. एम. माथुर (6 दिन)

वी. बी. एल. माथुर (विपिन बिहारी लाल माथुर) ने 3 मुख्यमंत्रियों के साथ सर्वाधिक 4 कार्यकालों में मुख्य सचिव के रूप में कार्य किया—

    • हरिदेव जोशी
    • शिवचरण माथुर
    • हरिदेव जोशी
    • भैरोंसिंह शेखावत
  • राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के सदस्य भी रहने वाले मुख्य सचिवसांवलादन उज्ज्वल
  • अनुसूचित जाति से राजस्थान के प्रथम मुख्य सचिवनिरंजन कुमार आर्य
  • अनुसूचित जनजाति से राजस्थान के प्रथम मुख्य सचिवओ. पी. मीणा

राजस्थान में राष्ट्रपति शासन (4 बार)

क्र.सं. राष्ट्रपति शासन की अवधि राज्यपाल मुख्यमंत्री कारण राष्ट्रपति
1. 13 मार्च 1967 से 26 अप्रैल 1967 तक (45 दिन) सम्पूर्णानन्द (लागू), सरदार हुकमसिंह (समाप्त) मोहनलाल सुखाड़िया चुनाव में स्पष्ट बहुमत प्राप्त न होने के कारण डॉ. राधाकृष्णन
2. 30 अप्रैल 1977 से 21 जून 1977 तक (53 दिन) वेदपाल त्यागी (लागू), रघुकुल तिलक (समाप्त) हरिदेव जोशी 1975 के राष्ट्रीय आपातकाल के बाद की राजनीतिक परिस्थितियाँ बी. डी. जत्ती (कार्यवाहक राष्ट्रपति)
3. 17 फरवरी 1980 से 5 जून 1980 तक (110 दिन) रघुकुल तिलक भैरोंसिंह शेखावत गैर-कांग्रेसी (जनता पार्टी) सरकार का पदच्युत होना नीलम संजीव रेड्डी
4. 15 दिसम्बर 1992 से 3 दिसम्बर 1993 तक (354 दिन) एम. चन्ना रेड्डी (लागू), बलिराम भगत (समाप्त) भैरोंसिंह शेखावत बाबरी मस्जिद विवाद के बाद उत्पन्न परिस्थितियाँ शंकर दयाल शर्मा

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