राजस्थान की जिला प्रशासनिक संरचना

❖ राजस्थान की जिला प्रशासनिक संरचना ❖


  • जिला प्रशासन की वर्तमान अवधारणा का प्रारम्भिक स्वरूप सबसे पहले मौर्यकाल में दिखाई देता है।
  • मौर्यकाल में जिले के लिए जनपद शब्द का प्रयोग किया जाता था (वर्तमान में यह शब्द उत्तर प्रदेश में भी प्रचलित है) तथा इसका प्रमुख अधिकारी राजुका कहलाता था।
  • गुप्तकाल एवं हर्षकाल में जिले को विषय कहा जाता था, जिसका प्रशासन विषयपति के हाथों में होता था।
  • सल्तनत काल में जिले को परगना कहा जाता था तथा इसका प्रमुख अधिकारी फौजदार कहलाता था।
  • मुगल काल में जिले के लिए सरकार शब्द का प्रयोग किया जाता था और इसका प्रमुख अमलगुजार होता था।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 233 में जिला शब्द का उल्लेख जिला न्यायाधीश की नियुक्ति के संदर्भ में किया गया है।

जिला कलेक्टर

  • गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स के शासनकाल में 1772 में भारत में पहली बार कलेक्टर का पद सृजित किया गया।
  • जिला कलेक्टर (जिलाधीश) भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का अधिकारी होता है तथा जिले का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी माना जाता है।
  • जिला कलेक्टर अपने कार्यों का निर्वहन संभागीय आयुक्त के निर्देशन में करता है। इसलिए उसका प्रथम उच्चाधिकारी संभागीय आयुक्त होता है।
  • 2009 से राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के अधिकारियों को पहली बार जिला कलेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया।
  • जिला कलेक्टर को जिला प्रशासन की आँख, कान एवं हाथ (बाँह) कहा जाता है।
  • जिला स्तर पर राज्य सरकार के कार्यों के संचालन एवं समन्वय की जिम्मेदारी जिला कलेक्टर पर होती है, इसलिए इसे जिले में लघु राज्य सरकार के रूप में कार्य करने वाला अधिकारी माना जाता है।
  • रजनी कोठारी ने जिलाधीश (जिला कलेक्टर) को “संस्थागत करिश्मा” की संज्ञा दी।
  • अटल बिहारी वाजपेयी के अनुसार जिलाधीश ही जिला प्रशासन की धुरी है।
  • के. के. दास का मत था कि जिलाधीश जैसा अधिकारी न पहले कहीं था और न भविष्य में कहीं होगा।
  • रैमजे मैकडोनाल्ड ने जिलाधीश की तुलना ऐसे कछुए से की, जिसकी पीठ पर भारत सरकार का हाथी खड़ा है।

जिला कलेक्टर (जिलाधीश) के कार्य

(1) जिला दण्डनायक (जिला मजिस्ट्रेट) के रूप में

  • जिले में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखना तथा पुलिस प्रशासन पर नियंत्रण रखना।
  • कारागारों का निरीक्षण करना।
  • दावा रहित सम्पत्ति के निस्तारण के आदेश जारी करना।
  • भारत में आने वाले विदेशियों के पासपोर्ट (पारपत्रों) की जाँच करना।
  • विशेष परिस्थितियों में रात्रि के समय पोस्टमार्टम की अनुमति प्रदान करना।
  • स्थानीय निकायों का नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण करना।

(2) भू-राजस्व अधिकारी के रूप में

  • भू-राजस्व का संग्रह करना।
  • भूमि सुधार, भूमि प्रबंधन एवं भूमि अधिग्रहण से संबंधित मामलों का निस्तारण करना।

(3) जिला विकास अधिकारी के रूप में

  • जिले की विकास परियोजनाओं की निगरानी करना तथा सभी विकास कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।
  • जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार के बीच समन्वय स्थापित करना।

(4) अन्य कार्य

  • जिले के मुख्य प्रोटोकॉल अधिकारी के रूप में कार्य करना।
  • जिले के जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में दायित्व निभाना।
  • जिले के मुख्य जनगणना अधिकारी के रूप में कार्य करना।
  • जिला कोषागार एवं उपकोषागार का पर्यवेक्षण करना।

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण

  • राज्य सरकार द्वारा आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत प्रत्येक जिले में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का गठन किया गया है, जिसका अध्यक्ष जिला कलेक्टर होता है।

उपखण्ड प्रशासन

  • प्रत्येक जिले को प्रशासनिक सुविधा के लिए उपखण्डों में विभाजित किया जाता है।
  • उपखण्ड का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी उपखण्ड अधिकारी (S.D.O./S.D.M.) होता है।
  • उपखण्ड अधिकारी, जिला कलेक्टर के निर्देशन में कार्य करता है। यह उपखण्ड का मुख्य भू-राजस्व अधिकारी होने के साथ-साथ प्रथम श्रेणी का कार्यपालक मजिस्ट्रेट भी होता है।

➤ उपखण्ड अधिकारी के प्रमुख कार्य

  • सरकारी भूमि पर होने वाले अतिक्रमण को रोकना।
  • भू-राजस्व से संबंधित आवश्यक निर्देश जारी करना।
  • भू-अभिलेख तैयार करवाना।
  • कृषि उत्पादन का आकलन करना।
  • गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों का सर्वेक्षण कराना।

तहसील प्रशासन

  • प्रत्येक उपखण्ड को आगे तहसीलों में विभाजित किया जाता है।
  • तहसील का प्रमुख अधिकारी तहसीलदार होता है।
  • तहसीलदार की नियुक्ति राजस्व मण्डल द्वारा की जाती है।
  • तहसीलदार, उपखण्ड अधिकारी के निर्देशन में अपने दायित्वों का निर्वहन करता है।
  • तहसीलदार द्वितीय श्रेणी का कार्यपालक मजिस्ट्रेट होता है।
  • तहसीलदार का प्रमुख दायित्व भू-राजस्व प्रशासन का संचालन करना है।

उपतहसील प्रशासन

  • प्रत्येक तहसील को आगे उपतहसीलों में विभाजित किया जाता है।
  • उपतहसील का प्रमुख अधिकारी नायब तहसीलदार होता है।
  • नायब तहसीलदार, तहसीलदार के निर्देशन में कार्य करता है।

पटवारी

  • पटवारी की नियुक्ति राजस्व मण्डल, अजमेर द्वारा की जाती है।
  • पटवारी के प्रमुख कार्य
  • गिरदावरी रिपोर्ट (फसल निरीक्षण) तैयार करना।
  • सरकारी सम्पत्ति की निगरानी करना।
  • नकल रिपोर्ट उपलब्ध कराना।
  • भू-नामान्तरण खोलना।

राजस्थान में पटवार प्रशिक्षण विद्यालय

क्रम प्रशिक्षण विद्यालय
1. टोंक
2. कोटा
3. देवखेड़ा (अलवर)
4. देबारी (उदयपुर)
5. गजसिंहपुर (गंगानगर)
6. जोधपुर

राजस्थान राजस्व मण्डल

  • मुख्यालयअजमेर
  • स्थापना1 नवम्बर 1949
  • 15 अक्टूबर 2020 को राजस्थान में प्रथम राजस्व दिवस का आयोजन किया गया।

पुलिस प्रशासन

  • पुलिस प्रशासन राज्य सूची का विषय है।
  • राजस्थान पुलिस का गठन 1948 में किया गया।
  • मुख्यालयजयपुर
  • राजस्थान पुलिस का ध्येय वाक्य“अपराधियों में डर, आमजन में विश्वास”

➤ आदर्श वाक्य“सेवार्थ कटिबद्धता”

  • पुलिस प्रशासन का सर्वोच्च पद पुलिस महानिदेशक (D.G.P.) का होता है।
  • अनेक जिलों को मिलाकर पुलिस रेंज का गठन किया जाता है, जिसका प्रमुख पुलिस महानिरीक्षक (I.G.P.) होता है।
  • किसी जिले का सर्वोच्च पुलिस अधिकारी पुलिस अधीक्षक (S.P.) होता है, जो जिला कलेक्टर के निर्देशन में अपने दायित्वों का निर्वहन करता है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top