राजस्थान की जनगणना

इस भाग में क्या पढ़ेंगे

राजस्थान की जनगणना

राजस्थान की जनगणना राज्य की जनसंख्या, सामाजिक संरचना तथा ग्रामीण एवं शहरी वितरण को समझने का महत्वपूर्ण आधार है। जनगणना संघ सूची का विषय है तथा इसका आयोजन प्रत्येक 10 वर्ष बाद किया जाता है। भारत में सबसे पहली जनगणना वर्ष 1872 में लॉर्ड मेयो के काल में हुई थी। इसके बाद भारत में पहली व्यवस्थित जनगणना वर्ष 1881 में लॉर्ड रिपिन के समय शुरू हुई। वर्ष 2011 की जनगणना भारत की 15वीं जनगणना थी, जबकि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद यह देश की 7वीं जनगणना थी। प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है।

राजस्थान की कुल जनसंख्या

राजस्थान की कुल जनसंख्या 6.86 करोड़ (6,85,48,437) है, जो भारत की कुल जनसंख्या का 5.67 प्रतिशत है। जनसंख्या की दृष्टि से राजस्थान का देश में 7वाँ स्थान है।

विवरण आँकड़ा
राजस्थान की कुल जनसंख्या 6.86 करोड़ (6,85,48,437)
भारत की कुल जनसंख्या में हिस्सा 5.67%
देश में स्थान 7वाँ

वर्ष 2011 की जनगणना के समय राजस्थान का स्थान 8वाँ था, लेकिन जून 2014 में आन्ध्रप्रदेश से तेलंगाना अलग होने के बाद राजस्थान का स्थान 7वाँ हो गया।

जनसंख्या की दृष्टि से जिले

राजस्थान में जनसंख्या की दृष्टि से जयपुर सबसे बड़ा जिला है। इसके बाद जोधपुर, अलवर, नागौर तथा उदयपुर का स्थान आता है।

जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़े जिले जनसंख्या
जयपुर 66.26 लाख
जोधपुर 36.87 लाख
अलवर 36.74 लाख
नागौर
उदयपुर

वहीं दूसरी ओर जैसलमेर, प्रतापगढ़, सिरोही तथा बूंदी राज्य के कम जनसंख्या वाले जिलों में शामिल हैं।

जनसंख्या की दृष्टि से छोटे जिले जनसंख्या
जैसलमेर 6.70 लाख
प्रतापगढ़ 8.68 लाख
सिरोही 10.36 लाख
बूंदी

राजस्थान में 10 लाख (1 मिलियन) से कम जनसंख्या वाले जिलों की संख्या 2 है।

राजस्थान के सर्वाधिक आबादी वाले शहर

राज्य में सर्वाधिक आबादी वाला शहर जयपुर है। इसके बाद जोधपुर, कोटा, बीकानेर तथा अजमेर का स्थान आता है।

शहर जनसंख्या
जयपुर 30.77 लाख
जोधपुर 10.33 लाख
कोटा 10.01 लाख
बीकानेर
अजमेर
  • राजस्थान में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की संख्या 3 है।
  • 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की संख्या 5 है।
  • 1 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की संख्या 30 है।

धार्मिक आधार पर जनसंख्या

राजस्थान की कुल जनसंख्या में हिन्दू आबादी का प्रतिशत सबसे अधिक है। इसके बाद मुस्लिम, सिख, जैन, ईसाई तथा बौद्ध आबादी का स्थान आता है।

धर्म प्रतिशत
हिन्दू 88.49%
मुस्लिम 9.06%
सिख 1.27%
जैन 0.91%
ईसाई 0.14%
बौद्ध 0.02%
  • सर्वाधिक हिन्दू जनसंख्या वाला जिला — जयपुर
    • सर्वाधिक हिन्दू प्रतिशत वाला जिला — दौसा
  • सर्वाधिक मुस्लिम जनसंख्या वाला जिला — जयपुर
    • सर्वाधिक Muslim प्रतिशत वाला जिला — जैसलमेर
  • सर्वाधिक ईसाई जनसंख्या वाला जिला — बाँसवाड़ा
    • सर्वाधिक ईसाई प्रतिशत वाला जिला — बाँसवाड़ा

ग्रामीण जनसंख्या

वर्ष 2001 में राजस्थान की ग्रामीण जनसंख्या 76.61 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2011 में घटकर 75.10 प्रतिशत रह गई। ग्रामीण जनसंख्या की दृष्टि से जयपुर, अलवर तथा नागौर राज्य के प्रमुख जिले हैं, जबकि ग्रामीण जनसंख्या प्रतिशत के आधार पर डूंगरपुर, बाड़मेर तथा बाँसवाड़ा शीर्ष स्थान पर हैं।

  • सर्वाधिक ग्रामीण जनसंख्या वाले जिले — जयपुर (31.54 लाख), अलवर, नागौर
  • सर्वाधिक ग्रामीण जनसंख्या प्रतिशत वाले जिले — डूंगरपुर, बाड़मेर, बाँसवाड़ा
  • न्यूनतम ग्रामीण जनसंख्या वाले जिले — जैसलमेर, कोटा, प्रतापगढ़
  • न्यूनतम ग्रामीण जनसंख्या प्रतिशत वाले जिले — कोटा, जयपुर, अजमेर

शहरी (नगरीय) जनसंख्या

वर्ष 2001 में राजस्थान की शहरी जनसंख्या 23.29 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2011 में बढ़कर 24.90 प्रतिशत हो गई। शहरी जनसंख्या की दृष्टि से जयपुर, जोधपुर तथा कोटा राज्य के प्रमुख जिले हैं, जबकि शहरी जनसंख्या प्रतिशत के आधार पर कोटा राज्य में प्रथम स्थान पर है।

  • सर्वाधिक शहरी जनसंख्या वाले जिले — जयपुर (34.71 लाख), जोधपुर, कोटा
  • सर्वाधिक शहरी जनसंख्या प्रतिशत वाले जिले — कोटा (60.31%), जयपुर, अजमेर, जोधपुर
  • न्यूनतम शहरी जनसंख्या वाले जिले — प्रतापगढ़, डूंगरपुर, जैसलमेर
  • न्यूनतम शहरी जनसंख्या प्रतिशत वाले जिले — डूंगरपुर, बाड़मेर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़

अनुसूचित जाति (S.C)

राजस्थान की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जातियों का महत्वपूर्ण योगदान है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में अनुसूचित जातियों का कुल प्रतिशत 17.83% है। राजस्थान की कुल ग्रामीण जनसंख्या में अनुसूचित जाति का प्रतिशत 18.5% है, जबकि कुल शहरी जनसंख्या में इसका प्रतिशत 15.7% है।

विवरण आँकड़ा
अनुसूचित जाति का कुल प्रतिशत 17.83%
ग्रामीण जनसंख्या में प्रतिशत 18.5%
शहरी जनसंख्या में प्रतिशत 15.7%
अनुसूचित जाति का लिंगानुपात 923

सर्वाधिक अनुसूचित जाति जनसंख्या वाले जिलों में जयपुर, गंगानगर, नागौर तथा अलवर शामिल हैं। वहीं अनुसूचित जाति प्रतिशत की दृष्टि से गंगानगर (36.58%) राज्य में प्रथम स्थान पर है। इसके बाद हनुमानगढ़ (27.85%), करौली (24.31%), चूरू (22.14%) तथा भरतपुर (21.87%) का स्थान आता है।

दूसरी ओर, अनुसूचित जाति जनसंख्या की दृष्टि से डूंगरपुर, प्रतापगढ़, बाँसवाड़ा तथा जैसलमेर राज्य के न्यूनतम जिले हैं, जबकि प्रतिशत की दृष्टि से डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, उदयपुर तथा प्रतापगढ़ सबसे कम अनुसूचित जाति प्रतिशत वाले जिले हैं।

अनुसूचित जनजाति (S.T)

राजस्थान में अनुसूचित जनजातियों का कुल प्रतिशत 13.48% है। ग्रामीण क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों की हिस्सेदारी अधिक है, जबकि शहरी क्षेत्रों में इसका प्रतिशत अपेक्षाकृत कम है।

विवरण आँकड़ा
अनुसूचित जनजाति का कुल प्रतिशत 13.48%
ग्रामीण जनसंख्या में प्रतिशत 16.88%
शहरी जनसंख्या में प्रतिशत 3.2%
अनुसूचित जनजाति का लिंगानुपात 948
  • अनुसूचित जनजाति जनसंख्या की दृष्टि से उदयपुर, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर तथा प्रतापगढ़ राज्य के प्रमुख जिले हैं।
  • प्रतिशत की दृष्टि से बाँसवाड़ा (76.38%) राज्य में प्रथम स्थान पर है। इसके बाद डूंगरपुर (70.82%), प्रतापगढ़ (64.32%), उदयपुर (49.71%) तथा सिरोही (28.22%) का स्थान है।
  • वहीं न्यूनतम अनुसूचित जनजाति जनसंख्या वाले जिलों में बीकानेर, नागौर, चूरू तथा गंगानगर शामिल हैं। प्रतिशत की दृष्टि से भी नागौर, बीकानेर, चूरू तथा गंगानगर सबसे कम अनुसूचित जनजाति प्रतिशत वाले जिले हैं।
  • साक्षरता की दृष्टि से भरतपुर तथा झुंझुनूं में अनुसूचित जनजाति साक्षरता सर्वाधिक है, जबकि सिरोही तथा जालौर में यह न्यूनतम है।

दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर

वर्ष 1911-1921 का दशक राजस्थान के जनसंख्या इतिहास में महान विभाजक दशक कहलाता है। इस अवधि में महामारी, सूखा तथा अकाल के कारण राज्य की जनसंख्या में कमी दर्ज की गई थी। राजस्थान में सर्वाधिक जनसंख्या वृद्धि दर वाला दशक 1971-1981 का दशक रहा। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर 21.31% रही, जबकि वर्ष 2001 में यह 28.41% थी।

विवरण वृद्धि दर
राजस्थान की दशकीय वृद्धि दर 21.31%
वर्ष 2001 की वृद्धि दर 28.41%
ग्रामीण जनसंख्या वृद्धि दर 19%
शहरी जनसंख्या वृद्धि दर 29%

सर्वाधिक दशकीय वृद्धि दर वाले जिलों में बाड़मेर (32.5%), जैसलमेर (31.8%), जोधपुर (27.7%) तथा बाँसवाड़ा (26.5%) शामिल हैं। वहीं न्यूनतम वृद्धि दर वाले जिलों में गंगानगर (10.0%), झुंझुनूं (11.7%), पाली (11.7%) तथा बूंदी (15.4) शामिल हैं।

  • सर्वाधिक ग्रामीण दशकीय वृद्धि दर वाले जिले — जैसलमेर, बाड़मेर, बाँसवाड़ा
  • न्यूनतम ग्रामीण दशकीय वृद्धि दर वाले जिले — कोटा, श्रीगंगानगर
  • सर्वाधिक शहरी दशकीय वृद्धि दर वाले जिले — अलवर, दौसा, बारां
  • न्यूनतम शहरी दशकीय वृद्धि दर वाले जिले — डूंगरपुर, प्रतापगढ़

राजस्थान के 16 जिले ऐसे हैं जिनकी वृद्धि दर राज्य की औसत वृद्धि दर से अधिक है।

जनघनत्व

प्रति वर्ग किलोमीटर में रहने वाले व्यक्तियों की संख्या को जनघनत्व कहा जाता है। भारत का जनघनत्व 382 है, जबकि राजस्थान का जनघनत्व 200 है। वर्ष 2001 में राजस्थान का जनघनत्व 165 था।

विवरण आँकड़ा
भारत का जनघनत्व 382
राजस्थान का जनघनत्व 200
वर्ष 2001 में राजस्थान का जनघनत्व 165
जनघनत्व की दृष्टि से राजस्थान का स्थान 19वाँ

जनघनत्व की दृष्टि से जयपुर (595) राज्य में प्रथम स्थान पर है। इसके बाद भरतपुर (503), दौसा (476), अलवर (438), धौलपुर (398) तथा बाँसवाड़ा (397) का स्थान है। वहीं न्यूनतम जनघनत्व वाले जिलों में जैसलमेर (17), बीकानेर (78), बाड़मेर (92) तथा चूरू (147) शामिल हैं।

लिंगानुपात

प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या को लिंगानुपात कहा जाता है। भारत का लिंगानुपात 943 है, जबकि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान का लिंगानुपात 928 है, जो वर्ष 1901 के बाद से राज्य का सर्वाधिक लिंगानुपात है।

विवरण आँकड़ा
भारत का लिंगानुपात 943
राजस्थान का लिंगानुपात 928
लिंगानुपात की दृष्टि से राजस्थान का स्थान 22वाँ
न्यूनतम लिंगानुपात (1921) 896

राजस्थान में सर्वाधिक लिंगानुपात वाले जिले डूंगरपुर (994), राजसमंद (990), पाली (987), प्रतापगढ़ (983) तथा बाँसवाड़ा (980) हैं। वहीं न्यूनतम लिंगानुपात वाले जिलों में धौलपुर (846), जैसलमेर (852), करौली (861) तथा भरतपुर (880) शामिल हैं। राजस्थान के 15 जिले ऐसे हैं जिनका लिंगानुपात राज्य के औसत लिंगानुपात 928 से भी कम है।

ग्रामीण लिंगानुपात

राजस्थान का ग्रामीण लिंगानुपात 933 है, जबकि वर्ष 2001 में यह 930 था।

  • सर्वाधिक ग्रामीण लिंगानुपात वाला जिला — पाली (1003), राजसमंद (998)
  • न्यूनतम ग्रामीण लिंगानुपात वाला जिला — धौलपुर (841)

शहरी लिंगानुपात

राजस्थान का शहरी (नगरीय) लिंगानुपात 914 है, जबकि वर्ष 2001 में यह 890 था।

  • सर्वाधिक शहरी लिंगानुपात वाला जिला — टोंक (985), बाँसवाड़ा (964)
  • न्यूनतम शहरी लिंगानुपात वाला जिला — जैसलमेर (807), धौलपुर (864), अलवर (872)

बाल (शिशु) लिंगानुपात (0-6 आयु वर्ग)

भारत का शिशु लिंगानुपात 919 है, जबकि राजस्थान का शिशु लिंगानुपात 888 है। वर्ष 2001 में यह 909 था।

विवरण आँकड़ा
भारत का शिशु लिंगानुपात 919
राजस्थान का शिशु लिंगानुपात 888
वर्ष 2001 का शिशु लिंगानुपात 909
  • सर्वाधिक शिशु लिंगानुपात वाला जिला — बाँसवाड़ा (934), प्रतापगढ़ (933), भीलवाड़ा (928)
  • न्यूनतम शिशु लिंगानुपात वाला जिला — झुंझुनूं (837), सीकर (848), करौली (852), गंगानगर (854)

ग्रामीण शिशु लिंगानुपात

राजस्थान का ग्रामीण शिशु लिंगानुपात 892 है।

  • सर्वाधिक ग्रामीण शिशु लिंगानुपात — बाँसवाड़ा (937)
  • न्यूनतम ग्रामीण शिशु लिंगानुपात — झुंझुनूं (832)

शहरी शिशु लिंगानुपात

राजस्थान का शहरी शिशु लिंगानुपात 874 है।

  • सर्वाधिक शहरी शिशु लिंगानुपात — नागौर (907)
  • न्यूनतम शहरी शिशु लिंगानुपात — धौलपुर (841)

साक्षरता

कोई भी व्यक्ति जिसकी आयु 7 वर्ष या उससे अधिक है तथा वह पढ़ और लिख सकता है, उसे साक्षर माना जाता है।

भारत की साक्षरता दर 74.04% है। देश में सर्वाधिक साक्षरता केरल में तथा न्यूनतम साक्षरता बिहार में दर्ज की गई है। साक्षरता की दृष्टि से राजस्थान का देश में 26वाँ स्थान है।

राजस्थान की साक्षरता दर 66.11% है, जबकि वर्ष 2001 में यह 60.41% थी।

विवरण आँकड़ा
भारत की साक्षरता दर 74.04%
राजस्थान की साक्षरता दर 66.11%
वर्ष 2001 में राजस्थान की साक्षरता 60.41%
साक्षरता में राजस्थान का स्थान 26वाँ

साक्षरता की दृष्टि से कोटा (76.6%) राज्य में प्रथम स्थान पर है। इसके बाद जयपुर (75.5%), झुंझुनूं (74.1%), सीकर तथा अलवर का स्थान आता है। वहीं न्यूनतम साक्षरता वाले जिलों में जालौर (54.9%), सिरोही (55.3%), प्रतापगढ़, बाँसवाड़ा तथा बाड़मेर शामिल हैं।

पुरुष साक्षरता

राजस्थान में पुरुष साक्षरता दर 79.20% है, जबकि वर्ष 2001 में यह 75.70% थी।

सर्वाधिक पुरुष साक्षरता वाले जिलों में झुंझुनूं, कोटा, जयपुर तथा सीकर शामिल हैं, जबकि न्यूनतम पुरुष साक्षरता वाले जिले प्रतापगढ़, बाँसवाड़ा, सिरोही तथा जालौर हैं।

महिला साक्षरता

राजस्थान में महिला साक्षरता दर 52.12% है, जबकि वर्ष 2001 में यह 43.90% थी।

विवरण आँकड़ा
महिला साक्षरता 52.12%
वर्ष 2001 में महिला साक्षरता 43.90%
पुरुष एवं महिला साक्षरता में अंतर 27.08%

राजस्थान में पुरुष एवं महिला साक्षरता के बीच 27.08% का अंतर है, जो देश में सर्वाधिक है। महिला साक्षरता की दृष्टि से बिहार के बाद राजस्थान का स्थान देश में निचले पायदान से दूसरा अर्थात 27वाँ राज्य है।

महिला साक्षरता की दृष्टि से कोटा (65.9%) राज्य में प्रथम स्थान पर है। इसके बाद जयपुर, झुंझुनूं तथा गंगानगर का स्थान आता है। वहीं न्यूनतम महिला साक्षरता वाले जिलों में जालौर (38.5%), सिरोही, जैसलमेर तथा बाड़मेर शामिल हैं।

ग्रामीण एवं शहरी साक्षरता

राजस्थान की ग्रामीण साक्षरता दर 61.44% है। ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुष साक्षरता 76.2% तथा महिला साक्षरता 45.8% है। ग्रामीण साक्षरता की दृष्टि से झुंझुनूं राज्य में प्रथम तथा सिरोही अंतिम स्थान पर है।

वहीं राजस्थान की शहरी साक्षरता दर 79.70% है। शहरी क्षेत्रों में पुरुष साक्षरता 87.9% तथा महिला साक्षरता 70.7% है। शहरी साक्षरता की दृष्टि से उदयपुर प्रथम तथा नागौर अंतिम स्थान पर है।

कार्यशील जनसंख्या

कार्य सहभागिता दर किसी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में भाग लेने वाली जनसंख्या का प्रतिशत दर्शाती है। भारत में कार्य सहभागिता दर 39.8% है, जबकि राजस्थान में यह 43.60% है।

विवरण प्रतिशत
भारत की कार्य सहभागिता दर 39.8%
राजस्थान की कार्य सहभागिता दर 43.60%
पुरुष कार्य सहभागिता दर 51.5%
महिला कार्य सहभागिता दर 35.1%

राजस्थान में सर्वाधिक कार्यशील जनसंख्या वाला जिला जयपुर है, जबकि कार्यशील जनसंख्या प्रतिशत की दृष्टि से प्रतापगढ़ (55.50%) राज्य में प्रथम स्थान पर है। वहीं न्यूनतम कार्यशील जनसंख्या वाला जिला जैसलमेर है तथा न्यूनतम कार्यशील जनसंख्या प्रतिशत वाला जिला जयपुर (37.20%) है।

जीवन प्रत्याशा रिपोर्ट

वर्ष 2015-19 के दौरान जन्म के समय जीवन प्रत्याशा 69 वर्ष रही, जबकि 2016-20 के दौरान यह बढ़कर 69.4 वर्ष हो गई।

महत्वपूर्ण बिन्दु

राजस्थान में वर्तमान में तीन मिलिट्री स्कूल (सैनिक स्कूल) संचालित हैं।

चित्तौड़गढ़ — स्थापना वर्ष 1961
डोरासर गाँव, झुंझुनूं — वर्ष 2018 से संचालित। यहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड प्रोग्रामिंग सेंटर की स्थापना की गई है।
हल्दीना गाँव, मालाखेड़ा (अलवर)

प्रमुख विश्वविद्यालय

राजस्थान में स्थित प्रमुख विश्वविद्यालय एवं संस्थान निम्नलिखित हैं —

विश्वविद्यालय / संस्थान स्थान
राजस्थान का केन्द्रीय विश्वविद्यालय अजमेर
राजस्थान विश्वविद्यालय (पुराना नाम – राजपूताना विश्वविद्यालय) जयपुर
आई.एल.डी कौशल (स्किल) विश्वविद्यालय जयपुर
हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय जयपुर
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) जोधपुर
मत्स्य विश्वविद्यालय अलवर
महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय भरतपुर
बाबा आम्टे दिव्यांग विश्वविद्यालय जयपुर
पुलिस और सुरक्षा विश्वविद्यालय जोधपुर
राजीव गाँधी जनजाति विश्वविद्यालय उदयपुर
क्रीड़ा (खेल) विश्वविद्यालय झुंझुनूं
पंडित दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय सीकर
डॉ. भीमराव अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय जयपुर
रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर
जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर
महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय बीकानेर
महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर
मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर
वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा

राजस्थान में दो उच्च अध्ययन शिक्षण संस्थान (आई.ए.एस.ई.) स्थापित हैं —

  1. राजकीय उच्च अध्ययन शिक्षण संस्थान — बीकानेर
  2. राजकीय उच्च अध्ययन शिक्षण संस्थान — अजमेर

राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान उदयपुर में स्थित है। इसकी स्थापना वर्ष 1978 में मेहरोत्रा समिति की सिफारिश पर की गई थी। राजीव गाँधी फिनटेक डिजिटल इंस्टीट्यूट जोधपुर में स्थित है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की स्थापना 1 अगस्त 1957 को जयपुर में की गई थी, लेकिन पी. सत्यनारायण कमेटी की सिफारिश पर इसे वर्ष 1961 में अजमेर स्थानांतरित कर दिया गया।


जनगणना 2027 : राजस्थान के लिए नई शुरुआत

राजस्थान सहित पूरे देश में अब जनगणना के नए चरण की शुरुआत हो चुकी है। वर्ष 2027 में आयोजित होने वाली जनगणना भारत की 16वीं जनगणना तथा स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद की 8वीं जनगणना होगी। वर्ष 2011 के बाद पहली बार देश और राजस्थान को जनसंख्या, साक्षरता, लिंगानुपात, जनघनत्व, शहरीकरण तथा सामाजिक संरचना से जुड़े नवीनतम आधिकारिक आँकड़े प्राप्त होंगे। वर्तमान में राजस्थान से संबंधित अधिकांश जनसांख्यिकीय आँकड़े वर्ष 2011 की जनगणना पर आधारित हैं।

जनगणना 2027 की प्रमुख विशेषताएँ

  • यह भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी।
  • पहली बार नागरिकों को Self Enumeration (स्वयं जनगणना भरने) की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
  • जनगणना का कार्य मोबाइल एप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जा रहा है।
  • इस जनगणना में जातीय गणना भी शामिल की जाएगी।
  • जनगणना के आँकड़ों का उपयोग भविष्य की सरकारी योजनाओं और नीतियों के निर्माण में किया जाएगा।

जनगणना 2027 के चरण

चरण विवरण
चरण-I मकान सूचीकरण एवं आवास जनगणना
चरण-II जनसंख्या गणना एवं सामाजिक-आर्थिक विवरण संग्रह

पहले चरण में मकानों, आवासीय सुविधाओं तथा परिवारों की उपलब्ध परिसंपत्तियों से संबंधित जानकारी एकत्रित की जा रही है। दूसरे चरण में जनसंख्या, शिक्षा, प्रवास, सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियाँ एकत्रित की जाएँगी।

राजस्थान के लिए इसका महत्व

जनगणना 2027 पूरी होने के बाद राजस्थान के जिलों की जनसंख्या, साक्षरता दर, लिंगानुपात, जनघनत्व, ग्रामीण-शहरी आबादी तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति से जुड़े सभी आँकड़ों को अद्यतन किया जाएगा। इसके बाद राजस्थान के प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाने वाले जनसंख्या संबंधी अधिकांश प्रश्न नए आँकड़ों पर आधारित होने की संभावना है।

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