राजस्थान के प्रमुख जनपद एवं प्राचीन नाम

❖ राजस्थान के प्रमुख जनपद एवं प्राचीन नाम ❖


यौधेय क्षेत्र

  • गंगानगर एवं हनुमानगढ़ का क्षेत्र प्राचीन काल में यौधेय क्षेत्र के नाम से जाना जाता था।
  • राजस्थान के उत्तरी भाग में यौधेय एक अत्यंत शक्तिशाली कबीले के रूप में स्थापित थे।
  • कुषाण शक्ति को पराजित कर समाप्त करने में यौधेयों ने महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की।
  • वराहमिहिर द्वारा रचित बृहत्संहिता में यौधेयों के पतन का उल्लेख मिलता है।

मारवाड़

  • जोधपुर के आसपास का क्षेत्र मारवाड़ कहलाता है।
  • प्राचीन समय में इस क्षेत्र को मरु प्रदेश के नाम से जाना जाता था।

राजस्थान का ब्रज क्षेत्र

  • भरतपुर, धौलपुर, करौली तथा सवाई माधोपुर का क्षेत्र मिलकर राजस्थान का ब्रज क्षेत्र कहलाता है।

मालव जनपद

  • टोंक क्षेत्र प्राचीन मालव जनपद का प्रमुख भाग था।
  • सिकंदर के आक्रमण के समय मालव पूर्व की ओर बढ़कर जयपुर क्षेत्र में आए तथा उन्होंने मालवनगर बसाया, जिसे वर्तमान में ककोटनगर (उनियारा, टोंक) के नाम से जाना जाता है।
  • ककोटनगर को मालवों ने अपनी राजधानी बनाया।
  • साम्राज्य विस्तार के उद्देश्य से मालवों ने पुष्कर के भदो पर आक्रमण किया, लेकिन शक क्षत्रप नहपान ने उन्हें पराजित कर दिया।
  • मालवों की विजय से संबंधित अभिलेख नांदसा (भीलवाड़ा) से प्राप्त हुआ है।
  • राजस्थान में सर्वाधिक मालव जनपद के सिक्के प्राप्त हुए हैं।

मालवा क्षेत्र

  • इंदौर, झाबुआ, नीमच, रतलाम, मंदसौर (मध्यप्रदेश) तथा प्रतापगढ़ एवं झालावाड़ मिलकर मालवा क्षेत्र का निर्माण करते हैं।
  • प्राचीन काल में यह क्षेत्र अवनति कहलाता था तथा इसका उल्लेख 16 महाजनपदों में मिलता है।
  • अवनति के दो भाग थे— उत्तरी अवनति एवं दक्षिणी अवनति

मत्स्य जनपद

  • जयपुर, अलवर तथा भरतपुर का क्षेत्र मत्स्य जनपद के अंतर्गत आता था।
  • मत्स्य जनपद का सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है।
  • महाभारत काल में इसकी राजधानी विराटनगर (बैराठ) थी, जहाँ पांडवों ने अपना अज्ञातवास व्यतीत किया था।
  • मत्स्य जनपद के शासक विराट ने विराटनगर की स्थापना की थी।
  • चीनी यात्री युवानच्वांग ने भी अपने विवरण में मत्स्य जनपद का उल्लेख किया है।
  • याज्ञवल्क्य द्वारा रचित शतपथ ब्राह्मण में भी इसका वर्णन मिलता है।
  • आनंद कोसलायन द्वारा रचित बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय में वर्णित 16 महाजनपदों की सूची में मत्स्य जनपद को राजस्थान का महाजनपद बताया गया है।

राजस्थान के अनेक क्षेत्र कुरु, शूरसेन तथा अवनति महाजनपदों के अंतर्गत आते थे। उत्तरी अवनति की राजधानी उज्जायिनी तथा दक्षिणी अवनति की राजधानी महिष्मती थी। इन दोनों के बीच नेत्रवती नदी प्रवाहित होती थी।

कुरु महाजनपद

  • अलवर का उत्तरी भाग कुरु महाजनपद में सम्मिलित था।
  • इसकी राजधानी इन्द्रप्रस्थ (आधुनिक दिल्ली) थी।

शूरसेन महाजनपद

  • भरतपुर, धौलपुर तथा करौली का क्षेत्र शूरसेन महाजनपद के अंतर्गत आता था।
  • इसकी राजधानी मथुरा थी।
  • बयाना प्रशस्ति में शूरसेन राजवंश का उल्लेख मिलता है।
  • चौथी शताब्दी ई.पूर्व के यूनानी लेखकों ने सिकंदर के समय शूरसेन महाजनपद का वर्णन किया है।

अर्जुनायन

  • अलवर एवं भरतपुर का क्षेत्र अर्जुनायन कहलाता था।
  • अर्जुनायनों ने मालवों के साथ मिलकर विदेशी क्षत्रपों को पराजित किया।

जम्बुख-रण

  • केशोरायपाटन (आश्रम पट्टन, बूंदी) में जम्बुख (रीछों) की अधिकता होने के कारण इस क्षेत्र को जम्बुख-रण कहा जाता था।

ब्रह्मवर्त

  • सरस्वती नदी और दृषद्वती नदी के मध्य स्थित क्षेत्र को ब्रह्मवर्त कहा जाता था।
  • मनुस्मृति में ब्रह्मवर्त का उल्लेख मिलता है।
  • महाभारत के अनुसार विनाशन (विनशन) नामक स्थान पर सरस्वती नदी के लुप्त होने का वर्णन मिलता है।
  • दृषद्वती नदी को वर्तमान में यमुना के नाम से जाना जाता है।
  • सरस्वती नदी का उल्लेख ऋग्वेद में प्राप्त होता है।

ब्रजनगर

  • झालरापाटन (झालावाड़) का प्राचीन नाम ब्रजनगर था।
  • झालरापाटन को सिटी ऑफ बेल्स (घंटियों का शहर) भी कहा जाता है।

गुर्जररात्रा

  • गुर्जर प्रतिहारों ने गुर्जररात्रा क्षेत्र पर शासन किया था।
  • इसमें जोधपुर का दक्षिणी भाग तथा भीनमाल (जालौर) सम्मिलित थे।

मांड / वल्ल / डुंगल

  • जैसलमेर का प्राचीन नाम मांड, वल्ल अथवा डुंगल था।

मेरवाड़ा

  • ब्यावर एवं अजमेर का क्षेत्र मेरवाड़ा कहलाता था।

शिवी जनपद

  • उदयपुर, सलूम्बर तथा चित्तौड़गढ़ का क्षेत्र शिवी जनपद के अंतर्गत आता था।
  • इसकी राजधानी मध्यमिका थी, जिसे वर्तमान में नगरी (चित्तौड़गढ़) के नाम से जाना जाता है।
  • बिड़च नदी के किनारे स्थित मध्यमिका का उल्लेख महाभारत, पतंजलि द्वारा रचित महाभाष्य तथा पाणिनी की अष्टाध्यायी में मिलता है।
  • शिवी जनपद का प्रारम्भिक उल्लेख इसके सिक्कों पर प्राप्त होता है।
  • ऋग्वेद में भी शिवी जनपद का वर्णन मिलता है।
  • नगरी से प्राचीन नहर के अवशेष प्राप्त हुए हैं।

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