राजस्थान के राज्यपाल

भाग – 6 : राज्य सरकार
(अनुच्छेद 153 से 237 तक)


भारतीय संविधान के भाग – 6 में अनुच्छेद 153 से 237 के अंतर्गत राज्य सरकार की संरचना एवं उससे संबंधित प्रावधानों का वर्णन किया गया है।

राज्य की कार्यपालिका (अनुच्छेद 153 – 167) में निम्न पद सम्मिलित हैं—

    • राज्यपाल
    • मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद
    • महाधिवक्ता

★ राज्य की विधायिका (अनुच्छेद 168 – 213) के प्रमुख घटक—

    • राज्यपाल
    • विधानसभा
    • विधानपरिषद

★ राज्य की न्यायपालिका (अनुच्छेद 214 – 237) के अंतर्गत—

    • उच्च न्यायालय
    • अधीनस्थ न्यायालय

इस भाग में क्या पढ़ेंगे

❖ राज्यपाल (Governor)

    • राज्य शासन व्यवस्था में सर्वोच्च संवैधानिक पद राज्यपाल (Governor) का होता है।
    • राज्य विधानमंडल की संरचना में राज्यपाल एक अभिन्न अंग के रूप में शामिल होता है।
    • राज्य की कार्यपालिका का संवैधानिक नेतृत्व राज्यपाल के पास निहित रहता है।
    • राज्यपाल, केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में अपनी भूमिका निभाता है।
    • राज्यपाल राज्य का औपचारिक (नाममात्र) प्रमुख होता है, जबकि शासन संचालन की वास्तविक शक्तियों का प्रयोग मुख्यमंत्री एवं उसकी मंत्रिपरिषद द्वारा किया जाता है।
    • 1 नवंबर 1956 से पहले राज्यपाल के स्थान पर राजप्रमुख पद प्रचलित था।
    • राज्य पुनर्गठन आयोग की अनुशंसा के आधार पर 7वें संविधान संशोधन, 1956 के माध्यम से राजप्रमुख के स्थान पर राज्यपाल का पद लागू किया गया।

राज्यपाल से संबंधित कथन

    • सरोजिनी नायडू ने राज्यपाल की तुलना “सोने के पिंजरे में बंद चिड़िया” से की है।
    • मार्गरेट अल्वा के अनुसार राज्यपाल, राज्य सरकारों के लिए Headache हैं, जबकि दूसरी ओर केंद्र सरकार भी उन्हें अपेक्षित महत्व नहीं देती।
    • सीतारमैया के अनुसार राज्यपाल का कार्य केवल अतिथियों का सम्मान करना, उन्हें चाय-भोजन कराना तथा दावत देना भर रह गया है।
    • विजयलक्ष्मी पण्डित के अनुसार राज्यपाल का पद केवल वेतन का आकर्षण मात्र है।
❖ अनुच्छेद 153 – राज्यपाल
  • मूल संविधान में प्रत्येक राज्य के लिए एक पृथक राज्यपाल नियुक्त करने का प्रावधान था।
  • 7वें संविधान संशोधन, 1956 की धारा 6 के माध्यम से यह व्यवस्था की गई कि एक ही व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है।
❖ अनुच्छेद 154 – राज्य की कार्यपालिका शक्ति
  • अनुच्छेद 154 (1) के अनुसार राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होती है, इसलिए वह राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है।
  • राज्यपाल अपनी कार्यपालिका शक्तियों का प्रयोग स्वयं अथवा अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करता है।
  • अधीनस्थ अधिकारी से अभिप्राय मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद से है।

नोट –

पद संबंधित व्यक्ति
राज्य का संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल
राज्य का राजनीतिक प्रमुख मुख्यमंत्री
राज्य का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी मुख्य सचिव
❖ अनुच्छेद 155 – राज्यपाल की नियुक्ति
  • राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर एवं राजमुद्रा सहित अधिपत्र के माध्यम से की जाती है।
  • राष्ट्रपति, केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह पर राज्यपाल की नियुक्ति करता है।
  • राज्यपाल की नियुक्ति संबंधी प्रावधान कनाडा के संविधान से लिया गया है।
❖ अनुच्छेद 156 – राज्यपाल का कार्यकाल (पदावधि)
  • अनुच्छेद 156 (1) के अनुसार राज्यपाल, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त अपने पद पर बना रहता है।
  • राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त का वास्तविक आशय प्रधानमंत्री अथवा केंद्रीय मंत्रिपरिषद की इच्छा से है।
  • राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
  • राज्यपाल को पद से हटाने का अधिकार भी राष्ट्रपति के पास होता है।
  • संविधान में राज्यपाल को हटाने की प्रक्रिया का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।
  • अनुच्छेद 156 (2) के अनुसार राज्यपाल अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को संबोधित करता है।
  • राज्यपाल का पद रिक्त होने पर उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश कार्यभार ग्रहण करता है।
  • अनुच्छेद 156 (3) के अनुसार सामान्यतः राज्यपाल का कार्यकाल 5 वर्ष होता है।
  • राष्ट्रपति चाहे तो 5 वर्ष की अवधि पूर्ण होने से पहले भी राज्यपाल को पद से हटा सकता है।
  • 5 वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद भी राष्ट्रपति उसे उसी राज्य अथवा किसी अन्य राज्य का राज्यपाल नियुक्त कर सकता है।
❖ अनुच्छेद 157 – राज्यपाल पद हेतु अर्हताएँ
  • भारत का नागरिक होना आवश्यक है। (जन्म से भारतीय नागरिक होना अनिवार्य नहीं है।)
  • 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका होना चाहिए।
❖ अनुच्छेद 158 – राज्यपाल पद की सेवा-शर्तें
  • अनुच्छेद 158 (1) के अनुसार राज्यपाल, संसद अथवा राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन का सदस्य नहीं हो सकता।
  • यदि किसी सदन का सदस्य राज्यपाल नियुक्त होता है, तो उसे पद ग्रहण करने से पूर्व अपनी सदस्यता छोड़नी होगी।
  • अनुच्छेद 158 (2) के अनुसार राज्यपाल किसी अन्य लाभ के पद पर आसीन नहीं हो सकता।
  • अनुच्छेद 158 (3) के अनुसार राज्यपाल के वेतन एवं भत्तों का निर्धारण संसद द्वारा किया जाता है।
  • राज्यपाल के भत्तों एवं विशेषाधिकारों का उल्लेख दूसरी अनुसूची में किया गया है।
  • अनुच्छेद 158 (3क) के अनुसार यदि एक ही व्यक्ति दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल हो, तो उसके वेतन एवं भत्तों का व्यय संबंधित राज्य राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित अनुपात में वहन करेंगे।
  • अनुच्छेद 158 (4) के अनुसार राज्यपाल के वेतन एवं भत्तों में उसकी पदावधि के दौरान कमी नहीं की जा सकती।
  • राज्यपाल का वेतन राज्य की संचित (समेकित) निधि से तथा पेंशन भारत की संचित (समेकित) निधि से दी जाती है।
  • राज्यपाल का वर्तमान वेतन ₹3.50 लाख प्रतिमाह है।
❖ अनुच्छेद 159 – राज्यपाल की शपथ / प्रतिज्ञान
  • राज्यपाल, पदभार ग्रहण करने से पूर्व शपथ अथवा प्रतिज्ञान करता है।
  • राज्यपाल को शपथ संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं।
  • मुख्य न्यायाधीश की अनुपस्थिति में उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश द्वारा शपथ दिलाई जाती है।
  • राज्यपाल की शपथ का प्रारूप अनुसूची 3 में नहीं दिया गया है।
❖ अनुच्छेद 161 – क्षमादान की शक्ति
  • राज्यपाल को कुछ दण्डों में क्षमादान, दण्ड का निलंबन तथा दण्ड में परिवर्तन करने का अधिकार प्राप्त है।
  • यह शक्ति मृत्युदण्ड एवं कोर्ट मार्शल से संबंधित दण्डों पर लागू नहीं होती।
❖ अनुच्छेद 162 – राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
❖ अनुच्छेद 163 – मंत्रिपरिषद की सहायता एवं सलाह
  • अनुच्छेद 163 (1) के अनुसार राज्यपाल को सहायता एवं सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद होगी, जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री करता है।
  • अनुच्छेद 163 (2) के अनुसार कुछ विशेष परिस्थितियों में राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य नहीं होता तथा स्वविवेक से निर्णय ले सकता है।
  • राज्यपाल की स्वविवेकीय शक्तियाँ दो प्रकार की होती हैं—
(1) संविधान द्वारा प्रदत्त स्वविवेकीय शक्तियाँ
  • अनुच्छेद 167 के अंतर्गत राज्यपाल, मुख्यमंत्री से किसी भी विषय की सूचना मांग सकता है तथा सूचना उपलब्ध कराना मुख्यमंत्री का दायित्व होता है।
  • अनुच्छेद 200 के अनुसार राज्यपाल किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रख सकता है।
  • अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होने की स्थिति में राज्यपाल, राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश कर सकता है।
(2) परिस्थितिजन्य स्वविवेकीय शक्तियाँ
  • यदि विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं होता, तो राज्यपाल अपने स्वविवेक से मुख्यमंत्री की नियुक्ति कर सकता है।
  • यदि मंत्रिपरिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद भी वह त्यागपत्र नहीं देती, तो राज्यपाल उसे पद से हटा सकता है।
  • यदि राज्यपाल को यह विश्वास हो जाए कि मंत्रिपरिषद ने विधानसभा का बहुमत खो दिया है, तो वह मुख्यमंत्री को सदन में बहुमत सिद्ध करने के लिए विधानसभा का अधिवेशन बुलाने का निर्देश दे सकता है। ऐसा न होने पर मंत्रिपरिषद को बर्खास्त कर सकता है।
  • यदि मंत्रिपरिषद संविधान के विरुद्ध कार्य करे अथवा मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार या अन्य गंभीर अपराधों में दोषी पाए जाने के बाद भी त्यागपत्र देने से इंकार कर दे, तो राज्यपाल मंत्रिपरिषद को पद से हटा सकता है।

❖ राज्यपाल द्वारा की जाने वाली प्रमुख नियुक्तियाँ

  • अनुच्छेद 164 के अंतर्गत मुख्यमंत्री तथा उसकी सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है।
  • अनुच्छेद 165 के अनुसार राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) की नियुक्ति करता है।
  • अनुच्छेद 233 के अंतर्गत जिला न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करता है।
  • अनुच्छेद 316 के अनुसार राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति करता है।
  • अनुच्छेद 243K एवं 243ZA के अंतर्गत राज्य निर्वाचन आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति करता है।
  • अनुच्छेद 243I एवं 243Y के अनुसार राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति करता है।
  • राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति करता है।
  • राज्य सूचना आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति करता है।
  • लोकायुक्त एवं उपलोकायुक्त की नियुक्ति करता है।
  • राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति करता है।

❖ राज्यपाल द्वारा अध्यक्ष / संरक्षक के रूप में निभाई जाने वाली भूमिकाएँ

  • अरावली विकास बोर्ड
  • राज्य सैनिक बोर्ड, राजस्थानअध्यक्ष
  • पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुरअध्यक्ष
  • राजस्थान रेडक्रॉस सोसाइटीअध्यक्ष
  • भूतपूर्व सैनिक कल्याण प्रबंधन समितिअध्यक्ष
  • राजस्थान स्काउट एवं गाइडसंरक्षक
  • राज्यपाल, राज्य के सभी राज्य विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति होता है तथा कुलाधिपतियों की नियुक्ति करता है।
  • निजी विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति राज्यपाल नहीं होता।
❖ अनुच्छेद 167 – राज्यपाल को जानकारी उपलब्ध कराने संबंधी मुख्यमंत्री का कर्तव्य
  • राज्यपाल, राज्य के प्रशासन से संबंधित किसी भी विषय की जानकारी मुख्यमंत्री से मांग सकता है।
  • मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक दायित्व है कि वह राज्यपाल को अपेक्षित सूचना उपलब्ध कराए।
  • यदि किसी विषय पर किसी मंत्री द्वारा निर्णय ले लिया गया हो, लेकिन उस पर मंत्रिपरिषद ने विचार न किया हो, तो राज्यपाल के निर्देश पर उस विषय को मंत्रिपरिषद के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत किया जाएगा।
❖ अनुच्छेद 168 – राज्य विधानमंडल
  • राज्यपाल, राज्य विधानमंडल का अभिन्न अंग होता है।
❖ अनुच्छेद 171 (3) – विधानपरिषद में मनोनयन
  • राज्यपाल को विधानपरिषद (उच्च सदन) के 1/6 सदस्यों को मनोनीत करने का अधिकार प्राप्त है।
  • यह मनोनयन साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारी आंदोलन एवं समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से किया जाता है।
❖ अनुच्छेद 174 – विधानमंडल का सत्र, सत्रावसान एवं विधानसभा का विघटन
  • राज्यपाल को विधानमंडल का सत्र बुलाने (सत्राहूत), सत्रावसान करने तथा विधानसभा को भंग (विघटित) करने का अधिकार प्राप्त है।
  • अनुच्छेद 174 (1) के अनुसार राज्यपाल, विधानमंडल के किसी एक सदन अथवा दोनों सदनों का सत्र आहूत कर सकता है।
  • एक वर्ष में विधानमंडल की कम-से-कम दो बैठकें होना अनिवार्य है।
  • अनुच्छेद 174 (2)(क) के अंतर्गत राज्यपाल, विधानमंडल के किसी एक या दोनों सदनों का सत्रावसान कर सकता है।
  • अनुच्छेद 174 (2)(ख) के अनुसार राज्यपाल, विधानसभा को विघटित (भंग) कर सकता है।
❖ अनुच्छेद 175 – अभिभाषण एवं संदेश भेजने का अधिकार
  • राज्यपाल को विधानमंडल के सदनों में अभिभाषण देने तथा उन्हें संदेश भेजने का अधिकार प्राप्त है।
❖ अनुच्छेद 176 – राज्यपाल का विशेष अभिभाषण
  • अनुच्छेद 176 (1) के अनुसार राज्यपाल, विधानमंडल के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करता है।
  • इस अवसर पर वह विधानमंडल का सत्र बुलाए जाने का कारण भी बताता है।
❖ अनुच्छेद 200 – विधेयकों पर राज्यपाल की अनुमति
  • विधानमंडल द्वारा पारित कोई विधेयक, राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत होने पर उसके पास निम्नलिखित तीन विकल्प होते हैं—
    • अनुमति प्रदान करना — इससे विधेयक कानून बन जाता है।
    • अनुमति रोकना — इसे वीटो शक्ति का प्रयोग कहा जाता है।
    • विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखना — विशेषकर यदि विधेयक राष्ट्रीय महत्व का हो अथवा संविधान के विरुद्ध प्रतीत होता हो।

❖ राज्यपाल की वीटो शक्तियाँ

(1) निलंबनकारी वीटो
  • जब राज्यपाल किसी विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस भेज देता है, तो इसे निलंबनकारी वीटो कहा जाता है।
  • यदि विधानमंडल उसी विधेयक को संशोधन सहित अथवा बिना संशोधन के पुनः पारित कर भेज देता है, तो राज्यपाल को उस पर अनुमति प्रदान करनी होती है।
(2) आत्यंतिक वीटो
  • राज्यपाल, किसी विधेयक पर अपनी स्वीकृति रोक सकता है, जिसे आत्यंतिक वीटो कहा जाता है।
  • आत्यंतिक वीटो का प्रयोग गैर-सरकारी विधेयकों के संबंध में किया जाता है।

नोट – धन विधेयक ऐसा विधेयक है जिसे राज्यपाल पुनर्विचार के लिए वापस नहीं भेज सकता, क्योंकि इसे राज्यपाल की पूर्व अनुमति के बाद ही विधानसभा में प्रस्तुत किया जाता है।

❖ अनुच्छेद 201 – राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित विधेयक
  • जब राज्यपाल किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित कर देता है, तो उस विधेयक पर आगे का निर्णय राष्ट्रपति द्वारा लिया जाता है।
  • विधानमंडल से पारित किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखने का निर्णय राज्यपाल अपने विवेकाधिकार के आधार पर करता है।
❖ अनुच्छेद 213 – अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति
  • अनुच्छेद 213 (1) के अनुसार यदि विधानमंडल का सत्र नहीं चल रहा हो तथा राज्यपाल को यह प्रतीत हो कि तत्काल कानून बनाना आवश्यक है, तो वह अपने हस्ताक्षर से अध्यादेश जारी कर सकता है।
  • अनुच्छेद 213 (2) के अनुसार राज्यपाल द्वारा जारी अध्यादेश को वही बल एवं प्रभाव प्राप्त होता है, जो राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी अधिनियम (कानून) को प्राप्त होता है।
  • अनुच्छेद 213 (2)(क) के अनुसार विधानमंडल का सत्र पुनः प्रारंभ होने के बाद 6 सप्ताह के भीतर अध्यादेश का अनुमोदन आवश्यक है, अन्यथा वह स्वतः निरस्त हो जाता है।
  • अनुच्छेद 213 (2)(ख) के अनुसार राज्यपाल किसी भी समय जारी किए गए अध्यादेश को वापस ले सकता है।
  • अध्यादेश की अधिकतम अवधि 6 माह 6 सप्ताह होती है।

★ राजस्थान में राज्यपाल द्वारा जारी अध्यादेशों की संख्या—

वर्ष अध्यादेश
2018 8
2019 3
2020 8
2021 0
2022 0
2023 1
2024 3
❖ अनुच्छेद 361 – राज्यपाल को प्राप्त न्यायिक संरक्षण
  • अनुच्छेद 361 (1) के अनुसार राज्यपाल, अपने पद की शक्तियों एवं कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किए गए कार्यों के लिए किसी न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं होता।
  • अनुच्छेद 361 (2) के अनुसार राज्यपाल के कार्यकाल के दौरान उसके विरुद्ध किसी भी न्यायालय में दाण्डिक (आपराधिक) कार्यवाही प्रारंभ नहीं की जा सकती।
  • अनुच्छेद 361 (3) के अनुसार राज्यपाल के पद पर रहते हुए उसकी गिरफ्तारी या कारावास के लिए कोई न्यायालय आदेश जारी नहीं कर सकता।
  • अनुच्छेद 361 (4) के अनुसार राज्यपाल के व्यक्तिगत कार्यों से संबंधित सिविल कार्यवाही प्रारंभ की जा सकती है, लेकिन इसके लिए निम्नलिखित शर्तों का पालन आवश्यक है—
    • राज्यपाल को लिखित सूचना देना अनिवार्य होगा।
    • सूचना देने के बाद कम-से-कम 2 माह का समय दिया जाएगा।
    • सूचना में पक्षकार का नाम, पता तथा प्रस्तावित कार्यवाही का विवरण अंकित होना चाहिए।

❖ राज्यपाल से संबंधित प्रमुख आयोग

★ राजमन्नार आयोग

  • गठन वर्ष1969

★ सरकारिया आयोग

  • गठन9 जून 1983
  • अध्यक्षरणजीत सिंह सरकारिया
  • सदस्यB. शिवरमन, S.R. सेन
  • केन्द्र-राज्य संबंधों के संबंध में इस आयोग ने 247 सिफारिशें प्रस्तुत कीं।

★ प्रमुख सिफारिशें—

    • अनुच्छेद 263 के अंतर्गत अंतर-सरकारी परिषद के रूप में एक स्थायी अंतर-राज्य परिषद की स्थापना की जानी चाहिए।
    • राज्यपाल उसी राज्य का न होकर दूसरे राज्य का व्यक्ति होना चाहिए।
    • राज्यपाल को 5 वर्ष की अवधि पूर्ण होने से पहले राजनीतिक कारणों से नहीं हटाया जाना चाहिए।
    • सक्रिय राजनीति से जुड़े व्यक्तियों की नियुक्ति राज्यपाल के पद पर नहीं की जानी चाहिए।
    • अनुच्छेद 356 का प्रयोग यथासंभव कम किया जाना चाहिए।

★ पूंछी आयोग

  • गठन27 अप्रैल 2007
  • अध्यक्षमदन मोहन पूंछी
  • सदस्यN.R. माधवमेनन, विनोद कुमार, धीरेंद्र सिंह, विजयशंकर

★ प्रमुख सिफारिशें—

    • राज्यपाल का 5 वर्ष का कार्यकाल सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
    • राष्ट्रपति की भाँति राज्यपाल को भी राज्य विधानमंडल द्वारा महाभियोग प्रक्रिया के माध्यम से हटाने का प्रावधान होना चाहिए।

❖ राजस्थान के राज्यपाल

क्र. राज्यपाल कार्यकाल मुख्यमंत्री प्रमुख तथ्य / विशेषताएँ
1 सवाई मानसिंह (राजप्रमुख) 30.03.1949 – 31.10.1956 राजप्रमुख के रूप में कार्य किया।
2 श्री गुरुमुख निहाल सिंह 01.11.1956 – 15.04.1962 मोहनलाल सुखाड़िया 25 अक्टूबर 1956 को नियुक्ति तथा 1 नवम्बर 1956 को पदभार ग्रहण किया। सर्वाधिक कार्यकाल वाले राज्यपाल रहे। 8 बार विधानसभा में अभिभाषण दिया। दिल्ली के मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष भी रहे।
3 सम्पूर्णानन्द 1962 – 1967 मोहनलाल सुखाड़िया उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके थे। डूंगर कॉलेज, बीकानेर के प्राचार्य भी रहे।
4 सरदार श्री हुकुम सिंह 1967 – 1970 मोहनलाल सुखाड़िया
5 न्यायमूर्ति श्री जगत नारायण (कार्यवाहक) मोहनलाल सुखाड़िया राजस्थान के प्रथम कार्यवाहक राज्यपाल थे।
6 सरदार श्री हुकुम सिंह 1970 – 1972 मोहनलाल सुखाड़िया, बरकतउल्ला खाँ
7 श्री जोगिन्दर सिंह 1972 – 1977 बरकतउल्ला खाँ, हरिदेव जोशी उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य तथा उड़ीसा के राज्यपाल रहे। राजस्थान के प्रथम राज्यपाल, जिन्होंने अपने पद से त्यागपत्र दिया।
8 न्यायमूर्ति वेदपाल त्यागी (कार्यवाहक) हरिदेव जोशी
9 श्री रघुकुल तिलक 1977 – 1981 हरिदेव जोशी, भैरोंसिंह शेखावत, जगन्नाथ पहाड़िया, शिवचरण माथुर केन्द्र में सत्ता परिवर्तन के बाद कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व ही पदमुक्त कर दिए गए। RPSC के सदस्य भी रह चुके थे।
10 न्यायमूर्ति श्री के.डी. शर्मा (कार्यवाहक) शिवचरण माथुर
11 एयर चीफ मार्शल श्री ओ.पी. मेहरा 1982 – 1985 शिवचरण माथुर भारतीय वायुसेना के अध्यक्ष रह चुके थे। महाराष्ट्र के राज्यपाल भी रहे।
12 न्यायमूर्ति श्री पी.के. बनर्जी (कार्यवाहक) शिवचरण माथुर
13 एयर चीफ मार्शल श्री ओ.पी. मेहरा 1985 शिवचरण माथुर, हीरालाल देवपुरा, हरिदेव जोशी हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड तथा भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष भी रहे।
14 न्यायमूर्ति श्री डी.पी. गुप्ता (कार्यवाहक) हरिदेव जोशी
15 श्री बसंत राव पाटिल 1985 – 1987 हरिदेव जोशी लोकसभा सदस्य रहे तथा महाराष्ट्र के 4 बार मुख्यमंत्री रहे। राज्यपाल पद से त्यागपत्र दिया।
क्र. राज्यपाल कार्यकाल मुख्यमंत्री प्रमुख तथ्य / विशेषताएँ
16 न्यायमूर्ति श्री जे.एस. वर्मा (कार्यवाहक) हरिदेव जोशी, शिवचरण माथुर
17 श्री सुखदेव प्रसाद 1988 – 1989 शिवचरण माथुर उत्तर प्रदेश में मंत्री तथा लोकसभा सदस्य रह चुके थे।
18 न्यायमूर्ति श्री जे.एस. वर्मा शिवचरण माथुर
19 श्री सुखदेव प्रसाद 1989 – 1990 शिवचरण माथुर, हरिदेव जोशी सत्ता परिवर्तन के बाद इन्हें राज्यपाल पद से हटा दिया गया।
20 श्री मिलापचन्द जैन (कार्यवाहक) हरिदेव जोशी उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे।
21 श्री देवी प्रसाद चट्टोपाध्याय 1990 – 1991 हरिदेव जोशी, भैरोंसिंह शेखावत
22 श्री स्वरूप सिंह 1991 – 1992 भैरोंसिंह शेखावत राज्यसभा सदस्य तथा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सदस्य रहे। राजस्थान के प्रथम अतिरिक्त प्रभार वाले राज्यपाल, जिन्हें राजस्थान के साथ गुजरात का भी अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
23 श्री एम. चेन्ना रेड्डी 1992 – 1993 भैरोंसिंह शेखावत आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके थे।
24 श्री धनिक लाल मण्डल (अतिरिक्त प्रभार) भैरोंसिंह शेखावत
25 श्री बलिराम भगत 1993 – 1998 भैरोंसिंह शेखावत लोकसभा सदस्य तथा लोकसभा अध्यक्ष भी रहे।
26 श्री दरबारा सिंह (पद पर रहते हुए निधन) भैरोंसिंह शेखावत लोकसभा सदस्य तथा पंजाब के मुख्यमंत्री रहे।
27 श्री एन.एल. टिबरेवाल 1998 – 1999 भैरोंसिंह शेखावत, अशोक गहलोत कार्यवाहक राज्यपाल के रूप में नियुक्त किए गए।
28 न्यायमूर्ति श्री अंशुमान सिंह 1999 – 2003 अशोक गहलोत
29 श्री निर्मल चन्द्र जैन (पद पर रहते हुए निधन) अशोक गहलोत लोकसभा सदस्य रहे।
30 श्री कैलाशपति मिश्र (अतिरिक्त प्रभार) अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे
क्र. राज्यपाल कार्यकाल मुख्यमंत्री प्रमुख तथ्य / विशेषताएँ
31 श्री मदन लाल खुराना (त्यागपत्र) अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे दिल्ली के मुख्यमंत्री तथा लोकसभा सांसद रहे।
32 श्री टी.वी. राजेश्वर (अतिरिक्त प्रभार) वसुंधरा राजे
33 श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल 2004 – 2007 वसुंधरा राजे महाराष्ट्र से विधायक, लोकसभा सदस्य तथा राज्यसभा की उपसभापति रहीं। राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने के लिए राज्यपाल पद से त्यागपत्र दिया।
34 ए. आर. किदवई (अतिरिक्त प्रभार) वसुंधरा राजे UPSC के सदस्य एवं अध्यक्ष रहे। हरियाणा के साथ राजस्थान के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभाला।
35 श्री शैलेन्द्र कुमार सिंह 2007 – 2009 वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत नोट: मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कार्यकाल में 6 राज्यपाल रहे।
36 श्री रामेश्वर ठाकुर (अतिरिक्त प्रभार) अशोक गहलोत मध्य प्रदेश के साथ राजस्थान के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभाला।
37 श्री शैलेन्द्र कुमार सिंह अशोक गहलोत पद पर रहते हुए निधन हुआ।
38 श्रीमती प्रभा राव (अतिरिक्त प्रभार) 2009 – 2010 अशोक गहलोत महाराष्ट्र विधानसभा की सदस्य तथा लोकसभा सदस्य रहीं। हिमाचल प्रदेश के साथ राजस्थान के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभाला।
39 श्रीमती प्रभा राव (पद पर रहते हुए निधन) अशोक गहलोत पद पर रहते हुए निधन हुआ।
40 श्री शिवराज पाटिल (अतिरिक्त प्रभार) 2010 – 2012 अशोक गहलोत महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष रहे। पंजाब के साथ राजस्थान के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभाला।
41 श्रीमती मार्गरेट अल्वा 2012 – 2014 अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे
42 श्री राम नाईक (अतिरिक्त प्रभार) वसुंधरा राजे उत्तर प्रदेश के साथ राजस्थान के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभाला।
43 श्री कल्याण सिंह 2014 – 2019 वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत उत्तर प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहे।
44 श्री कलराज मिश्र 2019 – 2024 अशोक गहलोत, भजनलाल शर्मा उत्तर प्रदेश से विधानसभा सदस्य एवं कैबिनेट मंत्री रहे। दो बार राज्यसभा सदस्य रहे। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल भी रहे।
45 हरिभाऊ किसनराव बागड़े 31.07.2024 – लगातार भजनलाल शर्मा महाराष्ट्र विधानसभा के 6 बार सदस्य रहे। वर्ष 2014 में महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष रहे।

❖ अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

  • भारत की प्रथम महिला राज्यपालसरोजिनी नायडू (उत्तर प्रदेश, 1947)।
  • अप्रैल 2016 में राज्यपाल कल्याण सिंह के कार्यकाल के दौरान स्मार्ट विलेज पहल की शुरुआत की गई, जिसका क्रियान्वयन राज्य विश्वविद्यालय द्वारा किया जा रहा है।
  • इस पहल के अंतर्गत धनोरा (धौलपुर) को प्रथम स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित किया गया।
  • 1956 के बाद 9 राज्यों के राज्यपालों को राजस्थान के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
राजस्थान की महिला राज्यपाल
क्र. नाम विशेष तथ्य
1 श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल राजस्थान की प्रथम महिला राज्यपाल, जिन्होंने पद पर रहते हुए त्यागपत्र दिया।
2 श्रीमती प्रभा राव राजस्थान की प्रथम एवं एकमात्र महिला राज्यपाल, जिनका पद पर रहते हुए निधन हुआ।
3 श्रीमती मार्गरेट अल्वा
  • राज्यपाल को संबोधित करते समय “माननीय राज्यपाल” अथवा “राज्यपाल महोदय” का प्रयोग किया जाता है।
  • अंग्रेज़ी में “Honourable Governor” संबोधन प्रचलित है।
❖ राज्यपाल सचिवालय
  • राजस्थान में राज्यपाल को प्रशासनिक सहायता प्रदान करने हेतु राज्यपाल सचिवालय कार्यरत है।
  • राज्यपाल का सचिव इस सचिवालय का प्रमुख होता है, जो भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का अधिकारी होता है।
  • राज्यपाल कलराज मिश्र के कार्यकाल में राजभवन में INFORMAS पोर्टल, SUGAM ऐप, Vice Chancellors Leave Portal तथा E-Store Portal की शुरुआत की गई।
❖ राज्यपाल राहत कोष (Governor Relief Fund)
  • राज्यपाल राहत कोष का गठन 14 मार्च 1973 को राज्यपाल जोगिन्दर सिंह के कार्यकाल में किया गया।
  • उद्देश्य
    • अकाल एवं अभावग्रस्त क्षेत्रों में सहायता प्रदान करना।
    • प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत एवं सहायता उपलब्ध कराना।

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