राजस्थान का साहित्य
❖ राजस्थानी साहित्य का कालक्रम –
(1) प्राचीन काल –
- 1050 से 1450 ई. तक का यह चरण साहित्यिक दृष्टि से वीरगाथाओं का काल माना जाता है
- इस अवधि की प्रमुख रचनाओं में श्रीधर व्यास द्वारा रचित रणमल्ल छंद का विशेष महत्व है
(2) पूर्व मध्य काल –
- 1450 से 1650 ई. के बीच का यह समय भक्ति आंदोलन और भक्ति साहित्य के विकास का काल रहा
(3) उत्तर मध्य काल –
- 1650 से 1850 ई. तक का यह दौर शृंगार, रीति और नीति आधारित साहित्यिक परंपराओं के लिए जाना जाता है
(4) आधुनिक काल –
- 1850 ई. से लेकर वर्तमान समय तक का साहित्यिक युग आधुनिक काल के रूप में स्वीकार किया जाता है
- इस चरण में बाकीदास और सूर्यमल्ल मिश्रण ने युवाओं में चेतना और जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
❖ राजस्थानी साहित्य की शैलियाँ –
❖ ख्यात –
- यह शब्द संस्कृत के ख्याति से विकसित हुआ है
- इसमें राजाओं के सम्मान, उनकी उपलब्धियों और महत्वपूर्ण कार्यों का विस्तार से वर्णन मिलता है
- इस शैली की शुरुआत अकबर काल (16वीं शताब्दी के अंत) में मानी जाती है
(1) मुहणौत नैणसी री ख्यात – मुहणौत नैणसी
- इसे राजस्थानी भाषा की सबसे प्राचीन ख्यात के रूप में जाना जाता है
- यह रचना पूर्णतः राजस्थानी भाषा में लिखी गई है
(2) बाकीदास री ख्यात – बाकीदास
- बाकीदास, जोधपुर के महाराजा मानसिंह के दरबारी कवि थे
- इसमें जयपुर और जोधपुर की स्थापना की तिथियों का उल्लेख मिलता है
(3) दयालदास री ख्यात / बीकानेर रा राठौड़ री ख्यात – दयालदास सिढावच
- इसके रचनाकार दयालदास सिढावच थे, जो बीकानेर के महाराजा रतनसिंह के दरबारी कवि रहे
- इसे ख्यात परंपरा की अंतिम रचना माना जाता है
- ख्यात देश दर्पण और आर्याख्यान कल्पद्रुम भी उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं
(4) मुण्डियार री ख्यात –
- इसमें मारवाड़ के शासकों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है
❖ वचनिका –
- यह शब्द संस्कृत के वचन से विकसित हुआ है
- इसमें गद्य और पद्य का मिश्रण (चंपू शैली) देखने को मिलता है
(1) अचलदास खींची री वचनिका – शिवदास गाडण
- इसमें गागरोन के शासक अचलदास खींची का वर्णन किया गया है
(2) राठौड़ महेश दासोत री वचनिका – जग्गा खिड़िया
❖ वात –
- वात का सामान्य अर्थ कहानी या लोककथा होता है
- वीरमदेव सोनगरा री वात – पदमनाभ
- ढोला मारू री वात – खुशाल चंद्र
- गोरा बादल री वात – जातमल
- लक्ष्मी कुमारी चुंडावत के अनुसार युद्ध में नगाड़ा और कथा में हुंकारा अत्यंत आवश्यक होते हैं
❖ परची –
- संत और महात्माओं के जीवन परिचय वाली रचनाएँ परची कहलाती हैं
- उदाहरण के रूप में कबीर री परची, रैदास री परची और मीराबाई री परची प्रमुख हैं
❖ प्रकास –
- जिन रचनाओं में किसी विशेष घटना या उपलब्धि पर प्रकाश डाला गया हो, उन्हें प्रकास कहा जाता है
- राज प्रकास – किशोर दास
- सूरज प्रकास – करणी दान
❖ मरस्या –
- किसी व्यक्ति की मृत्यु पर शोक व्यक्त करने हेतु लिखी गई काव्य रचनाएँ मरस्या कहलाती हैं
- राणे जगतप रा मरस्या – यह मेवाड़ के महाराणा जगतसिंह की मृत्यु पर आधारित है
- कल्ला रायमलोत ने पृथ्वीराज राठौड़ से अपने मरसिये जीवित अवस्था में ही लिखवाए थे
❖ रासो –
-
- जिन रचनाओं में राजा की वीरता, युद्ध और गौरव का वर्णन मिलता है, उन्हें रासो कहा जाता है
- पृथ्वीराज रासो – चंदबरदाई
- बीसलदेव रासो – नरपति नल्ह
- सगत रासो – गिरधर आसिया द्वारा रचित, जिसमें महाराणा प्रताप के भाई शक्तिसिंह का उल्लेख मिलता है
- खुमाण रासो – दलपत विजय, जिसमें मेवाड़ के शासक बप्पा रावल से राजसिंह तक का इतिहास वर्णित है
- विजयपाल रासो – नल्ल सिंह, इसमें करौली के शासक विजयपाल का वर्णन है
- मानचरित्र रासो – कवि नरोत्तम, मिर्जा राजा मानसिंह के काल में रचित
- राणा रासो – दयालदास
- रतन रासो – कुंभकर्ण
- कायम खा रासो – नियामत खा जान, इसमें कायमखानी वंश का इतिहास मिलता है
- प्रताप रासो – रचयिता जाचीक जीवन, इसमें अलवर की स्थापना एवं प्रतापसिंह का वर्णन है
- शत्रुशाल रासो – डूंगरसिंह
- जिन रचनाओं में राजा की वीरता, युद्ध और गौरव का वर्णन मिलता है, उन्हें रासो कहा जाता है
❖ विगत –
- यह ऐसी ऐतिहासिक कृतियाँ होती हैं जिनमें प्रशासनिक, सामाजिक और आर्थिक विवरण मिलता है
- मारवाड़ रा परगना री विगत – मुहणौत नैणसी द्वारा रचित, जिसे मारवाड़ का गजेटियर भी कहा जाता है
- इसमें जनगणना, भूमि, फसल और सिंचाई से संबंधित जानकारी मिलती है
- इसकी तुलना आइन-ए-अकबरी से की जाती है
❖ पहेली –
- इसे आड़ी, पाली और हीयाली जैसे नामों से भी जाना जाता है
❖ साखी –
- संत कवियों की अनुभवी शिक्षाओं को सोरठा छंद में प्रस्तुत किया जाता है, जिसमें गद्य और पद्य का मिश्रण मिलता है
❖ राजस्थान के प्रमुख साहित्यकार –
❖ डॉ. सीताराम लालस – नरैवा गाँव (जोधपुर)
- इन्होंने राजस्थानी भाषा का विशाल शब्दकोश तैयार किया जिसमें लगभग 2 लाख शब्द सम्मिलित हैं
- इस योगदान के कारण एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका ने इन्हें “राजस्थानी जुबा की मसाल” की उपाधि दी
❖ कन्हैयालाल सेठिया – सुजानगढ़ (चूरू)
- इनकी प्रसिद्ध कविता पातल और पीथल में महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज राठौड़ का वर्णन मिलता है
- अन्य प्रमुख रचनाएँ धरती धोरा री, लींलटास, जमीन रो धणी कुण, मींझर, मायद रो हेलो हैं
- लींलटास के लिए इन्हें 1976 में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ
- सबद रचना के लिए इन्हें 1987 में सूर्यमल्ल मिश्रण पुरस्कार मिला
- 1988 में इन्हें मूर्तिदेवी पुरस्कार प्रदान किया गया
- 2004 में पद्मश्री और 2012 में मरणोपरांत राजस्थान रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया
❖ दुरसा आढ़ा – धुंधला गाँव (पाली)
- वे अकबर के दरबारी कवि थे
- उन्होंने राणा प्रताप की प्रशंसा अकबर के समक्ष प्रस्तुत की
- प्रमुख रचनाएँ विरुद्ध छतरी (महाराणा प्रताप की शौर्यगाथा) और किरतार बावनी हैं
- अन्य रचनाओं में वीरमदेव सोलंकी रा दूहा और झूलना अमरसिंह जी रा शामिल हैं
- अचलेश्वर महादेव मंदिर (माउंट आबू) में उनकी पीतल की प्रतिमा स्थापित है
- पृथ्वीराज राठौड़ की रचना वेलि किशन रुकमणी री को उन्होंने 5वाँ वेद और 19वाँ पुराण कहा था
❖ रानी लक्ष्मी कुमारी चुंडावत – देवगढ़ (राजसमंद)
- वे राजस्थान विधानसभा की सदस्य तथा राजस्थान कांग्रेस की अध्यक्ष रही हैं
- उन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में भी कार्य किया
प्रमुख रचनाएँ – मांझल रात, पाबूजी री बात, डूंगर जी-जवाहर जी री बात, बाघो भारमली, हुंकारा दो सा, अमोलक बाता, मूमल, गिर ऊँचा ऊँचा गढ़ा, कै रे चकवा बात
- उन्होंने रूसी कथाओं का राजस्थानी अनुवाद गजबण नाम से किया, जिसके लिए उन्हें सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार मिला
- उन्हें 1984 में पद्मश्री और 2012 में राजस्थान रत्न पुरस्कार प्राप्त हुआ
❖ ब्रह्मगुप्त – भीनमाल (जालौर)
- वे एक प्रसिद्ध गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे
- उनकी प्रमुख कृति ब्रह्मस्फुट सिद्धांत खगोल विज्ञान का महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है
❖ विजयदान देथा –
- जन्म – बोरुंदा गाँव (जोधपुर)
- उपनाम – बिज्जी / राजस्थान का शेक्सपियर
प्रमुख रचनाएँ – बाता री फुलवारी (14 खंड), बापू के तीन हत्यारे, उलझन, चौधराइन की चतुराई (लघु कथा), माँ रो बदलो, अलेखूँ हिटलर, चरणदास चोर, रूख, परिणति, तीदो राव, अनोखा पेड़, सपन प्रिया
- इनकी कहानी दुविधा पर मणिकौल द्वारा फिल्म दुविधा बनाई गई तथा बाद में अमोल पालेकर द्वारा फिल्म पहेली बनाई गई
- इन्हें 2007 में पद्मश्री तथा 2012 में राजस्थान रत्न पुरस्कार प्रदान किया गया
- राजस्थानी भाषा में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रथम व्यक्ति विजयदान देथा थे
❖ मुहणौत नैणसी –
- वे जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह प्रथम के दरबारी कवि थे
- मुंशी देवी प्रसाद ने इन्हें राजपूताने का अबुल फजल कहा
- इन्हें राजस्थान की जनगणना का अग्रज माना जाता है
प्रमुख ग्रंथ – मुहणौत नैणसी री ख्यात, मारवाड़ री परगना री विगत
❖ अबुल फजल –
- जन्म आगरा में हुआ था
- इनके भाई फैजी के साथ वे अकबर के नवरत्नों में शामिल थे
- प्रमुख ग्रंथ – अकबरनामा (फारसी भाषा)
- अकबरनामा का तीसरा भाग ही आइने-अकबरी कहलाता है
❖ मुंशी देवीप्रसाद –
- जन्म – जयपुर, मृत्यु – जोधपुर
- प्रमुख ग्रंथ – मारवाड़ का भूगोल, राव मालदेव का जीवन चरित्र
- इन्होंने फारसी ग्रंथों का हिंदी अनुवाद किया
- इनकी लेखन शैली में प्रत्येक पृष्ठ के बाएँ भाग में हिंदी और दाएँ भाग में उसका उर्दू रूपांतरण होता था
❖ श्रीधर व्यास –
- वे मारवाड़ के शासक रणमल के राजकवि थे
- प्रमुख रचना – रणमल छंद
❖ कवि माघ –
- जन्म – भीनमाल (जालौर)
- प्रमुख कृति संस्कृत भाषा में शिशुपाल वध है, जिसकी रचना 7वीं/8वीं शताब्दी में मानी जाती है
❖ पंडित विश्वेश्वर नाथ रेऊ –
- वे जोधपुर के महाराजा सुमेरसिंह के समकालीन थे
प्रमुख रचनाएँ – Kines of Marwar, History of the RashtraKutas, विश्वेश्वर स्मृति
❖ पृथ्वीराज राठौड़ –
- वे बीकानेर के शासक कल्याणमल के पुत्र तथा रायसिंह के भाई थे
- वे अकबर के दरबारी कवि थे
- अकबर द्वारा गागरोन दुर्ग प्रदान किए जाने के बाद उन्होंने वहीं पर डिंगल भाषा में वेलि किशन रुकमणी री की रचना की, जिसमें भगवान कृष्ण–रुकमणी विवाह का वर्णन मिलता है
- L.P. टेस्सीटोरी ने इन्हें डिंगल का हीरो कहा
- अन्य रचनाएँ – दशम भागवत रा दूहा, ठाकुर जी रा दूहा, गंगा जी रा दूहा, गंगा लहरी (डिंगल भाषा)
❖ सूर्यमल मिश्रण –
- जन्म – 1815 ई., हरणा गाँव (बूँदी)
- पिता – चंडीदान, माता – भवानी देवी
- वे बूँदी के महाराव रामसिंह के दरबारी कवि थे
- उन्हें आधुनिक राजस्थानी काव्य जागरण का प्रमुख कवि माना जाता है
प्रमुख ग्रंथ – वंश भास्कर
- यह ग्रंथ डिंगल शैली में बूँदी के हाड़ा चौहान वंश का इतिहास प्रस्तुत करता है, जिसे उनके दत्तक पुत्र मुरारीदान ने पूर्ण किया
- प्रमुख कृति – वीर सतसई
- यह डिंगल में रचित वीर रसात्मक दोहों का संग्रह है
- इसमें 1857 की क्रांति के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना जाग्रत करने का प्रयास किया गया
प्रसिद्ध दोहे –
(1) इला न देणी आपणी, हालरियो हुलराय।
पूत सिखावै पालणै, मरण बड़ाई मांय।।(2) जिण बन भूल न जावता, गैद गवय गिदराज।
तिण बन जंबुक ताखडा, उधाम मंडे आज।।(3) कंत घरे किम आविया, तेहां रौ घण त्रास।
लेंहगे मूझ लुकीजियै, बैरी रौ न विसास।।
अन्य रचनाएँ – रामरंजात, धातु रूपावली, बलवंत विलास, सती रासो, छंदो मयूख, डिंगल कोष
❖ कर्नल जेम्स टॉड –
- जन्म – इंगलैंड (ईस्लिंगटन)
- उपनाम – राजस्थान इतिहास के जनक, राजस्थान इतिहास का भीष्म पितामह, घोड़े वाले बाबा
- वे 1818–1822 के बीच दक्षिण-पश्चिम राजपूताना (मेवाड़ व हाड़ौती) में पॉलिटिकल एजेंट रहे
- वे राजस्थान की जागीरदारी (फ्यूडल व्यवस्था) पर लिखने वाले प्रथम अंग्रेज इतिहासकार थे
प्रमुख पुस्तकें –
(1) एनाल्स एंड एंटीक्विटीज ऑफ राजस्थान (1829)
- इसका दूसरा नाम The Central and Western Rajput States of India है
- इसका संपादन विलियम कुक ने किया
- इसमें पहली बार राजस्थान, रायथान, रजवाड़ा शब्दों का प्रयोग हुआ
- इसका हिंदी अनुवाद डॉ. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा ने किया
- यह ग्रंथ जार्ज चतुर्थ और विलियम चतुर्थ को समर्पित है
(2) ट्रैवल्स इन वेस्टर्न इंडिया (1839)
- इसका संपादन उनकी पत्नी जूलिया क्लटरबक ने किया
- यह कृति श्रीमती विलियम हंटर को समर्पित है
❖ कविराजा श्यामलदास दधवाडिया –
- जन्म – धोकलिया गाँव (भीलवाड़ा)
- इन्होंने मेवाड़ का इतिहास वीर विनोद ग्रंथ में लिखना शुरू किया, जो बाद में महाराणा सज्जनसिंह के समय पूर्ण हुआ
- यह ग्रंथ कुल 5 भागों में विभाजित है
- इन्हें कविराजा की उपाधि महाराणा सज्जनसिंह ने दी तथा केसर-ए-हिंद उपाधि ब्रिटिश सरकार ने प्रदान की
- भारत सरकार ने इन्हें महामहोपाध्याय की उपाधि दी
❖ पंडित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा –
- जन्म – रोहिडा गाँव (सिरोही)
- गुरु – कविराजा श्यामलदास
- वे अजमेर म्यूजियम के क्यूरेटर पद पर लगभग 30 वर्षों तक रहे
प्रमुख रचनाएँ – सिरोही राज्य का इतिहास, राजपूताने का इतिहास, जोधपुर, बीकानेर, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा का इतिहास
- उनकी महत्वपूर्ण कृति भारतीय प्राचीन लिपि माला है, जो भारतीय पुरालेख पर पहली विस्तृत पुस्तक मानी जाती है
- इन्हें भारत सरकार द्वारा महामहोपाध्याय की उपाधि मिली
- इन्हें राजस्थान का ग्रिबन कहा जाता है
❖ L.P. टेस्सीटोरी –
- जन्म – उदीने (इटली)
- कार्यस्थल – बीकानेर
- महाराजा गंगासिंह ने इन्हें चारण साहित्य संग्रह का कार्य सौंपा
प्रमुख कृतियाँ – राजस्थानी चारण साहित्य: एक ऐतिहासिक सर्वे, पश्चिमी राजस्थान की व्याकरण
- इन्होंने वेलि किशन रुकमणी री और राव जैतसी रो छंद का संपादन किया
- बीकानेर म्यूजियम की स्थापना में इनका योगदान माना जाता है
❖ रामकरण आसोपा –
- जन्म – बडलू गाँव (जोधपुर)
- उन्होंने सर्वप्रथम 1896 में मारवाड़ी व्याकरण लिखा
- इन्होंने गीता का मारवाड़ी अनुवाद और डिंगल शब्दकोश तैयार किया
- उन्होंने मारवाड़ का भूगोल भी लिखा
- झमाल राजस्थानी काव्य का एक मात्रिक छंद है, तथा राव इन्द्रसिंह री झमाल प्रसिद्ध रचना है
- राजस्थानी साहित्य की प्राचीनतम रचना – भरतेश्वर बाहुबली घोर (1168 ई., रचनाकार – ब्रजसेन सूरी)
- संवतोल्लेख सहित प्रथम राजस्थानी रचना – भरत बाहुबली रास (रचनाकार – शालिभद्र सूरी)
- राजस्थानी भाषा का प्रथम उपन्यास – कनक सुंदर तथा प्रथम नाटक – केसर विलास; दोनों के रचयिता शिवचंद्र भरतिया (प्रथम गद्य लेखक)
- प्रथम राजस्थानी कहानी – विश्रांत प्रवास (रचनाकार – शिवचंद्र भरतिया)
- आधुनिक राजस्थानी की प्रथम काव्य कृति – बादली (रचनाकार – चंद्रसिंह बीरकाली)
- प्रथम राजस्थानी फिल्म – नजराना
- प्रथम लोकप्रिय राजस्थानी फिल्म – बाबासा री लाडली
- प्रथम राजस्थानी बाल फिल्म – डूंगरा रो भेद
❖ प्रमुख लेखक – रचनाएँ –
- रांगेय राघव – घरौंदा (प्रथम उपन्यास), मुर्दों का टीला, कब तक पुकारूं, आखिरी आवाज, सीधा सादा रास्ता
- मणि मधुकर – जख्म के चारों ओर, पगफैरो, पत्तों की बिरादरी, सफेद मेमने, सुधि सपनों के तीर, रसगंधर्व (नाटक), हवा में अकेले, पिंजरे में पन्ना
- यादवेन्द्र शर्मा ‘चन्द्र’ – हूँ गोरी किन पीव री, जोग-संयोग, चाँदा सेठाणी, मिट्टी का कलंक, समंद थार, तास रो घर, हजार घोड़ों का सवार
- नयमल जोशी – आभैपटकी, धोरां री छोरी, एक बिनणी दो बींद, परण्यौदी कंवारी
- जिनराज सूरी – शालीभद्र रास, गजसुकमाल रास, कयवन्ना रास
- कल्हण – राजतरंगिणी (संस्कृत में), कश्मीर का इतिहास
- सत्यप्रकाश जोशी – बोल भारमली, सधा
- हरीश भादाणी – बोलै सरणाटौ, बांथा में भूगोल
- शंकरदान सामौर – देस दर्पण, सगती सुजस
- इन्होंने अंग्रेजों को “मुल्क रा मीठा ठग” कहा
- छत्रकुंवरी (किशनगढ़) – प्रेम विनोद
- जगजीवन भट्ट – अजितोदय (मारवाड़ शासक अजीत सिंह का वर्णन)
- नाथू सिंह महियारिया (उदयपुर) – करणी शतक, चूंडा शतक, हाड़ी शतक
- सदाशिव भट्ट (बीकानेर) – राज रत्नाकर, राय/राज विनोद
- डॉ. दशरथ शर्मा (चूरू) – The Early Chauhan Dynasties
- पंडित जीवधर – अमरसार (महाराणा प्रताप व अमर सिंह का वर्णन)
- जोरावर सिंह (बीकानेर, 1736) – बैधकसार, पूजा पद्धति
- रणछोड़ भट्ट – अमर काव्य वंशावली (बप्पा रावल से राणा राजसिंह तक इतिहास)
- द्वारकरनाथ भट्ट – राग चंद्रिका (संगीत ग्रंथ)
- श्रीधर – पार्श्वनाथ चरित्र
- नाथूराम खड़गावत – Rajasthan Role in the Struggles of 1857
- शिवचंद्र भरतिया – फाटका जंजाल, मोत्यां की कोठी, बुढ़ापा की सगाई, बोध दर्पण (प्रथम आधुनिक गद्यकार)
- मान कवि – राजविलास (महाराणा राजसिंह का वर्णन)
- चंद्रसिंह बीरकाली – बादली, लू कालजे री कोर, कह मुकरणी, साँझा, जफरनामों
- बाणभट्ट – हर्षचरित्र (सम्राट हर्षवर्धन का वर्णन, संस्कृत)
- जैन कवि पाल्हण – नेमिनाथ बारहमासा (मारू-गुर्जर भाषा का प्रथम बारहमासा)
- चंद्रधर शर्मा गुलेरी – बारात लौट गई
- चंद्रप्रकाश देवल – पागी, कावड़, मारग
- गोविंद (मंडन का पुत्र) – कलानिधि, द्वार दीपिका
- गोपीनाथ – ग्रंथराज
- नृसिंह राजपुरोहित – अमर चुनड़ी
- कमल रंगा – आलेखूँ अंबा
- साया जी झूला – महादेव पार्वती री बेलि
- मेघराज मुकुल – सैणाणी, कोडमदे, चंवरी
- हेमकवि – गुण भाषा
- केशवदास – गुण रूपक
- नरहरिदास – अवतार चरित्र, रसिक रत्नावली
- रीमा आहूजा – A History of Rajasthan
- अमरनाथ जोगी – गंगालैंग
- आई. टी. प्रिचार्ड – Mutinies in Rajputana
- गोपीनाथ शर्मा – Social Life in Medieval Rajasthan
- उमरदान लालस – छप्पना रो छंद
- रमेश चंद्र दत्त – राजपूत जीवन संध्या
- कृष्णानंद व्यास – राग कल्पद्रुम, राग रत्नाकर
- हमीर देव चौहान – श्रृंगार हार
- द्वारकरनाथ भट्ट – राग चंद्रिका
- मतिराम – ललित ललाम
- लक्ष्मणदान कविया – रूख सतसई
- अर्जुन देव चारण – रिंद्रोही, धर्मयुद्ध, जातरा
- मंछाराम सवेग – रघुनाथ रूपक
- जयसिंह नीरज – दुखांत समारोह, ढ़ाणी का आदमी
- भंवर सिंह सामौर – संस्कृति री सनातन दीठ
- बादर ढ़ढ़ी – वीरमायन
- बाकीदास – गीत, सूर छत्तीसी, दातार बावनी, सुपह छत्तीसी, कुकवि बतीसी, कायर बावनी, चुगल मुख चपेटिका
- ईसरदास बारहठ – देवियांण, हरिरस, हाला झाला रा कुण्डलिया
- आचार्य महाप्रज्ञ – मन का कायाकल्प
- आचार्य नानेश मुनि – समता दर्शन और व्यवहार
- मीठेश निर्मोही – मुगती
- गजेसिंह राजपुरोहित – पलकती प्रीत
- माहुक – हरिमेखला
- जोगीदास कुंवारिया – हरि पिंगल प्रबंध
- तारा प्रकाश जोशी – माला के माणके
- समयसुंदर सीताराम – राजस्थानी रामायण
- बाला बक्स – शोक शतक
- हरिसेन – वृहत कथा कोष
- सुमेर सिंह शेखावत – मरु मंगल, मेघमाल
- असाईत – हंसावली
- बालचंद्र सूरी – बसंत विलास
- गौरा बादल चौपाई – हेमरत्न सूरी
- सीताराम भट्ट – जयवंश महाकाव्य (संस्कृत)
- किशोरदास – राजप्रकाश
- कर्पूरचंद्र कुलिश – मैं देखता चला गया
- बखत राम सा – बुद्धि विलास
- हरिभद्र सूरी – समराइच्चकहा
- रामावतार अग्रवाल – मारवाड़ म्यूरल्स
- गुलाब खंडेलवाल – रूप की धूप
