राजस्थान के मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद्

मुख्यमंत्री एवं मंत्रीपरिषद्

  • राज्य में संवैधानिक रूप से प्रमुख राज्यपाल माना जाता है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर वास्तविक शक्ति का संचालन मुख्यमंत्री करता है, जो सरकार का प्रमुख होता है।

अनुच्छेद 164 – मुख्यमंत्री पद का प्रावधान

अनुच्छेद 164 (1) के अनुसार राज्य के मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, जबकि अन्य मंत्रियों का चयन मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल करता है।

  • सभी मंत्री अपना कार्यकाल राज्यपाल की इच्छा (प्रसादपर्यंत) तक जारी रखते हैं।
  • सामान्य स्थिति में राज्यपाल विधानसभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता को मुख्यमंत्री पद पर नियुक्त करता है
  • यदि किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिले तो राज्यपाल अपने विवेकाधिकार का उपयोग करते हुए मुख्यमंत्री नियुक्त कर सकता है।
  • ऐसी स्थिति में नए मुख्यमंत्री को लगभग 1 महीने के भीतर विधानसभा में विश्वास मत साबित करना होता है।
  • मुख्यमंत्री का सामान्य कार्यकाल लगभग 5 वर्ष माना जाता है।
  • उसका पद तब तक सुरक्षित रहता है जब तक उसे विधानसभा में बहुमत का समर्थन (प्रसादपर्यंत स्थिति) प्राप्त रहता है।
  • “प्रसादपर्यंत” का तात्पर्य यहाँ विधानसभा में पूर्ण बहुमत की स्थिति से है।
  • यदि बहुमत समाप्त हो जाए तो मुख्यमंत्री को स्वेच्छा से त्यागपत्र देना पड़ता है, जो राज्यपाल को दिया जाता है।
  • एक मुख्यमंत्री का त्यागपत्र पूरे मंत्रिपरिषद के सामूहिक इस्तीफे के समान माना जाता है।
  • विधानसभा यदि अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दे तो मुख्यमंत्री को पद छोड़ना पड़ता है।

अनुच्छेद 164 (2) में स्पष्ट है कि मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।

अनुच्छेद 164 (3) के तहत मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों को शपथ राज्यपाल द्वारा दिलाई जाती है, जिसका प्रारूप अनुसूची 3 में निर्धारित है।

अनुच्छेद 164 (4) के अनुसार मुख्यमंत्री बनने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष निर्धारित की गई है।

  • मुख्यमंत्री के लिए अलग से कोई विशेष योग्यता नहीं होती, उसकी योग्यता वही होती है जो विधानसभा सदस्य बनने के लिए आवश्यक है।
  • यदि कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री बन जाता है लेकिन विधायक नहीं है, तो उसे 6 महीने के भीतर किसी भी सदन की सदस्यता प्राप्त करनी अनिवार्य होती है।

नोटअनुच्छेद 54 के अनुसार राष्ट्रपति चुनाव में केवल लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा के निर्वाचित सदस्य ही मतदान कर सकते हैं।

  • यदि कोई मुख्यमंत्री विधानपरिषद का सदस्य या मनोनीत सदस्य है तो वह इस प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकता।

अनुच्छेद 164 (5) के अनुसार मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों के वेतन और भत्तों का निर्धारण राज्य विधानमंडल द्वारा किया जाता है।

  • वर्तमान में मुख्यमंत्री का मासिक वेतन लगभग 75,000 रुपये है।

अनुच्छेद 166 राज्य सरकार की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक कार्यों के संचालन से संबंधित है।

मुख्यमंत्री के कार्य एवं शक्तियाँ

अनुच्छेद 167 के अनुसार मुख्यमंत्री का प्रमुख कर्तव्य राज्यपाल को आवश्यक सूचनाएँ उपलब्ध कराना है।

  • मुख्यमंत्री कैबिनेट के निर्णयों एवं प्रशासनिक नीतियों की जानकारी समय-समय पर राज्यपाल तक पहुँचाता है।
  • वह राज्यपाल और मंत्रिपरिषद के बीच मुख्य संचार कड़ी के रूप में कार्य करता है।
  • मंत्रिपरिषद की बैठकों की तारीख, समय और स्थान का निर्धारण मुख्यमंत्री करता है।
  • किसी भी मंत्री की नियुक्ति मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बिना संभव नहीं होती।
  • सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी भी मुख्यमंत्री की होती है।

★ मुख्यमंत्री निम्न संस्थाओं का अध्यक्ष/सदस्य होता है—

  • राज्य आयोजना बोर्ड का प्रमुख अध्यक्ष
  • राज्य पर्यटन सलाहकार समिति का अध्यक्ष
  • राजस्थान आर्थिक परिवर्तन सलाहकार परिषद का अध्यक्ष
  • मुख्यमंत्री सलाहकार समिति का अध्यक्ष
  • अंतर्राज्यीय परिषद, नीति आयोग की कार्यकारी परिषद और राष्ट्रीय विकास परिषद का सदस्य

राजस्थान में उप मुख्यमंत्री

  • संविधान में उप मुख्यमंत्री पद का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता।

राजस्थान में अब तक निम्न उप मुख्यमंत्री रहे हैं—

क्रम नाम विशेष तथ्य
1 श्री टीकाराम पालीवाल राजस्थान के प्रथम उप मुख्यमंत्री
2 श्री हरिशंकर भाभड़ा उप मुख्यमंत्री के रूप में सर्वाधिक कार्यकाल; पूर्व में विधानसभा अध्यक्ष भी रहे
3 श्री बनवारीलाल बैरवा उप मुख्यमंत्री रहे
4 श्रीमती कमला बेनीवाल राजस्थान की प्रथम महिला उप मुख्यमंत्री
5 श्री सचिन पायलट उप मुख्यमंत्री (2018–2020)
6 सुश्री दिया कुमारी वर्तमान उप मुख्यमंत्री; राजस्थान की दूसरी महिला उप मुख्यमंत्री
7 श्री प्रेमचंद बैरवा वर्तमान उप मुख्यमंत्री

राज्य मंत्रिपरिषद

अनुच्छेद 163 के अनुसार राज्यपाल को सहायता और परामर्श देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी, जिसका प्रमुख मुख्यमंत्री होता है।

अनुच्छेद 164 (1) के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करता है तथा अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करता है।

  • मंत्री अपने पद पर राज्यपाल के प्रसादपर्यंत बने रहते हैं।
  • यदि कोई मंत्री विधानमंडल का सदस्य नहीं है, तो उसे 6 माह के भीतर सदस्यता प्राप्त करना आवश्यक होता है

अनुच्छेद 164 (1क) के अनुसार किसी राज्य की मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा सदस्यों की कुल संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकती तथा न्यूनतम संख्या 12 (11+1) से कम नहीं होगी।

  • यह प्रावधान 91वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 (लागू 1 जनवरी 2004) के माध्यम से जोड़ा गया था।
  • राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सदस्य हैं, इसलिए यहाँ मंत्रियों की अधिकतम संख्या 30 (29+1) तथा न्यूनतम संख्या 12 होती है।
  • यदि किसी राज्य में मंत्रियों की संख्या निर्धारित सीमा से अधिक हो जाती है तो 6 माह के भीतर उसे अनुरूप किया जाना आवश्यक है

मंत्रियों की श्रेणियाँ

➤ मंत्रिपरिषद में सामान्यतः तीन प्रकार के मंत्री होते हैं—

(1) कैबिनेट मंत्री

  • ये राज्य सरकार के महत्वपूर्ण विभागों के प्रमुख होते हैं।

जैसे— गृह विभाग, वित्त विभाग, कृषि विभाग

  • राज्य सरकार के किसी विभाग के राजनीतिक प्रमुख के रूप में कार्य करते हैं।

(2) राज्य मंत्री

  • इन्हें स्वतंत्र प्रभार दिया जा सकता है या कैबिनेट मंत्री के अधीन विभाग सौंपा जाता है।
  • स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री अपने विभाग के कार्यों का संचालन मुख्यमंत्री की स्वीकृति से कर सकते हैं।

(3) उपमंत्री

  • इन्हें किसी भी विभाग का स्वतंत्र प्रभार नहीं दिया जाता।
  • ये कैबिनेट मंत्री एवं राज्य मंत्रियों की सहायता करते हैं।

संसदीय सचिव

  • राजस्थान में संसदीय सचिव एवं राज्य मंत्रियों की परंपरा की शुरुआत वर्ष 1967 में चौथी विधानसभा के दौरान मुख्यमंत्री श्री मोहनलाल सुखाड़िया के कार्यकाल में हुई थी।
  • इनकी नियुक्ति मुख्यमंत्री द्वारा की जाती है।
  • शपथ भी इन्हें मुख्यमंत्री द्वारा दिलाई जाती है।
  • इनकी नियुक्ति राज्य के विधायकों में से ही की जाती है और उद्देश्य मंत्रियों को प्रशासनिक कार्यों में सहायता प्रदान करना होता है।
मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल में अन्तर
मंत्रिपरिषद मंत्रिमंडल
मूल संविधान में इस शब्द का उल्लेख मिलता है। मूल संविधान में इस शब्द का उल्लेख नहीं था। इसे 44वें संविधान संशोधन, 1978 द्वारा अनुच्छेद 352 में जोड़ा गया।
केन्द्रीय मंत्रिपरिषद – अनुच्छेद 74, राज्य मंत्रिपरिषद – अनुच्छेद 163
इसका आकार अपेक्षाकृत बड़ा होता है। इसका आकार अपेक्षाकृत छोटा होता है।
इसमें सभी मंत्री शामिल होते हैं जैसे – कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और उपमंत्री इसमें केवल कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।
अपेक्षाकृत कम शक्तिशाली होती है। अधिक शक्तिशाली होती है।

नोट – राजस्थान में मंत्रिमंडल सचिवालय, सचिवालय के सामान्य प्रशासन विभाग से अधिकारिक रूप से संबद्ध है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री

क्रम मुख्यमंत्री कार्यकाल मुख्य तथ्य मुख्य सचिव
(1) हीरालाल शास्त्री 1949 – 1951 • राजस्थान के प्रथम मनोनीत मुख्यमंत्री।
संविधान सभा के सदस्य रहे।
30 मार्च 1949 को राजस्थान में सम्भागीय व्यवस्था प्रारम्भ की।
के. राधाकृष्णन, वी. नारायण
(2) सी. एस. वेंकटाचार्य 1951 – 1951 • राजस्थान के दूसरे मनोनीत मुख्यमंत्री।
I.C.S. (Indian Civil Service) अधिकारी थे।
के. राधाकृष्णन, एस. डब्लू. शिवशंकर
(3) जयनारायण व्यास 1951 – 1952 • एकमात्र मुख्यमंत्री जो मनोनीत एवं निर्वाचित दोनों रहे।
संविधान सभा एवं राज्यसभा के सदस्य भी रहे।
एस. डब्लू. शिवशंकर, बी. जी. राव
(4) टीकाराम पालीवाल 1952 – 1952 3 मार्च 1952 को प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री बने।
लोकसभा एवं राज्यसभा सांसद रहे।
• जयनारायण व्यास के समय प्रथम उपमुख्यमंत्री बने।
• एकमात्र व्यक्ति जो मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री दोनों रहे।
• भूमि सुधार के जनक माने जाते हैं।
भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति (1962) के सदस्य रहे।
एस. डब्लू. शिवशंकर
(5) जयनारायण व्यास 1952 – 1954 • प्रथम विधानसभा चुनाव में जालोर A एवं जोधपुर शहर B से हार गए।
• बाद में किशनगढ़ उपचुनाव जीतकर दूसरे निर्वाचित मुख्यमंत्री बने।
• इनके कार्यकाल में पहली बार उपमुख्यमंत्री (टीकाराम पालीवाल) बने।
(6-7-8-9) मोहनलाल सुखाड़िया 1954 – 1971 • आधुनिक राजस्थान के निर्माता।
• सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने।
• मुख्यमंत्री बनने से पहले मंत्री रहे।
• पहली महिला मंत्री कमला बेनीवाल को नियुक्त किया।
1962 में सम्भागीय व्यवस्था समाप्त की।
1967 में पहली बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ।
1971 में त्यागपत्र दिया।
• सर्वाधिक 4 बार शपथ ली एवं सबसे लंबा कार्यकाल।
• बाद में कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश के राज्यपाल बने।
बी. जी. राव, कृष्ण पुरी, के. एन. सुब्रमण्यम, भगत सिंह मेहता, सावलदान उज्ज्वल, के. पी. यू. मेनन, आर. डी. माथुर, जेड. एस. झाला
मोहन मुखर्जी, गोपाल कृष्ण भानोत, विपिन बिहारीलाल माथुर, टी. वी. रमन, गोविन्द मिश्रा, मीठा लाल मेहता, अरुण कुमार
(10) बरकतउल्ला खाँ 1971 – 1973 • राजस्थान के प्रथम मुस्लिम मुख्यमंत्री
• मोहनलाल सुखाड़िया के मंत्रिमंडल में मंत्री रहे।
• एकमात्र मुख्यमंत्री जिनका कार्यकाल में ही निधन हुआ।
जेड. एस. झाला, सुन्दरलाल खुराना

राजस्थान के मुख्यमंत्री (क्रमांक 11 से आगे)

क्रम मुख्यमंत्री कार्यकाल मुख्य तथ्य मुख्य सचिव
(11) हरदेव जोशी 1973 – 1977 मोहनलाल सुखाड़िया एवं बरकतउल्ला खाँ के समय मंत्री रहे।
• राजस्थान विधानसभा में 10 बार विधायक रहे और कभी चुनाव नहीं हारे।
3 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली लेकिन कार्यकाल पूरा नहीं कर सके।
• विधानसभा के मुख्य सचेतक भी रहे।
1975 के आपातकाल के दौरान मुख्यमंत्री थे।
1987 में सम्भागीय व्यवस्था पुनः प्रारम्भ की।
असम, मेघालय एवं पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बने।
सुन्दरलाल खुराना, मोहन मुखर्जी, आर. डी. थापर, आनन्द मोहनलाल, नरेशचन्द्र, विपिन बिहारीलाल माथुर
(12) भैरोंसिंह शेखावत 1977 – 1980 • राजस्थान में प्रथम गैर-कांग्रेसी सरकार जनता पार्टी के नेतृत्व में बनी।
• उस समय ये विधानसभा सदस्य नहीं थे।
हरिशंकर भाभड़ा को उपमुख्यमंत्री बनाया गया।
11वीं विधानसभा में प्रोटेम स्पीकर रहे।
• भारत के 11वें उपराष्ट्रपति बने।
• इनके कार्यकाल में सर्वाधिक 2 बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ।
• पहली बार विधानसभा समय से पहले भंग होकर मध्यावधि चुनाव हुए।
(13) जगन्नाथ पहाड़िया 1980 – 1981 • राजस्थान के प्रथम अनुसूचित जाति के मुख्यमंत्री।
• लोकसभा एवं राज्यसभा सांसद रहे।
• मुख्यमंत्री बनने के समय विधानसभा सदस्य नहीं थे।
महादेवी वर्मा पर विवादित टिप्पणी के कारण 1981 में त्यागपत्र दिया।
• बाद में बिहार एवं हरियाणा के राज्यपाल बने।
गोपाल कृष्ण भानोत, मदनमोहन कृष्णावली
(14) शिवचरण माथुर 1981 – 1985 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से संबंधित थे।
23 फरवरी 1985 को डीग गोलीकांड के बाद त्यागपत्र दिया।
• बाद में असम के राज्यपाल बने।
• इनके नेतृत्व में राजस्थान प्रशासनिक सुधार आयोग (1999) का गठन हुआ।
मदनमोहन कृष्णावली, आनन्द मोहनलाल, विपिन बिहारीलाल माथुर
(15) हीरालाल देवपुरा 1985 – 1985 • 8वीं विधानसभा के अध्यक्ष एवं दूसरे राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष रहे।
• सबसे कम कार्यकाल (16 दिन) के मुख्यमंत्री।
आनन्द मोहनलाल
(16) हरदेव जोशी 1985 – 1988 • पुनः मुख्यमंत्री बने।
(17) शिवचरण माथुर 1988 – 1989 • पुनः मुख्यमंत्री बने।
(18) हरदेव जोशी 1989 – 1990 • तीसरी बार मुख्यमंत्री बने।
(19) भैरोंसिंह शेखावत 1990 – 1992 • पुनः मुख्यमंत्री बने।
(20) भैरोंसिंह शेखावत 1993 – 1998 • दूसरी बार पुनः मुख्यमंत्री बने।
(21) अशोक गहलोत 1998 – 2003 सरदारपुरा (जोधपुर) से विधायक हैं।
• मुख्यमंत्री के रूप में 3 बार शपथ ली।
2012-13 में प्रथम जेंडर बजट प्रस्तुत किया।
2022-23 में पहली बार कृषि बजट शुरू किया।
अरुण कुमार, इन्द्रजीत खन्ना, आर. के. नायर, डी. सी. सामंत, कुशल सिंह, टी. श्रीनिवासन, सलाउद्दीन अहमद, सी. के. मैथ्यू, सी. एस. राजन, देवेन्द्र भूषण गुप्ता, राजीव स्वरूप, निरंजन कुमार आर्या, उषा शर्मा
(22) श्रीमती वसुंधरा राजे 2003 – 2008 • जन्म 8 मार्च (अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस) को हुआ।
• निर्वाचन क्षेत्र झालरापाटन (झालावाड़)
• राजस्थान की प्रथम एवं एकमात्र महिला मुख्यमंत्री।
• विधानसभा में दो बार नेता प्रतिपक्ष रहीं।
आर. के. नायर, अनिल वैश्य, डी. सी. सामंत, सी. एस. राजन, राजीव महर्षि, ओमप्रकाश मीणा, अशोक जैन, निहालचन्द गोयल, देवेन्द्र भूषण गुप्ता
(23) अशोक गहलोत 2008 – 2013 • पुनः मुख्यमंत्री बने।
(24) श्रीमती वसुंधरा राजे 2013 – 2018 • पुनः मुख्यमंत्री बनीं।
(25) अशोक गहलोत 2018 – 2023 • पुनः मुख्यमंत्री बने।
(26) श्री भजनलाल शर्मा 2023 – वर्तमान • पदक्रम अनुसार 26वें एवं व्यक्तिक्रम अनुसार 12वें निर्वाचित मुख्यमंत्री।
• जन्म अटारी (भरतपुर)
• विधायक सांगानेर (जयपुर) से हैं।
• इनके समय उपमुख्यमंत्री – दीया कुमारी, प्रेमचंद बैरवा
उषा शर्मा, सुधांश पंत

महत्वपूर्ण तथ्य

  • भारत की प्रथम महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी थीं।
  • राजस्थान की प्रथम केयरटेकर (कामचलाऊ) सरकार के मुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल थे।

★ राजस्थान के वे मुख्यमंत्री जो दूसरे राज्यों में राज्यपाल रहे—

    1. ❖हरदेव जोशी
    2. ❖मोहनलाल सुखाड़िया
    3. ❖जगन्नाथ पहाड़िया
    4. ❖शिवचरण माथुर

★ वे मुख्यमंत्री जो मुख्यमंत्री बनने से पहले किसी भी मंत्रिपरिषद में मंत्री नहीं रहे—

    1. ❖ जयनारायण व्यास
    2. ❖ भैरोंसिंह शेखावत
    3. ❖ भजनलाल शर्मा
  • राजस्थान के एकमात्र मुख्यमंत्री जो राज्य विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे— हीरालाल देवपुरा
  • टीकाराम पालीवाल एवं जगन्नाथ पहाड़िया ऐसे मुख्यमंत्री रहे जो लोकसभा एवं राज्यसभा दोनों के सदस्य रहे।

★ राजस्थान के ऐसे मुख्यमंत्री जो नेता प्रतिपक्ष भी रहे—

    1. ❖ भैरोंसिंह शेखावत
    2. ❖ वसुंधरा राजे
    3. ❖ हरदेव जोशी

★ राजस्थान में चार बार मुख्यमंत्री बनने वाले व्यक्ति— मोहनलाल सुखाड़िया

★ तीन बार मुख्यमंत्री बनने वाले व्यक्ति—

  1. ❖ हरदेव जोशी
  2. ❖ भैरोंसिंह शेखावत
  3. ❖ अशोक गहलोत

★ दो बार मुख्यमंत्री बनने वाले व्यक्ति—

  1. ❖ शिवचरण माथुर
  2. ❖ वसुंधरा राजे
  3. ❖ जयनारायण व्यास

★ राजस्थान में सर्वाधिक अवधि तक मुख्यमंत्री रहने वाले—

  1. ❖ मोहनलाल सुखाड़िया
  2. ❖ अशोक गहलोत
  3. ❖ भैरोंसिंह शेखावत
  4. ❖ हरदेव जोशी

राजस्थान कार्यविधि नियम के अनुसार मुख्यमंत्री की स्वीकृति अनिवार्य कार्य

  • व्यक्तियों को विचारण के बिना निरुद्ध रखने हेतु भारत के संविधान के अनुच्छेद 22 (4) के अंतर्गत सलाहकार बोर्ड का गठन।
  • मृत्युदण्ड से दण्डित व्यक्ति के लिए क्षमादान से संबंधित प्रकरण।
  • वित्त विभाग में परिवर्तन से संबंधित मुद्दे।

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