राजस्थान में लोकायुक्त व्यवस्था

❖ राजस्थान में लोकायुक्त व्यवस्था ❖


  • विश्व के अधिकांश देशों में भ्रष्टाचार एवं प्रशासनिक शिकायतों की जाँच करने वाली संस्था को ओम्बुड्समैन (Ombudsman) कहा जाता है। भारत में यही व्यवस्था केन्द्रीय स्तर पर लोकपाल तथा राज्य स्तर पर लोकायुक्त के रूप में कार्य करती है।
  • भारत में लोकपाल एवं लोकायुक्त नाम का सुझाव 1963 में डॉ. एल. एम. सिंघवी ने दिया था।
  • मोरारजी देसाई की अध्यक्षता वाले प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (1966–70) ने सबसे पहले केन्द्र में लोकपाल तथा राज्यों में लोकायुक्त की स्थापना की अनुशंसा की।
  • लोकपाल विधेयक पहली बार 1968 में लोकसभा में प्रस्तुत किया गया।
  • भारत में सबसे पहले 1970 में ओडिशा ने लोकायुक्त विधेयक पारित किया।
  • 1971 में महाराष्ट्र तथा 1973 में राजस्थान में लोकायुक्त की स्थापना की गई।
  • लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 पर 31 दिसम्बर 2013 को राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर किए।
  • यह अधिनियम 16 जनवरी 2014 से प्रभावी हो गया।

राजस्थान में लोकायुक्त संस्था

  • राजस्थान लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त अध्यादेश, 1973 पारित किया गया, जो 3 फरवरी 1973 से राज्य में लागू हुआ। बाद में इसे 26 मार्च 1973 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई।
  • लोकायुक्त एक वैधानिक (सांविधिक) एवं सलाहकारी संस्था है। यह शिकायतों की जाँच कर सकती है, किन्तु स्वयं दण्ड देने का अधिकार नहीं रखती।
  • इस संस्था में एक लोकायुक्त तथा 8 सदस्य होते हैं।
  • लोकायुक्त का मुख्यालय जयपुर में स्थित है।

धारा 3 – नियुक्ति

  • लोकायुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा 2 सदस्यीय चयन समिति की अनुशंसा के आधार पर की जाती है।

चयन समिति के सदस्य

    • विधानसभा में विपक्ष का नेता
    • उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
  • उप-लोकायुक्त की नियुक्ति लोकायुक्त के परामर्श से राज्यपाल द्वारा की जाती है।
  • शपथराज्यपाल अथवा उसके द्वारा अधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा दिलाई जाती है।

धारा 4 – योग्यता

  • उच्चतम न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश अथवा उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश होना चाहिए।
  • किसी भी लाभ के पद पर कार्यरत नहीं होना चाहिए।
  • संसद या विधानमण्डल का सदस्य नहीं होना चाहिए।
  • किसी राजनीतिक दल से संबद्ध नहीं होना चाहिए।

धारा 5 – पदावधि व सेवा शर्तें

  • कार्यकाल5 वर्ष अथवा 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले पूर्ण हो।
  • लोकायुक्त को पुनर्नियुक्ति का अधिकार नहीं होता।
  • त्यागपत्रराज्यपाल को दिया जाता है।
  • वेतन, भत्ते एवं पेंशनराजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समान होते हैं।

धारा 6 – पद से हटाना

  • कदाचार अथवा असमर्थता के आधार पर संविधान के अनुच्छेद 311 में वर्णित प्रावधानों के अनुसार राज्यपाल द्वारा पद से हटाया जा सकता है।
  • पद से हटाने से पहले राज्यपाल ऐसी जाँच ऐसे व्यक्ति से कराता है, जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश अथवा किसी उच्च न्यायालय का सेवारत या सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश हो।
  • जाँच प्रतिवेदन विधानमण्डल के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होने के बाद राज्यपाल लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त को पद से हटा सकता है।

धारा 12

  • लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त अपना वार्षिक प्रतिवेदन राज्यपाल को प्रस्तुत करते हैं।
  • राज्यपाल इस प्रतिवेदन को विधानमण्डल के समक्ष रखवाता है।

लोकायुक्त का क्षेत्राधिकार

  • राज्य के सभी मंत्री
  • लोकसेवक, सचिव एवं विभागाध्यक्ष
  • जिला प्रमुख तथा उप जिला प्रमुख
  • पंचायत समिति के प्रधान एवं उपप्रधान
  • जिला परिषद एवं पंचायत समितियों की स्थायी समितियों के अध्यक्ष
  • नगर निगम के महापौर एवं उपमहापौर
  • नगर पालिका तथा नगर विकास न्यास के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष
  • राजकीय कम्पनी, निगम एवं मंडलों के अध्यक्ष
  • अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की जाँच

लोकायुक्त के क्षेत्राधिकार से बाहर

  • राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री
  • महालेखाकार
  • उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, अन्य न्यायाधीश, न्यायिक अधिकारी एवं कर्मचारी
  • मुख्य चुनाव आयुक्त तथा चुनाव अधिकारी
  • राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य
  • सेवानिवृत्त लोकसेवक (सरकारी कर्मचारी)
  • विधायक, सरपंच एवं पंच
  • विधानसभा सचिवालय के अधिकारी एवं कर्मचारी

लोकायुक्त के कार्य

  • भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग तथा अकर्मण्यता से संबंधित शिकायतों की जाँच कर नागरिकों की समस्याओं के समाधान का प्रयास करना।
  • प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जाँच करना।
  • लोकायुक्त को सिविल कोर्ट के समान शक्तियाँ प्राप्त हैं, जिनके आधार पर वह जाँच के लिए फाइलें, दस्तावेज एवं अन्य आवश्यक अभिलेख मंगवा सकता है।

लोकसेवक के विरुद्ध निम्न मामलों में जाँच की जा सकती है

  • पद का दुरुपयोग करने के मामले
  • भ्रष्टाचार से संबंधित मामले
  • किसी व्यक्ति को बिना कारण हानि या पीड़ा पहुँचाने के मामले
  • लोकायुक्त 5 वर्ष से अधिक पुराने मामलों की जाँच नहीं कर सकता।

महत्वपूर्ण तथ्य

विवरण जानकारी
राजस्थान के प्रथम लोकायुक्त आई. डी. दुआ (1973)
राजस्थान के प्रथम उप-लोकायुक्त के. पी. यू. मेनन
सर्वाधिक कार्यकाल वाले लोकायुक्त महेन्द्र भूषण शर्मा
न्यूनतम कार्यकाल वाले लोकायुक्त विनोद शंकर दवे
राजस्थान के वर्तमान 13वें लोकायुक्त श्री प्रताप कृष्ण लोहरा

नरपतमल लोढा समिति का गठन फरवरी 2014 में राज्य सरकार द्वारा श्री नरपतमल लोढा की अध्यक्षता में किया गया। इस समिति का उद्देश्य लोकायुक्त अधिनियम के प्रावधानों को अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाना था।

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