राजस्थान की सिंचाई परियोजनाएँ

❖ राजस्थान की सिंचाई परियोजनाएँ ❖


सिंचाई परियोजनाएँ

  • राजस्थान में सर्वाधिक सिंचित क्षेत्रफल वाला जिला गंगानगर है, जबकि न्यूनतम सिंचित क्षेत्रफल राजसमंद जिले का है।
  • सर्वाधिक सिंचित प्रतिशत वाला जिला गंगानगर है तथा सबसे कम सिंचित प्रतिशत चूरू जिले में दर्ज किया जाता है।
  • राजस्थान में सर्वाधिक सिंचाई राज्य के पूर्वी भाग में होती है।
  • राजस्थान में कुल 15 नदी बेसिन चिन्हित किए गए हैं।
  • इन सभी नदी बेसिनों में उपलब्ध कुल सतही जल की मात्रा लगभग 158.60 लाख एकड़ फीट (15.86 M.A.F.) है, जो भारत के कुल उपलब्ध जल संसाधनों का केवल 1.16% भाग है।
  • राजस्थान में सर्वाधिक सिंचाई कुओं एवं नलकूपों के माध्यम से की जाती है।
  • कुओं एवं नलकूपों से सर्वाधिक सिंचाई जयपुर एवं जोधपुर जिलों में होती है।
  • नहरों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई गंगानगर जिले में की जाती है।
  • तालाबों से सर्वाधिक सिंचाई भीलवाड़ा एवं उदयपुर जिलों में होती है।

➤ सिंचाई के प्रमुख स्रोत एवं उनका योगदान

    • कुओं (Open Wells) से – 20.10%
    • नलकूपों (Tube Wells) से – 49.29%
    • नहरों (Canals) से – 28.39%
    • तालाबों (Tanks) से – 0.33%
  • सिंचाई परियोजनाओं का वर्गीकरण मुख्य रूप से चार प्रकार का होता है।

(1) बहुउद्देशीय परियोजनाएँ

  • ऐसी परियोजनाएँ जिनका जल पेयजल, सिंचाई तथा विद्युत उत्पादन जैसे अनेक उद्देश्यों के लिए उपयोग में लिया जाता है।
  • पंडित जवाहर लाल नेहरू ने बहुउद्देशीय परियोजनाओं को “आधुनिक भारत का नवीन मंदिर” कहा था।

(2) वृहद सिंचाई परियोजना

  • जिन परियोजनाओं का कृषि कमाण्ड क्षेत्र 10 हजार हेक्टेयर से अधिक होता है।

(3) मध्यम सिंचाई परियोजना

  • जिनका कृषि कमाण्ड क्षेत्र 2 हजार से 10 हजार हेक्टेयर के बीच होता है।

(4) लघु सिंचाई परियोजना

  • जिन परियोजनाओं का कृषि कमाण्ड क्षेत्र 2 हजार हेक्टेयर से कम होता है।

भाखड़ा-नांगल परियोजना

  • यह भारत की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय परियोजना है।
  • यह राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा की संयुक्त परियोजना है।

सतलज नदी पर दो प्रमुख बाँध निर्मित किए गए हैं—

  • भाखड़ा बाँध
  • नांगल बाँध

1.) भाखड़ा बाँध

  • यह सतलज नदी पर बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश) में स्थित है।
  • इसकी आधारशिला वर्ष 1955 में पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा रखी गई।
  • यह भारत का दूसरा सबसे ऊँचा बाँध है।
  • भाखड़ा बाँध के पीछे गोविन्द सागर झील स्थित है।
  • पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भाखड़ा बाँध को “चमत्कारी विराट वस्तु” कहा था।

महत्वपूर्ण तथ्यभारत का सबसे ऊँचा बाँध भागीरथी नदी पर स्थित टिहरी बाँध (260 मीटर, उत्तराखण्ड) है।

2.) नांगल बाँध

  • यह सतलज नदी पर रोपड़ (पंजाब) में स्थित है।
  • नांगल बाँध से दो प्रमुख नहरें निकाली गई हैं—
  • बिस्त दोआब नहर – इससे पंजाब को सिंचाई सुविधा प्राप्त होती है।
  • भाखड़ा नहर – इसके माध्यम से राजस्थान, पंजाब तथा हरियाणा को सिंचाई सुविधा मिलती है।
  • भाखड़ा-नांगल परियोजना से सर्वाधिक लाभ हनुमानगढ़ जिले को प्राप्त हुआ है।
  • वर्ष 1959 में राजस्थान एवं पंजाब के बीच भाखड़ा-नांगल समझौता हुआ, जिसमें राजस्थान का हिस्सा 15.22% निर्धारित किया गया। इसके परिणामस्वरूप राज्य के लगभग 2.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हुई।
ब्यास परियोजना
  • यह राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा की संयुक्त परियोजना है।
  • ब्यास नदी पर पंडोह बाँध (मंडी, हिमाचल प्रदेश) तथा पोंग बाँध (कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश) का निर्माण किया गया है।
  • ब्यास नदी के अतिरिक्त जल को सतलज नदी तक पहुँचाने के लिए पंडोह बाँध से भाखड़ा बाँध तक ब्यास–सतलज लिंक चैनल बनाया गया है।

रावी–ब्यास विवाद

  • वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में कराची (पाकिस्तान) में सिन्धु जल संधि सम्पन्न हुई।
  • इस संधि के अंतर्गत भारत को सतलज, रावी तथा ब्यास नदियों के जल के उपयोग का अधिकार प्राप्त हुआ।

इराडी आयोग

  • राजस्थान, पंजाब तथा हरियाणा के बीच रावी–ब्यास परियोजना के जल बँटवारे को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ।
  • वर्ष 1985 के राजीव–लोंगोवाल समझौते के तहत न्यायमूर्ति इराडी की अध्यक्षता में इराडी आयोग का गठन किया गया।
  • आयोग की अनुशंसा के अनुसार राजस्थान के लिए 86 लाख एकड़ फीट जल निर्धारित किया गया।
चम्बल परियोजना
  • यह राजस्थान और मध्यप्रदेश की संयुक्त परियोजना है।
  • इस परियोजना में दोनों राज्यों की भागीदारी 50 : 50 के अनुपात में है।
  • चम्बल नदी पर कुल चार बाँध निर्मित किए गए हैं।
धौलपुर लिफ्ट परियोजना
  • यह परियोजना धौलपुर जिले में संचालित है।
  • इसका उद्देश्य चम्बल नदी का जल धौलपुर क्षेत्र में सिंचाई के लिए उपलब्ध कराना है।
सोम कागदर परियोजना
  • यह परियोजना खेरवाड़ा (उदयपुर) में स्थित है।
  • इसमें सोम कागदर बाँध का निर्माण सोम नदी पर किया गया है।
नदसमंद परियोजना
  • यह परियोजना राजसमंद में बनास नदी पर विकसित की गई है।
  • इससे राजसमंद को पेयजल तथा सिंचाई दोनों सुविधाएँ प्राप्त होती हैं।
औराई परियोजना
  • यह परियोजना चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है।
  • इसका निर्माण औराई नदी पर किया गया है।
मानसी वाकल परियोजना
  • यह परियोजना उदयपुर में स्थित है।
  • इसका उद्देश्य मानसी एवं वाकल नदियों का जल पिछोला झील तक पहुँचाना है।
  • इस परियोजना के अंतर्गत मानसी वाकल बाँध का निर्माण किया गया है।
  • इससे उदयपुर शहर को जलापूर्ति की जाती है।
कोठारी परियोजना
  • यह परियोजना भीलवाड़ा जिले में स्थित है।
  • कोठारी नदी पर मेजा बाँध (मांडलगढ़, भीलवाड़ा) का निर्माण किया गया है।
  • मेजा बाँध के माध्यम से भीलवाड़ा शहर को पेयजल की आपूर्ति की जाती है।
माही बजाज सागर परियोजना
  • यह राजस्थान एवं गुजरात की संयुक्त परियोजना है।
  • इस परियोजना में राजस्थान की भागीदारी 45% तथा गुजरात की 55% है, जबकि इससे उत्पन्न होने वाली 100% विद्युत राजस्थान को प्राप्त होती है।
  • इस परियोजना से सर्वाधिक लाभ बाँसवाड़ा जिले को मिलता है।
  • माही नदी पर कागदी पिकअप बाँध (बाँसवाड़ा) निर्मित है, जहाँ से सिंचाई के लिए दो प्रमुख नहरें निकाली गई हैं—
    1. आनन्दीपुर भूखिया नहरबाँसवाड़ा जिले में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराती है।
    2. भीखाभाई सांगवाड़ा नहरडूंगरपुर जिले में सिंचाई सुविधा प्रदान करती है।

पीपलखूँट हाई लेवल केनाल

  • इसका उद्देश्य माही नदी का जल पीपलखूँट (प्रतापगढ़) क्षेत्र तक पहुँचाकर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है।

माही हाई लेवल नहर एवं जयसमंद पेयजल परियोजना

  • इस परियोजना के माध्यम से माही बजाज सागर बाँध का जल जयसमंद झील तक पहुँचाया जाता है।
  • इससे उदयपुर, चित्तौड़गढ़ तथा राजसमंद जिले लाभान्वित होते हैं।
जाखम परियोजना
  • यह परियोजना प्रतापगढ़ जिले में स्थित है।
  • जाखम नदी पर राजस्थान का सबसे ऊँचा बाँध जाखम बाँध (81 मीटर) निर्मित है।
  • इस बाँध का शिलान्यास मोहनलाल सुखाड़िया द्वारा किया गया था।
  • इस परियोजना से उदयपुर, चित्तौड़गढ़ तथा प्रतापगढ़ जिले लाभान्वित होते हैं।
सोम कमला अम्बा परियोजना
  • यह परियोजना कमला अम्बा गाँव (डूंगरपुर) में सोम नदी पर निर्मित है।
  • इसके माध्यम से आसपुर (डूंगरपुर) तथा सलूम्बर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होती है।
रामजल सेतु लिंक परियोजना
  • इस परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 दिसम्बर 2024 को दादिया गाँव (जयपुर) से किया।इसका पूर्व नाम पूर्वी राजस्थान नहर – पार्वती कालीसिंध चम्बल लिंक परियोजना (ERCP–PKC) था।
  • 28 जनवरी 2024 को इस परियोजना के संबंध में राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं केन्द्र सरकार के बीच समझौता हुआ।

➤ इस परियोजना में राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग के 17 जिले शामिल हैं—

    • अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, डीग, सवाईमाधोपुर, जयपुर, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, दौसा, अजमेर, ब्यावर, टोंक, कोटा, बूंदी, बारां एवं झालावाड़
  • इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश के 13 जिले भी इस परियोजना का हिस्सा हैं।
  • इस योजना के माध्यम से वर्ष 2054 तक लगभग 3.25 करोड़ लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया गया है।
  • चम्बल नदी की सहायक नदी बेसिनों कुनू, कूल, पार्वती, कालीसिंध एवं मेज में उपलब्ध जल का उपयोग छोटी एवं बड़ी परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 2.8 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए किया जाएगा।

➤ इस परियोजना के अंतर्गत 5 बैराज एवं 1 बाँध के निर्माण का प्रस्ताव है—

    • रामगढ़ बैराज (बारां)कूल नदी पर।
    • महलपुर बैराज (बारां)पार्वती नदी पर।
    • ननेरा बैराज (दीगोद, कोटा)कालीसिंध नदी पर।
  • इस परियोजना में ननेरा बैराज की भराव क्षमता सर्वाधिक है।
    • मेज बैराज (बूंदी)मेज नदी पर।
    • राठौड़ बैराज (सवाईमाधोपुर)बनास नदी पर।
    • डूंगरी बाँध (सवाईमाधोपुर)बनास नदी पर।
परवन सिंचाई परियोजना
  • यह परियोजना झालावाड़ जिले में परवन नदी पर स्थित है।
  • इसके माध्यम से झालावाड़, कोटा एवं बारां जिलों के 637 गाँवों को सिंचाई एवं पेयजल सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

अनास बाँध

  • यह बाँसवाड़ा में अनास नदी पर स्थित है।

सुकली परियोजना

  • यह सिरोही में सुकली नदी पर विकसित की गई है।

तकली सिंचाई परियोजना

  • यह परियोजना कोटा में स्थित है।

सावन-भादो परियोजना

  • यह परियोजना कोटा में स्थित है।

चाकण सिंचाई परियोजना

  • यह बूंदी जिले में स्थित है।

गरदड़ा सिंचाई परियोजना

  • यह बूंदी जिले में स्थित है।

गुढ़ा बाँध

  • यह बूंदी में मेज नदी पर निर्मित है।

बैंयली परियोजना

  • यह बारां जिले में स्थित है।

विलास सिंचाई परियोजना

  • यह बारां जिले में स्थित है।

ल्हासी सिंचाई परियोजना

  • यह बारां जिले में स्थित है।

कालीसिंध परियोजना

  • यह झालावाड़ जिले में स्थित है।

हरिश्चन्द्र सागर परियोजना

  • यह झालावाड़ जिले में स्थित है।

गागरीन सिंचाई परियोजना

  • यह झालावाड़ जिले में स्थित है।

चौली परियोजना

  • यह झालावाड़ जिले में स्थित है।

छापी सिंचाई परियोजना

  • यह झालावाड़ जिले में स्थित है।

भीमसागर परियोजना

  • यह झालावाड़ जिले में स्थित है।

पीपलाद सिंचाई परियोजना

  • यह झालावाड़ जिले में स्थित है।

झालाजी का बराना

  • बूंदी में मेज नदी पर स्थित यह राजस्थान की पहली सोलर लिफ्ट सिंचाई परियोजना है।

इन्दिरा लिफ्ट परियोजना

  • यह परियोजना करौली एवं सवाईमाधोपुर जिलों में संचालित है।

पार्वती सिंचाई परियोजना

  • यह धौलपुर में पार्वती नदी पर स्थित है।
  • धौलपुर में पार्वती नदी पर उर्मिला सागर बाँध निर्मित है।

बंध बारेठा बाँध

  • यह भरतपुर जिले में कुकुन्द नदी पर स्थित है।
  • यह भरतपुर का सबसे बड़ा बाँध है।

प्रमुख योजनाएँ

आपणी योजना

  • यह योजना जर्मनी की आर्थिक सहायता से चूरू, हनुमानगढ़ एवं झुंझुनूं जिलों में संचालित की जा रही है।

जीवनधारा योजना

  • इस योजना के अंतर्गत B.P.L. किसानों, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बिना किसी खर्च के सिंचाई कुओं का निर्माण कराया जाता है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

  • इस योजना का शुभारम्भ 1 जुलाई 2015 को किया गया।
  • इसमें केन्द्र एवं राज्य सरकार का वित्तीय अंश 60 : 40 के अनुपात में है।
  • समन्वित जलग्रहण प्रबंधन कार्यक्रम, त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम तथा ऑन फार्म जल प्रबंधन को इस योजना में सम्मिलित किया गया है।
  • इसका प्रमुख उद्देश्य सिंचाई सुविधाओं को अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाना है।

नीरांचल योजना

  • यह भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की योजना है।
  • इस योजना का वित्तपोषण विश्व बैंक द्वारा किया जाता है।
  • इसे राजस्थान सहित 9 राज्यों के 18 जिलों में प्रारम्भ किया गया।
  • राजस्थान में यह योजना जोधपुर एवं उदयपुर जिलों में संचालित है।
  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के परिणामों में सुधार लाने के उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत की गई।

मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान

  • इस अभियान का शुभारम्भ 27 जनवरी 2016 को गर्दनखेड़ी (झालावाड़) स्थित चेची तालाब से किया गया।
  • इसका मुख्य उद्देश्य गाँवों की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है।

जल जीवन मिशन

  • इस मिशन की शुरुआत वर्ष 2019–20 में की गई।
  • प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त 2019 को जल जीवन मिशन की घोषणा की। इसके अंतर्गत वर्ष 2024 तक 100 से अधिक आबादी वाले गाँवों के प्रत्येक घर में नल कनेक्शन के माध्यम से 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
  • इस योजना में केन्द्र एवं राज्य सरकार की वित्तीय भागीदारी 50 : 50 है।

राजीव गाँधी जल संचय योजना

  • इस योजना का शुभारम्भ अगस्त 2019 में किया गया।

अटल भूजल योजना

  • इस योजना की शुरुआत 1 अप्रैल 2020 से विश्व बैंक की सहायता से की गई।
  • इसमें देश के 7 राज्योंराजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र तथा कर्नाटक के कुल 78 जिलों को शामिल किया गया है।
  • इस योजना में विश्व बैंक एवं भारत सरकार की वित्तीय भागीदारी 50 : 50 है।
  • इसका प्रमुख उद्देश्य गिरते भू-जल स्तर को रोकना तथा भू-जल का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है।

हेली बोर्न सर्वेक्षण तकनीक

  • इस तकनीक की शुरुआत राजस्थान के जोधपुर से की गई।
  • इसका उपयोग भू-जल प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के लिए किया जाता है।

राजस्थान मरू क्षेत्र जल पुनर्गठन परियोजना

  • इस परियोजना का वित्तपोषण न्यू डेवलपमेंट बैंक द्वारा किया जा रहा है।
  • इसकी शुरुआत फरवरी 2018 में हुई।
  • परियोजना को 7 वर्ष में पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • इस योजना से गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं, सीकर, नागौर, बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर तथा बाड़मेर जिले लाभान्वित होंगे।

मुख्यमंत्री राजनीर योजना

  • इस योजना का शुभारम्भ 13 मार्च 2020 को किया गया।
  • इसका उद्देश्य शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्रति माह 15 हजार लीटर तक के जल उपयोग पर जल शुल्क माफ करना है।

राजस्थान जल क्षेत्र आजीविका सुधार परियोजना

  • इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2017 में जायका (JICA – Japan International Cooperation Agency) के सहयोग से की गई।
  • इसका उद्देश्य राजस्थान के 27 जिलों की 137 सिंचाई परियोजनाओं का जीर्णोद्धार करना तथा उनमें आवश्यक सुधार करना है।

जनता जल योजना

  • जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की इस पेयजल योजना के माध्यम से पंचायत स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति की जाती है।
  • यह योजना जैसलमेर एवं बीकानेर को छोड़कर राजस्थान के अन्य सभी जिलों में संचालित है।

प्रमुख संस्थाएँ

  • राजस्थान भूमिगत जल बोर्डजोधपुर (1950)
  • हाइड्रोलॉजी एंड वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूटबीकानेर
  • राजस्थान जल विभाग निगम लिमिटेडजयपुर (1984)
  • सिंचाई प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थानकोटा (1984)

राजस्थान में भू-जल के कुल 302 ब्लॉक हैं।

भू-जल ब्लॉकों का वर्गीकरण

श्रेणी संख्या
अति दोहित ब्लॉक (Over Exploited) 214
विषम ब्लॉक (Critical) 27
अर्द्धविषम ब्लॉक (Semi Critical) 21
सुरक्षित ब्लॉक (Safe) 37
लवणीय ब्लॉक (Saline) 3

डार्क जोन

  • जिन क्षेत्रों में भू-जल स्तर सामान्य मानकों से नीचे पहुँच जाता है, उन्हें डार्क जोन कहा जाता है।
  • राजस्थान के 14 जिलोंअलवर, भरतपुर, धौलपुर, सवाईमाधोपुर, झुंझुनूं, सीकर, नागौर, जयपुर, दौसा, अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, जैसलमेर तथा जालौर के सभी ब्लॉक डार्क जोन में शामिल हैं।

राजस्थान की नवीनतम भू-जल नीति 18 फरवरी 2010 को लागू की गई।

विश्व जल दिवस22 मार्च

राष्ट्रीय जल दिवस14 अप्रैल

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