राजस्थान की झीलें
राजस्थान की झीलों को मुख्यतः दो श्रेणियों में विभाजित किया जाता है—
- खारे पानी की झीलें
- मीठे पानी की झीलें
❖ (1) खारे पानी की झीलें
- राजस्थान में खारे पानी की झीलों की संख्या सर्वाधिक है।
- इन झीलों को टेथिस सागर का अवशेष माना जाता है।
- राज्य में सर्वाधिक खारे पानी की झीलें डीडवाना-कुचामन जिले में स्थित हैं।
❖ सांभर झील – फुलेरा (जयपुर)
- सांभर झील राजस्थान की सबसे बड़ी तथा भारत की दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की झील है।
- इसका विस्तार जयपुर, डीडवाना-कुचामन तथा अजमेर – इन तीन जिलों में है।
- इसकी लम्बाई – 32 किमी तथा चौड़ाई – 3 से 15 किमी है।
- यह झील 27°–29° उत्तरी अक्षांश तथा 74°–75° पूर्वी देशांतर के मध्य स्थित है।
➤ सांभर झील में जल लाने वाली नदियाँ
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- खारी नदी – डीडवाना-कुचामन की ओर से।
- मेन्था (मेंढा) नदी – उत्तर दिशा से।
- खण्डेला नदी – सीकर की ओर से।
- रूपनगढ़ नदी – दक्षिण दिशा से।
- इन सभी में मेन्था नदी सर्वाधिक नमक बहाकर लाती है।
- झील में क्यार पद्धति द्वारा नमक तैयार किया जाता है।
- सांभर झील देश में सर्वाधिक नमक उत्पादन करने वाली झील है।
- यह देश के कुल नमक उत्पादन का लगभग 8.7% उत्पादन करती है।
➤ सांभर साल्ट लिमिटेड
- 1964 में सांभर साल्ट लिमिटेड की स्थापना नमक उत्पादन के उद्देश्य से की गई।
- यह हिन्दुस्तान साल्ट लिमिटेड की सहायक कम्पनी है।
- इसमें केन्द्र सरकार की 60% तथा राज्य सरकार की 40% हिस्सेदारी है।
➤ विशेष तथ्य
- गुजरात का राज्य पक्षी राजहंस तथा कुरंजा पक्षी (खींचन गाँव) प्रवास के दौरान सांभर झील पर आते हैं।
- 2019 में एवियन बोटुलिज्म रोग के कारण यहाँ हजारों पक्षियों की मृत्यु हुई थी।
- 1990 में सांभर झील को रामसर साइट का दर्जा प्रदान किया गया।
नोट – भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील चिलका झील (उड़ीसा) है।
❖ रामसर स्थल
- 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में आर्द्रभूमियों (Wetlands) के संरक्षण हेतु विश्व सम्मेलन आयोजित किया गया।
- यह सम्मेलन 1975 में प्रभावी हुआ।
- भारत 1 फरवरी 1982 को इस संधि का सदस्य बना।
➤ राजस्थान के रामसर स्थल
| क्रम | रामसर स्थल | वर्ष |
|---|---|---|
| 1 | केवलादेव घना पक्षी विहार | 1981 |
| 2 | सांभर झील | 1990 |
| 3 | खींचन (फलोदी) | 2025 |
| 4 | मेनार (उदयपुर) | 2025 |
| 5 | सीलीसेढ़ झील | 2026 |
❖ पचपदरा झील – पचपदरा (बालोतरा)
- यह राजस्थान की दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की झील है।
- इसका स्थान लूनी बेसिन में है।
- इसका निर्माण पंचा भील द्वारा कराया गया।
- इस झील के नमक में लगभग 98% सोडियम क्लोराइड (NaCl) पाया जाता है, इसलिए यहाँ का नमक सर्वोत्तम माना जाता है।
- यहाँ खारवाल जाति परम्परागत रूप से मोरली झाड़ी का उपयोग करके नमक तैयार करती है, जिसे रेस्तां कहा जाता है।
- यहाँ तैयार होने वाला नमक कोसिया नाम से प्रसिद्ध है।
- 1960 में यहाँ राजस्थान स्टेट साल्ट वर्क्स, पचपदरा की स्थापना की गई।
❖ डीडवाना झील – डीडवाना-कुचामन
- इस झील का नमक खाने योग्य नहीं होता, क्योंकि इसमें फ्लोराइड की मात्रा अधिक होती है।
- यहाँ के नमक का उपयोग मुख्यतः कागज उद्योग तथा चमड़ा उद्योग में किया जाता है।
- नमक उत्पादन का कार्य राजस्थान स्टेट केमिकल वर्क्स द्वारा किया जाता है।
- इस झील में सोडियम सल्फेट संयंत्र स्थापित है, जहाँ सोडियम लवण का निर्माण किया जाता है।
- यहाँ नमक तैयार करने वाली संस्था को देवल कहा जाता है।
❖ खारे पानी की अन्य झीलें
- लूणकरणसर झील – बीकानेर
- तालछापर झील – सुजानगढ़ (चूरू)
- कावोद झील – जैसलमेर
- रेवासा झील – सीकर
- बाप झील – फलोदी
- फलोदी झील – फलोदी
- कुचामन झील – डीडवाना-कुचामन
- पोकरण झील – जैसलमेर
- कोछोर झील – सीकर
- डेगाना झील – नागौर
आदर्श लवणीय फार्म (मॉडल साल्ट फार्म) नावां (डीडवाना-कुचामन) में स्थित है।
❖ (2) मीठे पानी की झीलें
- राजस्थान में सर्वाधिक मीठे पानी की झीलें उदयपुर में स्थित हैं।
- उदयपुर को झीलों की नगरी (लेकसिटी) कहा जाता है।
- भारत में झीलों की नगरी श्रीनगर है।
- फिनलैण्ड को विश्व का झीलों का देश कहा जाता है।
❖ जयसमंद (ढेबर) झील – सलूम्बर
- इस झील का निर्माण मेवाड़ के महाराणा जयसिंह ने 1685 से 1691 के मध्य कराया।
- यह राजस्थान की सबसे बड़ी कृत्रिम (मानव निर्मित) मीठे पानी की झील है।
- झील को जल की आपूर्ति गोमती नदी से होती है।
- गोमती नदी के ढेबर दर्रे से निकलने के कारण इसे ढेबर झील भी कहा जाता है।
- झील में कुल 7 टापू स्थित हैं।
- सबसे बड़ा टापू बाबा का भांगड़ा है।
- सबसे छोटा टापू प्यारी कहलाता है।
- बाबा का मगरा टापू पर आईसलैंड रिसोर्ट होटल स्थित है।
- सिंचाई के लिए यहाँ से श्यामपुरा एवं भाट नामक दो नहरें निकाली गई हैं।
❖ पिछोला झील – उदयपुर
- राणा लाखा के शासनकाल में पिछ्छू (छीतर) बंजारे ने इस झील का निर्माण कराया।
- झील को जल की आपूर्ति सिसारमा नदी तथा बुझड़ा नदी से होती है।
➤ जगमंदिर
- इसका निर्माण महाराणा कर्णसिंह के समय प्रारम्भ हुआ।
- निर्माण कार्य जगतसिंह प्रथम के शासनकाल में पूर्ण हुआ।
➤ जगनिवास
- इसका निर्माण जगतसिंह द्वितीय द्वारा कराया गया।
- पिछोला झील में सौर ऊर्जा चालित पहली नाव का संचालन किया गया।
- झील के समीप सिटी पैलेस, बागौर की हवेली तथा नटनी का चबूतरा स्थित हैं।
❖ फतेहसागर झील – उदयपुर
- इस झील का निर्माण महाराणा जयसिंह द्वारा कराया गया।
- इसे देवाली तालाब तथा कर्नॉट बाँध के नाम से भी जाना जाता है।
- यह देवाली गाँव के निकट स्थित है।
- इसकी नींव ब्रिटिश राजकुमार ड्यूक ऑफ कर्नॉट ने रखी थी।
- बाद में इसका पुनर्निर्माण महाराणा फतेहसिंह द्वारा कराया गया।
- झील के आसपास सहेलियों की बाड़ी तथा हवाला शिल्प ग्राम स्थित हैं।
- फतेहसागर झील में देश की पहली सौर वेधशाला स्थापित की गई।
- राजस्थान की सबसे बड़ी सौर वेधशाला भी इसी झील के मध्य स्थित है।
❖ उदयसागर झील – उदयपुर
- 1559 ई. में महाराणा उदयसिंह ने आयड़ नदी के जल को रोककर इस झील का निर्माण कराया।
- झील के आगे बहने पर आयड़ नदी का नाम बेड़च नदी हो जाता है।
❖ स्वरूप सागर झील – उदयपुर
- इस झील का निर्माण महाराणा स्वरूप सिंह ने कराया।
- यह पिछोला झील तथा फतेहसागर झील को आपस में जोड़ती है।
- दूध तलाई उदयपुर में स्थित है।
नोट – उदयपुर की झीलों में साबरमती नदी का जल पहुँचाने के लिए देवास सुरंग का निर्माण किया गया। यह राजस्थान की सबसे लंबी जल सुरंग है, जिसकी लंबाई 11.6 किमी है।
❖ राजसमंद झील – राजसमंद
- इस झील का निर्माण महाराणा राजसिंह ने 1662 से 1676 ई. के मध्य अकाल राहत कार्यों के दौरान कराया।
- झील को जल की आपूर्ति गोमती नदी से होती है।
- इसका जल आसपास के क्षेत्रों की सिंचाई के लिए भी उपयोग में लिया जाता है।
- झील की नींव का प्रथम पत्थर घेवर बाई ने रखा था।
- झील की पाल पर घेवर माता मंदिर स्थित है।
- इसके उत्तरी किनारे को नौ चौकी पाल कहा जाता है।
- नौ चौकी पाल पर 25 शिलालेख स्थापित हैं, जिनमें संस्कृत भाषा में मेवाड़ का इतिहास अंकित है।
❖ पुष्कर झील – पुष्कर (अजमेर)
➤ उपनाम
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- हिन्दुओं का पाँचवाँ तीर्थ
- तीर्थराज
- तीर्थों का मामा
- कौंकण तीर्थ
- बावन घाटा झील (यहाँ 52 घाट बने हुए हैं)
- यह राजस्थान की सबसे पवित्र तथा सर्वाधिक प्रदूषित झील मानी जाती है।
➤ जनाना घाट / क्वीन मेरी घाट
- 1911 में ब्रिटिश महारानी मेरी के भारत आगमन की स्मृति में इसका निर्माण कराया गया।
- इसी घाट पर महात्मा गाँधी की अस्थियों का विसर्जन किया गया था, इसलिए इसे गाँधी घाट भी कहा जाता है।
- मान्यता है कि वेदव्यास ने यहाँ महाभारत तथा कालिदास ने अभिज्ञान शाकुंतलम् की रचना की।
- पुष्कर झील की सफाई का कार्य कनाडा के आर्थिक सहयोग से कराया गया।
➤ महत्वपूर्ण तथ्य
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- तीर्थों का मामा – पुष्कर
- तीर्थों का भांजा – मचकुण्ड (धौलपुर)
- तीर्थराज मेला – मचकुण्ड (धौलपुर)
- तीर्थों की नानी – देवयानी (सांभर, जयपुर)
- मेवाड़ का हरिद्वार मातृकुण्डिया (रश्मी, चित्तौड़गढ़) को कहा जाता है।
- यहाँ बनास नदी के तट पर मंगलेश्वर महादेव मंदिर स्थित है।
❖ आनासागर झील – अजमेर
- 1137 ई. में अर्णोराज (आना जी चौहान) ने लूनी (चन्द्रा) नदी का जल रोककर इस झील का निर्माण कराया।
- झील के किनारे जहाँगीर द्वारा निर्मित दौलत बाग स्थित है, जिसे वर्तमान में सुभाष बाग कहा जाता है।
- यहीं नूरजहाँ की माता असमत बेगम ने पहली बार गुलाब से इत्र तैयार किया था।
- शाहजहाँ ने यहाँ संगमरमर की पाँच बारहदरी (छतरियाँ) बनवाईं।
❖ फॉयसागर झील – अजमेर
- वर्तमान में इस झील को वरुण सागर के नाम से भी जाना जाता है।
- 1891–92 के अकाल राहत कार्यों के दौरान इंजीनियर फॉय के निर्देशन में इसका निर्माण कराया गया।
- इस झील में बांडी नदी का जल आता है।
- जल स्तर अधिक होने पर इसका अतिरिक्त पानी आनासागर झील में प्रवाहित हो जाता है।
❖ नक्की झील – माउंट आबू (सिरोही)
- यह राजस्थान की सबसे ऊँचाई पर स्थित झील है, जिसकी ऊँचाई लगभग 1200 मीटर है।
- राजस्थान की सबसे गहरी झील भी नक्की झील ही है।
- मान्यता है कि इस झील का निर्माण देवताओं ने अपने नाखूनों से खोदकर किया था।
- झील के निकट टॉड रॉक (मेंढक के आकार की पहाड़ी), नन रॉक (घूँघट निकाले महिला की आकृति) तथा नन्दी रॉक (भगवान शिव के वाहन नन्दी के स्वरूप वाली चट्टान) स्थित हैं।
❖ मोती झील – भरतपुर
- इस झील का निर्माण महाराजा सूरजमल ने कराया।
- इसे भरतपुर की जीवन रेखा माना जाता है।
- मोती झील से सुजानगंगा नहर के माध्यम से लोहागढ़ दुर्ग की खाई तक जल पहुँचाया जाता है।
- इस झील से प्राप्त नील-हरित शैवाल से नाइट्रोजन (N₂) युक्त खाद तैयार की जाती है।
❖ सिलीसेढ़ झील – अलवर
- इसका उपनाम राजस्थान का नन्दनकानन है।
- इस झील का निर्माण महाराजा विनयसिंह द्वारा कराया गया।
❖ जयसमंद झील – अलवर
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- जयसमंद झील अलवर में स्थित है।
❖ छापरवाड़ा झील – जयपुर
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- छापरवाड़ा झील जयपुर में स्थित है।
❖ पीथमपुरी झील – नीम का थाना (सीकर)
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- पीथमपुरी झील नीम का थाना (सीकर) क्षेत्र में स्थित है।
❖ बालसमंद झील – मंडोर (जोधपुर)
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- इस झील का निर्माण प्रतिहार शासक बालक राव ने कराया।
❖ महिला बाग का झालरा – जोधपुर
- यह गुलाब सागर के निकट स्थित है।
- इसका निर्माण विजयसिंह की पासवान गुलाबराय द्वारा कराया गया।
❖ कायलाना झील – जोधपुर
- इस झील का निर्माण सर प्रताप ने कराया।
❖ उम्मेद सागर झील – जोधपुर
- इसका निर्माण राव उम्मेदसिंह द्वारा कराया गया।
❖ कोलायत झील – बीकानेर
- इसका उपनाम शुष्क मरुस्थल का सुन्दर उद्यान है।
❖ गैब सागर झील – डूंगरपुर
- इस झील का निर्माण महारावल गोपीनाथ ने कराया।
- इसे एडवर्ड सागर तालाब के नाम से भी जाना जाता है।
❖ पुंजेला तालाब – डूंगरपुर
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- पुंजेला तालाब डूंगरपुर में स्थित है।
❖ रंगसागर तालाब – डूंगरपुर
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- रंगसागर तालाब डूंगरपुर में स्थित है।
❖ आनंदसागर झील (बाई तालाब) – बाँसवाड़ा
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- आनंदसागर झील, जिसे बाई तालाब भी कहा जाता है, बाँसवाड़ा में स्थित है।
❖ नवलसागर (नवलखा) झील – बूंदी
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- नवलसागर झील, जिसे नवलखा झील भी कहा जाता है, बूंदी में स्थित है।
❖ कनक सागर (दुगारी) झील – बूंदी
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- कनक सागर झील, जिसे दुगारी झील के नाम से भी जाना जाता है, बूंदी में स्थित है।
❖ जैतसागर झील – बूंदी
- इस झील का निर्माण जैता मीणा ने कराया।
- झील के समीप सुख महल स्थित है।
❖ रामगढ़ झील – बारां
- इस झील का निर्माण उल्का पिंड के प्रभाव से हुआ माना जाता है।
- रामगढ़ को देश की पहली जियो हेरिटेज साइट (भू-विरासत स्थल) के रूप में मान्यता प्राप्त है।
❖ गजनेर झील – बीकानेर
- इसका उपनाम पानी का शुद्ध दर्पण है।
❖ सरदार समंद झील – पाली
- यह झील सुकड़ी परियोजना से संबंधित है।
- सुकड़ी परियोजना पाली जिले में स्थित है।
- झील के निकट सरदार समंद पैलेस स्थित है।
❖ राष्ट्रीय झील संरक्षण कार्यक्रम (NLCP)
- केन्द्र सरकार ने राजस्थान की 6 झीलों को राष्ट्रीय झील संरक्षण कार्यक्रम (NLCP) में शामिल किया है।
➤ इस कार्यक्रम में शामिल झीलें
- पिछोला झील
- फतेहसागर झील
- नक्की झील
- पुष्कर झील
- आनासागर झील
- मानसागर झील
