❖ राजस्थान में नगरीय स्वशासन व्यवस्था ❖
- शहरी क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन की व्यवस्था को नगरीय (शहरी) स्वशासन कहा जाता है।
➤ राजस्थान में नगरीय स्वशासन की संरचना तीन स्तरों पर आधारित है—
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- नगर निगम
- नगर परिषद्
- नगर पालिका
- नगरीय स्वशासन राज्य सूची का विषय है।
- राजस्थान में पहली नगर पालिका की स्थापना माउंट आबू में 1864 में हुई। इसके बाद 1866 में अजमेर, 1867 में ब्यावर तथा 1869 में जयपुर में नगरपालिकाओं की स्थापना की गई।
- राजस्थान में स्थानीय निकाय विभाग की स्थापना 1950 में की गई।
- 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा नगरीय निकायों को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। उस समय प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव थे।
- यह अधिनियम 1 जून 1993 से प्रभावी हुआ।
- राजस्थान में इसे 9 अगस्त 1994 से लागू किया गया।
74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से संविधान में नया भाग 9 (क) जोड़ा गया। इसमें अनुच्छेद 243 त (P) से 243 यछ (ZG) तक कुल 18 अनुच्छेद शामिल किए गए तथा 12वीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसमें नगरपालिकाओं से संबंधित 18 विषयों का उल्लेख है।
❖ अनुच्छेद का विवरण
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- 243 त (P) – परिभाषाएँ
- 243 थ (Q) – नगरपालिका का गठन
प्रत्येक राज्य में नगरीय निकायों की त्रिस्तरीय व्यवस्था निर्धारित की गई है—
| नगरीय निकाय | जनसंख्या |
|---|---|
| नगर निगम | 5 लाख से 1 करोड़ |
| नगर परिषद् | 1 लाख से 5 लाख |
| नगर पालिका (नगर पंचायत) | 20 हजार से 1 लाख |
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- 243 द (R) – नगरपालिकाओं की संरचना
- 243 ध (S) – वार्ड समितियों आदि का गठन एवं संरचना
- 243 न (T) – स्थानों का आरक्षण
- अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इनमें से एक-तिहाई (1/3) स्थान संबंधित वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे।
- नगरपालिकाओं में प्रत्यक्ष निर्वाचन से भरे जाने वाले कुल स्थानों में से एक-तिहाई (1/3) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी।
- राज्य विधानमण्डल कानून बनाकर पिछड़े वर्ग के लिए भी नगरीय निकायों में आरक्षण की व्यवस्था कर सकता है।
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- 243 प (U) – नगरपालिकाओं की अवधि
- 243 फ (V) – सदस्यों के लिए निरर्हताएँ
- 243 ब (W) – नगरपालिकाओं की शक्तियाँ, प्राधिकार एवं उत्तरदायित्व
- 12वीं अनुसूची में नगरपालिकाओं से संबंधित 18 विषय शामिल किए गए हैं। राज्य विधानमण्डल कानून बनाकर नगरपालिकाओं को निम्नलिखित विषयों पर अधिकार प्रदान कर सकता है—
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- नगरीय योजना
- भूमि उपयोग एवं भवन निर्माण का विनियमन
- आर्थिक एवं सामाजिक विकास संबंधी योजनाओं का क्रियान्वयन
- सड़कों एवं पुलों का निर्माण
- घरेलू, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक प्रयोजनों के लिए जल प्रबंधन
- सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता, सफाई, कचरा प्रबंधन तथा मृत पशुओं का निस्तारण
- अग्निशमन सेवाओं का संचालन
- नगरीय वानिकी, पर्यावरण संरक्षण एवं उससे संबंधित कार्यों का प्रबंधन
- विकलांग एवं मंदबुद्धि व्यक्तियों के सामाजिक हितों की सुरक्षा
- गन्दी बस्तियों का सुधार एवं उन्नयन
- शहरी गरीबी कम करने के लिए प्रयास
- बाग-बगीचे, खेल मैदान तथा अन्य नागरिक सुविधाओं का विकास
- सांस्कृतिक एवं कला संबंधी गतिविधियों को प्रोत्साहन
- कब्रिस्तान, श्मशान तथा उनके लिए भूमि की व्यवस्था
- जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण
- पशुओं पर क्रूरता की रोकथाम तथा कॉंजी गृह की व्यवस्था
- रोड लाइट, पार्किंग, बस स्टॉप एवं वाहन पार्किंग जैसी सुविधाओं का विकास
- बूचड़खानों तथा चमड़ा उद्योग का विनियमन
- 243 भ (X) – नगरपालिकाओं द्वारा कर अधिरोपित करने की शक्ति एवं उनकी निधियाँ
❖ 243 म (Y) – वित्त आयोग
- राज्य वित्त आयोग नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति का पुनर्विलोकन भी करता है।
❖ 243 य (Z) – नगरपालिकाओं के लेखों की संपरीक्षा (अंकेक्षण)
- 243 यक (ZA) – नगरपालिकाओं के लिए निर्वाचन
- राज्य विधानमण्डल नगरपालिकाओं के निर्वाचन से संबंधित सभी विषयों पर कानून बना सकता है।
- 243 यख (ZB) – संघ राज्य क्षेत्रों पर इस भाग का लागू होना
- 243 यग (ZC) – इस भाग का कतिपय क्षेत्रों में लागू न होना
- 243 यघ (ZD) – जिला योजना समिति
➤ जिला आयोजना समिति
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- इस समिति का अध्यक्ष जिला परिषद् का जिला प्रमुख होता है।
- समिति में कुल 25 सदस्य होते हैं, जिनमें 3 पदेन सदस्य तथा 2 सदस्य राज्य सरकार द्वारा मनोनीत किए जाते हैं।
- शेष 20 सदस्य जिले के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों की जनसंख्या के अनुपात के आधार पर जिला परिषद् तथा नगरीय निकायों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों द्वारा निर्वाचित किए जाते हैं।
- 3 पदेन सदस्य क्रमशः जिला कलेक्टर, जिला परिषद् का मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा जिला परिषद् का अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी होते हैं।
- 243 यह (ZE) – महानगर योजना समिति
- प्रत्येक महानगर क्षेत्र (जिसकी जनसंख्या 10 लाख या उससे अधिक हो) के विकास की योजना का प्रारूप तैयार करने के लिए महानगर योजना समिति का गठन किया जाता है।
- इस समिति में कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्य महानगर क्षेत्र की नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों एवं पंचायतों के अध्यक्षों द्वारा अपने में से, नगरपालिकाओं एवं पंचायतों की जनसंख्या के अनुपात के अनुसार निर्वाचित किए जाते हैं।
- राजस्थान के किसी भी महानगरीय क्षेत्र में अब तक ऐसी कोई समिति गठित नहीं की गई है।
- 243 यच (ZF) – विद्यमान विधियों एवं नगरपालिकाओं का बना रहना
- 243 यछ (ZG) – निर्वाचन संबंधी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का प्रावधान
❖ शहरी स्वशासन व्यवस्था
(1) नगरपालिका
| क्र. | विषय | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | वर्तमान संख्या | 196 |
| 2 | गठन का आधार | 20 हजार से 1 लाख तक की जनसंख्या वाले शहरी क्षेत्रों में नगरपालिका का गठन किया जाता है |
| 3 | राजनीतिक अध्यक्ष | चेयरमैन / अध्यक्ष |
| 4 | चुनाव की प्रक्रिया | अप्रत्यक्ष |
| 5 | वार्ड के निर्वाचित सदस्य | पार्षद |
| 6 | न्यूनतम वार्डों की संख्या | 13 |
| 7 | प्रशासनिक अध्यक्ष | अधिशाषी अधिकारी |
| 8 | कार्यकाल | 5 वर्ष |
| 9 | न्यूनतम आयु | 21 वर्ष |
(2) नगर परिषद्
| क्र. | विषय | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | वर्तमान संख्या | 34 |
| 2 | गठन का आधार | 1 लाख से 5 लाख तक की जनसंख्या वाले शहरी क्षेत्रों में नगर परिषद् का गठन किया जाता है |
| 3 | राजनीतिक अध्यक्ष | सभापति |
| 4 | चुनाव की प्रक्रिया | अप्रत्यक्ष |
| 5 | वार्ड के निर्वाचित सदस्य | पार्षद |
| 6 | न्यूनतम वार्डों की संख्या | 13 |
| 7 | प्रशासनिक अध्यक्ष | आयुक्त |
| 8 | कार्यकाल | 5 वर्ष |
| 9 | न्यूनतम आयु | 21 वर्ष |
(3) नगर निगम
| क्र. | विषय | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | वर्तमान संख्या | 10 |
| 2 | गठन का आधार | 5 लाख से 1 करोड़ तक की जनसंख्या वाले शहरी क्षेत्रों में नगर निगम का गठन किया जाता है |
| 3 | राजनीतिक अध्यक्ष | महापौर / मेयर |
| 4 | चुनाव की प्रक्रिया | अप्रत्यक्ष |
| 5 | वार्ड के निर्वाचित सदस्य | पार्षद |
| 6 | न्यूनतम वार्डों की संख्या | 13 |
| 7 | प्रशासनिक अध्यक्ष | मुख्य कार्यकारी अधिकारी |
| 8 | कार्यकाल | 5 वर्ष |
| 9 | न्यूनतम आयु | 21 वर्ष |
❖ महत्वपूर्ण बिन्दू
वर्तमान में राजस्थान में 11 नगर निगम कार्यरत हैं—
| क्रमांक | नगर निगम |
|---|---|
| 1 | अजमेर |
| 2 | बीकानेर |
| 3 | जयपुर |
| 4 | जयपुर धरोहर नगर निगम |
| 5 | जोधपुर उत्तर |
| 6 | जोधपुर दक्षिण |
| 7 | कोटा उत्तर |
| 8 | कोटा दक्षिण |
| 9 | उदयपुर |
| 10 | भरतपुर |
| 11 | अलवर |
- पंचायतों एवं नगरपालिकाओं के चुनाव सम्पन्न होने के बाद मतों की गणना तथा निर्वाचन प्रक्रिया के प्रबंधन की निगरानी के लिए राज्य चुनाव आयुक्त द्वारा रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किए जाते हैं।
- 1974 में नगरपालिका प्रशासन में बजटीय सुधारों के लिए गठित समिति के अध्यक्ष गिरिजापति मुखर्जी थे।
- राजस्थान नगरपालिका नियम, 2009 के अनुसार अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष के पदभार ग्रहण करने के 2 वर्ष पूरे होने के बाद ही उनके विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया जा सकता है।
- अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए कुल सदस्यों में से कम से कम एक-तिहाई (1/3) सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं।
- प्रस्ताव पर विचार करने हेतु आयोजित बैठक की गणपूर्ति के लिए कुल सदस्यों का तीन-चौथाई (3/4) उपस्थित होना आवश्यक है।
- अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के लिए मतदान में कुल सदस्यों के तीन-चौथाई (3/4) बहुमत का समर्थन अनिवार्य है।
➤ राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के अनुसार राज्य सरकार द्वारा—
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- नगरपालिका में 6 व्यक्ति
- नगर परिषद् में 8 व्यक्ति
- नगर निगम में 12 व्यक्ति
नामित (निर्दिष्ट) किए जा सकते हैं।
- नगरपालिका चुनाव में किसी राजनीतिक दल के प्रत्याशी के नामांकन के लिए 1 प्रस्तावक आवश्यक होता है, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार के लिए 5 प्रस्तावकों का होना अनिवार्य है।
- जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (D.R.D.A.) का जिला परिषदों में विलय 1 सितम्बर 2003 से प्रभावी किया गया।
- जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (D.R.D.A.) का अध्यक्ष जिला प्रमुख होता है।
राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर पंचायतों एवं नगरपालिकाओं के संसाधनों को सुदृढ़ करने के लिए राज्य की संचित निधि में आवश्यक संवर्धन संबंधी उपायों की अनुशंसा भारत का वित्त आयोग राष्ट्रपति को करता है।
