❖ राजस्थान उच्च न्यायालय ❖
- राजस्थान उच्च न्यायालय की मुख्य (प्रधान) पीठ जोधपुर में स्थित है।
- 29 अगस्त 1949 को जयपुर में राजस्थान के प्रथम उच्च न्यायालय का उद्घाटन जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह द्वारा किया गया।
- उद्घाटन समारोह के दौरान माननीय न्यायमूर्ति कमलकांत वर्मा सहित 11 अन्य न्यायाधीशों को शपथ दिलाई गई।
➤ शपथ ग्रहण करने वाले 11 अन्य न्यायाधीश
| न्यायाधीश | संबंधित स्थान |
|---|---|
| नवल किशोर | जोधपुर |
| कुंवर अमर सिंह | जोधपुर |
| कँवरलाल बाफना | जयपुर |
| मोहम्मद इब्राहिम | जयपुर |
| जवान सिंह राणावत | उदयपुर |
| शार्दुल सिंह मेहता | उदयपुर |
| दुर्गाशंकर दवे | बूंदी |
| त्रिलोकचंद दत्त | बीकानेर |
| आनंद नारायण कौल | अलवर |
| के. के. शर्मा | भरतपुर |
| खेमचंद गुप्ता | कोटा |
- 1957 में गठित पी. सत्यनारायण राव समिति की अनुशंसा के आधार पर 1958 में राजस्थान उच्च न्यायालय का मुख्यालय जयपुर से जोधपुर स्थानांतरित कर दिया गया तथा जयपुर खंडपीठ को समाप्त कर दिया गया।
- पी. सत्यनारायण राव समिति के अध्यक्ष पी. सत्यनारायण राव थे तथा इसके अन्य सदस्य वी. विश्वनाथन एवं बी. के. गुप्ता थे।
- 8 दिसम्बर 1976 को जयपुर पीठ की पुनः स्थापना की गई।
- पुनर्स्थापित जयपुर पीठ ने अपना विधिवत न्यायिक कार्य 31 जनवरी 1977 से प्रारंभ किया।
- राजस्थान उच्च न्यायालय नियम, 1952 1 अक्टूबर 1952 से प्रभावी हुए।
- राजस्थान उच्च न्यायालय का आदर्श वाक्य “सत्यस्य जयोऽस्तु” है।
❖ उच्च न्यायालय
- भारतीय संविधान के भाग-6 में अनुच्छेद 214 से 231 तक राज्यों के उच्च न्यायालयों की संरचना एवं उनसे संबंधित प्रावधानों का वर्णन किया गया है।
- भारत में सर्वप्रथम 1862 में कलकत्ता, बम्बई तथा मद्रास में उच्च न्यायालयों की स्थापना की गई। इनमें कलकत्ता उच्च न्यायालय सबसे प्राचीन है।
- 1866 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की स्थापना की गई।
- वर्तमान में भारत में 25 उच्च न्यायालय कार्यरत हैं।
- 2019 में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय देश का 25वाँ उच्च न्यायालय बना।
- भारत की पहली महिला उच्च न्यायालय न्यायाधीश अन्ना चांडी थीं, जिन्होंने केरल उच्च न्यायालय में सेवा दी।
- भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश (उच्च न्यायालय) लीला सेठ थीं, जिन्हें हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
❖ अनुच्छेद 214 – प्रत्येक राज्य के लिए उच्च न्यायालय
- अनुच्छेद 214 के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय की व्यवस्था की गई है।
- अनुच्छेद 231 के अंतर्गत संसद को यह अधिकार प्राप्त है कि वह दो या दो से अधिक राज्यों अथवा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एक ही संयुक्त उच्च न्यायालय की स्थापना कर सकती है।
➤ संयुक्त उच्च न्यायालयों के प्रमुख उदाहरण
| संयुक्त राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | उच्च न्यायालय |
|---|---|
| पंजाब, हरियाणा एवं चंडीगढ़ | चंडीगढ़ उच्च न्यायालय |
| असम, नागालैंड, मिजोरम एवं अरुणाचल प्रदेश | गुवाहाटी उच्च न्यायालय |
| महाराष्ट्र, गोवा, दमन एवं दीव तथा दादरा एवं नगर हवेली | बॉम्बे उच्च न्यायालय |
❖ अनुच्छेद 215 – उच्च न्यायालय अभिलेख न्यायालय है
- अनुच्छेद 215 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय होता है।
- उच्च न्यायालय के सभी निर्णय, आदेश एवं न्यायिक कार्यवाहियाँ लिखित अभिलेख के रूप में सुरक्षित रखी जाती हैं।
- उच्च न्यायालय के निर्णय अधीनस्थ न्यायालयों में साक्ष्य के रूप में मान्य होते हैं।
- उच्च न्यायालय को अपनी अवमानना के मामलों में दण्ड देने का अधिकार प्राप्त है।
❖ अनुच्छेद 217 – न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं पद की शर्तें
- उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श करने के बाद की जाती है।
- उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श के उपरांत की जाती है।
- 1993 से उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति तथा स्थानांतरण के लिए कॉलेजियम प्रणाली लागू है। इस व्यवस्था के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित व्यक्तियों में से ही उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त किए जाते हैं।
- भारत के मुख्य न्यायाधीश को कॉलेजियम के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों से परामर्श करना आवश्यक होता है।
- उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं अन्य न्यायाधीश अधिकतम 62 वर्ष की आयु तक अपने पद पर बने रह सकते हैं।
- यदि किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की आयु को लेकर विवाद उत्पन्न होता है, तो भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद राष्ट्रपति उसका अंतिम निर्णय करते हैं।
- 15वाँ संविधान संशोधन, 1963 के माध्यम से उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं अन्य न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई।
- उच्च न्यायालय का प्रत्येक न्यायाधीश पदभार ग्रहण करने से पूर्व संबंधित राज्य के राज्यपाल अथवा उनके द्वारा अधिकृत व्यक्ति के समक्ष शपथ ग्रहण करता है।
- त्यागपत्र देने की स्थिति में उच्च न्यायालय का न्यायाधीश अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को संबोधित करता है।
- उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को पद से हटाने के आधार अनुच्छेद 124(4) के अनुसार समान हैं। उन्हें राष्ट्रपति द्वारा महाभियोग की प्रक्रिया के माध्यम से हटाया जाता है।
➤ न्यायाधीशों को हटाने के केवल दो आधार हैं—
-
- सिद्ध कदाचार
- असमर्थता (अक्षमता)
➤ न्यायाधीश (जाँच) अधिनियम, 1968 के अंतर्गत उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की महाभियोग प्रक्रिया निम्न प्रकार है—
- महाभियोग प्रस्ताव लोकसभा अथवा राज्यसभा—किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है।
- लोकसभा में प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए कम से कम 100 सदस्यों तथा राज्यसभा में 50 सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं।
- संबंधित सदन के अध्यक्ष/सभापति को प्रस्ताव स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार होता है।
- प्रस्ताव स्वीकार होने पर अध्यक्ष/सभापति आरोपों की जाँच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित करते हैं।
➤ तीन सदस्यीय समिति में निम्न सदस्य शामिल होते हैं—
| सदस्य | विवरण |
|---|---|
| 1 | उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अथवा उनके द्वारा नामित कोई न्यायाधीश |
| 2 | किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश |
| 3 | एक प्रख्यात न्यायविद |
- यदि समिति न्यायाधीश को सिद्ध कदाचार का दोषी मानती है, तो संबंधित सदन उस प्रस्ताव पर विचार करता है।
- जब संसद के दोनों सदन विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित कर देते हैं, तब उसे राष्ट्रपति के अनुमोदन हेतु भेजा जाता है।
- अंतिम रूप से राष्ट्रपति आदेश जारी कर संबंधित न्यायाधीश को पद से हटाते हैं।
➤ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने के लिए आवश्यक योग्यताएँ—
- भारत का नागरिक होना चाहिए।
- भारत के किसी राज्य क्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष तक न्यायिक पद पर कार्य किया हो, अथवा किसी उच्च न्यायालय या अन्य न्यायालयों में लगातार 10 वर्ष तक अधिवक्ता के रूप में कार्य किया हो।
❖ अनुच्छेद 221 – न्यायाधीशों के वेतन एवं भत्ते
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन संसद द्वारा बनाए गए कानून के अनुसार निर्धारित किया जाता है।
- न्यायाधीशों के वेतन एवं भत्तों का उल्लेख भारतीय संविधान की दूसरी अनुसूची में किया गया है।
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन एवं भत्ते संबंधित राज्य की संचित निधि से दिए जाते हैं, जबकि उनकी पेंशन भारत की संचित निधि से प्रदान की जाती है।
❖ अनुच्छेद 222 – न्यायाधीशों का स्थानांतरण
- उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश का स्थानांतरण भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करने के बाद राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है।
❖ अनुच्छेद 223 – कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति
- यदि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो जाए या वे अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असमर्थ हों, तो राष्ट्रपति उस उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों में से किसी एक को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करते हैं।
❖ अनुच्छेद 226 – रिट जारी करने की उच्च न्यायालय की शक्ति
- उच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन सहित अन्य उपयुक्त मामलों में पाँच प्रकार की रिटें जारी करने का अधिकार प्राप्त है।
➤ बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)
- इस रिट के माध्यम से किसी बंदी व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष सशरीर प्रस्तुत करने तथा उसकी गिरफ्तारी या निरुद्ध किए जाने का कारण बताने का निर्देश दिया जाता है।
➤ परमादेश (Mandamus)
- परमादेश का अर्थ है — “हम आदेश देते हैं।”
- यह रिट ऐसे लोक अधिकारी अथवा सरकारी प्राधिकरण के विरुद्ध जारी की जाती है, जो अपने वैधानिक कर्तव्य का पालन करने से इंकार करता है।
➤ अधिकार पृच्छा (Quo Warranto)
- अधिकार पृच्छा का अर्थ है — “आपने किस अधिकार से यह पद ग्रहण किया है?”
- यदि कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक पद पर अवैध रूप से आसीन हो, तो उसके अधिकार की वैधता की जाँच के लिए यह रिट जारी की जाती है।
➤ उत्प्रेषण (Certiorari)
- उत्प्रेषण का अर्थ है — “मंगा लेना।”
- उच्च न्यायालय किसी अधीनस्थ न्यायालय से किसी मामले की सुनवाई अपने समक्ष स्थानांतरित कर सकता है।
- यदि अधीनस्थ न्यायालय अपने अधिकार-क्षेत्र से बाहर जाकर कोई निर्णय देता है या उसकी कार्यवाही विधि के अनुरूप नहीं होती, तो उच्च न्यायालय उस मामले को अपने पास मंगाकर उसकी समीक्षा कर सकता है।
➤ प्रतिषेध (Prohibition)
- प्रतिषेध का अर्थ है — “मना करना।”
- इस रिट के माध्यम से उच्च न्यायालय किसी अधीनस्थ न्यायालय को ऐसे मामले की सुनवाई से रोक सकता है, जो उसके अधिकार-क्षेत्र से बाहर हो।
❖ अनुच्छेद 227 – उच्च न्यायालय की अधीक्षण शक्ति
- प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने अधिकार-क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी न्यायालयों एवं न्यायाधिकरणों पर अधीक्षण (Superintendence) का अधिकार प्राप्त है।
- इस अधिकार के अंतर्गत उच्च न्यायालय अधीनस्थ न्यायालयों से आवश्यक विवरण या अभिलेख मंगा सकता है।
- उच्च न्यायालय अधीनस्थ न्यायालयों के संचालन हेतु आवश्यक नियम एवं प्रारूप भी निर्धारित कर सकता है।
❖ अनुच्छेद 228 – उच्च न्यायालय को अंतरण
- यदि उच्च न्यायालय को यह प्रतीत हो कि उसके अधीनस्थ किसी न्यायालय में लंबित किसी मामले में संविधान की व्याख्या से संबंधित कोई महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न निहित है, तो वह उस मामले को अपने पास मंगाकर स्वयं उसका निर्णय कर सकता है।
❖ न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति
- उच्च न्यायालय को राज्य विधानमंडल तथा केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों की संवैधानिक वैधता की समीक्षा करने का अधिकार प्राप्त है।
- यदि कोई कानून संविधान के प्रावधानों के विपरीत पाया जाता है, तो उच्च न्यायालय उसे असंवैधानिक घोषित कर सकता है।
❖ राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण – जयपुर
➤ जयपुर स्थित राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण के अधिकार-क्षेत्र में निम्न चार संभाग आते हैं—
| क्रम | संभाग |
|---|---|
| 1 | जयपुर |
| 2 | भरतपुर |
| 3 | कोटा |
| 4 | अजमेर |
➤ राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण की जोधपुर स्थायी पीठ के अधिकार-क्षेत्र में निम्न तीन संभाग सम्मिलित हैं—
| क्रम | संभाग |
|---|---|
| 1 | जोधपुर |
| 2 | बीकानेर |
| 3 | उदयपुर |
❖ उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ (जोधपुर) का क्षेत्राधिकार
➤ जोधपुर स्थित मुख्य पीठ के अधिकार-क्षेत्र में निम्न 19 न्यायालय आते हैं—
| क्रम | न्यायालय |
|---|---|
| 1 | जोधपुर जिला |
| 2 | जोधपुर मेट्रोपोलिटन |
| 3 | बालोतरा |
| 4 | जैसलमेर |
| 5 | जालौर |
| 6 | सिरोही |
| 7 | पाली |
| 8 | गंगानगर |
| 9 | हनुमानगढ़ |
| 10 | बीकानेर |
| 11 | चूरू |
| 12 | मेड़ता |
| 13 | भीलवाड़ा |
| 14 | राजसमंद |
| 15 | उदयपुर |
| 16 | चित्तौड़गढ़ |
| 17 | प्रतापगढ़ |
| 18 | डूंगरपुर |
| 19 | बांसवाड़ा |
❖ उच्च न्यायालय की खंडपीठ (जयपुर) का क्षेत्राधिकार
➤ जयपुर स्थित खंडपीठ के अधिकार-क्षेत्र में निम्न 17 न्यायालय शामिल हैं—
| क्रम | न्यायालय |
|---|---|
| 1 | जयपुर जिला |
| 2 | जयपुर मेट्रो-1 |
| 3 | जयपुर मेट्रो-2 |
| 4 | दौसा |
| 5 | अलवर |
| 6 | सीकर |
| 7 | झुंझुनूं |
| 8 | भरतपुर |
| 9 | धौलपुर |
| 10 | करौली |
| 11 | सवाई माधोपुर |
| 12 | अजमेर |
| 13 | टोंक |
| 14 | कोटा |
| 15 | बूंदी |
| 16 | बारां |
| 17 | झालावाड़ |
- बाड़मेर एवं नागौर ऐसे दो जिले हैं, जिनके जिला न्यायालय संबंधित जिला मुख्यालय पर स्थापित न होकर क्रमशः बालोतरा एवं मेड़ता में स्थित हैं।
❖ महत्वपूर्ण बिन्दु
- वर्तमान में राजस्थान उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश सहित कुल 50 न्यायाधीश स्वीकृत हैं।
- राजस्थान उच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश कमलकांत वर्मा (के. के. वर्मा) थे।
- राजस्थान उच्च न्यायालय में सबसे लंबे कार्यकाल तक मुख्य न्यायाधीश रहने का रिकॉर्ड कैलाश नाथ वांचू के नाम है।
- सबसे कम कार्यकाल वाले मुख्य न्यायाधीश सतीश कुमार मित्तल रहे।
- राजस्थान उच्च न्यायालय के प्रथम कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जे. एम. पांचाल थे।
- राजस्थान उच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश कांता भटनागर थीं।
- वर्तमान मुख्य न्यायाधीश मनिन्द्र मोहन श्रीवास्तव हैं।
- राजस्थान उच्च न्यायालय के ऐसे न्यायाधीश, जिन्होंने राजस्थान सरकार में राज्यमंत्री के रूप में भी कार्य किया, वे जस्टिस फारुख हसन थे।
❖ राजस्थान उच्च न्यायालय के वे मुख्य न्यायाधीश जिनका स्थानांतरण सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में हुआ
| क्रम | नाम |
|---|---|
| 1 | कैलाश नाथ वांचू |
| 2 | पी. एन. सिंघल |
| 3 | जे. एस. वर्मा |
| 4 | शिवराज वी. पाटिल |
| 5 | अरुण कुमार |
| 6 | ए. आर. लक्ष्मण |
| 7 | जे. एम. पांचाल |
| 8 | दीपक वर्मा |
| 9 | अरुण मिश्रा |
| 10 | अमिताभ रॉय |
| 11 | नवीन सिन्हा |
| 12 | एस. रविन्द्र भट्ट |
| 13 | पंकज मित्तल |
| 14 | ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह |
❖ राजस्थान उच्च न्यायालय के वे मुख्य न्यायाधीश जिन्हें भारत का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया
| क्रम | नाम |
|---|---|
| 1 | कैलाश नाथ वांचू |
| 2 | जे. एस. वर्मा |
- कैलाश नाथ वांचू के कार्यकाल में 1956 में भारत के मुख्य न्यायाधीश एस. आर. दास की अनुशंसा पर राजस्थान के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए नए वारंट जारी किए गए।
❖ राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण
- राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की स्थापना 1998 में की गई।
- इसका मुख्यालय जयपुर में स्थित है।
❖ राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी
- 16 नवम्बर 2001 को न्यायिक प्रशासन स्कूल एवं राजस्थान न्यायिक अकादमी के नाम से इसकी स्थापना की गई।
- 24 जनवरी 2007 को इसका नाम परिवर्तित कर राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी कर दिया गया।
- राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी का मुख्यालय जोधपुर में स्थित है।
- जुलाई 2022 में राजस्थान उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एस. एस. शिन्दे ने राज्य की प्रथम वर्चुअल कोर्ट का ई-उद्घाटन किया।
❖ अधीनस्थ न्यायालय
- भारतीय संविधान के भाग-6 में अनुच्छेद 233 से 237 तक अधीनस्थ न्यायालयों से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।
- अनुच्छेद 233 के अनुसार जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा संबंधित उच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद की जाती है।
- जिला स्तर पर सर्वोच्च न्यायिक संस्था जिला न्यायालय होती है, जिसे अधीनस्थ न्यायालय भी कहा जाता है।
➤ सामान्यतः जिला न्यायालय दो प्रमुख भागों में विभाजित होता है—
-
- दीवानी न्यायालय (सिविल कोर्ट)
- फौजदारी न्यायालय (क्रिमिनल कोर्ट)
❖ राजस्थान उच्च न्यायालय के वे न्यायाधीश जो अन्य उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश बने
| क्रम | न्यायाधीश | संबंधित उच्च न्यायालय |
|---|---|---|
| 1 | कांता भटनागर | मद्रास उच्च न्यायालय |
| 2 | संदीप मेहता | गुवाहाटी उच्च न्यायालय |
| 3 | गोविन्द माथुर | इलाहाबाद उच्च न्यायालय |
| 4 | अजय रस्तोगी | त्रिपुरा उच्च न्यायालय |
