राजस्थान राज्य विधानमण्डल

इस भाग में क्या पढ़ेंगे

राज्य विधानमण्डल

भारतीय संविधान के भाग-6 तथा अनुच्छेद 168 से 212 तक राज्य विधानमण्डल से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।

❖ अनुच्छेद 168 — राज्य विधानमण्डल का गठन

➤ प्रत्येक राज्य में एक विधानमण्डल का प्रावधान होता है, जिसका गठन राज्यपाल तथा एक या दो सदनों से मिलकर होता है।

राज्य विधानमण्डल के सदन निम्नलिखित हैं—

  • विधानसभा (निम्न सदन)अनुच्छेद 170
  • विधान परिषद (उच्च सदन)अनुच्छेद 169

राज्य विधानमण्डल के अंग

    • राज्यपाल
    • विधानसभा
    • विधान परिषद
  •  यद्यपि राज्यपाल विधानमण्डल का सदस्य नहीं होता, फिर भी उसे इसका अभिन्न अंग माना जाता है, क्योंकि किसी भी विधेयक को कानून का रूप तभी प्राप्त होता है जब उस पर राज्यपाल की स्वीकृति (हस्ताक्षर) मिल जाती है।
  • राजस्थान में एकसदनीय विधानमण्डल की व्यवस्था है, अर्थात यहाँ केवल विधानसभा कार्य करती है।

भारत में केवल 6 राज्यों में द्विसदनीय विधानमण्डल (विधानसभा एवं विधान परिषद) की व्यवस्था है—

  1. उत्तरप्रदेश
  2. बिहार
  3. महाराष्ट्र
  4. कर्नाटक
  5. आन्ध्रप्रदेश
  6. तेलंगाना

❖ विधान परिषद

➤ अनुच्छेद 169 — विधान परिषद का उत्सादन / सृजन (गठन)
  • किसी राज्य में विधान परिषद की स्थापना के लिए संबंधित विधानसभा को विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करना होता है।
  • इसके बाद यह प्रस्ताव संसद को भेजा जाता है, जहाँ साधारण बहुमत से पारित होने पर उस राज्य में विधान परिषद की स्थापना की जा सकती है।
  • विधान परिषद एक स्थायी सदन है। इसे भंग नहीं किया जा सकता, किन्तु संसद आवश्यक होने पर इसे समाप्त कर सकती है।
  • 18 अप्रैल 2012 को राजस्थान विधानसभा ने विधान परिषद के गठन के संबंध में प्रस्ताव पारित कर संसद को भेजा था, किन्तु इस विषय में अब तक कोई कानून पारित नहीं किया गया है।
❖ अनुच्छेद 170 — विधानसभा की संरचना
  • किसी भी राज्य की विधानसभा में अधिकतम 500 तथा न्यूनतम 60 सदस्य हो सकते हैं।
  • उत्तरप्रदेश में सर्वाधिक 403 विधानसभा सीटें हैं।

नोटगोवा (40), मिजोरम (40), सिक्किम (32) तथा पुडुचेरी (30) की विधानसभा सीटों की संख्या 60 से कम है।

  • वर्तमान में विधानसभा सीटों का निर्धारण 1971 की जनगणना के आधार पर किया गया है।
  • राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सीटें हैं।
  • इनमें अनुसूचित जाति (SC) के लिए 34 तथा अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 25 सीटें आरक्षित हैं।
  • 2026 तक राजस्थान में विधानसभा सीटों की संख्या 200 ही निर्धारित रहेगी।
  • विधानसभा का गठन प्रत्येक पाँच वर्ष में जनता द्वारा प्रत्यक्ष निर्वाचन के माध्यम से चुने गए प्रतिनिधियों से किया जाता है।
❖ अनुच्छेद 171 — विधान परिषद की संरचना
  • किसी राज्य की विधान परिषद के सदस्यों की कुल संख्या उस राज्य की विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के एक-तिहाई (1/3) से अधिक नहीं हो सकती तथा यह संख्या 40 से कम भी नहीं होगी।
  • यदि राजस्थान में विधान परिषद का गठन किया जाता है, तो इसकी अधिकतम सदस्य संख्या 66 हो सकती है।
  • विधान परिषद के सदस्यों का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अंतर्गत एकल संक्रमणीय मत द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है।

विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या का गठन निम्न प्रकार से होता है—

  1. कुल सदस्यों का एक-तिहाई (1/3) भाग नगरपालिकाओं, जिला बोर्डों तथा अन्य स्थानीय प्राधिकारियों के निर्वाचित सदस्यों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल द्वारा निर्वाचित किया जाता है।
  2. कुल सदस्यों का एक-बारहवाँ (1/12) भाग ऐसे नागरिकों के निर्वाचक मंडल द्वारा चुना जाता है, जिन्होंने किसी विश्वविद्यालय से कम-से-कम 3 वर्ष पूर्व स्नातक की उपाधि प्राप्त की हो।
  3. कुल सदस्यों का एक-बारहवाँ (1/12) भाग राज्य के माध्यमिक विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में कम-से-कम 3 वर्ष से अध्यापन कार्य कर रहे शिक्षकों के निर्वाचक मंडल द्वारा निर्वाचित किया जाता है।
  4. कुल सदस्यों का एक-तिहाई (1/3) भाग राज्य विधानसभा के सदस्यों द्वारा ऐसे व्यक्तियों में से चुना जाता है, जो स्वयं विधानसभा के सदस्य नहीं होते।
  5. शेष एक-षष्ठांश (1/6) सदस्यों का मनोनयन राज्यपाल द्वारा किया जाता है।
❖ अनुच्छेद 172 — विधानमण्डल का कार्यकाल
  • राज्य विधानसभा का सामान्य कार्यकाल उसके प्रथम अधिवेशन की तिथि से 5 वर्ष का होता है।
  • राज्यपाल आवश्यकता पड़ने पर विधानसभा को निर्धारित अवधि पूर्ण होने से पहले भी विघटित कर सकता है।
  • राष्ट्रीय आपातकाल लागू होने की स्थिति में संसद कानून बनाकर विधानसभा के कार्यकाल में एक बार में अधिकतम 1 वर्ष तक की वृद्धि कर सकती है। किन्तु आपातकाल समाप्त होने के बाद यह बढ़ी हुई अवधि 6 माह से अधिक नहीं रह सकती।
  • राजस्थान की 5वीं विधानसभा का कार्यकाल आपातकाल के दौरान बढ़ाया गया था, इसलिए यह राज्य की सबसे अधिक अवधि तक कार्य करने वाली विधानसभा रही है।

नोट — वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने अथवा उसके विघटन की स्थिति में राज्यपाल नई विधानसभा के गठन हेतु साधारण (आम) चुनाव की अधिसूचना जारी करता है।

  • विधान परिषद के प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष होता है।
  • प्रत्येक 2 वर्ष के बाद एक-तिहाई (1/3) सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं तथा उनके स्थान पर नए सदस्यों का निर्वाचन किया जाता है।
❖ अनुच्छेद 173 — विधानमण्डल के सदस्य बनने की अर्हताएँ (योग्यता)
  • अभ्यर्थी भारत का नागरिक होना चाहिए।
  • विधानसभा का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष तथा विधान परिषद का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष निर्धारित है।
❖ अनुच्छेद 174 — विधानमण्डल का सत्र, सत्रावसान एवं विघटन
  • राज्यपाल समय-समय पर राज्य विधानमण्डल का सत्र बुलाता है, उसका सत्रावसान करता है तथा आवश्यक होने पर विधानसभा को विघटित भी कर सकता है।
  • किसी एक सत्र की अंतिम बैठक और अगले सत्र की पहली बैठक के बीच 6 माह से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए। इस प्रकार एक वर्ष में कम-से-कम 2 सत्र आयोजित होना अनिवार्य है।
  • विधानसभा के सत्र की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है।
  • किसी बैठक को स्थगित करने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष के पास होता है। यह केवल बैठक का स्थगन होता है, पूरे सत्र का नहीं।

नोट2016 के नबाम रेबिया वाद में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना राज्यपाल विधानसभा का सत्र नहीं बुला सकता।

❖ अनुच्छेद 178 — विधानसभा के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष
  • विधानसभा अपने सदस्यों में से अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष का निर्वाचन करती है।
  • विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) और उपाध्यक्ष के लिए अलग से शपथ नहीं दिलाई जाती। वे केवल विधानसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण करते हैं।
  • विधानसभा अध्यक्ष अपना त्यागपत्र उपाध्यक्ष को तथा उपाध्यक्ष अपना त्यागपत्र अध्यक्ष को सौंपता है।
  • विधानसभा साधारण बहुमत (उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के 50% से अधिक) से प्रस्ताव पारित करके अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष को पद से हटा सकती है।
  • यदि अध्यक्ष का पद रिक्त हो, तो उपाध्यक्ष उसके दायित्वों का निर्वहन करता है। यदि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों के पद रिक्त हों, तो राज्यपाल द्वारा नियुक्त विधानसभा का कोई सदस्य इन दायित्वों का पालन करता है।
❖ अनुच्छेद 182 — विधान परिषद के सभापति एवं उपसभापति
  • इस अनुच्छेद में विधान परिषद के सभापति एवं उपसभापति के पद का उल्लेख किया गया है।
  • विधान परिषद अपने सदस्यों में से ही सभापति तथा उपसभापति का निर्वाचन करती है।
❖ अनुच्छेद 188 — विधानमण्डल के सदस्यों की शपथ
  • विधानसभा अथवा विधान परिषद का प्रत्येक सदस्य राज्यपाल या उनके द्वारा नियुक्त व्यक्ति के समक्ष शपथ ग्रहण करता है।
  • शपथ का प्रारूप तीसरी अनुसूची में निर्धारित किया गया है।

➤ प्रोटेम स्पीकर (अस्थायी अध्यक्ष) –

  • प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
  • प्रोटेम स्पीकर को शपथ भी राज्यपाल ही दिलाते हैं।
  • सामान्यतः विधानसभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया जाता है, जो नव-निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने का कार्य करता है।
    • राजस्थान की प्रथम विधानसभा के प्रोटेम स्पीकरमहाराणा संग्राम सिंह
    • राजस्थान की 16वीं विधानसभा के प्रोटेम स्पीकरकालीचरण सराफ
❖ अनुच्छेद 189 — सदनों में मतदान एवं गणपूर्ति (कोरम)
  • विधानसभा अध्यक्ष अथवा विधान परिषद के सभापति सामान्य परिस्थितियों में किसी विधेयक पर मतदान नहीं करते।
  • यदि किसी विधेयक पर पक्ष और विपक्ष के मतों की संख्या बराबर हो जाए, तो अध्यक्ष/सभापति अपने निर्णायक मत (Casting Vote) का प्रयोग करता है।
➤ अनुच्छेद 189(3) — गणपूर्ति (कोरम)
  • इस उपबंध में विधानमण्डल की बैठक संचालित करने हेतु आवश्यक गणपूर्ति (कोरम) का प्रावधान किया गया है।
  • किसी बैठक के लिए आवश्यक कोरम, सदन की कुल सदस्य संख्या का एक-दशमांश (1/10) अथवा 10 सदस्य, इनमें से जो संख्या अधिक हो, वही होगी।
  • राजस्थान विधानसभा में गणपूर्ति के लिए कम-से-कम 20 सदस्य उपस्थित होना आवश्यक है।
❖ अनुच्छेद 191 — विधानमण्डल के सदस्यों की निरर्हताएँ (अयोग्यता)
➤ अनुच्छेद 191(1)

निम्न परिस्थितियों में कोई व्यक्ति राज्य विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य निर्वाचित होने के लिए अयोग्य माना जाएगा—

  • यदि वह लाभ के पद पर आसीन हो।
  • यदि उसे दिवालिया घोषित किया गया हो।
  • यदि वह चुनावी अपराध अथवा भ्रष्ट चुनावी आचरण का दोषी पाया गया हो।
  • यदि उसे अस्पृश्यता, दहेज प्रथा अथवा सती प्रथा जैसे सामाजिक अपराधों को बढ़ावा देने के कारण दंडित किया गया हो।
  • यदि यह प्रश्न उत्पन्न हो कि कोई सदस्य अनुच्छेद 191(1) के अंतर्गत वर्णित किसी अयोग्यता से ग्रस्त है या नहीं, तो अनुच्छेद 192 के अनुसार उसका अंतिम निर्णय राज्यपाल द्वारा किया जाएगा।
  • निर्णय देने से पूर्व राज्यपाल निर्वाचन आयोग की राय प्राप्त करेगा तथा उसी के अनुसार निर्णय करेगा।
➤ अनुच्छेद 191(2)
  • यदि कोई विधानमण्डल का सदस्य दसवीं अनुसूची (दल-बदल कानून) के अंतर्गत अयोग्य ठहराया जाता है, तो इस विषय में अंतिम निर्णय संबंधित सदन के अध्यक्ष अथवा सभापति द्वारा किया जाता है।
❖ अनुच्छेद 195 — सदस्यों के वेतन एवं भत्ते
  • राज्य विधानमण्डल के सदस्यों के वेतन एवं भत्तों का निर्धारण संबंधित राज्य विधानमण्डल द्वारा किया जाता है।
  • राजस्थान में विधानसभा सदस्य (विधायक) का वेतन 40 हजार रुपये निर्धारित है।
❖ अनुच्छेद 196 — विधेयकों के पुरःस्थापन एवं पारित किए जाने से संबंधित उपबंध
  • धन विधेयक (अनुच्छेद 198) तथा वित्त विधेयक (अनुच्छेद 207) से संबंधित प्रावधानों के अधीन रहते हुए, कोई भी विधेयक विधानमण्डल के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है।
  • द्विसदनीय विधानमण्डल वाले राज्यों में कोई विधेयक तब तक पारित नहीं माना जाता, जब तक उसे दोनों सदनों की स्वीकृति प्राप्त न हो जाए।
  • किसी सदन के सत्रावसान होने मात्र से वहाँ लंबित विधेयक समाप्त नहीं होता।

★ नोटअनुच्छेद 368(2) के अंतर्गत भारत की संसद द्वारा पारित कोई विधेयक यदि राजस्थान विधानसभा के अनुमोदन के लिए भेजा जाता है, तो विधानसभा उसे स्वीकार अथवा अस्वीकार कर सकती है, किन्तु उसमें कोई संशोधन प्रस्तावित नहीं कर सकती।

★ नोटविधानमण्डल का ऐसा सदस्य जो मंत्री नहीं है और स्वयं कोई विधेयक प्रस्तुत करता है, उसके द्वारा प्रस्तुत विधेयक को गैर-सरकारी विधेयक (निजी सदस्य विधेयक) कहा जाता है।

➤ राजस्थान विधानसभा में अब तक पारित गैर-सरकारी (निजी सदस्य) विधेयक

क्रमांक विधेयक वर्ष
1 राजस्थान कानूनी चिकित्सक विधेयक 1952
2 कुछ जानवरों की राजस्थान संरक्षण विधेयक 1954
3 राजस्थान सामाजिक शिक्षा बोर्ड विधेयक 1958
4 राजस्थान पशु और पक्षी निषेध विधेयक 1973

राजस्थान की तीसरी विधानसभा में सर्वाधिक 16 प्राइवेट (निजी) विधेयक प्रस्तुत किए गए थे, किन्तु उनमें से एक भी विधेयक पारित नहीं हो सका।

❖ अनुच्छेद 198 — धन विधेयक के संबंध में प्रक्रिया
  • धन विधेयक केवल राज्यपाल की पूर्व अनुमति प्राप्त होने के बाद ही प्रस्तुत किया जा सकता है।
  • इसका पुरःस्थापन (प्रस्तुतिकरण) सबसे पहले विधानसभा में तथा केवल मंत्री द्वारा किया जाता है।
  • विधानसभा से पारित होने के पश्चात धन विधेयक को विधान परिषद के पास भेजा जाता है।
  • विधान परिषद इस विधेयक को अधिकतम 14 दिन तक अपने पास रख सकती है। निर्धारित अवधि पूर्ण होने पर विधेयक स्वतः पारित माना जाता है।
  • विधान परिषद को धन विधेयक में न तो संशोधन करने का अधिकार है और न ही उसे अस्वीकार करने का। वह केवल अपनी सिफारिशें भेज सकती है, जिन्हें स्वीकार या अस्वीकार करने का निर्णय विधानसभा करती है।
❖ अनुच्छेद 199 — धन विधेयक की परिभाषा

निम्न विषयों से संबंधित विधेयक धन विधेयक माना जाता है—

  1. कर लगाने, समाप्त करने, छूट देने, परिवर्तन करने अथवा उसके विनियमन (नियंत्रण) से संबंधित प्रावधान।
  2. राज्य द्वारा धन उधार लेने, वित्तीय दायित्व ग्रहण करने अथवा राज्य की ओर से गारंटी देने के संबंध में विनियमन।
  3. राज्य की संचित निधि अथवा आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा, उसमें धन जमा करने या उससे धन निकालने से संबंधित विषय।

नोट — किसी अप्रत्याशित व्यय की पूर्ति के लिए राज्यपाल राज्य की आकस्मिकता निधि से अग्रिम राशि प्रदान कर सकता है।

  • कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय विधानसभा अध्यक्ष द्वारा किया जाता है।
  • प्रत्येक धन विधेयक पर विधानसभा अध्यक्ष अपने हस्ताक्षर सहित यह प्रमाणित करता है कि वह धन विधेयक है।
❖ अनुच्छेद 202 — वार्षिक वित्तीय विवरण
  • प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए राज्यपाल, राज्य विधानमण्डल के समक्ष उस वर्ष की अनुमानित प्राप्तियों एवं व्यय का विवरण प्रस्तुत करवाता है, जिसे वार्षिक वित्तीय विवरण कहा जाता है।

नोटभारतीय संविधान में ‘बजट’ शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। इसके स्थान पर ‘वार्षिक वित्तीय विवरण’ शब्द का उल्लेख मिलता है।

  • प्रत्येक वर्ष बजट का प्रस्तुतीकरण वित्त मंत्री द्वारा किया जाता है।
  • अशोक गहलोत तथा वसुंधरा राजे ने वित्त मंत्री के रूप में सर्वाधिक 10-10 बार बजट प्रस्तुत किया है।
❖ महत्वपूर्ण बिंदु
  • अनुच्छेद 333 के अंतर्गत राज्यपाल को विधानसभा में एंग्लो-इंडियन समुदाय के एक सदस्य को मनोनीत करने का अधिकार था, किन्तु 104वें संविधान संशोधन, 2020 के बाद लोकसभा एवं विधानसभाओं में एंग्लो-इंडियन समुदाय के मनोनयन का प्रावधान समाप्त कर दिया गया।
  • भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचन में राजस्थान विधानसभा के प्रत्येक विधायक के मत का मूल्य 129 है।
  • राजस्थान विधानसभा के निर्वाचन में अनुसूचित जनजाति (ST) की सभी विधानसभा सीटें आरक्षित रखने वाले जिले हैं—
    1. प्रतापगढ़
    2. डूंगरपुर
    3. बाँसवाड़ा
  • राजस्थान में सर्वाधिक 19 विधानसभा सीटें जयपुर जिले में हैं।
  • राजस्थान में न्यूनतम 2-2 विधानसभा सीटें जैसलमेर तथा प्रतापगढ़ जिलों में हैं।
  • राजस्थान में पहली बार अविश्वास प्रस्ताव 1952 में प्रथम विधानसभा के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल के विरुद्ध लाया गया था।
  • राजस्थान में अंतिम अविश्वास प्रस्ताव 1985 में मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी के विरुद्ध प्रस्तुत किया गया।
  • राजस्थान में अब तक 5 बार विश्वास प्रस्ताव लाया जा चुका है, किन्तु किसी भी अवसर पर सरकार नहीं गिरी।
  • विश्वास प्रस्ताव पहली बार 1990 में भैरोंसिंह शेखावत के कार्यकाल में तथा अंतिम बार 2020 में अशोक गहलोत के कार्यकाल में प्रस्तुत किया गया।
  • 16 जुलाई 2022 को राजस्थान विधानसभा में देश के पहले डिजिटल संग्रहालय का उद्घाटन तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना द्वारा किया गया।
  • इस डिजिटल संग्रहालय का नाम राजनीतिक आख्यान संग्रहालय (पॉलिटिकल नैरेटिव म्यूजियम) रखा गया।
  • राजस्थान विधानसभा का वर्तमान भवन 2001 में लालकोठी (जयपुर) में बनकर तैयार हुआ, जिसका उद्घाटन नवंबर 2001 में तत्कालीन राष्ट्रपति के. आर. नारायणन ने किया।
  • इस भवन के निर्माण में जोधपुर, बंसी पहाड़पुर (भरतपुर) तथा करौली के पत्थरों का उपयोग किया गया है।
  • राजस्थान विधानसभा का पुराना भवन सवाई मानसिंह टाउन हॉल (जयपुर) में स्थित था।

❖ राजस्थान की विधानसभाएँ

❖ पहली विधानसभा (1952–1957)
  • गठन 23 फरवरी 1952 को हुआ।
  • कुल 160 विधानसभा सीटें थीं।

चुनाव परिणाम इस प्रकार रहे—

राजनीतिक दल लड़ी गई सीटें / प्राप्त सीटें
कांग्रेस 153 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिनमें से 82 सीटें जीतीं
रामराज्य परिषद 24 सीटें
भारतीय जनसंघ 8 सीटें
कृषिक लोकपार्टी 7 सीटें
  • 29 मार्च 1952 को सवाई मानसिंह टाउन हॉल (जयपुर) में पहली बैठक आयोजित की गई।
    • राजस्थान के प्रथम प्रोटेम स्पीकरमहाराणा संग्राम सिंह
    • प्रथम विधानसभा अध्यक्षनरोत्तम लाल जोशी
    • प्रथम विधानसभा उपाध्यक्षलालसिंह शक्तावत
    • प्रथम नेता प्रतिपक्षजसवंत सिंह
    • प्रथम मुख्य सचेतकमथुरादास माथुर (जोधपुर)
  • इसी विधानसभा के दौरान राजस्थान की पहली महिला विधायक श्रीमती यशोदा देवी (बाँसवाड़ा) तथा पहली महिला मंत्री कमला बेनीवाल बनीं।
  • 1 नवम्बर 1956 को अजमेर-मेरवाड़ा की 30 सदस्यीय विधानसभा का राजस्थान विधानसभा में विलय कर दिया गया, जिससे कुल सदस्य संख्या बढ़कर 190 हो गई।
❖ दूसरी विधानसभा (1957–1962)
  • कुल विधानसभा सीटें 176 थीं।
  • विधानसभा अध्यक्षरामनिवास मिर्धा
  • इस विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद रिक्त रहा।
  • इस कार्यकाल में कुल 306 बैठकें आयोजित हुईं, जो राजस्थान विधानसभा के इतिहास में सर्वाधिक हैं।
❖ तीसरी विधानसभा (1962–1967)
  • विधानसभा अध्यक्षरामनिवास मिर्धा
  • नेता प्रतिपक्षलक्ष्मण सिंह
❖ चौथी विधानसभा (1967–1972)
  • कुल विधानसभा सीटें 184 थीं।
  • चुनाव परिणाम में कांग्रेस को 89, स्वतंत्र पार्टी को 48 तथा भारतीय जनसंघ को 22 सीटें प्राप्त हुईं।
  • राजस्थान में पहली बार राष्ट्रपति शासन लागू किया गया।
  • इसी विधानसभा के दौरान पहली बार राज्यमंत्री तथा संसदीय सचिव के पद की व्यवस्था की गई।
    • विधानसभा अध्यक्षनिरंजन नाथ आचार्य
    • नेता प्रतिपक्षलक्ष्मण सिंह
❖ पाँचवीं विधानसभा (1972–1977)
  • कुल विधानसभा सीटें 184 थीं।
  • कांग्रेस ने 145 सीटों पर विजय प्राप्त की।
  • इस कार्यकाल में दूसरी बार राष्ट्रपति शासन लागू किया गया।
    • विधानसभा अध्यक्षरामकिशोर व्यास
    • नेता प्रतिपक्षलक्ष्मण सिंह
❖ छठी विधानसभा (1977–1980)
  • इस विधानसभा में सदस्य संख्या 184 से बढ़ाकर 200 कर दी गई।
  • चुनाव में जनता पार्टी को 152 तथा कांग्रेस को 41 सीटें प्राप्त हुईं।
  • राजस्थान में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार का गठन हुआ।

विधानसभा अध्यक्ष

    • महारावल लक्ष्मणसिंह
    • गोपालसिंह आहोर

नेता प्रतिपक्ष

    • परसराम मदेरणा
    • राम नारायण चौधरी
    • लक्ष्मण सिंह
  • पहली बार विधानसभा अपना 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा किए बिना ही भंग हुई।
  • इस अवधि में तीसरी बार राष्ट्रपति शासन लागू किया गया।
❖ सातवीं विधानसभा (1980–1985)
  • चुनाव में कांग्रेस को 133 तथा भारतीय जनता पार्टी को 32 सीटें प्राप्त हुईं।
  • राजस्थान में पहली बार मध्यावधि चुनाव आयोजित हुए।
  • यह विधानसभा मध्यावधि चुनाव के परिणामस्वरूप गठित हुई थी।
    • विधानसभा अध्यक्षपूनमचंद विश्नोई
    • नेता प्रतिपक्षभैरोंसिंह शेखावत
❖ आठवीं विधानसभा (1985–1990)

विधानसभा अध्यक्ष

  • हीरालाल देवपुरा
  • गिरिराज प्रसाद

नेता प्रतिपक्ष

  • भैरोंसिंह शेखावत
  • केदारनाथ शर्मा
❖ नवीं विधानसभा (1990–1992)
  • चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को सर्वाधिक 85 सीटें प्राप्त हुईं तथा उसने जनता दल यूनाइटेड के 55 सदस्यों के समर्थन से सरकार बनाई।
  • भैरोंसिंह शेखावत दूसरी बार मुख्यमंत्री बने।
    • विधानसभा अध्यक्षहरिशंकर भाभड़ा
    • नेता प्रतिपक्षहरिदेव जोशी
  • इस विधानसभा में केवल 95 बैठकें आयोजित हुईं, जो सबसे कम हैं।
  • राममंदिर (अयोध्या) आंदोलन के दौरान जनता दल यूनाइटेड द्वारा समर्थन वापस लेने के कारण विधानसभा निर्धारित अवधि से पहले भंग हो गई।
  • इस कार्यकाल में चौथी बार राष्ट्रपति शासन लागू किया गया।
  • राजस्थान में दूसरी बार मध्यावधि चुनाव कराए गए।

नोटराजस्थान विधानसभा अब तक केवल दो बार समय से पहले भंग हुई है—

  • छठी विधानसभा
  • नवीं विधानसभा
❖ दसवीं विधानसभा (1993–1998)

विधानसभा अध्यक्ष

  1. हरिशंकर भाभड़ा
  2. शांतिलाल चपलोत
  3. समरथ लाल मीणा

नेता प्रतिपक्षपरसराम मदेरणा

❖ ग्यारहवीं विधानसभा (1998–2003)
  • विधानसभा अध्यक्षपरसराम मदेरणा
  • नेता प्रतिपक्ष
    1. भैरोंसिंह शेखावत
    2. गुलाबचंद कटारिया
❖ बारहवीं विधानसभा (2003–2008)
  • राजस्थान की प्रथम महिला विधानसभा अध्यक्षश्रीमती सुमित्रा सिंह
  • राजस्थान की प्रथम महिला राज्यपालश्रीमती प्रतिभा पाटिल
  • राजस्थान की प्रथम महिला मुख्यमंत्रीवसुंधरा राजे

नेता प्रतिपक्ष

  1. बी. डी. कल्ला
  2. राम नारायण चौधरी
  3. हेमाराम चौधरी
❖ तेरहवीं विधानसभा (2008–2013)
  • विधानसभा अध्यक्षदीपेन्द्र सिंह शेखावत

नेता प्रतिपक्ष

    1. श्रीमती वसुंधरा राजे
    2. गुलाबचंद कटारिया
  • प्रोटेम स्पीकरदेवी सिंह भाटी
❖ चौदहवीं विधानसभा (2013–2018)
  • विधानसभा अध्यक्षकैलाश मेघवाल
  • नेता प्रतिपक्षरामेश्वर लाल डूडी
  • प्रोटेम स्पीकरप्रभुमन सिंह
❖ पन्द्रहवीं विधानसभा (2018–2023)
  • विधानसभा अध्यक्षसी. पी. जोशी

नेता प्रतिपक्ष

    1. गुलाबचंद कटारिया
    2. राजेन्द्र राठौड़
  • प्रोटेम स्पीकरगुलाबचंद कटारिया
❖ सोलहवीं विधानसभा (2023–लगातार)
  • विधानसभा अध्यक्षवासुदेव देवनानी
  • नेता प्रतिपक्षटीकाराम जूली

➤ मतदान प्रतिशत

विवरण प्रतिशत
कुल मतदान 74.45%
पुरुष मतदान 74.53%
महिला मतदान 74.72%
  • सर्वाधिक मतदान वाला विधानसभा क्षेत्रकुशलगढ़ (88.13%), पोकरण
  • न्यूनतम मतदान वाले विधानसभा क्षेत्रआहोर एवं सुमेरपुर

➤ महिला प्रतिनिधित्व

विवरण संख्या
महिला विधायक 20 (10%)
SC महिला विधायक 7
ST महिला विधायक 2

➤ 16वीं विधानसभा की दलीय स्थिति

राजनीतिक दल सीटें
भारतीय जनता पार्टी 119
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 66
भारतीय आदिवासी पार्टी 4
बहुजन समाज पार्टी 2
राष्ट्रीय लोक दल 1
निर्दलीय 8
❖ महत्वपूर्ण तथ्य
  • राजस्थान की प्रथम महिला विधानसभा उपाध्यक्षतारा भण्डारी
  • राजस्थान में सबसे लंबे कार्यकाल तक विधानसभा अध्यक्ष रहने का रिकॉर्ड रामनिवास मिर्धा के नाम है, जिन्होंने 1957 से 1967 तक यह पद संभाला।
  • राजस्थान में सबसे कम अवधि तक विधानसभा अध्यक्ष रहने वाले व्यक्ति समरथ लाल मीणा थे, जिनका कार्यकाल लगभग 5 माह रहा।
  • पूनमचन्द विश्नोई ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने राजस्थान विधानसभा में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा प्रोटेम स्पीकर—तीनों पदों का दायित्व निभाया।
  • महारावल लक्ष्मण सिंह ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने राजस्थान विधानसभा में अध्यक्ष, प्रोटेम स्पीकर तथा नेता प्रतिपक्ष—तीनों पदों पर कार्य किया।
  • राजस्थान विधानसभा के प्रथम गैर-कांग्रेसी विधानसभा अध्यक्षलक्ष्मण सिंह

राजस्थान विधानसभा की प्रक्रिया एवं नियम

  • राजस्थान विधानसभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियम का निर्माण 1956 में किया गया।
  • इन नियमों में कुल 25 अध्याय शामिल हैं।

❖ अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष का निर्वाचन

➤ अध्यक्ष का निर्वाचन

  • विधानसभा अध्यक्ष के निर्वाचन की तिथि राज्यपाल द्वारा निर्धारित की जाती है।
  • निर्धारित तिथि की सूचना विधानसभा सचिव द्वारा प्रत्येक सदस्य को दी जाती है।

➤ उपाध्यक्ष का निर्वाचन

  • विधानसभा उपाध्यक्ष के निर्वाचन की तिथि विधानसभा अध्यक्ष निर्धारित करता है।
  • इसकी सूचना भी विधानसभा सचिव द्वारा सभी सदस्यों को प्रदान की जाती है।

➤ सभापति तालिका

  • विधानसभा अध्यक्ष समय-समय पर सदन के सदस्यों में से अधिकतम 4 सदस्यों की सभापति तालिका मनोनीत करता है।
  • अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष दोनों की अनुपस्थिति में इसी तालिका में शामिल कोई एक सदस्य सदन की अध्यक्षता करता है।
❖ सामान्य बैठकें
  • राजस्थान विधानसभा की सामान्य बैठक का समय प्रातः 11:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक निर्धारित है।
❖ प्रश्नकाल
  • प्रातः 11:00 बजे से 12:00 बजे तक का प्रथम घंटा प्रश्नकाल कहलाता है।
  • इस अवधि में सदस्य राज्य सरकार से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछते हैं।
प्रश्नों के प्रकार
  1. तारांकित प्रश्न
  2. अतारांकित प्रश्न
  3. अल्प सूचना प्रश्न
(1) तारांकित प्रश्न
  • सामान्यतः प्रत्येक बैठक का पहला घंटा अल्प सूचना प्रश्नों सहित तारांकित प्रश्नों के पूछने एवं उनके उत्तर देने के लिए निर्धारित रहता है, जब तक कि अध्यक्ष अन्यथा निर्देश न दें।
  • इन प्रश्नों का उत्तर मौखिक रूप से दिया जाता है।
  • इनके संबंध में पूरक प्रश्न पूछने की अनुमति होती है।
  • प्रतिदिन कम-से-कम 12 तारांकित प्रश्नों पर विचार किया जाता है।
  • किसी एक सदस्य के अधिकतम 2 तारांकित प्रश्न ही एक दिन में मौखिक उत्तर के लिए सूचीबद्ध किए जा सकते हैं।
(2) अतारांकित प्रश्न
  • इन प्रश्नों का उत्तर संबंधित सदस्य को लिखित रूप में दिया जाता है।
  • इन पर सदन में कोई चर्चा नहीं होती।
  • सार्वजनिक महत्व के विषय में जानकारी प्राप्त करने के लिए अन्तःसत्र अवधि के दौरान कोई सदस्य एक सप्ताह में अधिकतम एक अतारांकित प्रश्न की सूचना दे सकता है।
(3) अल्प सूचना प्रश्न
  • ऐसे प्रश्न, जिनका उत्तर 14 दिनों से कम अवधि के भीतर मौखिक रूप में दिया जाता है, अल्प सूचना प्रश्न कहलाते हैं।
❖ शून्यकाल
  • दोपहर 12:00 बजे से 1:00 बजे तक का समय शून्यकाल कहलाता है।
  • इस अवधि में सदस्य बिना पूर्व सूचना के भी प्रश्न उठा सकते हैं।

❖ आधे घंटे की चर्चा –

  • विधानसभा अध्यक्ष सदन की बैठक के अंतिम आधे घंटे में लोक महत्व के ऐसे विषय पर चर्चा की अनुमति दे सकता है, जो किसी प्रश्न से संबंधित हो तथा जिस पर अतिरिक्त स्पष्टीकरण आवश्यक हो।
  • यदि कोई सदस्य आधे घंटे की चर्चा के लिए विषय उठाना चाहता है, तो उसे 3 दिन पूर्व विधानसभा सचिव को लिखित सूचना देनी होगी।
  • इस सूचना का समर्थन कम-से-कम 2 अन्य सदस्यों के हस्ताक्षरों द्वारा किया जाना आवश्यक है।

❖ विधानमण्डल में विभिन्न प्रकार के प्रस्ताव

(1) अविश्वास प्रस्ताव
  • अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किया जाता है।
  • इस प्रस्ताव को प्रस्तुत करने की अनुमति प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद तथा दिन की कार्यसूची प्रारंभ होने से पहले प्राप्त करनी होती है।
  • प्रस्ताव प्रस्तुत करने वाला सदस्य उसी दिन बैठक प्रारंभ होने से पहले विधानसभा सचिव को इसकी लिखित सूचना देता है।
  • राजस्थान विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कुल सदस्य संख्या के एक-पाँचवें (1/5) अर्थात कम-से-कम 40 सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं।
  • अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संबंधित सरकार पद पर नहीं बनी रहती और उसे इस्तीफा देना पड़ता है।
  • यदि अविश्वास प्रस्ताव अस्वीकृत हो जाए, तो उसे पुनः 6 माह तक प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
  • सर्वाधिक 6 बार अविश्वास प्रस्ताव मोहनलाल सुखाड़िया की सरकार के विरुद्ध प्रस्तुत किया गया।

नोटराजस्थान विधानसभा में अब तक 13 बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है, किन्तु एक भी प्रस्ताव पारित नहीं हुआ।

(2) विश्वास प्रस्ताव
  • विश्वास प्रस्ताव सत्ता पक्ष द्वारा सदन में अपना बहुमत सिद्ध करने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया जाता है।
  • यह प्रस्ताव विधानसभा में लाया जाता है। यदि यह पारित नहीं होता, तो सरकार को पद छोड़ना पड़ता है।
  • राजस्थान विधानसभा में अब तक 5 बार विश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है, किन्तु किसी भी अवसर पर सरकार नहीं गिरी।
  • इनमें से 3 बार भैरोंसिंह शेखावत तथा 2 बार अशोक गहलोत द्वारा विश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया।
  • पहली बार 1990 में भैरोंसिंह शेखावत ने तथा अंतिम बार अगस्त 2020 में अशोक गहलोत ने विश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
  • कार्यवाही के दौरान विश्वास प्रस्ताव को अविश्वास प्रस्ताव पर पूर्ववर्तिता (प्राथमिकता) प्राप्त होती है।
(3) स्थगन प्रस्ताव
  • किसी गंभीर एवं तात्कालिक लोकमहत्व के विषय पर सदन का ध्यान आकर्षित करने और उस पर चर्चा कराने के उद्देश्य से प्रस्तुत प्रस्ताव को स्थगन प्रस्ताव कहा जाता है।
  • इसकी सूचना उसी दिन बैठक प्रारम्भ होने से पूर्व अध्यक्ष, सचिव तथा संबंधित मंत्री को दी जाती है।
  • स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए विधानसभा के कुल सदस्यों के कम-से-कम एक-दशमांश (1/10) सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं।
  • इस प्रस्ताव को प्रस्तुत करने के लिए अध्यक्ष की स्वीकृति अनिवार्य होती है।
  • एक बैठक में एक से अधिक स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
  • यह प्रस्ताव केवल हाल ही में घटित किसी विशिष्ट घटना तक ही सीमित रहेगा।
  • स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से विशेषाधिकार का प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।
(4) ध्यानाकर्षण प्रस्ताव
  • यदि कोई विधानसभा सदस्य किसी मंत्री का ध्यान सार्वजनिक हित के किसी विषय की ओर आकर्षित करना चाहता है, तो उसे इसकी लिखित सूचना प्रमुख सचिव को देनी होती है।
(5) कटौती प्रस्ताव
  • कटौती प्रस्ताव विपक्ष द्वारा सरकार अथवा उसके किसी विभाग की अनुदान मांगों में प्रस्तावित राशि को कम करने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया जाता है।

➤ कटौती प्रस्ताव के प्रकार

प्रकार विवरण
नीतिगत कटौती अनुदान की मांग को घटाकर 1 रुपया कर दिया जाता है।
सांकेतिक कटौती अनुदान की मांग में 100 रुपये की कमी की जाती है।
अर्थगत (मितव्ययता) कटौती मांग में उल्लिखित राशि को कम किया जाता है। इसे मितव्ययता कटौती भी कहा जाता है।

➤ कटौती प्रस्ताव की ग्राह्यता की शर्तें

  • यह केवल एक ही अनुदान मांग से संबंधित होना चाहिए।
  • इसके माध्यम से विशेषाधिकार का प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।
  • इसमें किसी वर्तमान कानून में संशोधन अथवा उसे निरस्त करने का सुझाव नहीं होना चाहिए।
  • इसमें ऐसे विषय का उल्लेख नहीं होना चाहिए, जो राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से संबंधित न हो।
  • यह राज्य की संचित निधि पर भारित व्यय से संबंधित नहीं होना चाहिए।
  • कटौती प्रस्ताव की ग्राह्यता का अंतिम निर्णय अध्यक्ष द्वारा किया जाता है।
(6) धन्यवाद प्रस्ताव
  • आम चुनाव के बाद गठित नई सरकार तथा प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र (बजट सत्र) के आरंभ में राज्यपाल विधानमण्डल को संबोधित करता है।
  • अपने अभिभाषण में राज्यपाल सरकार की नीतियों एवं कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है।
  • राज्यपाल के अभिभाषण के उपरांत उनके प्रति आभार व्यक्त करने के लिए धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाता है।

नोटराजस्थान विधानसभा में अध्यक्ष अथवा पीठासीन अधिकारी की अनुमति के बिना किसी भी प्रस्ताव पर भाषण की अधिकतम अवधि 15 मिनट निर्धारित है।

(7) विशेषाधिकार प्रस्ताव
  • विशेषाधिकार प्रस्ताव उस स्थिति में प्रस्तुत किया जाता है, जब किसी सदस्य को यह प्रतीत हो कि किसी मंत्री ने सही तथ्यों को प्रस्तुत नहीं किया है अथवा सदन को गलत जानकारी देकर उसके विशेषाधिकारों का उल्लंघन किया है।
(8) निन्दा प्रस्ताव
  • निन्दा प्रस्ताव विपक्ष द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किया जाता है।
  • इसके पारित होने पर सरकार की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, किन्तु सरकार को पद छोड़ना नहीं पड़ता।

❖ विधेयकों का प्रमाणीकरण

  • किसी विधेयक के सदन से पारित होने के बाद उसकी दो प्रतियों पर विधानसभा अध्यक्ष हस्ताक्षर करता है।
  • इसके पश्चात विधेयक राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा जाता है।
  • यदि किसी अविलंबनीय (तात्कालिक) मामले में अध्यक्ष अनुपस्थित हो, तो सचिव अध्यक्ष की ओर से विधेयक का प्रमाणीकरण कर सकता है।

❖ राज्यपाल द्वारा विधेयक लौटाए जाने की स्थिति

  • यदि राज्यपाल किसी पारित विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस भेजता है, तो उसे विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सदन के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।

❖ सदस्य के स्थान (सीट) का त्यागपत्र

  • कोई सदस्य अपना त्यागपत्र अध्यक्ष को संबोधित लिखित पत्र के माध्यम से तथा अपने हस्ताक्षर सहित प्रस्तुत करता है।
  • यदि सदस्य स्वयं अध्यक्ष के समक्ष उपस्थित होकर त्यागपत्र सौंपता है तथा यह स्पष्ट करता है कि त्यागपत्र स्वैच्छिक एवं वास्तविक है, और अध्यक्ष के पास इसके विपरीत कोई जानकारी नहीं है, तो वह तत्काल त्यागपत्र स्वीकार कर सकता है।
  • यदि त्यागपत्र डाक अथवा किसी अन्य माध्यम से प्राप्त होता है, तो अध्यक्ष अपनी संतुष्टि के लिए आवश्यक जाँच करा सकता है कि त्यागपत्र स्वैच्छिक एवं वास्तविक है।
  • अध्यक्ष द्वारा त्यागपत्र स्वीकार किए जाने से पूर्व संबंधित सदस्य उसे वापस लेने का अधिकार रखता है।
  • त्यागपत्र स्वीकार होने के बाद अध्यक्ष इसकी सूचना सदन को देता है।
❖ समितियाँ
  • राजस्थान विधानसभा के कार्यों के सुचारु संचालन एवं सहायता के लिए कुल 22 समितियों की व्यवस्था की गई है।

इनका वर्गीकरण निम्न प्रकार से है—

समिति का प्रकार संख्या
वित्तीय समितियाँ 4
स्थायी समितियाँ 17
अस्थायी समिति 1
❖ वित्तीय समितियाँ
  • राजस्थान विधानसभा में कुल 4 वित्तीय समितियाँ कार्यरत हैं।
  • प्रत्येक समिति में 15 सदस्य होते हैं।
  • इन समितियों के अध्यक्ष का चयन विधानसभा अध्यक्ष द्वारा किया जाता है।
  • प्रत्येक समिति अपनी वार्षिक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) विधानसभा अध्यक्ष को प्रस्तुत करती है।

(1) लोक लेखा समिति / जन लेखा समिति

  • गठन10 अप्रैल 1952
  • कार्यकाल1 वर्ष
  • अध्यक्षविपक्ष का सदस्य

यह समिति राज्य सरकार के वित्तीय व्यय की जाँच, नियंत्रण एवं निगरानी का कार्य करती है।

(2) प्राक्कलन समिति ‘क’

  • कार्यकाल1 वर्ष
  • इस समिति को 17 विभागों के कार्यों एवं व्यय का परीक्षण करने का दायित्व सौंपा गया है।

इसके अंतर्गत प्रमुख विभाग हैं—

  • उद्योग एवं खनन
  • सार्वजनिक निर्माण विभाग
  • वित्त
  • शिक्षा
  • विधि एवं न्याय
  • आबकारी एवं कर
  • वन
  • ऊर्जा आदि।

(3) प्राक्कलन समिति ‘ख’

  • इस समिति को 16 विभागों के कार्यों एवं व्यय के परीक्षण का दायित्व सौंपा गया है।

इसके अंतर्गत प्रमुख विभाग हैं—

  • गृह
  • राजस्व
  • सहकारिता
  • पशुपालन
  • सिंचाई
  • खाद एवं नागरिक आपूर्ति
  • जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी आदि।

(4) राजकीय उपक्रम समिति

  • गठनअप्रैल 1968
❖ जाँच समितियाँ

राजस्थान विधानसभा में निम्नलिखित 4 जाँच समितियाँ कार्य करती हैं—

(1) प्रश्न एवं संदर्भ समिति
  • इस समिति के सदस्यों की नियुक्ति विधानसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है।
  • अध्यक्ष सहित इसमें कुल 15 सदस्य होते हैं।
  • यदि किसी तारांकित प्रश्न, अतारांकित प्रश्न अथवा अल्प सूचना प्रश्न का उत्तर उपलब्ध समय के अभाव में नहीं दिया जा सके अथवा अध्यक्ष उत्तर को संतोषजनक न माने, तो वह संबंधित विषय को प्रश्न एवं संदर्भ समिति को भेज देता है।
  • समिति संबंधित मामले की जाँच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती है।
(2) याचिका समिति
  • इस समिति के सदस्यों की नियुक्ति विधानसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है।
  • इसमें अधिकतम 15 सदस्य हो सकते हैं।
  • इसका मुख्य कार्य उन याचिकाओं की जाँच करना है, जो आम जनता द्वारा विधानसभा सदस्यों के माध्यम से समाधान हेतु प्रस्तुत की जाती हैं।
(3) विशेषाधिकार समिति
  • इस समिति के सदस्यों की नियुक्ति विधानसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है।
  • इसमें अधिकतम 15 सदस्य हो सकते हैं।
  • यह समिति विधानसभा सदस्यों के विशेषाधिकार हनन से संबंधित मामलों की जाँच करती है।
(4) सदाचार / आचरण समिति
  • इस समिति में अधिकतम 9 सदस्य हो सकते हैं।
  • इसके सदस्यों की नियुक्ति विधानसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है।
  • इसका उद्देश्य विधानसभा के सदस्यों में अनुशासन, गरिमा एवं मर्यादा बनाए रखना है।
  • यह समिति विधानसभा में सदस्यों के दुर्व्यवहार से संबंधित मामलों की जाँच करती है।
❖ अन्य समितियाँ
➤ कार्य सलाहकार / कार्य मंत्रणा समिति
  • इस समिति में अधिकतम 15 सदस्य होते हैं।
  • समिति के सदस्यों का मनोनयन विधानसभा अध्यक्ष द्वारा किया जाता है।
  • विधानसभा अध्यक्ष इस समिति के पदेन सभापति (अध्यक्ष) होते हैं।
  • समिति का कार्यकाल 1 वर्ष होता है।
  • इसका मुख्य कार्य राज्यपाल के अभिभाषण में उल्लिखित विषयों पर चर्चा के लिए समय निर्धारित करना है।
➤ नियम समिति / नियम उप समिति
  • इस समिति का गठन विधानसभा अध्यक्ष द्वारा किया जाता है।
  • इसमें अध्यक्ष सहित 15 सदस्य होते हैं।
  • विधानसभा अध्यक्ष ही इसके सभापति (अध्यक्ष) होते हैं।
  • यह समिति सदन की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन से संबंधित विषयों पर विचार करती है तथा आवश्यक होने पर नियमों में परिवर्तन या संशोधन की सिफारिश करती है।
➤ सामान्य प्रयोजनों संबंधी समिति
  • विधानसभा अध्यक्ष इस समिति के पदेन सभापति होते हैं।
  • समिति के सदस्यों का मनोनयन विधानसभा अध्यक्ष द्वारा किया जाता है।
  • इस समिति में सदस्यों की संख्या पूर्व निर्धारित नहीं होती।
➤ अधीनस्थ विधान संबंधी समिति
  • इस समिति में अध्यक्ष सहित 15 सदस्य होते हैं।
  • इसे सदन के कर्तव्यों की रक्षक समिति भी कहा जाता है।
  • यह समिति संविधान अथवा ऐसे कानूनों के अंतर्गत बनाए गए सभी आदेशों की जाँच करती है, जिनमें अधीनस्थ प्राधिकारियों को नियम अथवा आदेश बनाने की शक्ति प्रदान की गई हो।
  • जिन विधेयकों में विधायी शक्तियों के प्रत्यायोजन (Delegation) का प्रावधान होता है, उनकी भी जाँच यह समिति कर सकती है।
  • विधानसभा अध्यक्ष विधायी शक्तियों के प्रत्यायोजन से संबंधित प्रावधान वाले विधेयकों को इस समिति के पास विचारार्थ भेजता है।
  • यह समिति प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियम के नियम 241 में वर्णित विषयों पर भी विचार करती है।

❖ महत्वपूर्ण तथ्य

नोटराजस्थान विधानसभा की किसी भी समिति में अध्यक्ष सहित अधिकतम 15 सदस्य हो सकते हैं, किन्तु सामान्य प्रयोजनों संबंधी समिति में सदस्यों की संख्या पूर्व निर्धारित नहीं होती।

  • सामान्यतः विधानसभा की सभी समितियों का कार्यकाल 1 वर्ष होता है।
  • महिला एवं बालकों के कल्याण संबंधी समिति (अधिकतम 15 सदस्य) का कार्यकाल 2 वर्ष निर्धारित है।
  • विधानसभा अध्यक्ष आवश्यकता होने पर किसी समिति का कार्यकाल अधिकतम 6 माह तक बढ़ा सकता है।

भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान में बिना पूर्ण बहुमत के दो बार सरकार बनाई—

  1. नवीं विधानसभा85 सीटें
  2. दसवीं विधानसभा95 सीटें

❖ राजस्थान विधानसभा समितियाँ एवं वर्तमान अध्यक्ष

समिति वर्तमान अध्यक्ष
जन लेखा समिति (लोक लेखा समिति) टीकाराम जूली
राजकीय उपक्रम समिति कालीचरण सराफ
प्राक्कलन समिति ‘क’ अर्जुनलाल जीनगर
प्राक्कलन समिति ‘ख’ बाबू सिंह राठौड़
विशेषाधिकार समिति नरेन्द्र बुडानिया
याचिका एवं सदाचार समिति कैलाशचंद वर्मा
प्रश्न एवं संदर्भ समिति संदीप शर्मा
स्थानीय निकायों एवं पंचायतीराज संस्थाओं संबंधी समिति हरिसिंह रावत
कार्य सलाहकार समिति वासुदेव देवनानी
नियम समिति वासुदेव देवनानी
अनुसूचित जाति कल्याण समिति विश्वनाथ मेघवाल
अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति फूलसिंह मीणा
पिछड़ा वर्ग कल्याण समिति केसाराम चौधरी
अल्पसंख्यकों के कल्याण संबंधी समिति डॉ. दयाराम परमार
महिला एवं बालकों के कल्याण संबंधी समिति कल्पना देवी
पर्यावरण समिति डॉ. दयाराम परमार
सामान्य प्रयोजनों संबंधी समिति वासुदेव देवनानी

संसद में राजस्थान

  • वर्तमान में राजस्थान से लोकसभा के लिए कुल 25 सदस्य निर्वाचित होते हैं।
  • इनमें 4 सीटें अनुसूचित जाति (SC) तथा 3 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं।
  • राज्यसभा में राजस्थान का प्रतिनिधित्व 10 सदस्यों द्वारा किया जाता है।
  • इस प्रकार संसद के दोनों सदनों (लोकसभा + राज्यसभा) में राजस्थान के कुल 35 सदस्य (25 + 10) हैं।
  • 1952 के प्रथम लोकसभा चुनाव के समय राजस्थान में 22 लोकसभा सीटें थीं।
  • छठे लोकसभा चुनाव (1977) में राजस्थान की लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 25 कर दी गई।
  • 1952 के राज्यसभा चुनाव के समय राजस्थान को 9 सीटें आवंटित थीं।
  • 1960 में राज्यसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 10 कर दी गई।
❖ महत्वपूर्ण बिंदु
  • राजस्थान से प्रथम महिला लोकसभा सांसदमहारानी गायत्री देवी
  • राजस्थान से अनुसूचित जाति (SC) की प्रथम महिला लोकसभा सांसदसुशीला बांगरू
  • राजस्थान से अनुसूचित जनजाति (ST) की प्रथम महिला लोकसभा सांसदउषा देवी मीणा
  • राजस्थान से केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल होने वाली प्रथम महिला सांसदडॉ. गिरिजा व्यास
  • राजस्थान से सर्वाधिक 5 बार लोकसभा सांसद निर्वाचित होने वाली महिला — वसुंधरा राजे

राजस्थान से सर्वाधिक 4-4 बार राज्यसभा सदस्य चुने जाने वाले व्यक्ति—

    • रामनिवास मिर्धा
    • जसवंत सिंह
  • राजस्थान से प्रथम महिला राज्यसभा सांसदशारदा भार्गव
  • राजस्थान से सर्वाधिक बार राज्यसभा सांसद बनने वाली महिला — शारदा भार्गव
  • राजस्थान से सर्वाधिक बार लोकसभा सांसद निर्वाचित होने वाले व्यक्ति — नाथूराम मिर्धा

18वीं लोकसभा में राजस्थान से निर्वाचित महिला सांसद

क्रमांक सांसद लोकसभा क्षेत्र
1 श्रीमती मंजू शर्मा जयपुर
2 श्रीमती संजना जाटव भरतपुर
3 श्रीमती महिमा कुमारी राजसमंद
  • राजस्थान से प्रथम लोकसभा सांसद, जो लोकसभा अध्यक्ष बने — बलराम जाखड़ (सीकर)
  • राजस्थान से दूसरे लोकसभा सांसद, जो लोकसभा अध्यक्ष बने — ओम बिड़ला (कोटा–बूंदी)

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