राजस्थान में ऊर्जा संसाधन

राजस्थान में ऊर्जा संसाधन

राजस्थान के आर्थिक विकास, औद्योगिक विस्तार और कृषि क्षेत्र की प्रगति में ऊर्जा संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राज्य में ऊर्जा उत्पादन, प्रसारण तथा वितरण की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए समय-समय पर विभिन्न संस्थाओं और परियोजनाओं की स्थापना की गई है।

राजस्थान राज्य विद्युत मंडल

राजस्थान राज्य विद्युत मंडल की स्थापना 01 जुलाई 1957 को की गई थी। बाद में विद्युत क्षेत्र में बेहतर प्रबंधन और कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से राजस्थान राज्य विद्युत मंडल का विभाजन कर 19 जुलाई 2000 को पाँच नई कंपनियों का गठन किया गया।

इनमें से तीन निगमों का मुख्यालय जयपुर में स्थित है।

निगम/कंपनी मुख्यालय प्रमुख कार्य
राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड जयपुर राज्य सरकार की सभी विद्युत उत्पादन परियोजनाओं पर नियंत्रण तथा विद्युत उत्पादन
राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड जयपुर विद्युत प्रसारण लाइनों एवं सब-स्टेशनों का निर्माण और संचालन
जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड जयपुर विद्युत वितरण कार्य
अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड अजमेर विद्युत वितरण कार्य
जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड जोधपुर विद्युत वितरण कार्य

राज्य की 11वीं एवं 12वीं पंचवर्षीय योजना में सर्वोच्च प्राथमिकता ऊर्जा (Power) क्षेत्र को दी गई थी।

ऊर्जा के मुख्य स्रोत

ऊर्जा के स्रोतों को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जाता है।

1. परम्परागत स्रोत / अनवीकरणीय स्रोत

ये ऐसे स्रोत होते हैं जिनका एक बार उपयोग करने के बाद पुनः उपयोग नहीं किया जा सकता तथा उनसे दोबारा ऊर्जा प्राप्त नहीं की जा सकती।

इनमें प्रमुख हैं—

  • जल विद्युत
  • तापीय विद्युत (कोयला, प्राकृतिक गैस, तेल)
  • आणविक (परमाणु) ऊर्जा

2. गैर परम्परागत स्रोत / नवीकरणीय स्रोत

ये ऐसे स्रोत होते हैं जिनका उपयोग बार-बार किया जा सकता है तथा उनसे पुनः ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।

इनमें प्रमुख हैं—

  • जल विद्युत
  • सौर ऊर्जा
  • पवन ऊर्जा
  • ज्वारीय ऊर्जा
  • बायोगैस
  • बायोमास
  • भूतापीय ऊर्जा

नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में सबसे बड़ा योगदान सौर ऊर्जा का है तथा सौर ऊर्जा उत्पादन में राजस्थान का देश में प्रथम स्थान है।

➻ प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत

  • सौर ऊर्जा: सूर्य के प्रकाश से प्राप्त होने वाली ऊर्जा को सौर ऊर्जा कहा जाता है।
  • पवन ऊर्जा: तेज गति से चलने वाली हवाओं से उत्पन्न ऊर्जा को पवन ऊर्जा कहा जाता है।
  • बायोगैस ऊर्जा: पशुओं के मल-मूत्र के वायु रहित अवस्था में अपघटन के दौरान जीवाणुओं की क्रिया से प्राप्त ज्वलनशील गैस को बायोगैस कहा जाता है। इसमें सर्वाधिक मात्रा मिथेन गैस की होती है।
  • बायोमास ऊर्जा: कचरा, धान की भूसी तथा सरसों की भूसी से प्राप्त ऊर्जा को बायोमास ऊर्जा कहा जाता है।
  • ज्वारीय तरंग ऊर्जा: समुद्री तरंगों तथा ज्वार-भाटे से उत्पन्न ऊर्जा को ज्वारीय तरंग ऊर्जा कहा जाता है।
  • भू-तापीय ऊर्जा: भू-गर्भीय पदार्थों की ऊष्मा से उत्पन्न ऊर्जा को भू-तापीय ऊर्जा कहा जाता है। राजस्थान में इसकी सर्वाधिक संभावना माउंट आबू क्षेत्र में पाई जाती है। ग्रामीण राजस्थान में ऊर्जा संकट की समस्या को दूर करने में बायोगैस तथा सौर ऊर्जा सबसे अधिक सहायक स्रोत माने जाते हैं।

➻ राजस्थान की विद्युत उत्पादन क्षमता

  • मार्च 2024 तक राज्य में विद्युत ऊर्जा की अधिष्ठापित (उत्पादन) क्षमता 24783.64 मेगावाट थी, जो बढ़कर दिसंबर 2024 तक 26325.19 मेगावाट हो गई।
  • वर्तमान में राज्य के कुल ऊर्जा उत्पादन में क्रमशः तापीय ऊर्जा (62%), पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा तथा बायोमास ऊर्जा का योगदान है।

ऊर्जा संरक्षण दिवस — 14 दिसंबर

राजस्थान की ताप विद्युत परियोजनाएँ

राजस्थान में सर्वाधिक मात्रा में लिग्नाइट किस्म का कोयला पाया जाता है। राज्य में उपलब्ध लिग्नाइट में सबसे उत्तम गुणवत्ता का लिग्नाइट पलाना (बीकानेर) से प्राप्त होता है।

➻ सुपर थर्मल पावर प्लांट

ऐसे ताप विद्युत संयंत्र जिनकी कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 1000 मेगावाट या उससे अधिक होती है, उन्हें सुपर थर्मल पावर प्लांट कहा जाता है। राजस्थान में कुल 6 सुपर थर्मल पावर प्लांट स्थापित हैं।

पावर प्लांट स्थान स्थापना वर्ष विशेष तथ्य
सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर स्टेशन गंगानगर 1998 राजस्थान का पहला सुपर थर्मल पावर स्टेशन
कोटा ताप विद्युत परियोजना कोटा 2004 राजस्थान का कोयला आधारित प्रथम ताप विद्युत संयंत्र
कवई ताप विद्युत परियोजना बारां 2013
भादरेस ताप विद्युत परियोजना बाड़मेर 2013
छबड़ा ताप विद्युत परियोजना बारां 2014 दूसरा सर्वाधिक उत्पादन क्षमता वाला पावर प्लांट
कालीसिंध ताप विद्युत परियोजना झालावाड़ 2015

(1) सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर स्टेशन

सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर स्टेशन की स्थापना 1998 में की गई थी। यह राजस्थान का पहला सुपर थर्मल पावर स्टेशन है तथा इसे राजस्थान का आधुनिक विकास तीर्थ भी कहा जाता है। इस परियोजना में लिग्नाइट कोयले का उपयोग किया जाता है। यहाँ कुल 6 इकाइयाँ कार्यरत हैं। इसकी पहली इकाई ने अपना वाणिज्यिक संचालन 1 फरवरी 1999 से प्रारंभ किया था। इसकी कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 2820 मेगावाट है और यह राजस्थान का सर्वाधिक विद्युत उत्पादन करने वाला पावर प्लांट है।

(2) कोटा ताप विद्युत परियोजना

कोटा परियोजना राजस्थान का कोयला आधारित प्रथम ताप विद्युत संयंत्र है। यह बिटुमिन कोयले पर आधारित राजस्थान की एकमात्र परियोजना है।

➻ सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट

  • जिन ताप विद्युत संयंत्रों की कुल उत्पादन क्षमता 500 मेगावाट या उससे अधिक होती है, उन्हें सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट कहा जाता है।

राजस्थान में कुल 4 सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट हैं।

परियोजना स्थान वर्ष विशेष तथ्य
कवई सुपर क्रिटिकल ताप विद्युत गृह बारां 2013 राजस्थान का पहला सुपर तापीय विद्युत गृह
कालीसिंध ताप विद्युत परियोजना झालावाड़ 2014
छबड़ा ताप विद्युत परियोजना बारां 2017
सूरतगढ़ ताप विद्युत परियोजना गंगानगर 2020
  • कवई सुपर क्रिटिकल ताप विद्युत गृह: यह राजस्थान का पहला सुपर तापीय विद्युत गृह है। इसकी स्थापना निजी क्षेत्र में अदानी समूह द्वारा की गई थी।

➻ लिग्नाइट आधारित ताप विद्युत परियोजनाएँ

  • गिरल लिग्नाइट थर्मल पावर प्रोजेक्ट – यह परियोजना थुम्बली गाँव (शिव, बाड़मेर) में स्थित है। यह राजस्थान का पहला लिग्नाइट गैसीकरण तकनीक आधारित प्रोजेक्ट है, जिसमें लिग्नाइट को भूमि के भीतर ही गैस में परिवर्तित कर विद्युत उत्पादन किया जाता है।
  • बरसिंहसर थर्मल पावर परियोजना – यह परियोजना बरसिंहसर (बीकानेर) में स्थित है।
  • बीठनोक थर्मल पावर परियोजना – यह परियोजना बीठनोक (बीकानेर) में स्थित है।
  • गुढ़ा थर्मल पावर प्रोजेक्ट – यह परियोजना बीकानेर में स्थित है तथा इसकी स्थापना वी. एस. लिग्नाइट कम्पनी द्वारा की गई है।

प्राकृतिक गैस एवं तरल ईंधन आधारित विद्युत परियोजनाएँ

राजस्थान में प्राकृतिक गैस तथा तरल ईंधन पर आधारित अनेक विद्युत परियोजनाएँ स्थापित की गई हैं।

परियोजना स्थान विशेष तथ्य
अन्ता गैस विद्युत परियोजना बारां राजस्थान की प्रथम गैस विद्युत परियोजना
रामगढ़ गैस परियोजना जैसलमेर राजस्थान की द्वितीय गैस आधारित विद्युत परियोजना
धौलपुर गैस आधारित कम्बाइंड साइकिल पावर प्लांट धौलपुर गैस आधारित ताप विद्युत संयंत्र
केशोरायपाटन गैस विद्युत परियोजना बूंदी निजी क्षेत्र का प्रथम गैस आधारित पावर प्लांट
झामरकोटड़ा गैस परियोजना उदयपुर
  1. अन्ता गैस विद्युत परियोजना – अन्ता गैस विद्युत परियोजना राजस्थान की प्रथम गैस विद्युत परियोजना है। यह राजस्थान में स्थापित केन्द्र सरकार की प्रथम गैस विद्युत परियोजना भी है।
  2. रामगढ़ गैस परियोजना – रामगढ़ गैस परियोजना राजस्थान की द्वितीय गैस आधारित विद्युत परियोजना है। यहाँ आवश्यक गैस का उत्पादन ONGC द्वारा तनोट, डांडेवाला एवं मनिहारी टिब्बा क्षेत्रों से किया जाता है।
  3. धौलपुर गैस आधारित कम्बाइंड साइकिल पावर प्लांट – धौलपुर में स्थापित यह एक गैस आधारित ताप विद्युत संयंत्र है। इसका संचालन राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड द्वारा किया जाता है।
  4. केशोरायपाटन गैस विद्युत परियोजना – यह राजस्थान के निजी क्षेत्र का प्रथम गैस आधारित पावर प्लांट है।

➻ राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड द्वारा संचालित विद्युत केन्द्र

  • राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड द्वारा निम्न प्रमुख विद्युत केन्द्रों का संचालन किया जाता है—
    1. गिरल थर्मल पावर स्टेशन — थुम्बली गाँव (बाड़मेर)
    2. धौलपुर गैस कम्बाइंड परियोजना — धौलपुर
    3. छबड़ा संयंत्र — बारां

आणविक विद्युत परियोजनाएँ

राजस्थान देश के उन प्रमुख राज्यों में शामिल है जहाँ परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकास हुआ है। राज्य में स्थापित परमाणु विद्युत परियोजनाएँ न केवल राजस्थान बल्कि देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

(1) राजस्थान परमाणु शक्ति गृह –

  • राजस्थान परमाणु शक्ति गृह रावतभाटा (चित्तौड़गढ़) में स्थित है। यह परियोजना राणा प्रताप सागर बाँध के किनारे स्थापित की गई है तथा इसका संचालन नाभिकीय ऊर्जा निगम द्वारा किया जाता है।
  • इस परमाणु विद्युत गृह की स्थापना 1965 में कनाडा के सहयोग से की गई थी तथा यहाँ से विद्युत उत्पादन 16 दिसंबर 1973 को प्रारम्भ हुआ।
  • यह राजस्थान का प्रथम तथा देश का द्वितीय परमाणु विद्युत गृह है। देश का पहला परमाणु विद्युत गृह तारापुर (महाराष्ट्र) में स्थापित किया गया था।
  • राजस्थान परमाणु शक्ति गृह एक नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र है तथा यह दाबित भारी पानी (Pressurized Heavy Water) किस्म के रिएक्टरों की श्रृंखला में देश का पहला बिजलीघर माना जाता है।

(2) माही बाँसवाड़ा परमाणु बिजलीघर – 

  • माही बाँसवाड़ा परमाणु बिजलीघर राजस्थान के बाँसवाड़ा जिले में स्थित है। यह राजस्थान का दूसरा परमाणु बिजलीघर है।

राजस्थान के गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोत

राजस्थान में गैर परम्परागत एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा विभिन्न संस्थाओं की स्थापना की गई है।

  • राजस्थान ऊर्जा विकास अभिकरण (REDA) – गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोतों के विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जनवरी 1985 में जयपुर में राजस्थान ऊर्जा विकास अभिकरण (REDA) की स्थापना की गई।
  • राजस्थान स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (RSPCL) – 1995 में राजस्थान स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (RSPCL) की स्थापना की गई थी। बाद में 2002 में इसका विलय राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम में कर दिया गया।
  • राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड (RRECL) – राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड (RRECL – Rajasthan Renewable Energy Corporation Limited) की स्थापना 9 अगस्त 2002 को RSPCL एवं REDA के विलय के बाद जयपुर में की गई। यह संस्था गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोतों से ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा संरक्षण, ऊर्जा विकास तथा संबंधित उपकरणों को बढ़ावा देने का कार्य करती है। साथ ही यह संस्था भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर रही है।

राजस्थान में सौर ऊर्जा

नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में राजस्थान देश का अग्रणी राज्य है और सौर ऊर्जा उत्पादन में राज्य का देश में प्रथम स्थान है।

राजस्थान में सौर ऊर्जा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित हैं—

उपलब्धि स्थान
पहला गाँव जहाँ सौर ऊर्जा का प्रयोग किया गया नोख (फलौदी)
प्रथम सौर ऊर्जा चालित फ्रिज बालेसर (जोधपुर)
प्रथम सौर ऊर्जा विद्युतीकृत गाँव नयागाँव (जयपुर)
राजस्थान का पहला सौर ऊर्जा संयंत्र मथानियां (जोधपुर)
प्रथम 100 किलोवाट का सौर ऊर्जा संयंत्र गौरीर गाँव (झुंझुनूं)
राजस्थान का प्रथम सौर बिजलीघर खींवसर (नागौर)

प्रमुख सौर ऊर्जा परियोजनाएँ

राजस्थान में अनेक बड़े सौर ऊर्जा परियोजनाएँ स्थापित की गई हैं, जिन्होंने राज्य को सौर ऊर्जा उत्पादन का प्रमुख केन्द्र बनाया है।

परियोजना स्थान विशेष तथ्य
खींवसर सौर ऊर्जा परियोजना खींवसर (नागौर) 2010 में स्थापित
मथानियां सौर ऊर्जा परियोजना मथानियां (जोधपुर)
मोकला सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट जैसलमेर
धूनिया सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट जोधपुर
आगोरिया सोलर पावर प्रोजेक्ट बाड़मेर

➻ खींवसर सौर ऊर्जा परियोजना – खींवसर सौर ऊर्जा परियोजना की स्थापना 2010 में की गई थी। इसे रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा स्थापित किया गया तथा यह निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना मानी जाती है।

राजस्थान के सोलर पार्क

➻ भड़ला सोलर पार्क

  • भड़ला सोलर पार्क बाप (फलौदी) में स्थित है। यह राजस्थान का पहला तथा भारत का सबसे बड़ा सोलर पार्क है।
  • 2245 मेगावाट क्षमता वाले इस सोलर पार्क का विकास चार चरणों (फेज) में किया गया है।
फेज स्थापना/विकास
भड़ला सोलर पार्क फेज-1 राजस्थान सोलर पार्क डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा स्थापित
भड़ला सोलर पार्क फेज-2 राजस्थान सोलर पार्क डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा स्थापित
भड़ला सोलर पार्क फेज-3 आईएल एण्ड एफएस एनर्जी डेवलपमेंट कम्पनी लिमिटेड एवं राज्य सरकार की संयुक्त उपक्रम कम्पनी सौर्य ऊर्जा कम्पनी ऑफ राजस्थान लिमिटेड द्वारा स्थापित
भड़ला सोलर पार्क फेज-4 मैसर्स अडानी रिन्यूएबल एनर्जी पार्क राजस्थान लिमिटेड द्वारा स्थापित
  • फलौदी-पोकरण सोलर पार्क – फलौदी-पोकरण सोलर पार्क की स्थापना मैसर्स एसेल सौर्य ऊर्जा कम्पनी ऑफ राजस्थान लिमिटेड द्वारा की गई है। इसकी कुल स्थापित क्षमता 700 मेगावाट है।
  • धीरूभाई अंबानी सौर पार्क – यह सौर पार्क धूड़सर (जैसलमेर) में स्थित है।
  • फतेहगढ़ फेज-1B – यह परियोजना जैसलमेर में स्थित है तथा इसकी कुल क्षमता 1500 मेगावाट है। इसकी स्थापना अडानी रिन्यूएबल एनर्जी कम्पनी द्वारा की गई है।
  • नोख सोलर पार्क – नोख सोलर पार्क फलौदी में स्थित है। इसकी कुल स्थापित क्षमता 925 मेगावाट है तथा इसे राजस्थान सोलर पार्क डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा स्थापित किया गया है।
  • पूगल सोलर पार्क –  पूगल सोलर पार्क बीकानेर में स्थित है तथा इसकी कुल स्थापित क्षमता 2450 मेगावाट है। इसका विकास राजस्थान सोलर पार्क डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा किया जा रहा है। इस परियोजना के विकास हेतु अक्टूबर 2022 में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड एवं कोल इंडिया लिमिटेड के मध्य एक सहमति पत्र (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए।

सौर ऊर्जा की नीतियाँ

राजस्थान ने सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है। राज्य सरकार ने समय-समय पर विभिन्न नीतियों के माध्यम से सौर ऊर्जा क्षेत्र को प्रोत्साहित किया है।

नीति जारी करने की तिथि
प्रथम सौर ऊर्जा नीति 19 अप्रैल 2011
दूसरी सौर ऊर्जा नीति 8 अक्टूबर 2014
नवीन सौर ऊर्जा नीति 18 दिसंबर 2019

➻ अक्षय ऊर्जा नीति 2023

  • राजस्थान सरकार द्वारा 6 अक्टूबर 2023 को अक्षय ऊर्जा नीति 2023 जारी की गई।

इस नीति के अंतर्गत राज्य ने 2029-30 तक 90 गीगावाट अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें—

  • 65 गीगावाट सौर ऊर्जा से,
  • 15 गीगावाट पवन एवं पवन-सौर हाइब्रिड ऊर्जा से,
  • तथा 10 गीगावाट जल विद्युत, पम्प स्टोरेज और बैटरी ऊर्जा भंडारण से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।

सौर ऊर्जा से संबंधित योजनाएँ एवं कार्यक्रम

➻ सोलर सिटी कार्यक्रम

  • सोलर सिटी कार्यक्रम की शुरुआत फरवरी 2008 में की गई थी।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत राजस्थान के निम्न शहरों को सोलर सिटी घोषित किया गया है—

  • जयपुर
  • जोधपुर
  • अजमेर

राजस्थान में पवन ऊर्जा

सौर ऊर्जा के साथ-साथ राजस्थान पवन ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। राज्य सरकार ने पवन ऊर्जा विकास के लिए विभिन्न नीतियाँ लागू की हैं।

नीति जारी करने की तिथि
राजस्थान पवन ऊर्जा नीति 18 जुलाई 2012
नवीन राजस्थान पवन एवं हाइब्रिड ऊर्जा नीति 18 दिसंबर 2019

➻ प्रमुख पवन ऊर्जा परियोजनाएँ

  • राजस्थान का प्रथम पवन ऊर्जा संयंत्र – राजस्थान का पहला पवन ऊर्जा संयंत्र अमरसागर (जैसलमेर) में स्थापित किया गया था। इसकी स्थापना 21 अक्टूबर 1999 को हुई थी।

अन्य प्रमुख पवन ऊर्जा परियोजनाएँ

परियोजना स्थान
दूसरी पवन ऊर्जा परियोजना देवगढ़ (प्रतापगढ़)
तीसरी पवन ऊर्जा परियोजना बिठड़ी (फलौदी)
निजी क्षेत्र की पहली पवन ऊर्जा परियोजना बड़ा बाग (जैसलमेर)
RSMML का सबसे बड़ा पवन ऊर्जा संयंत्र मोकला (जैसलमेर)
RREC का प्रथम पवन ऊर्जा संयंत्र सोडा बंधन (जैसलमेर)
प्रमुख पवन ऊर्जा क्षेत्र आकल (जैसलमेर)

➻ हाइब्रिड विंड-सोलर पावर प्लांट

  • जैसलमेर में स्थापित हाइब्रिड विंड-सोलर पावर प्लांट भारत का पहला हाइब्रिड सोलर पावर प्लांट माना जाता है।
  • इस परियोजना से मई 2022 में विद्युत उत्पादन प्रारम्भ हुआ।
  • यह परियोजना अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) की सहायक कंपनी अडानी हाइब्रिड एनर्जी जैसलमेर वन लिमिटेड द्वारा स्थापित की गई है तथा इसकी कुल उत्पादन क्षमता 390 मेगावाट है।

➻ विंड एनर्जी फार्म परियोजना के प्रमुख क्षेत्र

विंड एनर्जी फार्म परियोजना के अंतर्गत राजस्थान में पवन ऊर्जा विकास के लिए निम्न प्रमुख स्थान चिन्हित किए गए हैं—

  • मोहनगढ़ (जैसलमेर)
  • देवगढ़ (प्रतापगढ़)
  • फलौदी
  • हर्षनाथ (सीकर)
  • खाडोल (बाड़मेर)
  • जसवंतगढ़ (उदयपुर)
  • धमोतर (प्रतापगढ़)

बायोमास ऊर्जा

बायोमास ऊर्जा वन, सूखी लकड़ियों, कृषि तथा उद्योग आधारित अपशिष्ट पदार्थों से प्राप्त की जाती है।

बायोमास ऊर्जा के प्रमुख स्रोत हैं—

  • सरसों
  • चावल की भूसी
  • विलायती बबूल
  • कोयला
  • गोबर गैस

➻ बायोमास नीति

  • राजस्थान सरकार द्वारा फरवरी 2010 में बायोमास नीति जारी की गई थी।
  • इसके बाद राज्य सरकार ने 29 सितंबर 2023 को बायोमास एवं वेस्ट टू एनर्जी नीति 2023 जारी की।

➻ गोबर से संपीड़ित बायोगैस परियोजना – HPCL द्वारा गोबर धन योजना के अंतर्गत अगस्त 2022 में पथमेडा गाँव (सांचौर, जालौर) में गोबर से संपीड़ित बायोगैस परियोजना का शिलान्यास किया गया।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • सोलर एनर्जी एंटरप्राइजेज जोन (SEEZ) – सौर ऊर्जा की अपार संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए जैसलमेर, बाड़मेर एवं जोधपुर जिलों को सोलर एनर्जी एंटरप्राइजेज जोन (SEEZ) घोषित किया गया है।
  • राजस्थान ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2023 – राजस्थान सरकार द्वारा 29 सितंबर 2023 को राजस्थान ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2023 जारी की गई। इस नीति के अंतर्गत 2030 तक 2000 किलो टन प्रतिवर्ष ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

प्रमुख योजनाएँ

➻ कुटीर ज्योति योजना (1988-89)

  • इस योजना के अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले SC, ST एवं OBC परिवारों को निःशुल्क विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराए गए।

➻ उदय योजना

  • विद्युत वितरण कंपनियों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार द्वारा 2015 में उदय योजना प्रारम्भ की गई।

➻ प्रधानमंत्री कुसुम योजना

  • भारत सरकार द्वारा किसानों के लिए सोलर पम्प तथा ग्रिड से जुड़े सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने हेतु “किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महा अभियान (कुसुम)” योजना को स्वीकृति प्रदान की गई।
  • इस योजना के संचालन हेतु नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विभिन्न घटकों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

➻ कुसुम घटक-A

    • भालोजी (कोटपूतली-बहरोड़) में राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम द्वारा प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत देश के पहले कृषि आधारित सौर ऊर्जा संयंत्र का शुभारम्भ किया गया। मार्च 2024 तक यहाँ 145 मेगावाट क्षमता के संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।

➻ कुसुम घटक-B

इस घटक के अंतर्गत किसानों को ऑफ-ग्रिड सोलर पम्प सेट उपलब्ध कराने के लिए 25,000 सोलर पम्प सेट लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस योजना में कुल 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है, जिसमें—

    • 30 प्रतिशत केन्द्र सरकार द्वारा,
    • तथा 30 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है।

➻ कुसुम घटक-C

    • इस घटक के अंतर्गत 7.5 HP तक की क्षमता वाले कृषि पम्प सेटों को सौर ऊर्जाकृत करने के लिए 4 लाख पम्प सेटों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

➻ मुख्यमंत्री निःशुल्क बिजली योजना (घरेलू अनुदान)

  • इस योजना के अंतर्गत 150 यूनिट तक मासिक विद्युत उपभोग करने वाले सभी घरेलू उपभोक्ताओं को निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराई जाती है।

➻ पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना

  • 13 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री द्वारा इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक माह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 1 करोड़ घरों पर सौर संयंत्र स्थापित करने की घोषणा की गई। राजस्थान ने इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ऊर्जा विभाग में PMU (Project Monitoring Unit) का गठन किया है तथा राज्य में 5 लाख घरों में सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। रूफटॉप संयंत्र स्थापित करने के लिए 40 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान किया गया है।

आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए—

  • पंजीकरण,
  • आवेदन स्वीकृति,
  • तथा अनुदान वितरण

की शत-प्रतिशत ऑनलाइन व्यवस्था की गई है। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक जिले में आदर्श सौर ग्राम विकसित किए जाने का प्रस्ताव है।

प्रमुख संस्थान

ऊर्जा, अनुसंधान एवं तकनीकी विकास से संबंधित राजस्थान के प्रमुख संस्थान निम्नलिखित हैं—

संस्थान स्थान
विकास अध्ययन संस्थान जयपुर
इंस्टिट्यूट ऑफ लीडरशिप डेवलपमेंट जयपुर
केन्द्रीय इलेक्ट्रोनिकी अभियांत्रिकी शोध संस्थान पिलानी (झुंझुनूं)
रक्षा अनुसंधान प्रयोगशाला जोधपुर
राज्य सुदूर संवेदन अनुप्रयोग केन्द्र जोधपुर
भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (Indian Institute of Handloom Technology) जोधपुर (1993)

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