राजस्थान में पर्यटन
राजस्थान को अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, भव्य दुर्गों, महलों, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक विविधता के कारण सैलानियों का स्वर्ग कहा जाता है। पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है और इसी कारण पर्यटन उद्योग को निर्धूम उद्योग (धुआँ रहित उद्योग) भी कहा जाता है। विश्व स्तर पर विश्व पर्यटन दिवस प्रत्येक वर्ष 27 सितम्बर को मनाया जाता है, जबकि भारत में भारतीय पर्यटन दिवस 25 जनवरी को मनाया जाता है। वर्ष 2017 को अन्तराष्ट्रीय पर्यटन वर्ष के रूप में मनाया गया था।
राजस्थान में पर्यटन गतिविधियों को संगठित रूप देने के लिए वर्ष 1956 में पर्यटन विभाग की स्थापना की गई। बाद में 30 जनवरी 2019 से राजस्थान पर्यटन विभाग की टैगलाइन (लोगो) “पधारो म्हारे देश” निर्धारित की गई राजस्थान ने पर्यटन क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। राज्य में पर्यटन को 4 मार्च 1989 को मोहम्मद यूनुस समिति की सिफारिश पर उद्योग का दर्जा दिया गया। इसके साथ ही राजस्थान देश का ऐसा प्रथम राज्य बना जिसने पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान किया। इसके बाद 18 मई 2022 को राज्य सरकार ने पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के विकास के उद्देश्य से इन्हें पूर्ण उद्योग का दर्जा प्रदान किया।
राजस्थान में विदेशी पर्यटकों की संख्या वर्ष के विभिन्न महीनों में अलग-अलग रहती है। राज्य में सर्वाधिक विदेशी पर्यटक नवंबर माह में आते हैं, जबकि सबसे कम विदेशी पर्यटक जून माह में आते हैं। विदेशी पर्यटकों की दृष्टि से जयपुर, उदयपुर और जोधपुर प्रमुख शहर हैं, जबकि देशी पर्यटकों की संख्या सीकर और जयपुर में सबसे अधिक रहती है।
राजस्थान के पर्यटन परिपथ (Tourism Circuits)
राजस्थान को पर्यटन की दृष्टि से मुख्य रूप से 10 पर्यटन सर्किटों में विभाजित किया गया है।
| पर्यटन सर्किट | शामिल जिले / प्रमुख स्थान |
|---|---|
| मरु सर्किट (डेजर्ट ट्रायंगल) | जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर तथा बाद में शामिल बाड़मेर |
| शेखावाटी सर्किट | चूरू, सीकर, झुंझुनूं |
| ढूंढाड़ सर्किट | जयपुर, दौसा |
| हाड़ौती सर्किट | कोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़ |
| मेरवाड़ा सर्किट | अजमेर, नागौर |
| मेवाड़ सर्किट | उदयपुर, चितौड़गढ़, राजसमंद |
| रणथम्भौर सर्किट | सवाईमाधोपुर, टोंक |
| मेवात (ब्रज) सर्किट | अलवर, भरतपुर, सवाईमाधोपुर |
| वागड़ सर्किट | डूंगरपुर, बाँसवाड़ा |
| गोडवाड़ सर्किट | जालौर, पाली, सिरोही |
1. मरु सर्किट (डेजर्ट ट्रायंगल)
- इस सर्किट में थार रेगिस्तान के जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर तथा बाड़मेर जिले शामिल हैं। इसे मरु त्रिकोण या रेगिस्तानी त्रिकोण भी कहा जाता है।
2. शेखावाटी सर्किट
- इसमें चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिले शामिल हैं।
3. ढूंढाड़ सर्किट
- इस सर्किट में जयपुर और दौसा जिले शामिल हैं।
4. हाड़ौती सर्किट
- इसमें कोटा, बूँदी, बारां और झालावाड़ जिले आते हैं।
5. मेरवाड़ा सर्किट
- इस सर्किट में अजमेर और नागौर जिले शामिल हैं।
- प्रमुख पर्यटन स्थल: ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर, मेडता तथा किशनगढ़।
6. मेवाड़ सर्किट
- इसमें उदयपुर, चितौड़गढ़ और राजसमंद जिले शामिल हैं।
7. रणथम्भौर सर्किट
- इस सर्किट में सवाईमाधोपुर और टोंक जिले शामिल हैं।
8. मेवात (ब्रज) सर्किट
- इसमें अलवर, भरतपुर और सवाईमाधोपुर जिले शामिल हैं।
- प्रमुख पर्यटन स्थल: सिलीसेढ़, सरिस्का, भानगढ़, भर्तृहरि, पाण्डुपोल तथा तिजारा।
9. वागड़ सर्किट
- इसमें डूंगरपुर और बाँसवाड़ा जिले शामिल हैं।
- प्रमुख पर्यटन स्थल: घोटिया अम्बा, मानगढ़ धाम, सोमनाथ मंदिर, बेणेश्वर तथा गलियाकोट।
10. गोडवाड़ सर्किट
- इस सर्किट में जालौर, पाली और सिरोही जिले शामिल हैं।
- प्रमुख पर्यटन स्थल: माउन्ट आबू, रणकपुर तथा दिलवाड़ा।
राजस्थान में पर्यटन विकास के नए सर्किट
➻ स्वर्णिम त्रिकोण (Golden Triangle):- इस पर्यटन परिपथ में दिल्ली, जयपुर और आगरा शामिल हैं। यह देश का सबसे लोकप्रिय पर्यटन मार्ग माना जाता है तथा इसमें सर्वाधिक पर्यटक आते हैं। इस स्वर्णिम त्रिकोण में राजस्थान का प्रतिनिधित्व जयपुर करता है।
➻ बृजभूमि रिलिजन सर्किट:- राजस्थान और उत्तरप्रदेश की सीमा पर पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा इस सर्किट का विकास किया जा रहा है।
➻ बुद्धा सर्किट:- चीन, जापान और श्रीलंका जैसे बौद्ध देशों के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए राजस्थान के जयपुर और झालावाड़ जिलों को विकसित किया जा रहा है।
➻ तीर्थ सर्किट:- इसमें अजमेर, पुष्कर, नाथद्वारा और कांकरोली शामिल हैं।
➻ कृष्णा सर्किट:- इस सर्किट के अंतर्गत राजस्थान, हरियाणा, उड़ीसा और गुजरात के 12 कृष्ण मंदिरों को जोड़ने के प्रस्ताव को फरवरी 2016 में मंजूरी दी गई।
राजस्थान से इसमें निम्न मंदिरों को शामिल किया गया है—
- श्रीनाथ जी मंदिर
- गोविन्द देव जी मंदिर (जयपुर)
- कनक वृन्दावन
- चरण मंदिर (जयपुर)
- गलता जी (जयपुर)
- खाटूश्यामजी (सीकर)
➻ राष्ट्रीय राजधानी सर्किट:- इसमें अलवर, बैराठ, भरतपुर, धौलपुर तथा स्वर्णिम त्रिकोण का मार्ग शामिल किया गया है।
➻ ईको टूरिज्म सर्किट (नेचर टूरिस्ट सर्किट):- इस सर्किट में सरिस्का, झालाना, कुम्भलगढ़ और माउन्ट आबू को शामिल किया गया है।
पर्यटन विकास की प्रमुख संस्थाएँ
| संस्था | स्थापना |
|---|---|
| राजस्थान पर्यटन विकास निगम लिमिटेड (RTDC) | 1 अप्रैल 1979, जयपुर |
| राजस्थान राज्य होटल निगम लिमिटेड | 7 जून 1965 |
RTDC से संबंधित प्रमुख प्रतिष्ठान—
- ढोला मारू RTDC होटल — बीकानेर
- ढोला मारू टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स — जैसलमेर
पर्यटन विकास की प्रमुख योजनाएँ
➻ हेरिटेज होटल योजना
- यह योजना वर्ष 1991 में प्रारम्भ की गई। जिन भवनों का स्थापत्य 1950 से पुराना होता है, उन्हें हेरिटेज प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है।
- देश का पहला हेरिटेज होटल अजीत भवन (जोधपुर) है।
➻ प्रसाद योजना (PRASHAD)
- PRASHAD – Pilgrimage Rejuvenation and Spiritual Heritage Augmentation Drive
- भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा वर्ष 2014-15 में देश के 12 शहरों में इस योजना की शुरुआत की गई। इस योजना के अंतर्गत धार्मिक और आध्यात्मिक शहरों का विकास किया जा रहा है।
- राजस्थान से अजमेर और पुष्कर को इसमें शामिल किया गया है।
- इसके अतिरिक्त फरवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने धार्मिक स्थल मालासेरी डूंगरी (आसींद, भीलवाड़ा) को भी इस योजना में शामिल किया।
➻ स्वदेश दर्शन योजना
- भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा वर्ष 2014-15 में पर्यटन स्थलों के विकास के लिए यह योजना प्रारम्भ की गई।
राजस्थान में इसके अंतर्गत निम्न पर्यटन परिपथ विकसित किए गए हैं—
1. मरु (डेजर्ट) परिपथ
- इसमें सांभर झील तथा अन्य स्थानों के विकास को शामिल किया गया है।
2. कृष्णा परिपथ
इसमें निम्न धार्मिक स्थलों को शामिल किया गया है—
- गोविन्द देव जी मंदिर (जयपुर)
- खाटू श्याम जी मंदिर
- नाथद्वारा मंदिर
3. विरासत (हेरिटेज) परिपथ
इस परिपथ में निम्न स्थल शामिल किए गए हैं—
- कुंभलगढ़ किला
- नाहरगढ़
- जयगढ़ किला
- गागरोन
- चितौड़गढ़
- जैसलमेर
- गोगामेड़ी
- बाग ए निलोफर
- पुरानी छावनी (धौलपुर)
- मीरा बाई स्मारक (मेडता)
- सुनहरी कोठी (टोंक)
4. आध्यात्मिक परिपथ
इसमें निम्न धार्मिक स्थलों को शामिल किया गया है—
- सालासर बालाजी (चूरू)
- सामोद बालाजी (जयपुर)
- घाटे के बालाजी
- बंधे के बालाजी (जयपुर)
- बीजक
- अंबिका मंदिर (विराटनगर – कोटपूतली बहरोड़)
- सांवलिया जी (चितौड़गढ़)
➻ स्वदेश दर्शन 2.0
- स्वदेश दर्शन योजना को अब नया नाम स्वदेश दर्शन 2.0 दिया गया है।
इसके अंतर्गत निम्न स्थलों को शामिल किया गया है—
- केशोराय मंदिर
- बूँदी आर्ट सेंटर (बूँदी)
- उम्मेद उद्यान
- मारवाड़ आर्ट कल्चर सेंटर (जोधपुर)
- सांवलिया सेठ मंदिर (चितौड़गढ़)
- करणीमाता मंदिर (देशनोक-बीकानेर)
➻ वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना
- यह योजना वर्ष 2013 से देवस्थान विभाग द्वारा संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत राज्य सरकार वरिष्ठ नागरिकों को 70 वर्ष तक धार्मिक स्थलों की यात्रा निःशुल्क करवा रही है।
- वर्ष 2016 से देवस्थान विभाग द्वारा वरिष्ठ नागरिकों को हवाई जहाज के माध्यम से भी तीर्थयात्रा करवाई जाने लगी है।
- बजट में 6 हजार वरिष्ठजन को हवाई मार्ग से तथा 50 हजार वरिष्ठजनों को AC Train से तीर्थ यात्रा कराने की घोषणा की गई है।
राजस्थान की पर्यटन नीतियाँ
- राजस्थान सरकार ने पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने तथा निवेश और रोजगार के अवसरों में वृद्धि के उद्देश्य से समय-समय पर विभिन्न पर्यटन नीतियाँ लागू की हैं।
- राज्य की प्रथम पर्यटन नीति 27 सितम्बर 2001 को लागू की गई थी, जबकि नवीनतम राजस्थान पर्यटन नीति 9 सितम्बर 2020 को जारी की गई।
पर्यटन नीतियों से संबंधित प्रमुख जानकारी:-
| नीति | लागू होने की तिथि |
|---|---|
| राजस्थान की प्रथम पर्यटन नीति | 27 सितम्बर 2001 |
| नवीनतम राजस्थान पर्यटन नीति | 9 सितम्बर 2020 |
| प्रथम ईको टूरिज्म पॉलिसी (पारिस्थितिकी पर्यटन नीति) | 4 फरवरी 2010 |
| नवीनतम ईको टूरिज्म पॉलिसी | 15 जुलाई 2021 |
| राजस्थान ग्रामीण पर्यटन नीति | 24 नवम्बर 2022 |
| राजस्थान फिल्म पर्यटन प्रोत्साहन नीति | 18 अप्रैल 2022 |
| राजस्थान पर्यटन इकाई नीति (RTUP) | 4 दिसंबर 2024 |
➻ राजस्थान फिल्म पर्यटन प्रोत्साहन नीति
राजस्थान सरकार ने 18 अप्रैल 2022 को राजस्थान फिल्म पर्यटन प्रोत्साहन नीति लागू की। इस नीति के अंतर्गत फिल्म, टीवी सीरियल तथा वेब सीरीज के निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए लागत का 15 प्रतिशत अथवा 2 करोड़ रुपये, जो भी न्यूनतम हो, सब्सिडी प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।
➻ राजस्थान पर्यटन इकाई नीति (RTUP)
राजस्थान पर्यटन इकाई नीति (RTUP) को 4 दिसंबर 2024 को लागू किया गया। इस नीति का मुख्य उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र से जुड़े निवेशकों और उद्यमियों को अधिक लाभ प्रदान करना है।
राजस्थान में रोप वे
पहाड़ी क्षेत्रों में खम्भों पर लगी केबलों के सहारे चलने वाली ट्रॉलियों को रोप वे कहा जाता है। राजस्थान में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्थानों पर रोप वे स्थापित किए गए हैं।
| क्रम | रोप वे | स्थान | विशेष जानकारी |
|---|---|---|---|
| 1 | सुन्धा माता मंदिर रोप वे | भीनमाल, जालौर | वर्ष 2006 में प्रारम्भ, राजस्थान का सबसे लम्बा रोप वे (800 मीटर) |
| 2 | करणी माता मंदिर रोप वे | उदयपुर | — |
| 3 | सावित्री माता मंदिर रोप वे | पुष्कर, अजमेर | — |
| 4 | वीर हनुमान मंदिर रोप वे | सामोद, जयपुर | — |
| 5 | अन्नपूर्णा माता रोप वे | खोले के हनुमान मंदिर, जयपुर | देश का प्रथम स्वचालित रोप वे |
| 6 | नीमच माता मंदिर रोप वे | उदयपुर | — |
| 7 | जीणमाता मंदिर रोप वे | सीकर | — |
➻ प्रस्तावित नए रोप वे
राजस्थान में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के लिए पाँच नए रोप वे प्रस्तावित किए गए हैं—
- जोगी महल — सवाईमाधोपुर
- आमेर से नाहरगढ़ — जयपुर
- इंद्रगढ़ से बीजासन माता — बूँदी
- छतरंग मोटी से चितौड़गढ़ किला — चितौड़गढ़
- समाई माता मंदिर — बाँसवाड़ा
पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित प्रमुख महोत्सव
राजस्थान पर्यटन विभाग राज्य की सांस्कृतिक विरासत, लोक कला और पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से विभिन्न महोत्सवों का आयोजन करता है।
| महोत्सव | स्थान | आयोजन का समय |
|---|---|---|
| ऊँट महोत्सव | बीकानेर | जनवरी |
| पतंग महोत्सव | जयपुर | मकर संक्रान्ति (14 जनवरी) |
| सांभर फेस्टिवल | जयपुर | जनवरी |
| जयपुर लिटरेचर | जयपुर | जनवरी |
| जालौर महोत्सव | जालौर | फरवरी |
| माही महोत्सव | बाँसवाड़ा | फरवरी |
| बेणेश्वर महोत्सव | डूंगरपुर | फरवरी |
| मरु (डेजर्ट) महोत्सव | जैसलमेर | जनवरी, फरवरी |
| शेखावाटी महोत्सव | चूरू, सीकर, झुंझुनूं | फरवरी, मार्च |
| ब्रज होली महोत्सव | भरतपुर | मार्च |
| थार महोत्सव | बाड़मेर | फरवरी, मार्च |
| धुलंडी उत्सव | जयपुर | मार्च |
| बैलून महोत्सव | बाड़मेर | अप्रैल |
| ग्रीष्म महोत्सव | माउन्ट आबू | मई, जून |
| मैंगो फेस्टिवल | बाँसवाड़ा | जून |
| आभानेरी उत्सव | दौसा | सितम्बर, अक्टूबर |
| मारवाड़ महोत्सव | जोधपुर | अक्टूबर |
| मीरा महोत्सव | चितौड़गढ़ | आश्विन पूर्णिमा |
| मत्स्य महोत्सव | अलवर | अक्टूबर, नवम्बर |
| बूँदी महोत्सव | बूँदी | नवम्बर |
| कुंभलगढ़ महोत्सव | राजसमंद | दिसम्बर |
| रणकपुर महोत्सव | पाली | दिसम्बर |
| शरद महोत्सव | माउन्ट आबू | दिसम्बर |
| शिल्पग्राम महोत्सव | उदयपुर | दिसम्बर |
बजट 2025-26 से संबंधित महत्वपूर्ण घोषणा
- राज्य बजट 2025-26 में घोषणा की गई कि वर्ष 2027 में जयपुर की स्थापना के 300 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर गोविन्द देव जी कला महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।
