राजस्थान में परिवहन
राजस्थान में परिवहन व्यवस्था राज्य के आर्थिक, सामाजिक एवं औद्योगिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है। परिवहन के माध्यम से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों को आपस में जोड़ा जाता है तथा व्यापार, पर्यटन और आवागमन को गति मिलती है।
परिवहन मुख्यतः चार प्रकार का होता है—
- सड़क परिवहन
- रेल परिवहन
- वायु परिवहन
- जल परिवहन
सड़क परिवहन
राजस्थान में परिवहन का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम सड़क परिवहन है। राज्य के अधिकांश क्षेत्र सड़क नेटवर्क से जुड़े हुए हैं, जिससे यात्रियों और माल परिवहन दोनों को सुविधा मिलती है। विश्व में आधुनिक सड़क निर्माण का श्रेय स्कॉटलैंड के जॉन मकादम को दिया जाता है, जबकि भारत में सड़क निर्माण के क्षेत्र में शेरशाह सूरी का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। शेरशाह सूरी ने प्रसिद्ध ग्रैंड ट्रंक रोड का निर्माण करवाया था, जो बांग्लादेश के चटगाँव से प्रारम्भ होकर लाहौर होते हुए काबुल तक जाती है।
राजस्थान में सड़कों की स्थिति
आर्थिक समीक्षा 2024-25 के अनुसार राजस्थान में विभिन्न श्रेणियों की सड़कों की लंबाई निम्न प्रकार है—
| सड़क का प्रकार | लंबाई (किमी) |
|---|---|
| राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) | 10,790 |
| राज्य राजमार्ग (SH) | 17,376 |
| मुख्य जिला सड़कें (MDR) | 14,372 |
| अन्य जिला सड़कें | 68,265 |
| ग्रामीण सड़कें | 2,06,318 |
| कुल योग | 3,17,121 |
मार्च 2024 तक राजस्थान में सड़क घनत्व 92.66 किमी प्रति 100 वर्ग किमी दर्ज किया गया है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर सड़क घनत्व 165.24 किमी है।
राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway)
राष्ट्रीय राजमार्गों का संचालन केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है। इनके निर्माण एवं रखरखाव का कार्य भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा किया जाता है। NHAI की स्थापना वर्ष 1988 में की गई थी। सड़कों की विभिन्न श्रेणियों की पहचान उनके मील के पत्थरों के रंगों से भी की जाती है—
| सड़क का प्रकार | मील के पत्थरों का रंग |
|---|---|
| राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) | पीला |
| राज्य राजमार्ग (SH) | हरा |
| प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़कें | नारंगी |
| जिला सड़कें | काला |
वर्तमान में राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्गों की संख्या 52 है। राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई के आधार पर भारत में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान क्रमशः पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। इनमें राजस्थान का स्थान तीसरा है। वहीं राष्ट्रीय राजमार्गों की न्यूनतम लंबाई वाले राज्यों में गोवा और सिक्किम शामिल हैं।
राजस्थान के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग
NH 11 (पुरानी संख्या – 15)
यह राष्ट्रीय राजमार्ग म्याजलार (जैसलमेर) से प्रारम्भ होकर रेवाड़ी (हरियाणा) तक जाता है।
राजस्थान में यह राजमार्ग निम्न जिलों से होकर गुजरता है—
- जैसलमेर
- फलोदी
- बीकानेर
- चूरू
- सीकर
- झुंझुनूं
NH 21 (पुरानी संख्या – 11)
यह राष्ट्रीय राजमार्ग जयपुर से प्रारम्भ होकर आगरा होते हुए बरेली (उत्तर प्रदेश) तक जाता है।
राजस्थान में यह राष्ट्रीय राजमार्ग निम्न जिलों से होकर गुजरता है—
- जयपुर
- दौसा
- भरतपुर
NH 23 (पुरानी संख्या – 11A)
यह राष्ट्रीय राजमार्ग कौथून (जयपुर) से प्रारम्भ होकर धौलपुर तक जाता है।
राजस्थान में यह राष्ट्रीय राजमार्ग निम्न क्षेत्रों से होकर गुजरता है—
- जयपुर
- टोंक
- लालसोट (दौसा)
- सवाईमाधोपुर
- करौली
- धौलपुर
NH 25 (पुरानी संख्या – 12, 14)
यह राष्ट्रीय राजमार्ग मुनाबाव (बाड़मेर) से प्रारम्भ होकर ब्यावर तक जाता है।
राजस्थान में यह निम्न जिलों से होकर गुजरता है—
- बाड़मेर
- बालोतरा
- जोधपुर
- ब्यावर
NH 27 : पूर्वी-पश्चिमी कॉरिडोर (East-West Corridor)
NH 27 को पूर्वी-पश्चिमी कॉरिडोर अथवा पूर्वी-पश्चिमी गलियारा कहा जाता है। इसकी कुल लंबाई 4112 किमी है तथा यह देश का सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग पोरबंदर (गुजरात) से प्रारम्भ होकर सिल्चर (असम) तक जाता है।
यह भारत के निम्न सात राज्यों से होकर गुजरता है—
- गुजरात
- राजस्थान
- मध्यप्रदेश
- उत्तरप्रदेश
- बिहार
- पश्चिम बंगाल
- असम
राजस्थान में यह राष्ट्रीय राजमार्ग निम्न सात जिलों से होकर गुजरता है—
- आबूरोड (सिरोही)
- उदयपुर
- चित्तौड़गढ़
- भीलवाड़ा
- बूंदी
- कोटा
- बारां
NH 44 : उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर (North-South Corridor)
NH 44 को उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर अथवा उत्तर-दक्षिण गलियारा कहा जाता है। इसकी कुल लंबाई 3717 किमी है और यह देश का दूसरा सबसे बड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) से प्रारम्भ होकर कन्याकुमारी (तमिलनाडु) तक जाता है।
यह भारत के निम्न राज्यों एवं केंद्रशासित क्षेत्रों से होकर गुजरता है—
- जम्मू-कश्मीर
- हिमाचल प्रदेश
- पंजाब
- हरियाणा
- दिल्ली
- उत्तरप्रदेश
- राजस्थान
- मध्यप्रदेश
- महाराष्ट्र
- तेलंगाना
- आंध्रप्रदेश
- कर्नाटक
- तमिलनाडु
राजस्थान में यह राष्ट्रीय राजमार्ग केवल धौलपुर जिले से होकर गुजरता है तथा राज्य में इसकी लंबाई 27 किमी है।
NH 48 : स्वर्णिम चतुर्भुज योजना
NH 48 भारत की महत्वपूर्ण स्वर्णिम चतुर्भुज योजना (Golden Quadrilateral Project) का हिस्सा है। इस योजना का उद्देश्य देश के चार महानगरों दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई और कोलकाता को 4 से 6 लेन वाले राजमार्गों द्वारा जोड़ना है। इस परियोजना की कुल लंबाई 5846 किमी है।
स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के अंतर्गत प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग निम्न हैं—
| राष्ट्रीय राजमार्ग | मार्ग | लंबाई |
|---|---|---|
| NH 48 | दिल्ली से मुम्बई | 1419 किमी |
| NH 48 | मुम्बई से चेन्नई | 1290 किमी |
| NH 16 | चेन्नई से कोलकाता | 1684 किमी |
| NH 19 | कोलकाता से दिल्ली | 1453 किमी |
यह कॉरिडोर भारत के अनेक राज्यों से होकर गुजरता है, जिनमें प्रमुख हैं— दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान (जयपुर), गुजरात (अहमदाबाद), महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, झारखण्ड, बिहार तथा उत्तरप्रदेश।
राजस्थान में यह राष्ट्रीय राजमार्ग निम्न आठ जिलों से होकर गुजरता है—
- कोटपूतली-बहरोड़
- जयपुर
- अजमेर
- ब्यावर
- भीलवाड़ा
- चित्तौड़गढ़
- उदयपुर
- डूंगरपुर
NH 52 (पुरानी संख्या – 65, 11, 12)
यह राष्ट्रीय राजमार्ग संगरूर (पंजाब) से प्रारम्भ होकर अंकोला (कर्नाटक) तक जाता है।
राजस्थान में यह निम्न आठ जिलों से होकर गुजरता है—
- चूरू
- सीकर
- जयपुर
- टोंक
- भीलवाड़ा
- बूंदी
- कोटा
- झालावाड़
NH 58 (पुरानी संख्या – 8, 65, 89)
यह राष्ट्रीय राजमार्ग फतेहपुर (सीकर) से प्रारम्भ होकर पालनपुर (गुजरात) तक जाता है।
राजस्थान में यह निम्न आठ जिलों से होकर गुजरता है—
- सीकर
- चूरू
- डीडवाना-कुचामन
- नागौर
- अजमेर
- ब्यावर
- राजसमंद
- उदयपुर
इसी मार्ग से संबंधित NH 89 अजमेर को बीकानेर से जोड़ता है।
NH 62 (पुरानी संख्या – 15, 14, 89)
यह राष्ट्रीय राजमार्ग अबोहर (पंजाब) से प्रारम्भ होकर पिंडवाड़ा (सिरोही) तक जाता है।
राजस्थान में यह निम्न सात जिलों से होकर गुजरता है—
- गंगानगर
- हनुमानगढ़
- बीकानेर
- नागौर
- जोधपुर
- पाली
- सिरोही
NH 162
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग बर (ब्यावर) से प्रारम्भ होकर पाली तक जाता है।
NH 68 (पुरानी संख्या – 15)
यह राष्ट्रीय राजमार्ग तनोट (जैसलमेर) से प्रारम्भ होकर प्रांतिज (गुजरात) तक जाता है।
राजस्थान में यह निम्न तीन जिलों से होकर गुजरता है—
- जैसलमेर
- बाड़मेर
- जालौर
NH 925A
यह राष्ट्रीय राजमार्ग सत्ता (जालौर) से प्रारम्भ होकर गांधव (बाड़मेर) तक जाता है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह भारत का पहला राष्ट्रीय राजमार्ग है जिस पर भारतीय वायुसेना के विमानों के लिए आपातकालीन परिस्थितियों में उतरने हेतु इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप का निर्माण किया गया है।
इस इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप का उद्घाटन वर्ष 2021 में नितिन गडकरी तथा राजनाथ सिंह द्वारा बाड़मेर के गांधव-बाखासर के मध्य किया गया था। इस राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण भारमाला परियोजना के अंतर्गत किया गया है।
NH 919 (पुरानी संख्या – 71B)
यह राष्ट्रीय राजमार्ग रेवाड़ी (हरियाणा) से प्रारम्भ होकर धारूहेड़ा, सोहना और पलवल (हरियाणा) तक जाता है। राजस्थान में यह राष्ट्रीय राजमार्ग केवल खैरथल-तिजारा जिले से होकर गुजरता है।
महत्वपूर्ण बिन्दु
राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्गों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य निम्न प्रकार हैं—
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| राजस्थान में NH की सर्वाधिक लंबाई वाले जिले | बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर |
| राजस्थान में NH की न्यूनतम लंबाई वाले जिले | करौली, प्रतापगढ़, डूंगरपुर |
| राजस्थान के सबसे लंबे NH | NH 52 (793 किमी), NH 11, NH 62, NH 48 |
| राजस्थान के सबसे छोटे NH | NH 919 (पुराना नाम 71B – 5 किमी), NH 148B (5 किमी – कोटपूतली-बहरोड़), NH 168A |
| राजस्थान का सबसे व्यस्त NH | NH 48 (पुराना नाम – 8) |
| सर्वाधिक राष्ट्रीय राजमार्गों वाला जिला | जयपुर (9 NH), ब्यावर (6 NH), उदयपुर (6 NH) |
राज्य उच्चमार्ग (State Highway)
राष्ट्रीय राजमार्गों के अतिरिक्त राज्य के भीतर विभिन्न जिलों और प्रमुख नगरों को जोड़ने का कार्य राज्य उच्चमार्गों द्वारा किया जाता है।
राजस्थान के राज्य उच्चमार्गों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य निम्न हैं—
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| राजस्थान का सबसे लंबा राज्य उच्चमार्ग | SH 1 – झालावाड़ से मथुरा तक |
| राजस्थान का सबसे छोटा राज्य उच्चमार्ग | SH 34B – सरोली मोड़ से दुनी (टोंक) तक |
सड़क विकास की प्रमुख परियोजनाएँ
राजस्थान में सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने तथा ग्रामीण, शहरी, औद्योगिक और पर्यटन क्षेत्रों को बेहतर संपर्क उपलब्ध कराने के लिए समय-समय पर अनेक महत्वपूर्ण योजनाएँ एवं परियोजनाएँ प्रारंभ की गई हैं।
➻ प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) – प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत 25 दिसंबर 2000 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा की गई थी। वर्ष 2015-16 से इस योजना में केंद्र एवं राज्य सरकार के बीच वित्तीय भागीदारी का अनुपात 60:40 निर्धारित किया गया है।
➻ मुख्यमंत्री सड़क योजना – इस योजना की शुरुआत 7 अक्टूबर 2005 से की गई। इस योजना के अंतर्गत राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थलों तथा धार्मिक महत्व के स्थलों को सड़क मार्ग से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।
➻ ग्रामीण गौरव पथ योजना – ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क अवसंरचना को मजबूत बनाने के उद्देश्य से ग्रामीण गौरव पथ योजना वर्ष 2014-15 में प्रारंभ की गई।
➻ शहरी गौरव पथ योजना – शहरी क्षेत्रों में सड़क विकास को गति देने के लिए शहरी गौरव पथ योजना वर्ष 2016-17 में प्रारंभ की गई।
➻ भारमाला परियोजना – भारतमाला परियोजना की शुरुआत 31 जुलाई 2015 से की गई। इस परियोजना के अंतर्गत देशभर में विभिन्न एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जा रहा है। राजस्थान में इस परियोजना के अंतर्गत 1825 किमी लंबाई की 10 सड़कों को चिह्नित किया गया है।
1. दिल्ली-मुम्बई ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे
यह एक्सप्रेस-वे राजस्थान के निम्न जिलों से होकर गुजरेगा—
- डीग
- अलवर
- दौसा
- सवाईमाधोपुर
- टोंक
- बूंदी
- कोटा
राजस्थान में इस एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई 373.63 किमी है। इस परियोजना के अंतर्गत 12 फरवरी 2023 को प्रधानमंत्री द्वारा सोहना (हरियाणा) से दौसा खंड के 247 किमी लंबे प्रथम चरण का उद्घाटन किया गया।
2. अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेस-वे
- इस परियोजना के अंतर्गत संगरिया (हनुमानगढ़) – सांचौर – संतालपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया गया है।
राजस्थान में यह एक्सप्रेस-वे निम्न जिलों से होकर गुजरता है—
- हनुमानगढ़
- गंगानगर
- बीकानेर
- फलौदी
- जोधपुर
- बालोतरा
- जालौर
राजस्थान में इसकी कुल लंबाई 637 किमी है।
3. भटिंडा-अजमेर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे
यह एक्सप्रेस-वे राजस्थान के निम्न जिलों से होकर गुजरेगा—
- हनुमानगढ़
- चूरू
- सीकर
- नागौर
- अजमेर
➻ राजस्थान रोड विजन 2025
- राजस्थान रोड विजन 2025 राज्य सरकार की सड़क तंत्र के विकास से संबंधित एक दीर्घकालीन योजना है।
- इस योजना को राजस्थान लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा तैयार किया गया है।
इस योजना के अंतर्गत—
- ग्रामीण सड़कों का रखरखाव किया जाएगा।
- धार्मिक महत्व के 100 स्थानों को बेहतर सड़क संपर्क प्रदान किया जाएगा।
- पर्यटन, खनन तथा औद्योगिक क्षेत्रों के लिए नई सड़कों का विकास किया जाएगा।
योजना के अनुसार पहले 15 वर्षों में सभी गांवों को सड़क मार्ग से जोड़ा जाएगा तथा इसके बाद अगले 10 वर्षों में फ्लाईओवर एवं चार लेन वाले राज्य महामार्गों का विकास किया जाएगा।
➻ राजस्थान राज्य राजमार्ग विकास से संबंधित प्रमुख कार्यक्रम
- राजस्थान राज्य सड़क विकास निधि अधिनियम को 10 अगस्त 2004 को पारित किया गया।
- इसके अतिरिक्त, एशियन विकास बैंक तथा विश्व बैंक की सहायता से राज्य राजमार्गों के विकास का कार्य किया जा रहा है।
➻ राजस्थान राज्य राजमार्ग विकास परियोजना
- इस परियोजना के अंतर्गत राज्य राजमार्गों को विकसित करने का कार्य किया जा रहा है।
➻ राजस्थान राज्य राजमार्ग निवेश कार्यक्रम-1
- प्रारंभ : नवंबर 2017
- वित्त पोषण : एशियन विकास बैंक
➻ राजस्थान राज्य राजमार्ग निवेश कार्यक्रम-2
- प्रारंभ : दिसंबर 2019
- वित्त पोषण : एशियन विकास बैंक
➻ राजस्थान राज्य राजमार्ग निवेश कार्यक्रम-3
- प्रारंभ : मार्च 2023
- पूर्ण होने की अवधि : सितंबर 2026
- वित्त पोषण : एशियन विकास बैंक
➻ राजस्थान राज्य राजमार्ग निवेश कार्यक्रम-2
- यह परियोजना विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित है।
प्रमुख नीतियाँ
- राजस्थान में सड़क परिवहन एवं सड़क अवसंरचना के विकास के लिए समय-समय पर विभिन्न नीतियाँ लागू की गई हैं।
| नीति | वर्ष |
|---|---|
| सड़क नीति | 1994 |
| राज्य सड़क विकास नीति | 2013 |
| राजस्थान इलेक्ट्रिकल व्हीकल नीति | 2022 |
- सड़क नीति, 1994 – राजस्थान ने वर्ष 1994 में सड़क नीति घोषित की थी तथा ऐसा करने वाला यह देश का पहला राज्य बना।
- राज्य सड़क विकास नीति, 2013 – राज्य में सड़क अवसंरचना के विकास को गति देने के उद्देश्य से राज्य सड़क विकास नीति 2013 लागू की गई।
- राजस्थान इलेक्ट्रिकल व्हीकल नीति, 2022 – राज्य में इलेक्ट्रिकल वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राजस्थान इलेक्ट्रिकल व्हीकल नीति 2022 को 1 सितंबर 2022 से 5 वर्षों के लिए लागू किया गया।
सड़क परिवहन से संबंधित प्रमुख संस्थाएँ
➻ सीमा सड़क संगठन (BRO)
- सीमा सड़क संगठन (Border Roads Organisation – BRO) की स्थापना वर्ष 1960 में की गई थी।
- यह संगठन अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती जिलों में सड़क निर्माण का कार्य करता है तथा रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
➻ राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC)
- राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) की स्थापना 1 अक्टूबर 1964 को की गई।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थापना | 1 अक्टूबर 1964 |
| मुख्यालय | जयपुर |
| आदर्श वाक्य | शुभास्ते पंथानः सन्तु |
- राजस्थान परिवहन विभाग का नाम 1 अक्टूबर 2021 से बदलकर परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग कर दिया गया है।
- इस विभाग का आदर्श वाक्य “चरैवेति चरैवेति” है।
➻ रिडकोर (RIDCOR) – Road Infrastructure Development Company of Rajasthan (RIDCOR) की स्थापना अक्टूबर 2004 में की गई।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थापना | अक्टूबर 2004 |
| मुख्यालय | जयपुर |
| भागीदारी | राजस्थान सरकार एवं I.L.F.S. की 50:50 भागीदारी |
यह कंपनी राज्य में मेगा हाईवे परियोजनाओं का संचालन करती है।
➻ राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम लिमिटेड (RSRDC) – इस संस्था की स्थापना वर्ष 1979 में राजस्थान स्टेट ब्रिज लिमिटेड के नाम से की गई थी।
➻ सड़क सुरक्षा संस्थान
- राजस्थान का सड़क सुरक्षा संस्थान जयपुर में स्थित है।
- राजस्थान अगले 10 वर्षों के लिए सड़क सुरक्षा कार्य योजना अपनाने वाला देश का पहला राज्य बना है। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में 50 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
रेल परिवहन
- राजस्थान में सड़क परिवहन के बाद रेल परिवहन राज्य की यातायात व्यवस्था का दूसरा प्रमुख आधार है। यह राज्य के विभिन्न क्षेत्रों को देश के प्रमुख औद्योगिक, व्यापारिक और पर्यटन केन्द्रों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- भारतीय रेलवे का राष्ट्रीयकरण वर्ष 1951 में किया गया था तथा रेलवे संघ सूची का विषय है।
- वर्ष 2017-18 से केंद्र सरकार ने रेलवे बजट को सामान्य बजट में शामिल कर दिया है।
- भारत में पहली रेल सेवा का संचालन 16 अप्रैल 1853 को बोरबंदर (मुम्बई) से ठाणे के मध्य किया गया था।
- राजस्थान में पहली रेल सेवा 21 अप्रैल 1874 को आगरा फोर्ट (उत्तर प्रदेश) से बांदीकुई (दौसा) के मध्य प्रारंभ हुई।
- राजस्थान की पहली रेल बस सेवा का संचालन अक्टूबर 1994 में मेडता रोड से मेडता सिटी के मध्य शुरू किया गया।
- राजस्थान में रेल लाने के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध किशनलाल सोनी को “रेल वाले बाबा” के नाम से जाना जाता है।
राजस्थान में रेल नेटवर्क
- राजस्थान में रेलमार्गों की कुल लंबाई 6135 किमी है, जो देश के कुल रेलमार्ग का 9.53 प्रतिशत है।
- राजस्थान में वर्तमान में 2 रेलवे जोन तथा 5 रेलवे मंडल हैं।
1. उत्तर पश्चिमी रेलवे जोन
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| गठन | 2002 |
| मुख्यालय | जयपुर |
| मंडल | जयपुर, जोधपुर, अजमेर एवं बीकानेर |
2. पश्चिमी मध्य रेलवे जोन
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मुख्यालय | जबलपुर |
| राजस्थान का मंडल | कोटा मंडल |
रेल परिवहन से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
- राजस्थान में नैरोगेज (छोटी लाइन) केवल धौलपुर जिले में स्थित है।
- डूंगरपुर-बाँसवाड़ा-रतलाम रेल लाइन का शिलान्यास वर्ष 2011 में सोनिया गांधी द्वारा किया गया था।
- बाँसवाड़ा एवं प्रतापगढ़ ऐसे जिले हैं जहाँ वर्तमान में कोई रेलमार्ग नहीं है।
राजस्थान के प्रमुख रेलवे संस्थान
राजस्थान में रेलवे से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण संस्थान एवं प्रतिष्ठान स्थित हैं, जिनका राष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व है।
| संस्थान | स्थान | स्थापना/विशेष जानकारी |
|---|---|---|
| लोको रेलवे कारखाना (कैरिज वर्कशॉप) | अजमेर | स्थापना – 1879 |
| सिमको वैगन फैक्ट्री | भरतपुर | — |
| रेलवे विद्युत लोको शेड | कोटा | — |
| मेमू रेल कोच फैक्ट्री | भीलवाड़ा | — |
| पश्चिम रेलवे क्षेत्रीय प्रशिक्षण केन्द्र | उदयपुर | स्थापना – 1965 |
- फुलेरा जंक्शन एशिया का मीटरगेज का सबसे बड़ा रेलवे यार्ड है।
- उदयपुर स्थित पश्चिम रेलवे क्षेत्रीय प्रशिक्षण केन्द्र में भारत का सबसे बड़ा रेलवे मॉडल कक्ष स्थापित है।
- भारतीय रेल अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना पचपदरा (बालोतरा) में की गई है।
- भवानी मंडी रेलवे स्टेशन (झालावाड़) की विशेषता यह है कि इसका एक भाग राजस्थान में तथा दूसरा भाग मध्यप्रदेश में स्थित है।
- मियां का बाड़ा रेलवे स्टेशन (बालोतरा) का नाम बदलकर महेश नगर हॉल्ट कर दिया गया है।
राजस्थान में वंदे भारत ट्रेनें
भारत की पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत राजस्थान में अजमेर-जयपुर-दिल्ली मार्ग पर प्रारंभ की गई।
इसके बाद राज्य में निम्न वंदे भारत ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया—
| क्रम | मार्ग |
|---|---|
| पहली वंदे भारत | अजमेर – जयपुर – दिल्ली |
| दूसरी वंदे भारत | जोधपुर – साबरमती |
| तीसरी वंदे भारत | जयपुर – उदयपुर |
| चौथी वंदे भारत | उदयपुर – कोटा – आगरा |
राजस्थान की प्रमुख पर्यटन रेल सेवाएँ
- राजस्थान की विरासत, संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई विशेष रेल सेवाओं का संचालन किया जाता है।
| रेल सेवा | प्रारंभ वर्ष |
|---|---|
| पैलेस ऑन व्हील्स | 26 जनवरी 1982 |
| हेरिटेज ऑन व्हील्स | 2006 |
| रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स | मार्च 2009 |
पैलेस ऑन व्हील्स को राजस्थान की प्रसिद्ध शाही रेलगाड़ी माना जाता है।
➻ विस्टाडोम हेरिटेज ट्रेन – 5 अक्टूबर 2023 से विस्टाडोम हेरिटेज ट्रेन का संचालन प्रारंभ किया गया।
- यह ट्रेन मारवाड़ जंक्शन (पाली) से कामली घाट (राजसमंद) तक चलाई जा रही है।
➻ थार एक्सप्रेस – थार एक्सप्रेस की शुरुआत फरवरी 2006 में मुनाबाव (बाड़मेर) से खोखरापार (पाकिस्तान) के मध्य की गई थी।
- राजस्थान में इस रेल सेवा का पहला स्टेशन मुनाबाव है।
जयपुर मेट्रो रेल परियोजना
- जयपुर मेट्रो परियोजना का निर्माण एशियन विकास बैंक की आर्थिक सहायता से किया गया है।
- इसके संचालन के लिए जयपुर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (JMRC) की स्थापना 1 जनवरी 2010 को की गई थी।
- जयपुर मेट्रो राजस्थान की पहली तथा देश की छठी मेट्रो रेल प्रणाली है।
- जयपुर में मेट्रो रेल सेवा का संचालन जून 2015 से प्रारंभ हुआ।
- इस परियोजना का निर्माण दो चरणों में किया जा रहा है।
फेज प्रथम:-
| चरण | मार्ग | स्थिति |
|---|---|---|
| फेज प्रथम (A) | मानसरोवर से चाँदपोल | 3 जून 2015 से प्रारंभ |
| फेज प्रथम (B) | चाँदपोल से बड़ी चौपड़ | सितंबर 2020 से प्रारंभ |
| फेज प्रथम (C) | बड़ी चौपड़ से ट्रांसपोर्ट नगर | प्रस्तावित |
| फेज प्रथम (D) | मानसरोवर से 200 फीट बाइपास | प्रस्तावित |
फेज द्वितीय:-
- सीतापुरा से अम्बाबाड़ी तक मेट्रो लाइन का निर्माण प्रस्तावित है।
वायु परिवहन
- वायु परिवहन भी संघ सूची का विषय है।
- अंतर्राष्ट्रीय वायु परिवहन संघ (IATA) का मुख्यालय कनाडा में स्थित है तथा इसकी स्थापना 1945 में हुई थी।
राजस्थान के नागरिक हवाई अड्डे
➻ सांगानेर हवाई अड्डा, जयपुर
- सांगानेर हवाई अड्डा राजस्थान का पहला तथा देश का 14वाँ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है।
- यह भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के अधीन संचालित होता है।
- इस हवाई अड्डे को 29 दिसंबर 2005 को अंतर्राष्ट्रीय दर्जा प्रदान किया गया तथा इसकी अधिसूचना फरवरी 2006 में जारी की गई थी।
- यह हवाई अड्डा पूर्ण रूप से सौर ऊर्जा से विद्युतीकृत है।
- वर्तमान में जयपुर हवाई अड्डे का संचालन अडानी ग्रुप द्वारा लीज आधार पर किया जा रहा है।
➻ अन्य नागरिक हवाई अड्डे:-
| हवाई अड्डा | स्थान |
|---|---|
| महाराणा प्रताप हवाई अड्डा | डबोक (उदयपुर) |
| कोटा हवाई अड्डा | कोटा |
| किशनगढ़ हवाई अड्डा | किशनगढ़ (अजमेर) |
किशनगढ़ हवाई अड्डे का उद्घाटन 11 अक्टूबर 2017 को किया गया था।
➻ सैन्य हवाई अड्डे:-
राजस्थान के निम्न हवाई अड्डे भारतीय वायुसेना के अधीन संचालित होते हैं—
| हवाई अड्डा | स्थान |
|---|---|
| सूरतगढ़ हवाई अड्डा | सूरतगढ़ (गंगानगर) |
| नाल हवाई अड्डा | बीकानेर |
| रातानाडा हवाई अड्डा | जोधपुर |
| जैसलमेर हवाई अड्डा | जैसलमेर |
| उत्तरलाई हवाई अड्डा | बाड़मेर |
इनमें सूरतगढ़ हवाई अड्डा राजस्थान का महत्वपूर्ण भूमिगत हवाई अड्डा है।
ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट एवं उड़ान प्रशिक्षण
- राजस्थान का पहला ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट शंभूपुरा (कोटा) में स्थापित किया जा रहा है।
- इसके अतिरिक्त किशनगढ़ में उड़ान प्रशिक्षण अकादमी स्थापित की जा रही है। यह उड़ान प्रशिक्षण संगठन (FTO) के अंतर्गत संचालित होगी।
- राज्य बजट 2025-26 में प्रतापगढ़, झालावाड़ तथा झुंझुनूं में भी Flying Training Organisation (FTO) स्थापित करने की घोषणा की गई है।
