राजस्थान में खनिज

राजस्थान में खनिज

  • खनिज सम्पदा की दृष्टि से राजस्थान देश के समृद्ध राज्यों में आता है।
  • राजस्थान में 81 प्रकार के खनिज पाये जाते हैं, जिनमें से 58 खनिजों का उत्खनन हो रहा है।
  • खनिजों की किस्मों की दृष्टि से राजस्थान का प्रथम स्थान है, जबकि खनिज भण्डारों (उपलब्धता) के आधार पर झारखंड के बाद द्वितीय स्थान है।
  • खनिज उत्पादन मूल्य की दृष्टि से राजस्थान का झारखंड एवं मध्यप्रदेश के बाद तृतीय स्थान है।
  • राजस्थान को खनिजों का अजायबघर कहा जाता है।
  • सर्वाधिक खनिज अरावली पर्वतमाला में पाये जाते हैं।
  • खान एवं भू-विज्ञान विभाग का मुख्यालय उदयपुर में स्थित है।

RSMML (Rajasthan State Mines and Minerals Limited)

  • राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड (RSMML) की स्थापना 1974 में उदयपुर में की गई।
  • इसका मुख्य कार्य खनिजों का दोहन करना तथा खनिज क्षेत्र को बढ़ावा देना है।

इसकी गतिविधियों को निम्न 4 भागों में विभाजित किया गया है—

स्ट्रेटजिक बिजनेस यूनिट एवं प्रॉफिट सेन्टर प्रमुख खनिज स्थान
1 रॉक फॉस्फेट झामरकोटड़ा (उदयपुर)
2 जिप्सम बीकानेर
3 लाईमस्टोन जोधपुर
4 लिग्नाइट जयपुर

राजस्थान राज्य खनिज विकास निगम (RSMDC)

  • स्थापना — 1979
  • फरवरी 2003 में इसका विलय राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड (RSMML) में कर दिया गया।

खनन क्षेत्र का आर्थिक योगदान

  • राजस्थान के औद्योगिक क्षेत्र में स्थिर कीमतों (2011-12) पर सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में 5.77% के साथ मजबूत वृद्धि देखी गई है।
  • 2024-25 में राजस्थान में प्रचलित कीमतों पर सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में खनन क्षेत्र का योगदान 3.30% है।

खनिजों का वर्गीकरण

(1) धात्विक खनिज

  • जो खनिज धातु से बने होते हैं तथा जिनका उपयोग एक से अधिक बार किया जा सकता है।
  • उदाहरण — लोहा, ताँबा, सोना, चाँदी, मैंगनीज, सीसा-जस्ता, टंगस्टन, बेराइट्स, बॉक्साइट

धात्विक खनिजों को दो भागों में बाँटा गया है—

(क) लौह धात्विक खनिज — लोहा, मैंगनीज, टंगस्टन।

(ख) अलौह धात्विक खनिज — ताँबा, सीसा-जस्ता, सोना, चाँदी, बेराइट्स।

(2) अधात्विक खनिज

  • ये धातु से बने नहीं होते तथा मुख्यतः औद्योगिक क्रियाओं में उपयोग किये जाते हैं, इसलिए इन्हें औद्योगिक खनिज भी कहा जाता है।
  • उदाहरण — अभ्रक, ऐस्बेस्टॉस, फैल्सपार, वोलेस्टोनाइट, सल्फर, चूना पत्थर, संगमरमर

(3) आण्विक खनिज

  • यूरेनियम, लिथियम, बेरिलियम, ग्रेफाइट।

(4) उर्वरक खनिज

  • जिप्सम, रॉक फॉस्फेट, पोटाश, पाइराइट्स।

(5) ईंधन खनिज

  • कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस।

राजस्थान का एकाधिकार (एकमात्र उत्पादक राज्य)

  • सीसा-जस्ता, सेलेनाइट, वोलेस्टोनाइट, जास्पर तथा तामड़ा (गारनेट) के उत्पादन में राजस्थान का एकाधिकार है।

धात्विक खनिज

❖ लोहा (Iron)

  • भारत में लौह के दो प्रमुख अयस्क पाये जाते हैं — मैग्नेटाइट एवं हेमेटाइट
  • राजस्थान में हेमेटाइट किस्म का लोहा पाया जाता है।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • मोरीजा बानोला, चौमू सामोद, बोमानी, बागावास, रावसोला — जयपुर।
  • नीमला राइसेला, लालसोट — दौसा
  • डाबला, थोई, रामपुरा, बनिया का बास — सीकर
  • डाबला, बागोली, सराय पंचलगी — झुंझुनूं
  • पुर, बिगोद, धूलखेड़ा जीपिया, बनेदा — भीलवाड़ा
  • लोहारपुरा, इन्द्रगढ़ — बूंदी
  • लिलोटी, तोडुपुरा, देदरोली, खोहरा (हिंडौन) — करौली
  • नाथरा की पाल, थूर-हुंडेर — उदयपुर

❖ ताँबा (Copper)

  • ताँबा भण्डारों की दृष्टि से राजस्थान का प्रथम स्थान (53.8%) तथा उत्पादन की दृष्टि से मध्यप्रदेश के बाद द्वितीय स्थान (42%) है।
  • राजस्थान की ताम्र नगरी खेतड़ी (झुंझुनूं) है।
  • ताँबे का उपयोग बिजली के तार, विद्युत उपकरणों आदि के निर्माण में किया जाता है।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • कोलिहान, मदान कुदान (सभी श्रेणियों का ताम्बा मिलता है), अकवाली, टुंडा, बनवास, सतकुई, करमरी, धौलामाला, बबाई — झुंझुनूं।
  • खेतड़ी-सिंघाना (झुंझुनूं) में हिन्दुस्तान ताँबा निगम (HCL) द्वारा खनन किया जा रहा है।
  • खो दरीबा, भगोनी, थानागाजी, कुशलगढ़, सैनपुरी, भगत का बास — अलवर
  • पुर दरीबा, देवतलाई, बनेदा — भीलवाड़ा
  • हनोतिया (ब्यावर), बालेश्वर (सीकर), गोलिया, बसंतगढ़ (सिरोही), पादर की पाल (डूंगरपुर), बीदासर (चूरू), कालाबर (पाली), उदयपुर, सलूंबर, रेलमगरा (राजसमंद)

हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL)

  • स्थापना — 1967, कोलकाता
  • इसका एक संयंत्र ताँबा गलाने हेतु खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स के नाम से स्थापित किया गया।

सीसा-जस्ता (Pb-Zn)

  • सीसा एवं जस्ता मिश्रित रूप में प्राप्त होते हैं, जिसे गेलेना कहा जाता है।
  • सीसा-जस्ता के साथ चाँदी भी पायी जाती है।
  • सीसा-जस्ता विद्युत का कुचालक होता है।
  • यह आर्कियन एवं प्रोटेरोजोइक परतदार चट्टानों में पाया जाता है।
  • सीसे का उपयोग बैटरी, रेल इंजन तथा हवाई जहाज में किया जाता है।
  • जस्ता का उपयोग लोहे की पॉलिश करने, सैल बनाने तथा रंग-रोगन में किया जाता है।
  • सीसा-जस्ता भण्डारों में राजस्थान का प्रथम स्थान है।
  • सीसा-जस्ता के उत्पादन में राजस्थान का एकाधिकार है।
  • सर्वाधिक सीसा-जस्ता उदयपुर में पाया जाता है।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • जावरमाला, बराई मगरा — उदयपुर
  • मोचिया मगरा, बल्लारिया — सलूंबर
  • जावर क्षेत्र (उदयपुर) सीसा-जस्ता के लिए प्रसिद्ध है तथा यहाँ सर्वाधिक सीसा-जस्ता पाया जाता है।
  • रामपुरा, आंगुचा, गुलाबपुरा, पुर, बनेदा, देवपुरा — भीलवाड़ा
  • रामपुरा-आंगुचा में सबसे बढ़िया किस्म का सीसा-जस्ता प्राप्त होता है तथा यह सबसे बड़ी उत्पादक खदान है।
  • राजपुरा दरीबा, सिन्देसर खुर्द, मोखमपुरा — राजसमंद
  • सिन्देसर सर्वाधिक उत्पादन क्षमता वाली खान है।
  • चौथ का बरवाड़ा — सवाईमाधोपुर
  • गुढ़ा किशोरीदास — अलवर

हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड (HZL)

  • स्थापना — 10 जनवरी 1966, देबारी (उदयपुर)
  • इसका मुख्यालय उदयपुर में स्थित है।

इसके प्रमुख जिंक (जस्ता) शोधन संयंत्र निम्न हैं—

संयंत्र स्थान स्थापना वर्ष
देबारी जिंक स्मेल्टर उदयपुर 1968
चन्देरिया सीसा-जस्ता स्मेल्टर चित्तौड़गढ़ 1991
दरीबा स्मेल्टिंग कॉम्पलेक्स राजसमंद 2010

चन्देरिया सीसा-जस्ता स्मेल्टर (चित्तौड़गढ़) एशिया का सबसे बड़ा जिंक स्मेल्टर है।

❖ चाँदी (Silver)

  • चाँदी विद्युत की सुचालक होती है।
  • चाँदी उत्पादन में राजस्थान का भारत में प्रथम स्थान है।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • जावर (उदयपुर)।
  • राजपुरा दरीबा (राजसमंद)
  • रामपुरा आंगुचा (भीलवाड़ा)

❖ सोना (Gold)

  • भारत में सर्वाधिक स्वर्ण उत्पादन कर्नाटक में होता है।
  • सोना सबसे अधिक तन्य धातु है, अर्थात इसे खींचकर तार बनाया जा सकता है।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • आनन्दपुर भूकिया, जगतपुरा भूकिया, देलवाड़ा, तिमारन माता — बाँसवाड़ा।
  • देवतलाई कोटड़ी — भीलवाड़ा
  • हाल ही में घाटोल (बाँसवाड़ा) एवं उदयपुर में सोने के भण्डारों का पता लगाया गया है।

❖ टंगस्टन (Wolfram)

  • हीरे के बाद टंगस्टन दूसरी सबसे कठोर धातु है।
  • यह सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण खनिज है।
  • इसका उपयोग विद्युत बल्ब में किया जाता है।
  • देश के लगभग 75% टंगस्टन का उत्पादन राजस्थान से होता था, किन्तु वर्तमान में खनन कार्य बन्द है।
  • डेगाना में टंगस्टन का वोल्फ्रोमाइट अयस्क प्राप्त होता है।
  • राजस्थान राज्य टंगस्टन विकास निगम की स्थापना जयपुर में की गई थी।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • डेगाना भाकरी — नागौर (यहाँ से प्राप्त टंगस्टन को सेना के उपयोग हेतु रक्षा विभाग ले जाता था)।
  • वाल्दा, आबू रेवदर — सिरोही
  • नाना कराब, पदराला, बीजापुर — पाली

❖ मैंगनीज

  • सर्वाधिक मैंगनीज भण्डार बाँसवाड़ा में स्थित हैं।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • लीलवानी, नरडिया, कांसला, तलवाड़ा, कालाखूंटा, तिम्मा मोरी, सिवानिया, खेडिया, घाटिया, कचला — बाँसवाड़ा।
  • बाँसवाड़ा में गरासिया से रतीमाऊरी तक मैंगनीज का जमाव पाया जाता है।
  • छोटी सार, बड़ी सार — उदयपुर
  • रेवसा गाँव — सवाईमाधोपुर
  • नेगडिया, नाथद्वारा — राजसमंद

❖ बेरिलियम

  • बेरिलियम आण्विक रिएक्टरों में मंदक के रूप में कार्य करता है।
  • इसे खरीदने का अधिकार भारतीय सेना के पास है।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • चम्पागुढ़ा, सिलेका, शिकारबाड़ी — उदयपुर।
  • गुजरवाड़ा — जयपुर
  • आमेठ — राजसमंद
  • बांदरसिंदरी — अजमेर

❖ बॉक्साइट

  • बॉक्साइट चट्टानों के अपरदन से बनता है।
  • राजस्थान में सर्वाधिक बॉक्साइट उदयपुर में पाया जाता है।

अधात्विक खनिज

❖ अभ्रक (Mica)

  • अभ्रक विद्युत का कुचालक तथा अज्वलनशील खनिज है।
  • यह आग्नेय एवं कायांतरित चट्टानों में पाया जाता है।
  • इसका उपयोग चादरें तथा सजावटी सामान बनाने में किया जाता है।
  • अभ्रक उत्पादन में राजस्थान का आन्ध्रप्रदेश के बाद द्वितीय स्थान है।
  • राजस्थान में सर्वाधिक अभ्रक उत्पादन भीलवाड़ा एवं अजमेर में होता है।
  • अभ्रक से तापरोधी ईंट एवं चादरें बनाने का कारखाना भीलवाड़ा में स्थित है।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • नात की नेरी, सिंधिरियास — भीलवाड़ा।
  • कलाटांकरा — अजमेर

❖ फेल्सपार

  • फेल्सपार अभ्रक की खानों से सह-उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है।
  • भारत में फेल्सपार के सर्वाधिक भण्डार (66%) राजस्थान में पाए जाते हैं, जिनमें अजमेर का स्थान सर्वाधिक है।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • मकरेड़ा, लोहारवाड़ा, तारागढ़, बांदरसिंदरी, पीसांगन — अजमेर।
  • मसूदा (ब्यावर)
  • गुजरवाड़ा — जयपुर

❖ ऐस्बेस्टॉस

  • ऐस्बेस्टॉस का उपयोग सीमेंट, चादर निर्माण, फिल्टर, बॉयलर तथा रेल के डिब्बों में किया जाता है।
  • भारत में सर्वाधिक ऐस्बेस्टॉस राजस्थान में पाया जाता है।
  • राजस्थान में सर्वाधिक ऐस्बेस्टॉस उत्पादन उदयपुर में होता है।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • ऋषभदेव, खेरवाड़ा, झाड़ौल — उदयपुर
  • इसके अतिरिक्त राजसमंद, पीरपदा (डूंगरपुर), आसींद (भीलवाड़ा) तथा अर्जुनपुरा (अजमेर) में भी यह पाया जाता है।

❖ यूरेनियम

  • उपयोग — परमाणु विखंडन में।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • कुराडिया, भूणास — भीलवाड़ा
  • उमरड़ा — उदयपुर
  • खंडेला, रोहिल एवं सुहागपुरा — सीकर में यूरेनियम के भण्डार मिले हैं।
  • यहाँ यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (UCIL) ने यूरेनियम उत्खनन के लिए सुरंग निर्माण प्रारम्भ किया है।
  • यह राजस्थान का पहला तथा देश का तीसरा प्रोजेक्ट है।

❖ काँच बालुका (Silica Sand)

  • काँच बालुका उत्पादन में राजस्थान का तृतीय स्थान है।
  • उपयोग — काँच उद्योग में।
  • राजस्थान में सर्वाधिक उत्पादन जयपुर में होता है।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • निमोडा, कुण्डाल, झिर — जयपुर।
  • बारोदिया, टिकारड़ा — बूंदी

❖ डोलोमाइट (Dolomite)

  • उपयोग — लोहा उद्योगों में।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • कारोली, कसोली, ओडन, सीमल — राजसमंद
  • बाजला — अजमेर
  • काबरा — ब्यावर
  • माण्डल, कोशिथल — भीलवाड़ा
  • इंदो की ढाणी — जोधपुर

❖ चूना पत्थर (Limestone)

  • इसे लाइमस्टोन भी कहा जाता है।
  • उपयोग — सीमेंट निर्माण में।
  • जहाँ चूना पत्थर पाया जाता है वहाँ सीमेंट उद्योग की अधिक संभावना रहती है।
  • राजस्थान में सर्वाधिक चूना पत्थर चित्तौड़गढ़ में पाया जाता है।
  • सर्वाधिक केमिकल ग्रेड चूना पत्थर नागौर में पाया जाता है।
  • सर्वाधिक सीमेंट ग्रेड चूना पत्थर चित्तौड़गढ़ एवं पाली में पाया जाता है।
  • सर्वाधिक स्टील ग्रेड चूना पत्थर जैसलमेर एवं नागौर में पाया जाता है।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • निम्बाहेड़ा, अमारना, कारुंदा, बेगूँ दल का खेड़ा, मानपुरा — चित्तौड़गढ़।
  • गोटन, मूंडवा, माण्डला — नागौर
  • बिलाड़ा — जोधपुर, उदयपुर, धौली मगरी (सलूम्बर)
  • सानू, पारेवार, कानोई, बड़ा बाग — जैसलमेर
  • लखमानों की ढाणी, कुंईवाला साउथ, मियों की ढाणी (जैसलमेर) में सीमेंट ग्रेड चूना पत्थर की खोज की गई है।

❖ फ्लोराइट (फ्लोर्सपार)

  • सर्वाधिक फ्लोराइट भण्डार गुजरात में हैं तथा राजस्थान का द्वितीय स्थान है।
  • राजस्थान में सर्वाधिक उत्पादन डूंगरपुर में होता है।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • मांडो की पाल, काहिला — डूंगरपुर।

❖ वोलेस्टोनाइट

  • उपयोग — सिरेमिक उद्योग तथा कागज उद्योग में।
  • वोलेस्टोनाइट उत्पादन में राजस्थान का एकाधिकार है।
  • राजस्थान में सर्वाधिक उत्पादन उदयपुर में होता है।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • कोटड़ा, बड़ा उपरला, खेड़ा — उदयपुर।
  • गोला अलीपुरा, रामपुरा — ब्यावर
  • बेलका मगरा — सिरोही
  • खेड़ा उपरला — पाली, पीसांगन (अजमेर)

❖ बेराइट्स

  • भारत में आन्ध्रप्रदेश के बाद राजस्थान का द्वितीय स्थान है।
  • सर्वाधिक उत्पादन उदयपुर में होता है।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • रेलपातलिया, बाबरमाल, केवड़ा — उदयपुर।
  • सलूम्बर, देलवाड़ा — राजसमंद
  • जमरौली, सैनपुरी, जाहिर का खेड़ा, भगत का बास, भानखेड़ा — अलवर

❖ पन्ना (Emerald – एमराल्ड)

  • उपयोग — आभूषण बनाने में।
  • हरे रंग का होने के कारण इसे हरी अग्नि भी कहा जाता है।
  • पन्ना मंडी एवं पन्ना नगरीजयपुर

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • कालागुमान — राजसमंद
  • गोगुंदा एवं टिक्की — उदयपुर
  • राजगढ़, गुडास, बुबानी — अजमेर
  • बुबानी एवं मुहामी (अजमेर) से गुढ़ा गाँव (राजसमंद) तक फायरग्रेड पन्ने की विशाल पट्टी खोजी गई है, जिसे ग्रीन फायर बेल्ट कहा जाता है।

❖ हीरा

  • राजस्थान में केसरपुरा एवं मानपुरा (प्रतापगढ़) से नगण्य मात्रा में हीरा होने के अनुमान हैं।

❖ तामड़ा (गारनेट)

  • लाल रंग का होने के कारण इसे रक्तमणि कहा जाता है।
  • तामड़ा (गारनेट) के उत्पादन में राजस्थान का एकाधिकार है।
  • राजस्थान में सर्वाधिक उत्पादन टोंक एवं अजमेर में होता है।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • राजमहल, जनकपुरा, कुशालपुरा, कल्याणपुर, देवखेड़ा — टोंक
  • सरवाड़, खरवारी, बांदनवाड़ा — अजमेर
  • बागेश्वर — सीकर

❖ सुलेमानी पत्थर

  • इसे अकीक (गोमद) के नाम से भी जाना जाता है।
  • सुलेमानी पत्थर के उत्पादन में राजस्थान का एकाधिकार है।
  • यह मुख्यतः कोटा, झालावाड़ एवं चित्तौड़गढ़ में पाया जाता है।

उर्वरक खनिज

❖ जिप्सम

  • अन्य नाम — हरसौठ, सेलखड़ी, गोदंती
  • उपयोग — रासायनिक खाद (उर्वरक) बनाने में तथा क्षारीय भूमि में सेम की समस्या के समाधान में किया जाता है।
  • इसका उपयोग प्लास्टर ऑफ पेरिस, सीमेंट तथा कागज निर्माण में भी किया जाता है।

जिप्सम उत्पादन में राजस्थान का एकाधिकार है।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • बीकानेर (सर्वाधिक), नागौर, बाड़मेर, जैसलमेर, हनुमानगढ़ एवं गंगानगर जिलों में जिप्सम पाया जाता है।
  • गोठ मांगलोद, भदवासी, जोधियासी, मालगू मंगोल — नागौर
  • लूनकरणसर, जामसर, पूगल, बल्लर, धीरेरा, कावनी — बीकानेर
  • फलसूंड — जैसलमेर
  • कुरला, श्योकर, पीर की ढाणी, उत्तरलाई, कवास — बाड़मेर
  • खूटाणी — पाली
  • राजस्थान में जिप्सम की सबसे बड़ी खान जामसर (बीकानेर) तथा बिसरासर (हनुमानगढ़) है।

❖ सेलेनाइट

  • सेलेनाइट, जिप्सम की ही एक किस्म है।
  • सेलेनाइट उत्पादन में राजस्थान का एकाधिकार है।
  • सेलेनाइट का खनन राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड (RSMML) द्वारा बाड़मेर (सर्वाधिक) तथा बीकानेर में किया जाता है।

❖ रॉक फॉस्फेट

  • उपयोग — उर्वरक खाद बनाने तथा लवणीय भूमि की समस्या दूर करने में किया जाता है।
  • रॉक फॉस्फेट भण्डारों में राजस्थान का प्रथम स्थान (93%) है।
  • राजस्थान में सर्वाधिक रॉक फॉस्फेट उदयपुर में पाया जाता है।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • झामरकोटड़ा, नीमच माता, माटून, डाकन कोटड़ा, सीसारमा, बड़गाँव — उदयपुर।
  • फतेहगढ़, बिरमानियां — जैसलमेर
  • अचरोल — जयपुर
  • अड़ुका अंदारी — अलवर
  • राजस्थान में सर्वाधिक रॉक फॉस्फेट उत्पादन झामरकोटड़ा खान से होता है, जहाँ खनन कार्य राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड (RSMML) द्वारा किया जा रहा है।

❖ पाइराइट्स

  • पाइराइट्स को झूठा सोना कहा जाता है।

प्रमुख खान

  • सलादीपुरा — सीकर

❖ पोटाश

  • देश में पहली बार पोटाश के भण्डार राजस्थान के नागौर, बीकानेर, गंगानगर एवं हनुमानगढ़ में प्राप्त हुए हैं।

अन्य गौण खनिज

❖ संगमरमर (Marble)

  • संगमरमर एक कायांतरित (रूपान्तरित) चट्टान है, जो चूना पत्थर से बनती है।
  • संगमरमर उत्पादन में राजस्थान का देश में प्रथम स्थान है।
  • यह सभी पत्थरों में सर्वाधिक मूल्य अर्जित करने वाला पत्थर है।
  • मकराना (डीडवाना-कुचामन) संगमरमर के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र है।
  • यहाँ सर्वश्रेष्ठ किस्म का संगमरमर पाया जाता है, जिससे ताजमहल तथा विक्टोरिया मेमोरियल (कोलकाता) का निर्माण किया गया है।
  • मकराना को संगमरमर शहर कहा जाता है।
  • राजस्थान में संगमरमर की सबसे बड़ी खान आर.के. मार्बल्स (राजसमंद) है।
  • एशिया की सबसे बड़ी संगमरमर मंडी एवं परिशोधन केन्द्र किशनगढ़ (अजमेर) में स्थित है।
  • मार्बल डंपिंग यार्डकिशनगढ़
  • हरा संगमरमरऋषभदेव (उदयपुर)
  • सफेद संगमरमर (कैल्सिटिक)मकराना
  • काला संगमरमरभैंसलाना (जयपुर)
  • गुलाबी संगमरमरबाबरमल (उदयपुर)
  • पीला संगमरमरजैसलमेर

❖ बेंटोनाइट

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • शिव, हाथी की ढाणी, थुम्बली गाँव — बाड़मेर (सर्वाधिक उत्पादन)।
  • इसके अतिरिक्त सवाईमाधोपुर एवं बीकानेर में भी बेंटोनाइट के भण्डार पाए जाते हैं।

❖ ग्रेनाइट

  • ग्रेनाइट आग्नेय चट्टानों में पाया जाने वाला कठोर खनिज है।
  • इसे विश्व का सबसे महंगा पत्थर माना जाता है।
  • सर्वाधिक ग्रेनाइट उत्पादन जालौर में होता है।
  • जालौर को ग्रेनाइट सिटी कहा जाता है।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • कालकाजी, कवला, नून, खम्बी, रानीवाड़ा — जालौर।
  • छप्पन की पहाड़ियाँ — सिवाणा (बालोतरा)

❖ इमारती बलुआ पत्थर (Sand Stone)

  • इमारती बलुआ पत्थर उत्पादन में राजस्थान का प्रथम स्थान है।
  • राजस्थान में सर्वाधिक उत्पादन जोधपुर में होता है।
  • बादामी पत्थरजोधपुर
  • स्लेटी पत्थरअलवर
  • गुलाबी पत्थरबंसी पहाड़पुर (भरतपुर)
  • लाल पत्थरबाड़ी, बसेड़ी (धौलपुर) तथा करौली
  • दिल्ली के लाल किले एवं राष्ट्रपति भवन के निर्माण में धौलपुर के लाल पत्थर का उपयोग किया गया है।
  • कोटा स्टोनकोटा
  • काला पत्थरडूंगरपुर
  • पीला पत्थरजैसलमेर
  • दुलमेरा (बीकानेर) में लाल बलुआ पत्थर की खदान स्थित है।

❖ घीया पत्थर (Soap Stone)

  • यह डोलोमाइट की चट्टानों के साथ पाया जाता है।
  • भारत में सर्वाधिक घीया पत्थर राजस्थान में पाया जाता है।
  • राजस्थान में सर्वाधिक उत्पादन उदयपुर में होता है।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • ऋषभदेव, गोगुन्दा, कागदर-कल्याणपुर बेल्ट — उदयपुर
  • देपुरा, देवला, ओरड़ा — सलूम्बर
  • घेवरिया, जहाजपुर — भीलवाड़ा

❖ केल्साइट

  • भारत में सर्वाधिक केल्साइट राजस्थान में पाया जाता है।
  • राजस्थान में सर्वाधिक उत्पादन उदयपुर एवं सिरोही में होता है।

❖ वर्मीक्यूलाइट

  • वर्मीक्यूलाइट खनिज अजमेर में पाया जाता है।

❖ मैग्नेसाइट

  • मैग्नेसाइट खनिज के प्रमुख प्राप्ति स्थल कोटड़ी एवं मंगरोप (भीलवाड़ा) हैं।

❖ मुल्तानी मिट्टी

  • प्रमुख प्राप्ति स्थल — पलाना, केसरदेसर (बीकानेर) तथा कपूड़ी, अलाथिया (बाड़मेर)

ईंधन खनिज

  • इन खनिजों से ऊर्जा प्राप्त होती है, किन्तु इनका पुनः उपयोग नहीं किया जा सकता।
  • ये कायांतरित चट्टानों से प्राप्त होते हैं।

कोयला

  • भारत में सर्वाधिक कोयला झारखंड में पाया जाता है।

कोयले के मुख्यतः 4 प्रकार होते हैं —

(1) एन्थ्रेसाइट

  • यह सबसे अच्छा कोयला माना जाता है।
  • इसमें धुआँ कम निकलता है।
  • इसमें कार्बन की मात्रा 80% से 90% होती है।

(2) बिटुमिन

  • इसमें कार्बन की मात्रा 75% से 80% होती है।

(3) लिग्नाइट

  • इसमें कार्बन की मात्रा लगभग 50% होती है।

(4) पीट

  • यह सबसे निम्न श्रेणी का कोयला होता है।
  • इसमें कार्बन की मात्रा 50% से कम होती है।
  • राजस्थान में सर्वाधिक लिग्नाइट कोयला (भूरा कोयला) पाया जाता है।
  • यह तृतीय महाकल्प का लिग्नाइट कोयला है।
  • भारत में सर्वाधिक लिग्नाइट उत्पादन तमिलनाडु में होता है, जबकि गुजरात के बाद राजस्थान का तृतीय स्थान है।
  • राजस्थान में सर्वाधिक लिग्नाइट भण्डार बाड़मेर, बीकानेर एवं नागौर में स्थित हैं।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • कपूड़ी, जालिपा, गिरल, सोनड़ी, कुरला, बोथिया, मगने की ढाणी — बाड़मेर
  • गिरल एवं सोनड़ी खानों में लिग्नाइट का खनन राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड (RSMML) द्वारा किया जा रहा है।
  • ये राजस्थान की प्रथम आधुनिक ओपन कास्ट लिग्नाइट खदानें हैं।
  • सिणधरी, भरका, चोकला — बालोतरा
  • पलाना में सर्वश्रेष्ठ किस्म का लिग्नाइट कोयला पाया जाता है।
  • पलाना, बरसिंगसर, बीठनोक, खारी चारणन, केसरदेसर, गूढ़ा, हाडला — बीकानेर
  • मातासुख, इन्दावर, कसनाऊ, मोकला, कुचेरा, मेड़ता — नागौर

राजस्थान में लिग्नाइट आधारित विद्युत परियोजनाएँ

  • बरसिंगसर — बीकानेर
  • गिरल — बाड़मेर
  • भादरेस — बाड़मेर
  • बीठनोक — बीकानेर

खनिज तेल (Petroleum)

  • तृतीय महाकल्प से निर्मित अवसादी चट्टानों में खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस के भण्डार पाए जाते हैं।
  • राजस्थान के पश्चिमी जिलों जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर एवं गंगानगर में अवसादी चट्टानें पाई जाती हैं, इसलिए यहाँ खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस के भण्डार उपलब्ध हैं।
  • कच्चे तेल उत्पादन में भारत में बॉम्बे हाई का प्रथम स्थान तथा राजस्थान का द्वितीय स्थान (14.95%) है।
  • भारत में कच्चे तेल का उत्पादन लगभग 29.36 मिलियन टन प्रतिवर्ष है, जिसमें से लगभग 4.39 मिलियन टन प्रतिवर्ष उत्पादन राजस्थान से होता है।
  • राजस्थान में सर्वाधिक कच्चे तेल के भण्डार एवं उत्पादन बाड़मेर में हैं।
  • वर्तमान में 15 तेल क्षेत्रों से प्रतिदिन लगभग 66,000 से 67,000 बैरल खनिज तेल का उत्पादन किया जा रहा है।
  • राजस्थान में पेट्रोलियम निदेशालय की स्थापना 1997 में जयपुर में की गई।
  • राजस्थान राज्य पेट्रोलियम निगम लिमिटेड का गठन जुलाई 2008 में किया गया।

राजस्थान के प्रमुख पेट्रोलीफेरस (पेट्रोलियम सम्भाव्य) बेसिन

पेट्रोलीफेरस बेसिन क्षेत्र
बाड़मेर-सांचौर बेसिन बाड़मेर, जालौर
जैसलमेर बेसिन जैसलमेर
बीकानेर-नागौर बेसिन बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, नागौर
विंध्यन बेसिन कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ तथा भीलवाड़ा एवं चित्तौड़गढ़ का कुछ भाग

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • सादाजूण्ड, कवास, गुडामालानी — बाड़मेर
  • कोसलू, बायतु, नगाणा — बालोतरा
  • सादेवाला, तनोट, बाघेवाला — जैसलमेर
  • बींझबायला — गंगानगर
  • बाघेवाला, सादेवाला एवं टाबरीवाला (जैसलमेर) में तेल के भण्डार प्राप्त हुए हैं।
  • यहाँ PDVSA एवं ऑयल इंडिया लिमिटेड द्वारा कच्चे तेल का दोहन किया जा रहा है।
  • वर्तमान में राजस्थान में कुल 14 PEL (Petroleum Exploration Licence) कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस के अन्वेषण हेतु स्वीकृत हैं।
  • 13 PML (Petroleum Mining Lease) क्षेत्रों में विकास एवं दोहन का कार्य प्रगति पर है।

केयर्न वेदांता लिमिटेड द्वारा खोजे गए प्रमुख तेल क्षेत्र

  • स्कॉटलैंड की केयर्न एनर्जी इंडिया लिमिटेड (वर्तमान में केयर्न वेदांता लिमिटेड) द्वारा राजस्थान में तेल खोज सम्बन्धी कार्य किए गए हैं।

प्रमुख क्षेत्र

  • मंगला — बालोतरा
  • 2004 में यहाँ तेल के विशाल भण्डार प्राप्त हुए थे।
  • यह राजस्थान का सर्वाधिक तेल उत्पादन करने वाला क्षेत्र है।
  • ऐश्वर्या — बायतु (बालोतरा)
  • सरस्वती — बालोतरा
  • रागेश्वरी ऑयल — बाड़मेर
  • कामेश्वरी — बाड़मेर
  • गुड़ा — गुडामालानी (बाड़मेर)
  • विजया एवं भाग्यम — बाड़मेर
  • शक्ति — नगाणा (बालोतरा)
  • पूनम — बीकानेर-नागौर बेसिन, जिसे ऑयल इंडिया लिमिटेड द्वारा खोजा गया।
  • इसके अतिरिक्त दुर्गा (बाड़मेर), वंदना-9, तुकाराम, NC-West, NE, NP तथा Y2Y क्षेत्र भी महत्वपूर्ण हैं।

पचपदरा रिफाइनरी

  • पचपदरा रिफाइनरी बालोतरा में स्थित है।
  • HPCL राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड की स्थापना 18 सितम्बर 2013 को की गई।
  • जनवरी 2018 में रिफाइनरी का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया।
  • इसमें राजस्थान सरकार की 26% तथा HPCL की 74% संयुक्त हिस्सेदारी है।
  • यह राजस्थान की पहली तथा भारत की 26वीं रिफाइनरी है।
  • पचपदरा रिफाइनरी को जलापूर्ति इन्दिरा गाँधी नहर परियोजना से की जाएगी।

राजस्थान पेट्रो जोन

  • पचपदरा रिफाइनरी से निकलने वाले डाउनस्ट्रीम उत्पादों पर आधारित उद्योगों के लिए बालोतरा में राजस्थान पेट्रो जोन की स्थापना की जाएगी।

प्राकृतिक गैस (Natural Gas)

  • भारत की सबसे लम्बी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन हजीरा (गुजरात) – विजयपुर (मध्यप्रदेश) – जगदीशपुर (उत्तरप्रदेश) पाइपलाइन है।
  • इसकी देखभाल GAIL (Gas Authority of India Limited) द्वारा की जाती है।
  • इस पाइपलाइन से अंता गैस विद्युत गृह (बारां), खाद संयंत्र गढ़ेपान (कोटा), सिमकोर ग्लास फैक्ट्री (कोटा) तथा धौलपुर विद्युत संयंत्र को गैस आपूर्ति की जाती है।
  • प्राकृतिक गैस उत्पादन की दृष्टि से राजस्थान का तृतीय स्थान है।
  • राजस्थान में प्राकृतिक गैस के सर्वाधिक भण्डार बाड़मेर-सांचौर बेसिन में स्थित हैं।
  • जैसलमेर बेसिन तथा बाड़मेर-सांचौर बेसिन में प्राकृतिक गैस उत्पादन का कार्य ऑयल इंडिया लिमिटेड (स्थापना – 1959), ONGC (स्थापना – 14 अगस्त 1956) तथा केयर्न एनर्जी-वेदांता द्वारा किया जा रहा है।

प्रमुख प्राप्ति स्थल

  • शाहगढ़, तनोट, घोटारू, डांडेवाला, रामगढ़, मनहेरा टिब्बा — जैसलमेर
  • चिन्नेवाला टिब्बा — जैसलमेर
  • राजस्थान में प्राकृतिक गैस का पहला कुआँ डांडेवाला (जैसलमेर) में स्थित है।
  • सर्वप्रथम 1983 में हीलियम एवं मीथेन गैस के भण्डार घोटारू (जैसलमेर) में प्राप्त हुए।

अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

  • राजस्थान की प्रथम खनिज नीति 1978 में भैरोसिंह शेखावत द्वारा जारी की गई थी।
  • राजस्थान की प्रथम खनन नीति 1994 में भैरोसिंह शेखावत द्वारा जारी की गई थी।
  • नई खनिज नीति 2015 में इंस्टीट्यूट ऑफ माइन्स, जयपुर में जारी की गई।

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