❖ राजस्थान वन्यजीव अभयारण्य
- भारत सरकार द्वारा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 लागू किया गया, जिसे राजस्थान सरकार ने 1 सितम्बर 1973 को लागू किया।
- 42वें संविधान संशोधन, 1976 द्वारा वन्यजीव विषय को समवर्ती सूची का विषय बनाया गया, जिसके अंतर्गत भारत सरकार एवं राज्य सरकार दोनों इस पर कानून बना सकती हैं।
❖ चिंकारा
- वैज्ञानिक नाम – गजेला बनेट्टी (Gazella bennettii)
- 22 मई 1981 को इसे राजस्थान का राज्य पशु घोषित किया गया।
- राष्ट्रीय मरू उद्यान एवं नाहरगढ़ अभयारण्य में बड़ी संख्या में चिंकारा देखने को मिलते हैं।
❖ ऊँट
- वैज्ञानिक नाम – कैमेलस ड्रोमेडेरियस (Camelus dromedarius)
- 19 सितम्बर 2014 को इसे राजस्थान का राज्य पशु (पालतू पशु) घोषित किया गया।
❖ गोडावण
- वैज्ञानिक नाम – क्रायोटिस नाइग्रीसेप्स (Choriotis nigriceps)
- उपनाम – सोहन चिड़िया, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, माल मोरड़ी (अजमेर)
- 21 मई 1981 को इसे राजस्थान का राज्य पक्षी घोषित किया गया।
❖ प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड
- 2013 में गोडावण के संरक्षण हेतु राष्ट्रीय मरू उद्यान में इस परियोजना को प्रारम्भ किया गया।
- प्रोजेक्ट बस्टर्ड प्रारम्भ करने वाला राजस्थान देश का प्रथम राज्य है।
- भारत सरकार ने 1 अप्रैल 1973 को बाघ परियोजना प्रारम्भ की तथा बाघ को राष्ट्रीय पशु घोषित किया।
- राजस्थान में वर्तमान में 5 बाघ परियोजनाएँ संचालित हैं।
- राजस्थान में 3 राष्ट्रीय उद्यान एवं 27 वन्यजीव अभयारण्य हैं।
- राष्ट्रीय उद्यान केन्द्र सरकार द्वारा संचालित होते हैं।
- भारत का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान जिम कार्बेट नेशनल पार्क (उत्तराखण्ड) है, जिसका वर्तमान नाम रामगंगा नेशनल पार्क है।
(1) रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान – सवाईमाधोपुर
- स्थापना – 1955
- 1973 में यहाँ टाइगर प्रोजेक्ट (प्रथम टाइगर प्रोजेक्ट) प्रारम्भ किया गया।
- 1 नवम्बर 1980 को इसे राजस्थान का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया।
- क्षेत्रफल की दृष्टि से यह राजस्थान का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है।
- रणथम्भौर को भारतीय बाघों का घर कहा जाता है।
- इस अभयारण्य में लाल सिर वाले तोते एवं काला गरुड़ पाए जाते हैं।
- कूनो अभयारण्य (मध्यप्रदेश) को आबाद करने हेतु रणथम्भौर से गुना (मध्यप्रदेश) तक बाघ गलियारा (Tiger Corridor) बनाए जाने का प्रस्ताव है।
❖ इण्डिया इको डेवलपमेंट कार्यक्रम
- जैव विविधता के संरक्षण हेतु विश्व बैंक की आर्थिक सहायता से भारत सरकार द्वारा 1996-97 में 7 स्थानों पर यह योजना प्रारम्भ की गई, जिनमें रणथम्भौर बाघ परियोजना भी शामिल है।
❖ भैरुपुरा गाँव
- रणथम्भौर टाइगर रिजर्व की परिधि में स्थित 110 परिवारों वाले इस गाँव को स्थानांतरित किया जाना है।
❖ (2) केवलादेव (घना) राष्ट्रीय उद्यान – भरतपुर
- यहाँ भगवान शिव (कैलाश) का केवलादेव मंदिर स्थित होने के कारण इसका नाम केवलादेव घना अभयारण्य पड़ा।
- स्थापना – 1956
- 1981 में इसे राजस्थान का दूसरा राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया।
- यह राजस्थान का सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान है।
- इसे पक्षियों का स्वर्ग तथा पक्षियों की सबसे बड़ी प्रजनन स्थली के रूप में जाना जाता है।
- यहाँ पक्षी प्रजातियों की सर्वाधिक विविधता पाई जाती है।
- 1985 में यूनेस्को द्वारा इसे विश्व प्राकृतिक धरोहर में शामिल किया गया तथा यह राजस्थान का एकमात्र अभयारण्य है जिसे यह दर्जा प्राप्त है।
- यह स्वर्णिम त्रिकोण पर्यटक परिपथ पर स्थित है।
- इसमें बाणगंगा एवं गंभीरी नदियाँ बहती हैं।
- इस अभयारण्य में शीत ऋतु के दौरान प्रवासी पक्षी साइबेरियन सारस आता है।
- 1981 में इसे राजस्थान की प्रथम रामसर साइट (वेटलैण्ड स्थल) में शामिल किया गया।
- यह पक्षी वैज्ञानिक डॉ. सलीम अली की कार्यस्थली रही है।
नोट – “भरतपुर बर्ड पैराडाइज” पुस्तक के लेखक मार्टिन इंवास हैं।
❖ (3) मुकन्दरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान – कोटा, चित्तौड़गढ़
- 1955 में इसे अभयारण्य घोषित किया गया तथा 9 जनवरी 2012 को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया।
- पुराना नाम – दर्रा अभयारण्य
- 2013 में इसे बाघ परियोजना का दर्जा दिया गया, जो राजस्थान का तीसरा टाइगर प्रोजेक्ट है।
- यह टाइगर प्रोजेक्ट कोटा, बूंदी, झालावाड़ एवं चित्तौड़गढ़ जिलों में फैला हुआ है।
- चम्बल, कालीसिंध एवं आहू नदियाँ इसमें होकर बहती हैं।
- यह अभयारण्य गागरोनी तोते के लिए प्रसिद्ध है।
❖ अभयारण्य
- पशु-पक्षियों के विहार हेतु संरक्षित क्षेत्र को अभयारण्य कहा जाता है।
- राजस्थान में 27 वन्यजीव अभयारण्य हैं।
| क्रमांक | अभयारण्य / टाइगर प्रोजेक्ट | स्थान | प्रमुख विशेषताएँ |
|---|---|---|---|
| 1 | सरिस्का बाघ अभयारण्य | अलवर |
|
| – | रेड डाटा बुक | – |
|
| 2 | रामगढ़ विषधारी अभयारण्य | बूंदी, कोटा |
|
| – | धौलपुर-करौली टाइगर प्रोजेक्ट | धौलपुर, करौली |
|
| – | कुम्भलगढ़ टाइगर प्रोजेक्ट | राजसमंद |
|
| 3 | दर्रा वन्यजीव अभयारण्य | कोटा, झालावाड़ |
|
| 4 | जयसमंद अभयारण्य | सलूम्बर |
|
| 5 | तालछापर अभयारण्य | चूरू |
|
| 6 | कुम्भलगढ़ अभयारण्य | राजसमंद, पाली, उदयपुर |
|
| 7 | जवाहर सागर अभयारण्य | बूंदी, कोटा, चित्तौड़गढ़ |
|
| 8 | सीतामाता अभयारण्य | चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ |
|
| 9 | राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभयारण्य | राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश |
|
| 10 | राष्ट्रीय मरू अभयारण्य (डेजर्ट नेशनल पार्क) | जैसलमेर, बाड़मेर |
|
| 11 | कैलादेवी अभयारण्य | करौली, सवाईमाधोपुर |
|
| 12 | नाहरगढ़ अभयारण्य | जयपुर |
|
| 13 | जमवारामगढ़ अभयारण्य | जयपुर |
|
| 14 | भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य | चित्तौड़गढ़ |
|
| 15 | बस्सी अभयारण्य | चित्तौड़गढ़ |
|
| 16 | शेरगढ़ अभयारण्य | बारां |
|
| 17 | टॉडगढ़-रावली अभयारण्य | ब्यावर, पाली, राजसमंद |
|
| 18 | फुलवारी की नाल अभयारण्य | उदयपुर |
|
| 19 | सवाई मानसिंह अभयारण्य | सवाईमाधोपुर | • — |
| 20 | बन्ध बारेठा अभयारण्य | भरतपुर | • — |
| 21 | वनविहार अभयारण्य | धौलपुर | • — |
| 22 | सवाईमाधोपुर अभयारण्य | सवाईमाधोपुर | • — |
| 23 | रामसागर अभयारण्य | धौलपुर | • — |
| 24 | केसरबाग अभयारण्य | धौलपुर | • — |
| 25 | सज्जनगढ़ अभयारण्य | उदयपुर |
|
| 26 | माउंट आबू अभयारण्य | सिरोही |
|
| 27 | सरिस्का ‘अ’ अभयारण्य | अलवर |
|
| – | गनेर अभयारण्य | बीकानेर |
|
| – | भैरोंदेव डाकव अभयारण्य | अलवर |
|
❖ क्षेत्रफल के आधार पर राजस्थान के प्रमुख अभयारण्य
| श्रेणी | अभयारण्य |
|---|---|
| क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़े अभयारण्य | 1. राष्ट्रीय मरू अभयारण्य |
| 2. कैलादेवी अभयारण्य | |
| 3. कुम्भलगढ़ अभयारण्य | |
| 4. राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभयारण्य | |
| क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटे अभयारण्य | 1. सरिस्का ‘अ’ अभयारण्य |
| 2. सज्जनगढ़ अभयारण्य | |
| 3. तालछापर अभयारण्य | |
| 4. केसरबाग अभयारण्य |
राजस्थान के मृगवन एवं बायोलॉजिकल पार्क
❖ राजस्थान के मृगवन – 7
| क्रमांक | मृगवन | स्थान | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|
| 1 | चित्तौड़गढ़ मृगवन | चित्तौड़गढ़ | राजस्थान का सबसे प्राचीन मृगवन |
| 2 | सज्जनगढ़ मृगवन | उदयपुर | — |
| 3 | पुष्कर मृगवन | अजमेर | — |
| 4 | माचिया सफारी पार्क | जोधपुर | — |
| 5 | अशोक विहार | जयपुर | — |
| 6 | संजय उद्यान | शाहपुरा (जयपुर) | — |
| 7 | अमृता देवी मृगवन | खेजड़ली (जोधपुर) | — |
❖ राजस्थान में बायोलॉजिकल पार्क (जैविक उद्यान) – 4
| क्रमांक | बायोलॉजिकल पार्क | स्थान | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|
| 1 | सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क | उदयपुर | राजस्थान का प्रथम बायोलॉजिकल पार्क |
| 2 | माचिया बायोलॉजिकल पार्क | जोधपुर | — |
| 3 | नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क | जयपुर | — |
| 4 | अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क | कोटा | — |
❖ निर्माणाधीन बायोलॉजिकल पार्क
| क्रमांक | बायोलॉजिकल पार्क | स्थान | स्थिति |
|---|---|---|---|
| 1 | मरूधरा बायोलॉजिकल पार्क | बीकानेर | निर्माणाधीन |
| 2 | पुष्कर जैविक उद्यान | पुष्कर (अजमेर) | निर्माणाधीन |
| 3 | अलवर बायोलॉजिकल पार्क | अलवर | निर्माणाधीन |
| 4 | भरतपुर बायोलॉजिकल पार्क | भरतपुर | बजट 2025-26 में घोषणा |
❖ राजस्थान में जंतुालय – 4
| क्रमांक | जंतुालय | स्थान | प्रमुख विशेषताएँ |
|---|---|---|---|
| 1 | जयपुर जंतुालय | रामनिवास बाग (जयपुर) |
|
| 2 | उदयपुर जंतुालय | गुलाबबाग (उदयपुर) |
|
| 3 | बीकानेर जंतुालय | बीकानेर | • — |
| 4 | कोटा जंतुालय | कोटा |
|
❖ राजस्थान के कन्जर्वेशन रिजर्व – 37
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| राजस्थान में सर्वाधिक कन्जर्वेशन रिजर्व वाला जिला | बारां |
| राजस्थान का सबसे बड़ा कन्जर्वेशन रिजर्व | बालेश्वर (सीकर) |
| राजस्थान का सबसे छोटा कन्जर्वेशन रिजर्व | बीड मुहाना B (जयपुर) |
| क्रमांक | कन्जर्वेशन रिजर्व | स्थान | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|
| 1 | बीसलपुर कन्जर्वेशन रिजर्व | टोंक | — |
| 2 | जोड़बीड़ | बीकानेर | — |
| 3 | सुंधामाता | जालौर, सिरोही | देश का प्रथम भालू अभयारण्य |
| 4 | गुढ़ा विश्नोईयान | जोधपुर | — |
| 5 | शाकम्भरी | सीकर, झुंझुनूं | — |
| 6 | गोगेलाव | नागौर | — |
| 7 | बीड | झुंझुनूं | — |
| 8 | रोटू | नागौर | — |
| 9 | उम्मेदगंज पक्षी विहार | कोटा | — |
| 10 | जवाई बाँध | पाली | — |
| 11 | बांसियाल खेतड़ी | झुंझुनूं | — |
| 12 | बांसियाल खेतड़ी बागोर | झुंझुनूं | — |
| 13 | जवाई बाँध 2 | पाली | — |
| 14 | मनसा माता | झुंझुनूं | — |
| 15 | शाहबाद | बारां | — |
| 16 | रणखार | जालौर | जंगली गधों के लिए प्रसिद्ध |
| 17 | शाहबाद तलहटी | बारां | — |
| 18 | बीड घास फूलिया | भीलवाड़ा | — |
| 19 | बाघदड़ा क्रोकोडाइल | उदयपुर | भंस्मरख |
| 20 | वाडाखेड़ा बीड | सिरोही | — |
| 21 | झालाना आमागढ़ | जयपुर | — |
| 22 | रामगढ़ | बारां | — |
| 23 | खरमोर | अजमेर | — |
| 24 | हमीरगढ़ | भीलवाड़ा | — |
| 25 | सोरसन 1 | बारां | — |
| 26 | सोरसन 2 | बारां | — |
| 27 | सोरसन 3 | बारां | — |
| 28 | कुरजां | फलौदी | — |
| 29 | बांझ आमली | बारां | — |
| 30 | बालेश्वर | सीकर | राजस्थान का सबसे बड़ा कन्जर्वेशन रिजर्व |
| 31 | बीड मुहाना A | जयपुर | — |
| 32 | बीड मुहाना B | जयपुर | राजस्थान का सबसे छोटा कन्जर्वेशन रिजर्व |
| 33 | गंगा भैरव घाटी | अजमेर | — |
| 34 | महासीर | उदयपुर | — |
| 35 | बीड फतेहपुर | सीकर | — |
| 36 | अमरख महादेव लेपर्ड | उदयपुर | — |
| 37 | आसोप | शाहपुरा (भीलवाड़ा) | 27 अगस्त 2024 को ब्लैक बक संरक्षण रिजर्व के रूप में विकसित |
| 38 | बुचारा मेन | कोटपुतली | — |
| 39 | मोकला पारेवर | जैसलमेर | — |
| 40 | खेजड़ली कलां | जोधपुर | — |
- आसोप कन्जर्वेशन रिजर्व को 27 अगस्त 2024 को काले हिरणों (ब्लैक बक) के संरक्षण हेतु विकसित किया गया।
- सुंधा माता कन्जर्वेशन रिजर्व को देश के प्रथम भालू अभयारण्य के रूप में विकसित किया गया।
❖ राजस्थान में आखेट निषिद्ध क्षेत्र – 33
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| सर्वाधिक आखेट निषिद्ध क्षेत्र वाले जिले | बीकानेर एवं जोधपुर |
| राजस्थान का सबसे बड़ा आखेट निषिद्ध क्षेत्र | संवत्सर कोटसर (बीकानेर) |
| राजस्थान का सबसे छोटा आखेट निषिद्ध क्षेत्र | कनक सागर (बूंदी) |
❖ आखेट निषिद्ध क्षेत्र
| क्रमांक | आखेट निषिद्ध क्षेत्र | जिला |
|---|---|---|
| 1 | डोली | जोधपुर |
| 2 | लोहावट | फलौदी |
| 3 | साथिन | जोधपुर |
| 4 | गुढ़ा विश्नोई | जोधपुर |
| 5 | फीटकाशनी | जोधपुर |
| 6 | जम्भेश्वर जी | जोधपुर |
| 7 | डेचूं | फलौदी |
| 8 | धोरीमन्ना | बाड़मेर |
| 9 | उज्जला | जैसलमेर |
| 10 | रामदेवरा | जैसलमेर |
| 11 | देशनोक | बीकानेर |
| 12 | जोड़बीड़ | बीकानेर |
| 13 | बज्जू | बीकानेर |
| 14 | दियात्रा | बीकानेर |
| 15 | संवत्सर कोटसर | बीकानेर |
| 16 | मुकाम | बीकानेर |
| 17 | सैंथल सागर | दौसा |
| 18 | महलां | जयपुर |
| 19 | बरदोद | कोटपूतली-बहरोड़ |
| 20 | जोड़िया | खैरथल-तिजारा |
| 21 | रानीपुरा | टोंक |
| 22 | कवाल जी | सवाईमाधोपुर |
| 23 | बागदड़ा | उदयपुर |
| 24 | कनक सागर | बूंदी |
| 25 | सोरसन | बारां |
| 26 | सौखलिया | अजमेर |
| 27 | गंगवाना | अजमेर |
| 28 | तिलोरा | अजमेर |
| 29 | मेनाल | चित्तौड़गढ़ |
| 30 | जरोदा | नागौर |
| 31 | रोटू | नागौर |
| 32 | सांचौर | जालौर |
| 33 | जवाई बाँध | पाली |
❖ राजस्थान के जिलों के वन्यजीव शुभंकर (2016)
| क्रमांक | जिला | वन्यजीव (शुभंकर) |
|---|---|---|
| 1 | गंगानगर | चिंकारा |
| 2 | हनुमानगढ़ | छोटा किलकिल |
| 3 | चूरू | काला हिरण |
| 4 | बीकानेर | भट्ट तीतर |
| 5 | झुंझुनूं | काला तीतर |
| 6 | सीकर | शाहीन |
| 7 | जयपुर | चीतल |
| 8 | अलवर | सांभर |
| 9 | दौसा | खरगोश |
| 10 | भरतपुर | सारस |
| 11 | धौलपुर | पंचीडा |
| 12 | करौली | घड़ियाल |
| 13 | सवाईमाधोपुर | बाघ |
| 14 | कोटा | उदबिलाव |
| 15 | बूंदी | सुर्खाब |
| 16 | बारां | मगरमच्छ |
| 17 | झालावाड़ | गागरोनी तोता |
| 18 | चित्तौड़गढ़ | चौसिंगा |
| 19 | प्रतापगढ़ | उड़न गिलहरी |
| 20 | बाँसवाड़ा | जलपीपी |
| 21 | डूंगरपुर | जांघिल |
| 22 | उदयपुर | बिज्जू |
| 23 | राजसमंद | भेड़िया |
| 24 | सिरोही | जंगली मुर्गा |
| 25 | जालौर | भालू |
| 26 | बाड़मेर | लोमड़ी |
| 27 | जैसलमेर | गोडावण |
| 28 | जोधपुर | कुरजां |
| 29 | पाली | तेन्दुआ |
| 30 | अजमेर | खड़मोर |
| 31 | भीलवाड़ा | मोर |
| 32 | टोंक | हंस |
| 33 | नागौर | राजहंस |
❖ लेपर्ड (तेंदुआ) सफारी
- पैंथर (तेंदुओं) के संरक्षण के लिए यह योजना संचालित की जा रही है।
- झालाना (जयपुर) देश का प्रथम लेपर्ड प्रोजेक्ट है।
- यह आमागढ़ (जयपुर), टॉडगढ़-रावली, कुम्भलगढ़, जयसमंद (सलूम्बर), खेतड़ी बांसियाल (झुंझुनूं), शेरगढ़ (बारां), माउंट आबू (सिरोही), जवाई बाँध (पाली), बस्सी अभयारण्य (चित्तौड़गढ़) तथा सीतामाता अभयारण्य (प्रतापगढ़) में संचालित है।
❖ अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
- गमधर जैव विविधता पार्क – उदयपुर : यह चंदन के वृक्षों का संरक्षण क्षेत्र है।
- किशन बाग – जयपुर : यहाँ रेगिस्तान पार्क विकसित किया गया है।
- जोड़बीड़ (बीकानेर) राजस्थान का प्रथम एवं भारत का तीसरा गिद्ध कन्जर्वेशन रिजर्व है।
- दाऊलाल बोहरा (बीकानेर) गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत हैं।
- उदयपुर का मेनार गाँव (पक्षी गाँव) पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है।
- राजस्थान का प्रथम बर्ड पार्क – उदयपुर
- राजस्थान का पहला स्नेक पार्क (सर्प उद्यान) – कोटा
- Captive Animal Sponsorship Scheme के अंतर्गत वन्यजीवों को आमजन, संस्थाओं एवं वन्यजीव प्रेमियों द्वारा गोद लेने हेतु योजना प्रारम्भ की गई।
- राजस्थान स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी की स्थापना 2018 में की गई।
- राजस्थान में अधिसूचित वेटलैंड की संख्या 76 है।
- अथर्ववेद में वर्णित ‘भूमि सूक्त’ पर्यावरण जागरूकता से संबंधित प्रथम लिखित दस्तावेज है।
❖ राजस्थान में रामसर साइट – 4
- केवलादेव घना – 1981
- सांभर झील – 1990
- खींचन (फलौदी) – 2025
- मेनार, उदयपुर – 2025
