राजस्थान वन्यजीव अभयारण्य

❖ राजस्थान वन्यजीव अभयारण्य

  • भारत सरकार द्वारा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 लागू किया गया, जिसे राजस्थान सरकार ने 1 सितम्बर 1973 को लागू किया।
  • 42वें संविधान संशोधन, 1976 द्वारा वन्यजीव विषय को समवर्ती सूची का विषय बनाया गया, जिसके अंतर्गत भारत सरकार एवं राज्य सरकार दोनों इस पर कानून बना सकती हैं।

❖ चिंकारा

  • वैज्ञानिक नाम – गजेला बनेट्टी (Gazella bennettii)
  • 22 मई 1981 को इसे राजस्थान का राज्य पशु घोषित किया गया।
  • राष्ट्रीय मरू उद्यान एवं नाहरगढ़ अभयारण्य में बड़ी संख्या में चिंकारा देखने को मिलते हैं।

❖ ऊँट

  • वैज्ञानिक नाम – कैमेलस ड्रोमेडेरियस (Camelus dromedarius)
  • 19 सितम्बर 2014 को इसे राजस्थान का राज्य पशु (पालतू पशु) घोषित किया गया।

❖ गोडावण

  • वैज्ञानिक नाम – क्रायोटिस नाइग्रीसेप्स (Choriotis nigriceps)
  • उपनाम – सोहन चिड़िया, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, माल मोरड़ी (अजमेर)
  • 21 मई 1981 को इसे राजस्थान का राज्य पक्षी घोषित किया गया।

❖ प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड

  • 2013 में गोडावण के संरक्षण हेतु राष्ट्रीय मरू उद्यान में इस परियोजना को प्रारम्भ किया गया।
  • प्रोजेक्ट बस्टर्ड प्रारम्भ करने वाला राजस्थान देश का प्रथम राज्य है।
  • भारत सरकार ने 1 अप्रैल 1973 को बाघ परियोजना प्रारम्भ की तथा बाघ को राष्ट्रीय पशु घोषित किया।
  • राजस्थान में वर्तमान में 5 बाघ परियोजनाएँ संचालित हैं।
  • राजस्थान में 3 राष्ट्रीय उद्यान एवं 27 वन्यजीव अभयारण्य हैं।
  • राष्ट्रीय उद्यान केन्द्र सरकार द्वारा संचालित होते हैं।
  • भारत का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान जिम कार्बेट नेशनल पार्क (उत्तराखण्ड) है, जिसका वर्तमान नाम रामगंगा नेशनल पार्क है।

(1) रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान – सवाईमाधोपुर

  • स्थापना – 1955
  • 1973 में यहाँ टाइगर प्रोजेक्ट (प्रथम टाइगर प्रोजेक्ट) प्रारम्भ किया गया।
  • 1 नवम्बर 1980 को इसे राजस्थान का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया।
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से यह राजस्थान का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है।
  • रणथम्भौर को भारतीय बाघों का घर कहा जाता है।
  • इस अभयारण्य में लाल सिर वाले तोते एवं काला गरुड़ पाए जाते हैं।
  • कूनो अभयारण्य (मध्यप्रदेश) को आबाद करने हेतु रणथम्भौर से गुना (मध्यप्रदेश) तक बाघ गलियारा (Tiger Corridor) बनाए जाने का प्रस्ताव है।

❖ इण्डिया इको डेवलपमेंट कार्यक्रम

  • जैव विविधता के संरक्षण हेतु विश्व बैंक की आर्थिक सहायता से भारत सरकार द्वारा 1996-97 में 7 स्थानों पर यह योजना प्रारम्भ की गई, जिनमें रणथम्भौर बाघ परियोजना भी शामिल है।

❖ भैरुपुरा गाँव

  • रणथम्भौर टाइगर रिजर्व की परिधि में स्थित 110 परिवारों वाले इस गाँव को स्थानांतरित किया जाना है।

❖ (2) केवलादेव (घना) राष्ट्रीय उद्यान – भरतपुर

  • यहाँ भगवान शिव (कैलाश) का केवलादेव मंदिर स्थित होने के कारण इसका नाम केवलादेव घना अभयारण्य पड़ा।
  • स्थापना – 1956
  • 1981 में इसे राजस्थान का दूसरा राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया।
  • यह राजस्थान का सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान है।
  • इसे पक्षियों का स्वर्ग तथा पक्षियों की सबसे बड़ी प्रजनन स्थली के रूप में जाना जाता है।
  • यहाँ पक्षी प्रजातियों की सर्वाधिक विविधता पाई जाती है।
  • 1985 में यूनेस्को द्वारा इसे विश्व प्राकृतिक धरोहर में शामिल किया गया तथा यह राजस्थान का एकमात्र अभयारण्य है जिसे यह दर्जा प्राप्त है।
  • यह स्वर्णिम त्रिकोण पर्यटक परिपथ पर स्थित है।
  • इसमें बाणगंगा एवं गंभीरी नदियाँ बहती हैं।
  • इस अभयारण्य में शीत ऋतु के दौरान प्रवासी पक्षी साइबेरियन सारस आता है।
  • 1981 में इसे राजस्थान की प्रथम रामसर साइट (वेटलैण्ड स्थल) में शामिल किया गया।
  • यह पक्षी वैज्ञानिक डॉ. सलीम अली की कार्यस्थली रही है।

नोट – “भरतपुर बर्ड पैराडाइज” पुस्तक के लेखक मार्टिन इंवास हैं।

❖ (3) मुकन्दरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान – कोटा, चित्तौड़गढ़

  • 1955 में इसे अभयारण्य घोषित किया गया तथा 9 जनवरी 2012 को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया।
  • पुराना नाम – दर्रा अभयारण्य
  • 2013 में इसे बाघ परियोजना का दर्जा दिया गया, जो राजस्थान का तीसरा टाइगर प्रोजेक्ट है।
  • यह टाइगर प्रोजेक्ट कोटा, बूंदी, झालावाड़ एवं चित्तौड़गढ़ जिलों में फैला हुआ है।
  • चम्बल, कालीसिंध एवं आहू नदियाँ इसमें होकर बहती हैं।
  • यह अभयारण्य गागरोनी तोते के लिए प्रसिद्ध है।

❖ अभयारण्य

  • पशु-पक्षियों के विहार हेतु संरक्षित क्षेत्र को अभयारण्य कहा जाता है।
  • राजस्थान में 27 वन्यजीव अभयारण्य हैं।
क्रमांक अभयारण्य / टाइगर प्रोजेक्ट स्थान प्रमुख विशेषताएँ
1 सरिस्का बाघ अभयारण्य अलवर
  • स्थापना – 1 नवम्बर 1955
  • राजस्थान का दूसरा टाइगर प्रोजेक्ट
  • यहाँ रॉयल बंगाल टाइगर पाए जाते हैं।
  • हरे कबूतरों (हरियल पक्षी) के लिए प्रसिद्ध।
  • यहाँ भर्तृहरि मंदिर, नीलकंठ महादेव मंदिर तथा पांडुपोल मंदिर स्थित हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार 1 किमी क्षेत्र में खनन गतिविधियों पर रोक है।
  • महाराजा तेजसिंह के समय तैयार फॉरेस्ट सेटलमेंट रिपोर्ट को पीली किताब कहा जाता है।
रेड डाटा बुक
  • विश्व के संकटग्रस्त जीव-जंतुओं एवं पादपों के लाल आँकड़ों का संकलन रेड डाटा बुक कहलाता है।
2 रामगढ़ विषधारी अभयारण्य बूंदी, कोटा
  • इसे अजगर की शरणस्थली कहा जाता है।
  • मेज नदी इसी अभयारण्य से होकर गुजरती है।
  • यह राजस्थान का चौथा एवं देश का 52वाँ टाइगर प्रोजेक्ट है।
धौलपुर-करौली टाइगर प्रोजेक्ट धौलपुर, करौली
  • राजस्थान का 5वाँ तथा देश का 55वाँ टाइगर प्रोजेक्ट
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान की सबसे छोटी बाघ परियोजना
कुम्भलगढ़ टाइगर प्रोजेक्ट राजसमंद
  • राजस्थान का छठा टाइगर प्रोजेक्ट प्रस्तावित है।
3 दर्रा वन्यजीव अभयारण्य कोटा, झालावाड़
  • यह अभयारण्य राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर प्रोजेक्ट दोनों का हिस्सा है।
4 जयसमंद अभयारण्य सलूम्बर
  • यह जयसमंद झील के आसपास स्थित है।
  • उपनाम – जलचरों की बस्ती
5 तालछापर अभयारण्य चूरू
  • काले हिरणों (कृष्ण मृग) के लिए प्रसिद्ध।
  • यहाँ मोथिया घास (मोथा) पाई जाती है।
  • प्रवासी पक्षी कुरजां (डेमोइसेल क्रेन) आता है।
  • यह पक्षी खींचन गाँव (फलौदी) में भी आता है।
  • महाभारत काल में यहाँ गुरु द्रोणाचार्य का आश्रम था।
  • यहाँ वन्यजीव प्रबंधन एवं रेगिस्तान पारितंत्र प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित है।
6 कुम्भलगढ़ अभयारण्य राजसमंद, पाली, उदयपुर
  • उपनाम – भेड़ियों की प्रजनन स्थली
  • चन्दन के वनों के लिए प्रसिद्ध।
  • यहाँ चौसिंगा (चार सींग) पाया जाता है।
7 जवाहर सागर अभयारण्य बूंदी, कोटा, चित्तौड़गढ़
  • चम्बल नदी इस अभयारण्य से होकर गुजरती है।
  • यहाँ उत्तर भारत का प्रथम सर्प उद्यान स्थित है।
  • गेपरनाथ महादेव एवं गरड़िया महादेव मंदिर स्थित हैं।
8 सीतामाता अभयारण्य चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़
  • उपनाम – चीतल की मातृभूमि
  • यहाँ दुर्लभ प्रकार की औषधियाँ एवं सागवान के वन पाए जाते हैं।
  • यहाँ भेड़ल (घंटेल) नामक चौसिंगा पाया जाता है।
  • यह उड़न गिलहरी के लिए प्रसिद्ध है तथा इसे उड़न गिलहरियों का स्वर्ग कहा जाता है।
9 राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभयारण्य राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश
  • राजस्थान के 5 जिलों में फैला है।
  • यह एकमात्र नदी अभयारण्य है।
  • इसे जलीय जीवों की प्रजनन स्थली एवं घड़ियालों का संसार कहा जाता है।
  • यहाँ गांगेय सुस डॉल्फिन पाई जाती है।
  • घड़ियाल रिपेयरिंग सेंटर – पलीघाट, सवाईमाधोपुर
10 राष्ट्रीय मरू अभयारण्य (डेजर्ट नेशनल पार्क) जैसलमेर, बाड़मेर
  • क्षेत्रफल – 3162 वर्ग किमी
  • राजस्थान का सबसे बड़ा अभयारण्य
  • स्थापना – 4 अगस्त 1980
  • इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा प्राप्त नहीं है
  • उपनाम – गोडावण की शरणस्थली
  • लाठी सीरीज एवं आकल वुड फॉसिल्स पार्क यहीं स्थित हैं।
11 कैलादेवी अभयारण्य करौली, सवाईमाधोपुर
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा अभयारण्य
12 नाहरगढ़ अभयारण्य जयपुर
  • यहाँ देश का तीसरा बीयर रेस्क्यू सेंटर (भालू बचाव केन्द्र) स्थापित है।
13 जमवारामगढ़ अभयारण्य जयपुर
  • बाणगंगा नदी इस अभयारण्य से होकर बहती है।
14 भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य चित्तौड़गढ़
  • यह चम्बल एवं बामनी नदियों के संगम पर स्थित है।
15 बस्सी अभयारण्य चित्तौड़गढ़
  • यहाँ बामनी एवं ओराई नदियाँ बहती हैं।
16 शेरगढ़ अभयारण्य बारां
  • उपनाम – साँपों की शरणस्थली
  • परवन नदी इस अभयारण्य से होकर बहती है।
17 टॉडगढ़-रावली अभयारण्य ब्यावर, पाली, राजसमंद
  • इसका नाम कर्नल जेम्स टॉड के नाम पर रखा गया है।
  • यह अजमेर, जोधपुर एवं उदयपुर संभागों में फैला हुआ है।
  • यह रीछ एवं जरखों के लिए प्रसिद्ध है।
18 फुलवारी की नाल अभयारण्य उदयपुर
  • यहाँ मानसी, वाकल एवं सोम नदियाँ बहती हैं।
19 सवाई मानसिंह अभयारण्य सवाईमाधोपुर • —
20 बन्ध बारेठा अभयारण्य भरतपुर • —
21 वनविहार अभयारण्य धौलपुर • —
22 सवाईमाधोपुर अभयारण्य सवाईमाधोपुर • —
23 रामसागर अभयारण्य धौलपुर • —
24 केसरबाग अभयारण्य धौलपुर • —
25 सज्जनगढ़ अभयारण्य उदयपुर
  • यहाँ सज्जनगढ़ किला बांसदरा पहाड़ी पर स्थित है।
26 माउंट आबू अभयारण्य सिरोही
  • राजस्थान का सबसे ऊँचा अभयारण्य
  • जंगली मुर्गों के लिए प्रसिद्ध।
  • राज्य सरकार ने माउंट आबू को इको सेंसिटिव जोन घोषित किया है।
27 सरिस्का ‘अ’ अभयारण्य अलवर
  • यह राजस्थान का सबसे छोटा अभयारण्य है।
गनेर अभयारण्य बीकानेर
  • यह बटबड़ पक्षी (रेत का तीतर) के लिए प्रसिद्ध है।
  • यहाँ गनेर झील एवं गनेर महल स्थित हैं।
भैरोंदेव डाकव अभयारण्य अलवर
  • इसे स्थानीय लोगों द्वारा अपने स्तर पर अभयारण्य घोषित किया गया है।

❖ क्षेत्रफल के आधार पर राजस्थान के प्रमुख अभयारण्य

श्रेणी अभयारण्य
क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़े अभयारण्य 1. राष्ट्रीय मरू अभयारण्य
2. कैलादेवी अभयारण्य
3. कुम्भलगढ़ अभयारण्य
4. राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभयारण्य
क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटे अभयारण्य 1. सरिस्का ‘अ’ अभयारण्य
2. सज्जनगढ़ अभयारण्य
3. तालछापर अभयारण्य
4. केसरबाग अभयारण्य

राजस्थान के मृगवन एवं बायोलॉजिकल पार्क

❖ राजस्थान के मृगवन – 7
क्रमांक मृगवन स्थान विशेष तथ्य
1 चित्तौड़गढ़ मृगवन चित्तौड़गढ़ राजस्थान का सबसे प्राचीन मृगवन
2 सज्जनगढ़ मृगवन उदयपुर
3 पुष्कर मृगवन अजमेर
4 माचिया सफारी पार्क जोधपुर
5 अशोक विहार जयपुर
6 संजय उद्यान शाहपुरा (जयपुर)
7 अमृता देवी मृगवन खेजड़ली (जोधपुर)
❖ राजस्थान में बायोलॉजिकल पार्क (जैविक उद्यान) – 4
क्रमांक बायोलॉजिकल पार्क स्थान विशेष तथ्य
1 सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क उदयपुर राजस्थान का प्रथम बायोलॉजिकल पार्क
2 माचिया बायोलॉजिकल पार्क जोधपुर
3 नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क जयपुर
4 अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क कोटा
❖ निर्माणाधीन बायोलॉजिकल पार्क
क्रमांक बायोलॉजिकल पार्क स्थान स्थिति
1 मरूधरा बायोलॉजिकल पार्क बीकानेर निर्माणाधीन
2 पुष्कर जैविक उद्यान पुष्कर (अजमेर) निर्माणाधीन
3 अलवर बायोलॉजिकल पार्क अलवर निर्माणाधीन
4 भरतपुर बायोलॉजिकल पार्क भरतपुर बजट 2025-26 में घोषणा

❖ राजस्थान में जंतुालय – 4

क्रमांक जंतुालय स्थान प्रमुख विशेषताएँ
1 जयपुर जंतुालय रामनिवास बाग (जयपुर)
  • सवाई रामसिंह द्वितीय द्वारा 1876 में स्थापित किया गया।
  • यहाँ तेंदुओं की देखभाल हेतु तेंदुआ पुनर्वास कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया।
2 उदयपुर जंतुालय गुलाबबाग (उदयपुर)
  • 1878 में स्वरूप सिंह द्वारा स्थापित किया गया।
3 बीकानेर जंतुालय बीकानेर • —
4 कोटा जंतुालय कोटा
  • यह राज्य का नवीनतम जंतुालय है।

❖ राजस्थान के कन्जर्वेशन रिजर्व – 37

श्रेणी विवरण
राजस्थान में सर्वाधिक कन्जर्वेशन रिजर्व वाला जिला बारां
राजस्थान का सबसे बड़ा कन्जर्वेशन रिजर्व बालेश्वर (सीकर)
राजस्थान का सबसे छोटा कन्जर्वेशन रिजर्व बीड मुहाना B (जयपुर)
क्रमांक कन्जर्वेशन रिजर्व स्थान विशेष तथ्य
1 बीसलपुर कन्जर्वेशन रिजर्व टोंक
2 जोड़बीड़ बीकानेर
3 सुंधामाता जालौर, सिरोही देश का प्रथम भालू अभयारण्य
4 गुढ़ा विश्नोईयान जोधपुर
5 शाकम्भरी सीकर, झुंझुनूं
6 गोगेलाव नागौर
7 बीड झुंझुनूं
8 रोटू नागौर
9 उम्मेदगंज पक्षी विहार कोटा
10 जवाई बाँध पाली
11 बांसियाल खेतड़ी झुंझुनूं
12 बांसियाल खेतड़ी बागोर झुंझुनूं
13 जवाई बाँध 2 पाली
14 मनसा माता झुंझुनूं
15 शाहबाद बारां
16 रणखार जालौर जंगली गधों के लिए प्रसिद्ध
17 शाहबाद तलहटी बारां
18 बीड घास फूलिया भीलवाड़ा
19 बाघदड़ा क्रोकोडाइल उदयपुर भंस्मरख
20 वाडाखेड़ा बीड सिरोही
21 झालाना आमागढ़ जयपुर
22 रामगढ़ बारां
23 खरमोर अजमेर
24 हमीरगढ़ भीलवाड़ा
25 सोरसन 1 बारां
26 सोरसन 2 बारां
27 सोरसन 3 बारां
28 कुरजां फलौदी
29 बांझ आमली बारां
30 बालेश्वर सीकर राजस्थान का सबसे बड़ा कन्जर्वेशन रिजर्व
31 बीड मुहाना A जयपुर
32 बीड मुहाना B जयपुर राजस्थान का सबसे छोटा कन्जर्वेशन रिजर्व
33 गंगा भैरव घाटी अजमेर
34 महासीर उदयपुर
35 बीड फतेहपुर सीकर
36 अमरख महादेव लेपर्ड उदयपुर
37 आसोप शाहपुरा (भीलवाड़ा) 27 अगस्त 2024 को ब्लैक बक संरक्षण रिजर्व के रूप में विकसित
38 बुचारा मेन कोटपुतली
39 मोकला पारेवर जैसलमेर
40 खेजड़ली कलां जोधपुर
  • आसोप कन्जर्वेशन रिजर्व को 27 अगस्त 2024 को काले हिरणों (ब्लैक बक) के संरक्षण हेतु विकसित किया गया।
  • सुंधा माता कन्जर्वेशन रिजर्व को देश के प्रथम भालू अभयारण्य के रूप में विकसित किया गया।

❖ राजस्थान में आखेट निषिद्ध क्षेत्र – 33

श्रेणी विवरण
सर्वाधिक आखेट निषिद्ध क्षेत्र वाले जिले बीकानेर एवं जोधपुर
राजस्थान का सबसे बड़ा आखेट निषिद्ध क्षेत्र संवत्सर कोटसर (बीकानेर)
राजस्थान का सबसे छोटा आखेट निषिद्ध क्षेत्र कनक सागर (बूंदी)
❖ आखेट निषिद्ध क्षेत्र
क्रमांक आखेट निषिद्ध क्षेत्र जिला
1 डोली जोधपुर
2 लोहावट फलौदी
3 साथिन जोधपुर
4 गुढ़ा विश्नोई जोधपुर
5 फीटकाशनी जोधपुर
6 जम्भेश्वर जी जोधपुर
7 डेचूं फलौदी
8 धोरीमन्ना बाड़मेर
9 उज्जला जैसलमेर
10 रामदेवरा जैसलमेर
11 देशनोक बीकानेर
12 जोड़बीड़ बीकानेर
13 बज्जू बीकानेर
14 दियात्रा बीकानेर
15 संवत्सर कोटसर बीकानेर
16 मुकाम बीकानेर
17 सैंथल सागर दौसा
18 महलां जयपुर
19 बरदोद कोटपूतली-बहरोड़
20 जोड़िया खैरथल-तिजारा
21 रानीपुरा टोंक
22 कवाल जी सवाईमाधोपुर
23 बागदड़ा उदयपुर
24 कनक सागर बूंदी
25 सोरसन बारां
26 सौखलिया अजमेर
27 गंगवाना अजमेर
28 तिलोरा अजमेर
29 मेनाल चित्तौड़गढ़
30 जरोदा नागौर
31 रोटू नागौर
32 सांचौर जालौर
33 जवाई बाँध पाली

❖ राजस्थान के जिलों के वन्यजीव शुभंकर (2016)

क्रमांक जिला वन्यजीव (शुभंकर)
1 गंगानगर चिंकारा
2 हनुमानगढ़ छोटा किलकिल
3 चूरू काला हिरण
4 बीकानेर भट्ट तीतर
5 झुंझुनूं काला तीतर
6 सीकर शाहीन
7 जयपुर चीतल
8 अलवर सांभर
9 दौसा खरगोश
10 भरतपुर सारस
11 धौलपुर पंचीडा
12 करौली घड़ियाल
13 सवाईमाधोपुर बाघ
14 कोटा उदबिलाव
15 बूंदी सुर्खाब
16 बारां मगरमच्छ
17 झालावाड़ गागरोनी तोता
18 चित्तौड़गढ़ चौसिंगा
19 प्रतापगढ़ उड़न गिलहरी
20 बाँसवाड़ा जलपीपी
21 डूंगरपुर जांघिल
22 उदयपुर बिज्जू
23 राजसमंद भेड़िया
24 सिरोही जंगली मुर्गा
25 जालौर भालू
26 बाड़मेर लोमड़ी
27 जैसलमेर गोडावण
28 जोधपुर कुरजां
29 पाली तेन्दुआ
30 अजमेर खड़मोर
31 भीलवाड़ा मोर
32 टोंक हंस
33 नागौर राजहंस

लेपर्ड (तेंदुआ) सफारी

  • पैंथर (तेंदुओं) के संरक्षण के लिए यह योजना संचालित की जा रही है।
  • झालाना (जयपुर) देश का प्रथम लेपर्ड प्रोजेक्ट है।
  • यह आमागढ़ (जयपुर), टॉडगढ़-रावली, कुम्भलगढ़, जयसमंद (सलूम्बर), खेतड़ी बांसियाल (झुंझुनूं), शेरगढ़ (बारां), माउंट आबू (सिरोही), जवाई बाँध (पाली), बस्सी अभयारण्य (चित्तौड़गढ़) तथा सीतामाता अभयारण्य (प्रतापगढ़) में संचालित है।

अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

  • गमधर जैव विविधता पार्क – उदयपुर : यह चंदन के वृक्षों का संरक्षण क्षेत्र है।
  • किशन बाग – जयपुर : यहाँ रेगिस्तान पार्क विकसित किया गया है।
  • जोड़बीड़ (बीकानेर) राजस्थान का प्रथम एवं भारत का तीसरा गिद्ध कन्जर्वेशन रिजर्व है।
  • दाऊलाल बोहरा (बीकानेर) गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत हैं।
  • उदयपुर का मेनार गाँव (पक्षी गाँव) पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है।
  • राजस्थान का प्रथम बर्ड पार्कउदयपुर
  • राजस्थान का पहला स्नेक पार्क (सर्प उद्यान)कोटा
  • Captive Animal Sponsorship Scheme के अंतर्गत वन्यजीवों को आमजन, संस्थाओं एवं वन्यजीव प्रेमियों द्वारा गोद लेने हेतु योजना प्रारम्भ की गई।
  • राजस्थान स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी की स्थापना 2018 में की गई।
  • राजस्थान में अधिसूचित वेटलैंड की संख्या 76 है।
  • अथर्ववेद में वर्णित ‘भूमि सूक्त’ पर्यावरण जागरूकता से संबंधित प्रथम लिखित दस्तावेज है।

राजस्थान में रामसर साइट – 4

  • केवलादेव घना1981
  • सांभर झील1990
  • खींचन (फलौदी)2025
  • मेनार, उदयपुर2025

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