❖ राजस्थान के त्योहार व मेले
❖ विक्रम संवत
- विक्रमादित्य द्वारा प्रारम्भ किया गया यह संवत 57 ईसा पूर्व से प्रचलित माना जाता है।
- यह चन्द्रमा आधारित कैलेंडर है।
- इसकी शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (एकम) से होती है तथा समापन चैत्र अमावस्या के दिन होता है।
- इस संवत में चैत्र से फाल्गुन तक कुल 12 महीने होते हैं।
- महीनों का क्रम इस प्रकार है— चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ तथा फाल्गुन।
❖ शक संवत
- 78 ईस्वी में इस संवत की शुरुआत हुई।
- इसका प्रारम्भ कुषाण शासक कनिष्क ने कराया था।
- यह सूर्य आधारित कैलेंडर है।
- 22 मार्च 1957 को भारत सरकार ने इसे राष्ट्रीय पंचांग के रूप में स्वीकार किया।
❖ ईस्वी सन्
- इसे ग्रेगोरियन कैलेंडर अथवा अंग्रेजी कैलेंडर भी कहा जाता है।
- इसकी अवधि 1 जनवरी से 31 दिसम्बर तक रहती है।
- इसमें वर्ष के कुल 12 महीने होते हैं।
- यह भी सूर्य आधारित कैलेंडर है।
❖ हिजरी सन्
- यह इस्लामिक कैलेंडर है तथा चन्द्रमा की गति पर आधारित होता है।
- इसकी शुरुआत 622 ईस्वी में हुई।
- इसके महीनों के नाम हैं— मोहर्रम, सफर, रबी-उल-अव्वल, रबी-उल-सानी, जमाद-उल-अव्वल, जमाद-उल-सानी, रज्जब, साबान, रमजान, सब्वाल, जिल्काद तथा जिलहिज।
- राजस्थान में त्योहारों की शुरुआत छोटी तीज से तथा समापन गणगौर के साथ माना जाता है।
- इसी कारण यह कहावत प्रचलित है— “तीज त्योहार बावड़ी, ले डूबी गणगौर।”
- राजस्थान की एक प्रसिद्ध कहावत है— “सात वार नौ त्योहार।”
❖ छोटी तीज / हरियाली तीज
- यह पर्व श्रावण शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है।
- इसे राजस्थान में त्योहारों के आगमन का प्रतीक माना जाता है।
- इस अवसर पर जयपुर में प्रसिद्ध तीज की सवारी निकाली जाती है।
- महिलाएँ लहरिया ओढ़नी धारण कर श्रृंगार करती हैं तथा पेड़ों पर झूले डालकर झूलती हैं।
- तीज से एक दिन पूर्व विवाहित महिलाओं के मायके से कपड़े, आभूषण एवं श्रृंगार सामग्री भेजी जाती है, जिसे सिंजारा कहा जाता है।
❖ राखी / रक्षाबंधन
- यह पर्व श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है।
- इसे भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का पर्व माना जाता है।
- इसी दिन नारियल पूर्णिमा भी मनाई जाती है।
- इस अवसर पर नारियल का पूजन किया जाता है।
❖ बड़ी तीज
- यह भाद्रपद कृष्ण तृतीया को मनाई जाती है।
- इसे बूढ़ी तीज, कजली तीज तथा सातूड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है।
- बूंदी की बड़ी तीज विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
❖ हल छठ
- यह पर्व भाद्रपद कृष्ण षष्ठी को मनाया जाता है।
- इसे श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
- इस दिन हल का पूजन किया जाता है।
❖ उब छठ
- यह भी भाद्रपद कृष्ण षष्ठी को मनाई जाती है।
- इस दिन बालिकाएँ सूर्यास्त से चन्द्रोदय तक खड़ी रहकर व्रत करती हैं।
❖ कृष्ण जन्माष्टमी
- यह पर्व भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को मनाया जाता है।
- इसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है।
- इस अवसर पर नाथद्वारा का मेला विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
❖ गोगानवमी
- यह पर्व भाद्रपद कृष्ण नवमी को मनाया जाता है।
❖ बछ बारस
- यह भाद्रपद कृष्ण द्वादशी (बारस) को मनाई जाती है।
- इस दिन गाय और बछड़े की पूजा की जाती है।
❖ सती अमावस्या
- यह पर्व भाद्रपद अमावस्या को मनाया जाता है।
- इस अवसर पर राणी सती का प्रसिद्ध मेला आयोजित होता है।
❖ हरतालिका तीज
- यह भाद्रपद शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है।
- इस दिन भगवान शिव एवं माता पार्वती का पूजन किया जाता है।
❖ गणेश चतुर्थी
- यह पर्व भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है।
- इसे भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
- इस पर्व को चतरा चतुर्थी भी कहा जाता है।
- महाराष्ट्र का यह प्रमुख त्योहार माना जाता है।
इस अवसर पर निम्नलिखित गणेश मंदिरों में मेले आयोजित होते हैं—
| मंदिर | स्थान |
|---|---|
| त्रिनेत्र गणेश | रणथम्भौर |
| चुंगी गणेश | जैसलमेर |
| नृत्य करते गणेशजी | अलवर |
| बाजना गणेश | सिरोही |
| मूरला गणेश | डूंगरपुर |
| बोहरा गणेश | उदयपुर |
| सिंह पर सवार गणेश (हेरम्ब गणपति) | बीकानेर दुर्ग |
| खड़े गणेश | कोटा |
| इश्किया गणेश | जोधपुर |
❖ ऋषि पंचमी
- यह पर्व भाद्रपद शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है।
- माहेश्वरी समाज इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाता है।
- इस अवसर पर भोजन थाली मेला (कामा – डीग) तथा हरिराम जी मेला (झोरडा – नागौर) आयोजित होते हैं।
❖ राधाष्टमी
- यह पर्व भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को मनाया जाता है।
- सलेमाबाद (अजमेर) स्थित निम्बार्क सम्प्रदाय में इस अवसर पर मेला भरता है।
❖ तेजा दशमी
- यह पर्व भाद्रपद शुक्ल दशमी को मनाया जाता है।
- इसी दिन जोधपुर में खेजड़ली वृक्ष मेला आयोजित किया जाता है।
❖ देवझूलनी / जलझूलनी एकादशी
- यह पर्व भाद्रपद शुक्ल एकादशी (ग्यारस) को मनाया जाता है।
- इस दिन भगवान विष्णु को बेवाण में विराजमान कर जलाशय तक ले जाकर स्नान कराया जाता है।
- इस अवसर पर मण्डपिया (चित्तौड़गढ़) तथा चारभुजानाथ (गढ़बोर, राजसमंद) में प्रसिद्ध मेले लगते हैं।
❖ अनन्त चतुर्दशी
- यह पर्व भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को मनाया जाता है।
❖ श्राद्धपक्ष
- इसकी अवधि भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक रहती है।
- इस दौरान 16 दिनों तक श्राद्ध कर्म किए जाते हैं।
- ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है।
- इन दिनों अविवाहित कन्याएँ गोबर से सांझियाँ बनाती हैं।
- नाथद्वारा में केले की सांझी बनाने की परम्परा प्रचलित है।
❖ नवरात्र
- वर्ष में कुल चार बार नवरात्र मनाए जाते हैं।
- सभी नवरात्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (एकम) से नवमी तक चलते हैं।
| नवरात्र | समय |
|---|---|
| चैत्र नवरात्र (वसंतीय नवरात्र) | चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (एकम) से नवमी तक |
| आश्विन नवरात्र (शारदीय नवरात्र) | आश्विन शुक्ल प्रतिपदा (एकम) से नवमी तक |
| गुप्त नवरात्र | माघ शुक्ल प्रतिपदा (एकम) से नवमी तक |
| गुप्त नवरात्र | आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा (एकम) से नवमी तक |
❖ दुर्गाष्टमी
- यह पर्व आश्विन शुक्ल अष्टमी को मनाया जाता है।
- पश्चिम बंगाल में इसे प्रमुख त्योहार के रूप में मनाया जाता है।
❖ दशहरा
- यह पर्व आश्विन शुक्ल दशमी को मनाया जाता है।
- इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था।
- अच्छाई की बुराई पर विजय के प्रतीक के कारण इसे विजयादशमी भी कहा जाता है।
- इस अवसर पर शस्त्र पूजन तथा खेजड़ी की पूजा की जाती है।
- लिंटास पक्षी के दर्शन इस दिन शुभ माने जाते हैं।
- राजस्थान का प्रसिद्ध दशहरा मेला कैथून (कोटा) में आयोजित होता है। इसकी शुरुआत माधोसिंह प्रथम के समय हुई तथा महाराव उम्मेदसिंह द्वितीय के शासनकाल में यह अधिक लोकप्रिय बना।
- भारत का सर्वाधिक प्रसिद्ध दशहरा मैसूर (कर्नाटक) का माना जाता है।
❖ रास / शरद पूर्णिमा
- यह पर्व आश्विन पूर्णिमा को मनाया जाता है।
- मान्यता है कि इस दिन चन्द्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है।
❖ करवा चौथ
- यह पर्व कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को मनाया जाता है।
- विवाहित महिलाएँ पति की दीर्घायु की कामना से व्रत रखती हैं।
❖ अहोई अष्टमी
- यह पर्व कार्तिक कृष्ण अष्टमी को मनाया जाता है।
- महिलाएँ संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं।
❖ धनतेरस
- यह पर्व कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (तेरस) को मनाया जाता है।
- इस दिन नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।
- समुद्र मंथन के समय सबसे पहले ऋषि धनवंतरी, जिन्हें आयुर्वेद का ज्ञाता माना जाता है, कलश लेकर प्रकट हुए थे।
❖ रूप चतुर्दशी / छोटी दीपावली
- यह पर्व कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाता है।
- इसका संबंध सौंदर्य और स्वच्छता से माना जाता है।
- इस अवसर पर घरों की विशेष रूप से सफाई की जाती है।
❖ दीपावली
- यह पर्व कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है।
- इसे हिन्दू धर्म का सबसे प्रमुख त्योहार माना जाता है।
- इस दिन माँ लक्ष्मी का विधिवत पूजन किया जाता है।
- मान्यता है कि भगवान राम 14 वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या (सरयू नदी के तट पर स्थित) लौटे थे।
- इसी दिन भगवान महावीर स्वामी तथा स्वामी दयानंद सरस्वती का निर्वाण भी हुआ था।
❖ गोवर्धन पूजा – कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (एकम)
- इस अवसर पर गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीकात्मक स्वरूप बनाकर उसकी पूजा की जाती है।
- श्रीनाथजी मंदिर में इस दिन अन्नकूट महोत्सव आयोजित होता है, जिसमें भीलों द्वारा चावल लूटने की परम्परा निभाई जाती है।
❖ भैया दूज / यम द्वितीया
- यह पर्व कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है।
❖ गोपाष्टमी
- यह पर्व कार्तिक शुक्ल अष्टमी को मनाया जाता है।
- इस दिन गायों को सजाकर उनकी पूजा की जाती है।
❖ आँवला नवमी / अक्षय नवमी
- यह पर्व कार्तिक शुक्ल नवमी को मनाया जाता है।
❖ देवशयनी एकादशी
- यह पर्व आषाढ़ शुक्ल एकादशी (ग्यारस) को मनाया जाता है।
- मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए पाताल लोक में शयन करने चले जाते हैं।
- इस अवधि में कोई भी मांगलिक कार्य सम्पन्न नहीं किया जाता।
❖ देवउठनी ग्यारस / प्रबोधिनी एकादशी
- यह पर्व कार्तिक शुक्ल एकादशी (ग्यारस) को मनाया जाता है।
- इस दिन भगवान विष्णु के जागरण की मान्यता है।
- इसके साथ ही मांगलिक कार्यों का शुभारम्भ हो जाता है।
- इसी अवसर पर तुलसी एवं शालिग्राम (भगवान विष्णु) का विवाह सम्पन्न कराया जाता है।
❖ कार्तिक पूर्णिमा
- इस दिन कोलायत मेला (बीकानेर), पुष्कर मेला, कपिल धारा मेला (बारां) तथा चन्द्रभागा मेला (झालावाड़) आयोजित होते हैं।
❖ मानगढ़ पहाड़ी (बांसवाड़ा) मेला
- यह मेला मार्गशीर्ष पूर्णिमा को आयोजित किया जाता है।
❖ तिल चतुर्थी / संकट चौथ
- यह पर्व माघ कृष्ण चतुर्थी को मनाया जाता है।
- इस दिन भगवान गणेश को तिल के लड्डुओं का भोग लगाया जाता है।
❖ मौनी अमावस्या
- यह पर्व माघ अमावस्या को मनाया जाता है।
- इसे मनु का जन्मदिवस माना जाता है।
- इस अवसर पर मौन व्रत रखने की परम्परा है।
❖ बसंत पंचमी
- यह पर्व माघ शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है।
- इस दिन माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है।
- इसी अवसर पर गार्गी पुरस्कार प्रदान किया जाता है।
- इस पर्व में पीले रंग का विशेष महत्व होता है तथा लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं।
❖ महाशिवरात्रि
- यह पर्व फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी (तेरस) को मनाया जाता है।
- इसे भगवान शिव के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
❖ फूलेरा दूज
- यह पर्व फाल्गुन शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है।
- इसे विवाह के लिए अबूझ सावा माना जाता है।
❖ आँवला एकादशी / आमलकी एकादशी
- यह पर्व फाल्गुन शुक्ल एकादशी (ग्यारस) को मनाया जाता है।
❖ होली
- यह पर्व फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है।
- इसे भक्त प्रह्लाद की स्मृति में मनाया जाने वाला त्योहार माना जाता है।
- राजस्थान में होली के अनेक विशिष्ट स्वरूप प्रसिद्ध हैं।
| होली का प्रकार | स्थान |
|---|---|
| कोड़ा मार होली | भिनाय (अजमेर) |
| लठमार होली | महावीरजी (करौली) |
| पत्थर मार होली | बाड़मेर |
| अंगारों की होली | केकड़ी (अजमेर) |
| देवर-भाभी होली | ब्यावर |
| गोबर के कंडों से होली | गलियाकोट (डूंगरपुर) |
| भगोरिया की होली | मेवाड़ के आदिवासियों द्वारा |
| पत्थरमार खूनी होली | भीलूड़ा गाँव (डूंगरपुर) |
| न्हांण | सांगोद (कोटा) में जादुई करतबों के साथ |
❖ धूलण्डी
- यह पर्व चैत्र कृष्ण प्रतिपदा (एकम) को मनाया जाता है।
- इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग एवं गुलाल लगाकर उत्सव मनाते हैं।
- इसी अवसर पर बादशाह मेला (ब्यावर) तथा फुलडोल मेला (शाहपुरा, भीलवाड़ा) आयोजित होते हैं।
❖ शीतलाष्टमी
- यह पर्व चैत्र कृष्ण अष्टमी को मनाया जाता है।
- इस दिन एक दिन पूर्व तैयार किया गया ठण्डा भोजन ग्रहण किया जाता है, जिसे बास्योडा कहा जाता है।
- इस मेले को बैलगाड़ी मेले के नाम से भी जाना जाता है।
- इस अवसर पर शीतला माता (शील डूंगरी, चाकसू) तथा केसरियानाथ जी (धूलैव) में मेले आयोजित होते हैं।
❖ घूड़ला
- यह पर्व चैत्र कृष्ण अष्टमी से चैत्र शुक्ल तृतीया तक मनाया जाता है।
- यह उत्सव राव सातलदेव की स्मृति में आयोजित किया जाता है।
❖ नववर्ष / वर्ष प्रतिपदा
- यह पर्व चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (एकम) को मनाया जाता है।
- मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना की थी।
❖ गणगौर
- यह पर्व चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है।
- इसे राजस्थान का सर्वाधिक गीतों वाला त्योहार माना जाता है।
- इस अवसर पर गण / ईशर (भगवान शिव) तथा गौर / ईसरी (माता पार्वती) की पूजा की जाती है।
- अविवाहित कन्याएँ योग्य वर की प्राप्ति तथा विवाहित महिलाएँ अखण्ड सुहाग की कामना से व्रत रखती हैं।
- यह पर्व माता पार्वती के गौने का प्रतीक माना जाता है।
- इसका आयोजन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल तृतीया तक कुल 18 दिनों तक चलता है।
- गणगौर के अवसर पर होली की राख से बनी पीड़िया (केक) तथा जौ के बीजों की पूजा की जाती है।
- इस पर्व पर अहमदाबाद के सूबेदार महमूद बेग की पुत्री गिन्दोली से जुड़े गीत गाए जाते हैं। गिन्दोली को जगमाल लेकर आया था।
| गणगौर का स्वरूप | स्थान / समय |
|---|---|
| गणगौर की सवारी | जयपुर |
| गुलाबी गणगौर | नाथद्वारा – चैत्र शुक्ल पंचमी |
| धींगा गणगौर | उदयपुर – वैशाख कृष्ण तृतीया; प्रारम्भ मेवाड़ के महाराणा राजसिंह के समय |
| धींगा गणगौर मेला | जोधपुर – वैशाख कृष्ण तृतीया |
| बिना गवर की गणगौर (केवल ईशर की सवारी) | बीकानेर – चैत्र शुक्ल तृतीया |
| बिना ईशर की गणगौर (केवल गवर की सवारी) | जैसलमेर – चैत्र शुक्ल चतुर्थी |
❖ अशोकाष्टमी
- यह पर्व चैत्र शुक्ल अष्टमी को मनाया जाता है।
❖ रामनवमी
- यह पर्व चैत्र शुक्ल नवमी को मनाया जाता है।
- इसे भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
❖ कामदा एकादशी
- यह पर्व चैत्र शुक्ल एकादशी को मनाया जाता है।
❖ हनुमान जयंती
- यह पर्व चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाता है।
- इसे हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
❖ आखातीज / अक्षय तृतीया
- यह पर्व वैशाख शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है।
- बीकानेर की स्थापना इसी दिन हुई थी।
- इस अवसर पर बीकानेर में पतंगबाजी की परम्परा है।
- किसान सात प्रकार के अनाज के साथ खेतों में बुवाई का शुभारम्भ करते हैं।
- यह अबूझ सावा माना जाता है तथा इसी दिन सर्वाधिक बाल विवाह होने की मान्यता है।
❖ बुद्ध पूर्णिमा / पीपल पूर्णिमा
- यह पर्व वैशाख पूर्णिमा को मनाया जाता है।
- इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति तथा महापरिनिर्वाण (मोक्ष) हुआ था।
- इस अवसर पर पीपल वृक्ष की पूजा की जाती है।
- इस दिन गोमती सागर मेला (झालरापाटन, झालावाड़), मातृकुंडिया मेला (राशमी, चित्तौड़गढ़), गौतमेश्वर मेला (अरणोद, प्रतापगढ़) तथा बाणगंगा मेला (बैराठ) आयोजित होते हैं।
❖ वटवृक्ष अमावस्या
- यह पर्व ज्येष्ठ अमावस्या को मनाया जाता है।
- इस दिन वट (बरगद) के वृक्ष की पूजा की जाती है।
❖ गंगा दशमी
- यह पर्व ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मनाया जाता है।
- इस अवसर पर कामा (डीग) में मेला आयोजित होता है।
❖ निर्जला ग्यारस
- यह पर्व ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी (ग्यारस) को मनाया जाता है।
- इस दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत रखने की परम्परा है।
❖ गुरु पूर्णिमा / व्यास पूर्णिमा
- यह पर्व आषाढ़ पूर्णिमा को मनाया जाता है।
❖ नाग पंचमी
- यह पर्व श्रावण कृष्ण पंचमी को मनाया जाता है।
- इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है।
- नाग पंचमी मेला मंडोर (जोधपुर) में आयोजित होता है।
❖ निडरी नवमी
- यह पर्व श्रावण कृष्ण नवमी को मनाया जाता है।
- इस अवसर पर नेवले की पूजा की जाती है।
❖ हरियाली अमावस्या
- यह पर्व श्रावण अमावस्या को मनाया जाता है।
- इस दिन भोजन में विशेष रूप से खीर एवं मालपुआ बनाए जाते हैं।
- ब्राह्मणों को भोजन कराने की परम्परा भी है।
- इस अवसर पर कल्पवृक्ष मेला (मांगलियावास, अजमेर), डिग्गीपुरी का राजा मेला (टोंक) तथा वीरपुरी मेला (मंडोर, जोधपुर) आयोजित होते हैं।
❖ जैन धर्म के त्योहार
❖ ऋषभदेव / आदिनाथ जयंती
- यह पर्व चैत्र कृष्ण नवमी को मनाया जाता है।
- इस दिन जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) की जयंती मनाई जाती है।
❖ महावीर जयंती
- यह पर्व चैत्र शुक्ल त्रयोदशी (तेरस) को मनाया जाता है।
- यह जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्मोत्सव है।
- इस अवसर पर महावीरजी (करौली) का प्रसिद्ध मेला आयोजित होता है।
❖ रोट तीज
- यह पर्व भाद्रपद शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है।
- इस दिन खीर तथा रोटी बनाने की परम्परा है।
❖ सुगंध दशमी
- यह पर्व भाद्रपद शुक्ल दशमी को मनाया जाता है।
❖ दसलक्षण पर्व
- इसका आयोजन भाद्रपद शुक्ल पंचमी से भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी तक किया जाता है।
❖ पर्युषण पर्व
- इसे जैन धर्म का महापर्व माना जाता है।
- पर्युषण का अर्थ “निकट बसना” होता है।
- यह पर्व भाद्रपद कृष्ण द्वादशी (बारस) से भाद्रपद शुक्ल पंचमी तक कुल 8 दिनों तक चलता है।
- इसका अंतिम दिन संवत्सरी पर्व के नाम से जाना जाता है।
❖ पड़वा ढोक
- यह पर्व आश्विन कृष्ण प्रतिपदा (एकम) को मनाया जाता है।
- इसे दिगम्बर जैन समाज का क्षमायाचना दिवस माना जाता है।
❖ सिख समाज के त्योहार
❖ गुरु नानक जयंती
- यह पर्व कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है।
- गुरु नानक देव सिख धर्म के प्रवर्तक थे।
- उनका जन्म 15 अप्रैल 1469 को ननकाना साहिब (पाकिस्तान) में हुआ था।
❖ गुरु गोविंद सिंह जयंती
- यह पर्व पौष शुक्ल सप्तमी को मनाया जाता है।
- गुरु गोविंद सिंह सिखों के दसवें एवं अंतिम गुरु थे।
- उनका जन्म पटना में हुआ था।
- उन्होंने गुरु परम्परा का समापन कर गुरु ग्रंथ साहिब को सिखों का गुरु घोषित किया।
❖ लोहड़ी
- यह पर्व प्रत्येक वर्ष 13 जनवरी को मनाया जाता है।
- इसे नई फसल के आगमन की खुशी में मनाया जाता है।
❖ बैसाखी
- यह पर्व 13 अप्रैल को मनाया जाता है।
- 13 अप्रैल 1699 को गुरु गोविंद सिंह ने आनंदपुर साहिब (रोपड़, पंजाब) में खालसा पंथ की स्थापना की थी।
❖ सिंधी समाज के त्योहार
❖ चेटीचण्ड / झूलेलाल जयंती
- यह पर्व चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (एकम) को मनाया जाता है।
- मान्यता है कि इसी दिन झूलेलाल ने वरुण देवता के अवतार के रूप में जन्म लिया था।
❖ चालीहा महोत्सव
- सिंध प्रान्त के शासक मृकशाह का वध झूलेलाल जी ने किया था।
- यह महोत्सव 16 जुलाई से 24 अगस्त तक मनाया जाता है।
❖ अंसूचद पर्व
- यह पर्व फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी को मनाया जाता है।
- इसे झूलेलाल जी के अन्तर्धान की स्मृति में मनाया जाता है।
❖ थदड़ी / बड़ी सातम
- यह पर्व भाद्रपद कृष्ण सप्तमी को मनाया जाता है।
- इसे सिंधी समाज का बास्योडा कहा जाता है।
❖ मुस्लिम समाज के त्योहार
❖ मोहर्रम
- हिजरी संवत का पहला महीना मोहर्रम होता है।
- इस माह की 10वीं तारीख को हुसैन, जो पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे (दोहिते) थे, कर्बला (इराक) के युद्ध में शहीद हुए थे।
- इसी दिन ताजिए निकाले जाते हैं।
❖ ईद मिलादुन्नबी / बारावफात
- रबी-उल-अव्वल माह की 12वीं तारीख को पैगंबर मोहम्मद साहब का जन्म हुआ था।
❖ शब-ए-बारात
- यह पर्व शाबान माह की 14वीं तारीख को मनाया जाता है।
- मान्यता है कि इस दिन पैगंबर मोहम्मद साहब की ईश्वर से आकाश में भेंट हुई थी।
- इस अवसर पर मुस्लिम समुदाय अपने भूलों एवं पापों की क्षमा के लिए खुदा से प्रार्थना करता है।
❖ रमजान
- इसे मुस्लिम धर्म का सबसे पवित्र महीना माना जाता है।
- इस पूरे महीने रोजे रखे जाते हैं।
❖ शब-ए-कद्र
- यह पर्व रमजान माह की 27वीं तारीख को मनाया जाता है।
- मान्यता है कि इसी दिन कुरान का अवतरण हुआ था।
❖ ईद-उल-फितर
- इसे सवैयों की ईद अथवा मीठी ईद भी कहा जाता है।
- रमजान के 30 रोजे पूरे होने के बाद शव्वाल माह की पहली तारीख को अल्लाह के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु यह पर्व मनाया जाता है।
❖ ईद-उल-जुहा (बकरा ईद)
- यह पर्व जिलहिज माह की 10वीं तारीख को मनाया जाता है।
- मान्यता है कि इस दिन इब्राहिम ने अपने पुत्र इस्माईल की कुर्बानी दी थी।
❖ ईसाई समाज के त्योहार
❖ क्रिसमस
- यह पर्व प्रत्येक वर्ष 25 दिसंबर को मनाया जाता है।
- यह ईसाई धर्म के प्रवर्तक ईसा मसीह का जन्मोत्सव है।
❖ गुड फ्राइडे
- इसी दिन ईसा मसीह को शुक्रवार के दिन सूली पर चढ़ाया गया था।
❖ ईस्टर
- यह पर्व ईसा मसीह के पुनर्जीवित होने की स्मृति में मनाया जाता है।
- यह घटना रविवार के दिन हुई थी।
❖ असेंशन डे
- यह पर्व ईस्टर के 40 दिन बाद मनाया जाता है।
- इसे ईसा मसीह के स्वेच्छा से स्वर्ग लोक गमन की स्मृति में मनाया जाता है।
❖ राजस्थान के धार्मिक मेले
❖ खेजड़ली वृक्ष मेला
- यह मेला खेजड़ली गाँव (जोधपुर) में आयोजित होता है।
- इसका आयोजन भाद्रपद शुक्ल दशमी को किया जाता है।
- इसे विश्व का एकमात्र वृक्ष मेला माना जाता है।
- खेजड़ली दिवस प्रत्येक वर्ष 12 सितम्बर को मनाया जाता है।
❖ फूटा देवल मेला
- यह मेला राजसमंद में आयोजित होता है।
- यहाँ परशुराम महादेव मंदिर स्थित है।
❖ कानन मेला
- यह मेला कानन गाँव (बालोतरा) में आयोजित किया जाता है।
- इस अवसर पर गैर नृत्य प्रस्तुत किया जाता है।
❖ बाबू महाराज मेला
- यह मेला धौलपुर में भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को आयोजित होता है।
❖ महावीरजी का मेला
- यह मेला चांदन गाँव (हिंडौन, करौली) में गम्भीर नदी के तट पर आयोजित होता है।
- इसका आयोजन चैत्र शुक्ल त्रयोदशी (तेरस) से वैशाख कृष्ण प्रतिपदा (एकम) तक किया जाता है।
- इसे जैन समुदाय का सबसे बड़ा मेला माना जाता है।
❖ सुईया मेला
- यह मेला चौहटन (बाड़मेर) में पौष अमावस्या को आयोजित होता है।
- इसे अर्द्धकुंभ के नाम से भी जाना जाता है।
❖ विरात्रा माता का मेला
- यह मेला चौहटन (बाड़मेर) में आयोजित होता है।
- विरात्रा माता को भोपा जाति की कुलदेवी माना जाता है।
- इसका आयोजन नवरात्र के दौरान किया जाता है।
❖ भर्तृहरि का मेला
- यह मेला अलवर में आयोजित होता है।
- इसका आयोजन वैशाख तथा भाद्रपद माह की शुक्ल सप्तमी से शुक्ल अष्टमी तक किया जाता है।
❖ जौहर मेला
- यह मेला चित्तौड़गढ़ में चैत्र कृष्ण एकादशी (ग्यारस) को आयोजित होता है।
❖ नारायणी माता मेला
- यह मेला अलवर में वैशाख शुक्ल एकादशी (ग्यारस) को आयोजित होता है।
❖ मूंडवा का मेला
- यह मेला नागौर में आयोजित किया जाता है।
❖ डोल मेला
- यह मेला बारां में आयोजित होता है।
❖ लाल्या काल्या का मेला
- यह मेला अजमेर में आयोजित किया जाता है।
❖ सैपऊ महादेव मेला
- यह मेला सैपऊ (धौलपुर) में आयोजित होता है।
❖ राजस्थान के पशु मेले
- राजस्थान का सबसे बड़ा पशु मेला नागौर में आयोजित होता है।
- राजस्थान में पशुपालन विभाग द्वारा कुल 10 राज्य स्तरीय पशु मेले आयोजित किए जाते हैं।
❖ (1) मल्लीनाथ पशु मेला
- यह मेला तिलवाड़ा (बालोतरा) में आयोजित होता है।
- इसका आयोजन चैत्र कृष्ण एकादशी (ग्यारस) से चैत्र शुक्ल एकादशी (ग्यारस) तक किया जाता है।
- इसे राजस्थान का सबसे प्राचीन पशु मेला माना जाता है।
- यह लूणी नदी के तट पर भरता है।
- यहाँ थारपारकर तथा कांकरेज गोवंश की नस्लों का क्रय-विक्रय होता है।
❖ (2) पुष्कर पशु मेला
- यह मेला पुष्कर (अजमेर) में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होता है।
- इसे राज्य का सबसे बड़ा रंगीन मेला माना जाता है।
- इसे मेरवाड़ा (ब्यावर–अजमेर) का कुंभ भी कहा जाता है।
- सायंकालीन आरती के समय दीपदान की विशेष परम्परा निभाई जाती है।
❖ (3) बलदेव पशु मेला
- यह मेला मेड़ता (नागौर) में आयोजित होता है।
- इसका आयोजन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (एकम) से चैत्र पूर्णिमा तक किया जाता है।
❖ (4) वीर तेजाजी पशु मेला
- यह मेला परबतसर (डीडवाना-कुचामन) में आयोजित होता है।
- आय (आमदनी) की दृष्टि से इसे राजस्थान का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है।
- यह नागौरी बैलों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
❖ (5) रामदेव पशु मेला
- यह मेला मानासर (नागौर) में आयोजित होता है।
- यहाँ नागौरी बैलों का विशेष महत्व है।
❖ (6) गोमती सागर पशु मेला
- यह मेला झालरापाटन (झालावाड़) में आयोजित होता है।
- यहाँ मुख्य रूप से मालवी नस्ल के पशुओं का क्रय-विक्रय किया जाता है।
❖ (7) चन्द्रभागा पशु मेला
- यह मेला झालरापाटन (झालावाड़) में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होता है।
- इसे हाड़ौती का सुरंगा कहा जाता है।
❖ (8) गोगामेड़ी पशु मेला
- यह मेला हनुमानगढ़ में आयोजित होता है।
- इसे राजस्थान का सबसे अधिक दिनों तक चलने वाला पशु मेला माना जाता है।
- इसका आयोजन श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद पूर्णिमा तक होता है।
❖ (9) जसवंत पशु मेला
- यह मेला भरतपुर में आयोजित होता है।
❖ (10) महाशिवरात्रि पशु मेला
- यह मेला करौली में आयोजित किया जाता है।
❖ राजस्थान के अन्य पशु मेले
❖ खलदानी माता गर्दभ (गधों) का मेला
- यह मेला भावगढ़ बंध्या (लुनियावास ग्राम पंचायत, जयपुर) में आयोजित होता है।
❖ सारणेश्वर पशु मेला
- यह मेला सिरोही में आयोजित किया जाता है।
- इसे रेबारी जाति का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है।
❖ बंजरग पशु मेला
यह मेला भरतपुर में आयोजित होता है।
❖ सेवड़िया पशु मेला
- यह मेला रानीवाड़ा (सांचौर, जालौर) में आयोजित किया जाता है।
- इसका आयोजन चैत्र शुक्ल एकादशी (ग्यारस) से पूर्णिमा तक होता है।
❖ राजस्थान के महोत्सव
| महोत्सव | स्थान | आयोजन का समय |
|---|---|---|
| ऊँट महोत्सव | बीकानेर | जनवरी |
| मरु महोत्सव | जैसलमेर | फरवरी |
| एडवेंचर स्पोर्ट्स महोत्सव | कोटा | फरवरी |
| अलवर महोत्सव | अलवर | फरवरी |
| शेखावाटी महोत्सव | चूरू, सीकर एवं झुंझुनूं | फरवरी |
| बृज महोत्सव | भरतपुर | फरवरी–मार्च |
| थार महोत्सव | बाड़मेर | फरवरी–मार्च |
| हाथी महोत्सव | जयपुर | मार्च |
| मेवाड़ महोत्सव | उदयपुर | मार्च–अप्रैल |
| बैलून (गुब्बारा) महोत्सव | बाड़मेर | अप्रैल |
| ग्रीष्म महोत्सव | माउंट आबू | जून |
| मांड / मारवाड़ महोत्सव | जोधपुर | अक्टूबर |
| मत्स्य महोत्सव | अलवर | अक्टूबर–नवम्बर |
| शीतकालीन (शरद) महोत्सव | माउंट आबू | दिसम्बर |
| पतंग महोत्सव | जयपुर | 14 जनवरी (मकर संक्रांति) |
❖ जवाहर प्रदर्शनी
- इसका आयोजन डीग में किया जाता है।
❖ मीरा महोत्सव
- यह महोत्सव चित्तौड़गढ़ में आयोजित होता है।
❖ मोमासर उत्सव
- इसका आयोजन बीकानेर में किया जाता है।
