राजस्थान में कृषि: राजस्थान की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है और राज्य की बड़ी आबादी आज भी अपनी आजीविका के लिए कृषि एवं पशुपालन पर निर्भर है। स्वतंत्रता के समय भारत की लगभग 75% जनसंख्या अपनी जीविका के लिए कृषि पर निर्भर थी, जबकि वर्तमान में राजस्थान की लगभग 62% आबादी कृषि से अपनी आजीविका प्राप्त करती है। यदि कृषि और पशुपालन दोनों कार्य एक साथ किए जाएँ, तो उसे मिश्रित कृषि कहा जाता है। राजस्थान में कृषि एवं पशुपालन पर लगभग 75% जनसंख्या निर्भर है।
भारत में कृषि गणना का कार्य प्रत्येक 5 वर्ष में कृषि एवं सहकारिता विभाग द्वारा किया जाता है। राजस्थान में कृषि विकास की सबसे बड़ी बाधाएँ वर्षा की अनियमितता एवं असमानता हैं। इसी कारण कृषि को सामान्यतः “मानसून का जुआ” कहा जाता है।
❖ राजस्थान की कृषि एवं अर्थव्यवस्था
राजस्थान राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में कृषि क्षेत्र का योगदान राज्य की अर्थव्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
| विवरण | 2023-24 | 2024-25 |
|---|---|---|
| स्थिर (2011-12) कीमतों पर कृषि क्षेत्र का योगदान | 26.21% | 26.54% |
| प्रचलित कीमतों पर कृषि क्षेत्र का योगदान | 26.72% | 26.92% |
वर्ष 2024-25 में खाद्यान्न उत्पादन 267.67 लाख मैट्रिक टन होने का अनुमान है, जो गत वर्ष की तुलना में 10.67% अधिक है। वहीं 2025-26 में खाद्यान्न उत्पादन 284 लाख मैट्रिक टन रहने का अनुमान है।
इसी अवधि में कृषि क्षेत्र के विभिन्न घटकों का योगदान निम्नानुसार है—
| क्षेत्र | योगदान |
|---|---|
| फसल क्षेत्र | 46.17% |
| पशुधन क्षेत्र | 46.77% |
| वानिकी क्षेत्र | 6.56% |
| मत्स्य क्षेत्र | 0.51% |
राजस्थान की कृषि से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
- राजस्थान का अन्न भंडार / खाद्य की टोकरी – गंगानगर
- राजस्थान का फलों का उद्यान (टोकरी) – गंगानगर
- मसालों के उत्पादन में राजस्थान का मध्यप्रदेश के बाद दूसरा स्थान है।
- राजस्थान में मसालों की दृष्टि से प्रथम स्थान – बारां का है।
❖ राजस्थान की प्रमुख कृषि पद्धतियाँ
राजस्थान में भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियों के आधार पर विभिन्न प्रकार की कृषि पद्धतियाँ अपनाई जाती हैं।
➻ शुष्क कृषि (बारानी कृषि) – यह कृषि बरसाती पानी पर आधारित होती है और सामान्यतः 50 सेमी से कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त मानी जाती है। राजस्थान के पश्चिमी भाग के मरुस्थलीय जिलों में मुख्यतः इसी प्रकार की कृषि की जाती है।
➻ सिंचित कृषि – जिस कृषि को सफल उत्पादन के लिए सिंचाई की आवश्यकता होती है, उसे सिंचित कृषि कहा जाता है।
➻ आर्द्र कृषि – राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में की जाने वाली कृषि को आर्द्र कृषि कहा जाता है। यह सामान्यतः 100 सेमी से अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में की जाती है।
➻ झूमिंग (Shifting Farming) या स्थानान्तरित कृषि – आदिवासी समुदायों द्वारा वनों को काटकर या जलाकर की जाने वाली कृषि को स्थानान्तरित कृषि अथवा स्लैश एण्ड बर्न कृषि कहा जाता है। राजस्थान में यह कृषि मुख्यतः डूंगरपुर, बांसवाड़ा एवं उदयपुर जिलों में प्रचलित है।
- राजस्थान में इस कृषि को गरासिया-वालरा कृषि कहा जाता है।
- भीलों द्वारा पहाड़ी जंगलों को जलाकर की जाने वाली कृषि चिमाता कहलाती है, जबकि मैदानी भागों में की जाने वाली कृषि को दजिया कहा जाता है।
भारत के विभिन्न राज्यों में इस कृषि के अलग-अलग नाम प्रचलित हैं—
| राज्य | स्थानीय नाम |
|---|---|
| राजस्थान | गरासिया-वालरा कृषि |
| आसाम | झूमिंग खेती |
| मध्यप्रदेश | कुमारी |
| आन्ध्रप्रदेश | पाडू |
❖ राजस्थान की फसल ऋतुएँ
राजस्थान में वर्ष भर में मुख्यतः तीन प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं।
1. खरीफ फसल (स्यालू)
- खरीफ फसलें सामान्यतः जून-जुलाई में बोई जाती हैं तथा सितंबर-अक्टूबर में काटी जाती हैं।
मुख्य फसलें: चावल, बाजरा, मक्का, कपास, गन्ना, ज्वार, ग्वार, मूंगफली, सोयाबीन, अरंडी, तिल, अरहर, उड़द, मूंग एवं मोठ।
2. रबी फसल (उनालू)
- रबी फसलें सामान्यतः अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती हैं तथा मार्च-अप्रैल में काटी जाती हैं।
मुख्य फसलें: गेहूं, सरसों, तारामीरा, सूरजमुखी, अलसी, जौ, राई, जीरा, मैथी, धनिया, सौंफ, चना, मसूर, मटर एवं ईसबगोल।
3. जायद फसल
- जायद फसलें सामान्यतः मार्च से जून के मध्य बोई जाती हैं।
मुख्य फसलें: तरबूज, खरबूज एवं ककड़ी।
➻ तरबूज की प्रमुख किस्में:
- शुगर बेबी
- दुर्गापुर केसर
➻ राजस्थान के उत्पादन में प्रथम स्थान वाली फसलें
राजस्थान देश में निम्न फसलों के उत्पादन में प्रथम स्थान रखता है—
- बाजरा, सरसों, मूंग, मोठ, अलसी, तारामीरा, ग्वार।
❖ प्रमुख खाद्यान्न फसलें
➻ बाजरा (Pearl Millet)
बाजरा राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसलों में से एक है। इसे “गरीब का भोजन” कहा जाता है। यह मूलतः एक अफ्रीकी पौधा है तथा राजस्थान में सर्वाधिक क्षेत्रफल में बोई जाने वाली फसल है। राजस्थान देश में बाजरा उत्पादन में प्रथम स्थान रखता है तथा यह सबसे अधिक सूखा सहन करने वाली फसल मानी जाती है। वर्ष 2021-22 में देश के कुल बाजरा उत्पादन का 38.98% हिस्सा राजस्थान में उत्पादित हुआ।
➻ प्रमुख बाजरा उत्पादक जिले
- बाड़मेर, अलवर, जयपुर, जोधपुर।
➻ प्रमुख किस्में
- RCB – 2, RCB – 911, RHB – 30, राज. 171
➻ अनुसंधान केन्द्र
- मंडोर (जोधपुर), गुड़ामालानी (बाड़मेर)
➻ गेहूं (Wheat)
राजस्थान में सर्वाधिक उत्पादन वाली फसल गेहूं है। राज्य के उत्तर-पश्चिमी जिलों में इसका उत्पादन अधिक होता है।
प्रमुख उत्पादक जिले
- हनुमानगढ़, गंगानगर, अलवर
गेहूं उत्पादन की अधिकता के कारण गंगानगर को “अन्न का कटोरा” तथा “राजस्थान का अन्न भंडार” कहा जाता है।
प्रमुख किस्में
- सोना कल्याण, मैक्सियन सोना, शरबती, सोनालिका, गंगा, कोहिनूर, सुनहरी, राज. 3077, राज. 1482, चम्बल 65
➻ मक्का (Maize)
मक्का को “अनाजों की रानी” कहा जाता है। राजस्थान के दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्वी भागों में इसका सर्वाधिक उत्पादन होता है।
प्रमुख उत्पादक जिले
- भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, बांसवाड़ा
प्रमुख किस्में
- माही धवल, माही कंचन, मेधा, नवजोत, सविता
कृषि अनुसंधान केन्द्र, बांसवाड़ा द्वारा मक्का की माही धवल, माही कंचन एवं सविता किस्मों का विकास किया गया है। मक्का फसल की पकने की अवधि लगभग 110 दिन होती है।
➻ चावल / धान (Rice)
धान एक रोपण (प्लान्टेशन) फसल है तथा इसके लिए सामान्यतः 100 से 150 सेमी औसत वर्षा की आवश्यकता होती है।
प्रमुख उत्पादक जिले
- बूंदी (सर्वाधिक), हनुमानगढ़, कोटा, बारां
प्रमुख किस्में
- माही सुगंधा, चम्बल, रत्ना, कावेरी, परमल, बासमती, डागर
- बूंदी का बासमती चावल विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
- राजस्थान में धान का कटोरा गंगानगर को कहा जाता है।
अनुसंधान केन्द्र:- बांसवाड़ा
➻ ज्वार (Sorghum)
ज्वार को “गरीब की रोटी” कहा जाता है। ज्वार उत्पादन में राजस्थान का देश में तीसरा स्थान है। इसका उपयोग मुख्य रूप से पशु चारे के रूप में भी किया जाता है।
प्रमुख उत्पादक जिले
- अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, नागौर
➻ जौ (Barley)
जौ राजस्थान की प्रमुख खाद्यान्न फसलों में से एक है और इसे सामान्यतः “गरीब का अनाज” कहा जाता है। जौ उत्पादन के क्षेत्र में राजस्थान का देश में दूसरा स्थान है। इसका उपयोग मुख्य रूप से बीयर एवं अल्कोहल निर्माण में किया जाता है।
प्रमुख उत्पादक जिले
- गंगानगर, जयपुर, सीकर
प्रमुख किस्में
- ज्योति, राज किरण, मोल्वा, RD – 2035, RD – 2508, RD – 57
❖ दलहनी फसलें (Pulse)
दलहनी फसलें कृषि व्यवस्था में विशेष महत्व रखती हैं क्योंकि ये मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाती हैं, जिससे भूमि की उर्वरता में वृद्धि होती है। दलहन उत्पादन में राजस्थान का देश में तीसरा स्थान है।
➻ चना (Gram)
चना राजस्थान की दलहनी फसलों में सर्वाधिक उत्पादन वाली फसल है। चना उत्पादन में भी राजस्थान का देश में तीसरा स्थान है।
प्रमुख उत्पादक जिले
- चूरू (सर्वाधिक), हनुमानगढ़, बीकानेर, अजमेर
प्रमुख किस्में
- दोहद येलो, सम्राट, GNG 16, GNG 663
➻ मूंग (Mung)
मूंग ऐसी दलहनी फसल है जो भूमि की उर्वर शक्ति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रमुख उत्पादक जिले
- नागौर, जोधपुर, चूरू
➻ मोठ (Moth)
राजस्थान की शुष्क जलवायु में मोठ एक महत्वपूर्ण दलहनी फसल है।
प्रमुख उत्पादक जिले
- बाड़मेर, बीकानेर, चूरू
➻ उड़द (Black Gram)
उड़द भी भूमि की उर्वर शक्ति बढ़ाने में उपयोगी फसल मानी जाती है।
प्रमुख उत्पादक जिले
- बूंदी, टोंक, भीलवाड़ा, अजमेर
- मसूर – मसूर उत्पादन की दृष्टि से झालावाड़ महत्वपूर्ण जिला है।
❖ तिलहनी फसलें (Oil Seeds)
तिलहनी फसलों के बीजों से तेल प्राप्त किया जाता है। इन फसलों की खेती राजस्थान में रबी और खरीफ दोनों मौसमों में की जाती है। तिलहन उत्पादन में राजस्थान का देश में प्रथम स्थान है।
➻ सरसों (Mustard)
सरसों उत्पादन में राजस्थान देश में प्रथम स्थान रखता है। इसी कारण राजस्थान को “सरसों का प्रदेश” भी कहा जाता है।
प्रमुख उत्पादक जिले
- भरतपुर, अलवर, गंगानगर, टोंक
प्रमुख किस्में
- वरदान, वरुणा
महत्वपूर्ण तथ्य
- राजस्थान की प्रमुख सरसों मंडी – सुमेरपुर (पाली)।
- केन्द्रीय सरसों अनुसंधान केन्द्र – सेवर (भरतपुर)।
- इसकी स्थापना 8वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान 20 अक्टूबर 1993 को की गई थी।
➻ मूंगफली (Ground Nut)
- मूंगफली को सामान्यतः “गरीब का बादाम” कहा जाता है। यह दलहनी फसलों की तरह मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाने में सहायक होती है।
- मूंगफली उत्पादन में राजस्थान का स्थान गुजरात के बाद दूसरा है।
- सर्वाधिक मूंगफली उत्पादन के कारण लूणकरणसर (बीकानेर) को राजस्थान का राजकोट कहा जाता है।
प्रमुख तथ्य
- प्रमुख मूंगफली मंडी – बीकानेर
प्रमुख किस्में
- चन्द्रा, RG – 141, RSB – 87, RS – 1
➻ सोयाबीन (Soyabean)
- सोयाबीन उत्पादन में देश में महाराष्ट्र का प्रथम स्थान है, जबकि राजस्थान का तीसरा स्थान है।
- राजस्थान में इसका प्रमुख उत्पादन हाड़ौती क्षेत्र में होता है।
प्रमुख उत्पादक क्षेत्र
- कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़
➻ अलसी (Lin Seed)
- अलसी के बीजों से तेल तथा इसके पौधों से रेशे प्राप्त किए जाते हैं।
- प्रमुख उत्पादक क्षेत्र – हाड़ौती क्षेत्र
➻ तारामीरा (Arugula)
- तारामीरा का उपयोग मुख्य रूप से साबुन निर्माण में किया जाता है।
- प्रमुख उत्पादक जिला – जयपुर
➻ अरंडी (Castor Seed)
- अरंडी के बीजों में अन्य तिलहनी फसलों की तुलना में सर्वाधिक तेल प्राप्त होता है।
- इसका उपयोग मुख्य रूप से पेंट तथा दवाइयाँ बनाने में किया जाता है।
- प्रमुख उत्पादक जिला – जालौर
❖ नगदी फसल / वाणिज्यिक फसल (Cash Crop)
वे फसलें जिन्हें स्वयं उपयोग में लेने के बजाय बाजार में बेचकर लाभ कमाने के उद्देश्य से उगाया जाता है, उन्हें नगदी या वाणिज्यिक फसलें कहा जाता है।
➻ कपास (Cotton)
कपास राजस्थान की प्रमुख नगदी फसलों में से एक है। इसे “सफेद सोना” तथा “नरमा” के नाम से भी जाना जाता है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| तापमान | 20° से 30° C |
| वर्षा | 75 से 100 सेमी |
| स्थानीय नाम | बणिया |
कपास को गांठों में गिना जाता है तथा इसकी सफल खेती के लिए लगभग 90 दिन पाला रहित अवधि आवश्यक होती है। अधिक आर्द्रता धारण करने की क्षमता के कारण काली मिट्टी कपास उत्पादन के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
राजस्थान में मुख्यतः तीन प्रकार की कपास बोई जाती है—
| कपास का प्रकार | प्रमुख क्षेत्र |
|---|---|
| देशी कपास | उदयपुर, सलूम्बर, चित्तौड़गढ़ |
| अमेरिकन कपास | गंगानगर, हनुमानगढ़, बांसवाड़ा |
| मालवी कपास | कोटा, बूंदी, झालावाड़ |
प्रमुख उत्पादक जिले
- हनुमानगढ़ (30%), गंगानगर, जोधपुर, नागौर
प्रमुख किस्में
- बीकानेरी नरमा, नरमा, गंगानगर अगेती, वीरनार, वरलक्ष्मी, संकर-4
➻ गन्ना (Sugar Cane)
गन्ना मूलतः भारतीय पौधा माना जाता है। भारत में इसका सर्वाधिक उत्पादन उत्तरप्रदेश में होता है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| तापमान | 15° से 25° C |
| वर्षा | 100 से 200 सेमी |
प्रमुख उत्पादक जिले
- गंगानगर, चित्तौड़गढ़, बूंदी
➻ तम्बाकू (Tobacco)
भारत में तम्बाकू को पहली बार पुर्तगाली लेकर आए थे।
प्रमुख उत्पादक जिले
- जालौर, अलवर
प्रमुख किस्में
- निकोटिन टुबेकम, निकोटिन रास्ट्रिका
➻ ईसबगोल (Psyllium)
ईसबगोल को घोड़ा जीरा भी कहा जाता है। विश्व के कुल ईसबगोल उत्पादन का लगभग 40% उत्पादन अकेले राजस्थान में होता है।
प्रमुख उत्पादक जिले
- बाड़मेर, जालौर, सिरोही, नागौर
➻ होहोबा / जोजोबा (Jojoba)
- होहोबा को “पीला सोना” अथवा “डेजर्ट गोल्ड” कहा जाता है।
- इस पौधे को वर्ष 1965 में काजरी (जोधपुर) के वैज्ञानिक इजरायल से लेकर आए थे। यह मुख्यतः मरुस्थलीय जंगलों का पौधा है।
प्रमुख उत्पादक जिले
- जोधपुर, गंगानगर, जयपुर
➻ अफीम (Opium)
अफीम को “काला सोना” कहा जाता है।
प्रमुख किस्में
- चेतक, जवाहर – 16
प्रमुख उत्पादक जिले
- चित्तौड़गढ़ (सर्वाधिक), प्रतापगढ़, कोटा, बारां, झालावाड़
➻ जीरा (Cumin)
जीरा उत्पादन में राजस्थान का देश में दूसरा स्थान है।
प्रमुख उत्पादक जिले
- जोधपुर, बाड़मेर, जालौर
➻ धनिया (Coriander)
- धनिया उत्पादन में राजस्थान का देश में तीसरा स्थान है।
- राजस्थान में इसकी सर्वाधिक खेती कोटा संभाग में की जाती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- प्रमुख धनिया मंडी – रामगंज (कोटा)।
➻ जैतून (Olive)
जैतून का उपयोग मुख्य रूप से खाने के साथ, सौंदर्य प्रसाधनों तथा दवाइयों में किया जाता है। राजस्थान ने देश में जैतून उत्पादन और प्रसंस्करण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहचान बनाई है। देश की पहली जैतून तेल रिफाइनरी का स्थापना कार्य 3 अक्टूबर 2014 को लूणकरणसर (बीकानेर) में किया गया। यहां निर्मित जैतून तेल को “राज ऑलिव” ब्राण्ड नाम से बाजार में उपलब्ध कराया जाता है।
➻ गुलाब
- राजस्थान में खमनोर (राजसमंद) तथा नाथद्वारा का चैती गुलाब (दमश्क गुलाब) विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यह गुलाब मुख्यतः चैत्र माह में अधिक मात्रा में खिलता है, इसलिए इसे चैती गुलाब कहा जाता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- सर्वाधिक गुलाब उत्पादन जिला – अजमेर
- राजस्थान की पहली पुष्प मंडी – पुष्कर
- राजस्थान की सबसे बड़ी फूल मंडी – मुहाना मंडी (जयपुर)
➻ मेहन्दी
- राजस्थान में सोजत (पाली) की मेहन्दी देशभर में प्रसिद्ध है। इसी कारण सोजत को “मेहन्दी नगरी” कहा जाता है।
- सोजत की मेहन्दी को वर्ष 2021 में जी.आई. टैग प्राप्त हुआ।
- मेहन्दी में लॉसोन (Lawsone) नामक पदार्थ पाया जाता है, जिसके कारण मेहन्दी लाल रंग धारण करती है।
➻ मैथी
राजस्थान की ताऊसर (नागौर) की खुशबूदार पान मैथी विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
प्रमुख उत्पादक जिले
- नागौर, बीकानेर, जोधपुर
➻ सोनामुखी
सोनामुखी एक औषधीय महत्व का पौधा है।
प्रमुख उत्पादक जिले
- जोधपुर, बीकानेर
सोनामुखी की पत्तियों का निर्यात मुख्यतः जोधपुर से किया जाता है।
➻ खजूर
राजस्थान में खजूर उत्पादन एवं अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण संस्थान स्थापित किए गए हैं।
- खजूर अनुसंधान केन्द्र – बीकानेर
- देश की सबसे बड़ी खजूर पौधा प्रयोगशाला – चौपासनी (जोधपुर)
➻ रतनजोत
रतनजोत की खेती मुख्य रूप से बायोडीजल उत्पादन के लिए की जा रही है।
- वानस्पतिक नाम – जेट्रोफा करकास
- आई के एफ टैक्नोलॉजी द्वारा कालरावास (उदयपुर) में रतनजोत आधारित बायोडीजल रिफाइनरी प्लांट स्थापित किया गया है।
- यह राजस्थान का पहला कॉमर्शियल बायोडीजल प्लांट है।
- राजस्थान की प्रथम बायोफ्यूल नीति वर्ष 2007 में जारी की गई।
राजस्थान की प्रमुख बागवानी एवं मसाला फसलें
| फसल | प्रमुख क्षेत्र / विशेषता |
|---|---|
| प्याज | जोधपुर, सीकर |
| हल्दी | झाड़ोल (उदयपुर), बीकानेर, बूंदी |
| लाल मिर्च | मथानिया (जोधपुर) |
| लहसुन | बारां |
| मटर | जयपुर |
| संतरा | झालावाड़ (राजस्थान का नागपुर) |
| किन्नू, माल्टा | गंगानगर |
❖ राजस्थान में कृषिगत संस्थाएं
राजस्थान में कृषि अनुसंधान, विपणन, बीज उत्पादन तथा ग्रामीण वित्तीय विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण संस्थाओं की स्थापना की गई है।
प्रमुख कृषिगत संस्थाएं
| संस्था का नाम | स्थान / स्थापना / प्रमुख जानकारी |
|---|---|
| राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान |
|
| कृषि अनुसंधान निदेशालय |
|
| राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड |
|
| राजस्थान राज्य बीज निगम लिमिटेड (RSSCL) |
|
| केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान केन्द्र (CAZRI) |
प्रमुख कार्य:-
|
| राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) |
|
| राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र |
|
अन्य महत्वपूर्ण कृषि संस्थान
| संस्थान | विवरण |
|---|---|
| केन्द्रीय कृषि फार्म, सूरतगढ़ (गंगानगर) | 1956 में रूस की सहायता से स्थापित, एशिया का सबसे बड़ा कृषि फार्म |
| केन्द्रीय कृषि फार्म, जैतसर (अनूपगढ़-गंगानगर) | – |
| बेर अनुसंधान केन्द्र – बीकानेर | – |
❖ राजस्थान के कृषि विश्वविद्यालय
- राजस्थान में कुल 5 कृषि विश्वविद्यालय स्थापित हैं।
| क्रम | विश्वविद्यालय |
|---|---|
| 1 | स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय – बीकानेर |
| 2 | महाराणा प्रताप कृषि एवं तकनीकी विश्वविद्यालय – उदयपुर |
| 3 | कृषि विश्वविद्यालय – बोरखेड़ा (कोटा) |
| 4 | कृषि विश्वविद्यालय – मंडोर (जोधपुर) |
| 5 | श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय – जोबनेर (जयपुर) |
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य –
- वर्ष 2024 तक राजस्थान में 39 राजकीय कृषि महाविद्यालय हैं।
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अनुसार राजस्थान में 47 कृषि विज्ञान केन्द्र हैं।
❖ प्रमुख कृषि क्रांतियां
कृषि एवं उससे संबंधित क्षेत्रों के विकास के लिए विभिन्न क्रांतियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
➻ हरित क्रांति
- हरित क्रांति के जनक नॉर्मन अर्नेस्ट बोरलॉग (अमेरिका) माने जाते हैं, जिन्हें नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ तथा वे नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले एकमात्र कृषि वैज्ञानिक हैं।
- भारत में हरित क्रांति के जनक एम. एस. स्वामीनाथन को माना जाता है।
- हरित क्रांति के परिणामस्वरूप गेहूं और चावल के उत्पादन में वृद्धि हुई। राजस्थान में इसका सर्वाधिक प्रभाव हनुमानगढ़ तथा गंगानगर जिलों में देखा गया।
हरित क्रांति के बाद कृषि में निम्न परिवर्तन देखने को मिले—
- मशीनों का प्रयोग बढ़ा।
- उन्नत बीजों का उपयोग बढ़ा।
- रासायनिक उर्वरकों का उपयोग बढ़ा।
प्रमुख क्रांतियां एवं उनके क्षेत्र –
| क्रांति | संबंधित क्षेत्र |
|---|---|
| श्वेत क्रांति | दूध उत्पादन |
| पीली क्रांति | तिलहन / सरसों उत्पादन |
| भूरी क्रांति | खाद्य प्रसंस्करण |
| नीली क्रांति | मछली उत्पादन |
| सुनहरी क्रांति | बागबानी |
| रजत क्रांति | अण्डा उत्पादन |
| लाल क्रांति | मांस / टमाटर उत्पादन |
| गोल क्रांति | आलू उत्पादन |
| काली / कृष्ण क्रांति | खनिज तेल / कोयला |
| गुलाबी क्रांति | झींगा मछली उत्पादन |
| बादामी क्रांति | मसाला उत्पादन |
| अमृत क्रांति | नदियों को जोड़ने से संबंधित |
| इन्द्रधनुषी क्रांति | सभी क्रांतियों पर निगरानी हेतु |
❖ कृषि की प्रमुख योजनाएं
राजस्थान एवं भारत सरकार द्वारा कृषि विकास, उत्पादन वृद्धि तथा किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
| योजना | प्रारम्भ | वित्त पोषण |
|---|---|---|
| राष्ट्रीय दलहन विकास योजना | 1988-89 | केन्द्र : राज्य = 75 : 25 |
| राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM) | 2005-06 | 2015-16 से 60 : 40 |
| राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) | 2007-08 | 2015-16 से 60 : 40 |
| राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) | 2007-08 | 2015-16 से 60 : 40 |
| राष्ट्रीय आयुष मिशन | 2009-10 | 2015-16 से 60 : 40 |
➻ राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM)
- राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत राजस्थान के 24 जिलों का चयन किया गया है।
➻ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM)
- यह योजना वर्ष 2007-08 में केन्द्र सरकार द्वारा गेहूं एवं दलहन उत्पादन में वृद्धि के उद्देश्य से प्रारम्भ की गई।
➻ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
- प्रारम्भ – 13 जनवरी 2016
- संचालन – भारतीय कृषि बीमा कम्पनी लिमिटेड
- यह योजना राजस्थान के सभी जिलों में लागू है।
➻ राष्ट्रीय टिकाऊ (सतत्) खेती मिशन (NMSA)
इस योजना में केन्द्र एवं राज्य सरकार का वित्त पोषण अनुपात 60:40 है।
इसके अंतर्गत निम्न तीन उप मिशन शामिल किए गए हैं—
- वर्षा आधारित क्षेत्र विकास (RAD)
- मृदा स्वास्थ्य प्रबन्धन एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड
- कृषि वानिकी उप मिशन (SMAF)
➻ प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग उन्नयन योजना (PMFME)
- प्रारम्भ – जून 2020
- नोडल एजेंसी – राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड
➻ मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना
- मृदा की गुणवत्ता का वैज्ञानिक आकलन करने के उद्देश्य से मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का प्रारम्भ 19 फरवरी 2015 को किया गया।
- नारा: “स्वस्थ धरा, खेत हरा”
यह भारत सरकार की एक योजना है, जिसके अंतर्गत किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जाते हैं। इन कार्डों में मिट्टी की गुणवत्ता तथा उसमें पाई जाने वाली कमियों की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।
➻ पीएम किसान सम्मान निधि योजना
यह योजना 1 दिसंबर 2018 को लागू की गई।
- वित्त पोषण – 100 प्रतिशत भारत सरकार द्वारा
- सम्मान निधि राशि – 9 हजार रुपये प्रतिवर्ष
➻ राजीव गाँधी कृषक साथी सहायता योजना
इस योजना का प्रारम्भ 9 दिसंबर 2009 को किया गया। योजना के अंतर्गत किसानों एवं कृषि मजदूरों को कृषि कार्य करते समय दुर्घटना होने पर 5 हजार रुपये से 50 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जबकि मृत्यु होने की स्थिति में 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान है।
➻ मुख्यमंत्री कृषक साथी योजना
- इस योजना का प्रारम्भ 24 फरवरी 2021 को किया गया।
- यह योजना कृषक कल्याण कोष के माध्यम से संचालित 3 वर्षों की अनुदान आधारित योजना है।
➻ राजस्थान कृषि प्रतिस्पर्धा योजना (RACP)
- राजस्थान कृषि प्रतिस्पर्धा योजना (RACP) का प्रारम्भ जुलाई 2012 में किया गया।
- यह योजना विश्व बैंक की आर्थिक सहायता से संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देना, सिंचाई जल का कुशल उपयोग सुनिश्चित करना तथा किसानों की आय में वृद्धि करना है।
➻ किसान कलेवा योजना
- इस योजना का प्रारम्भ जनवरी 2014 में किया गया।
- योजना के अंतर्गत किसानों को 5 रुपये प्रति थाली की दर से भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
➻ मुख्यमंत्री बीज स्वावलंबन योजना – इस योजना की शुरुआत 2017-18 में कोटा, भीलवाड़ा एवं उदयपुर जिलों में की गई थी। बाद में इसे 2018-19 से राजस्थान के सभी 10 कृषि जलवायु खंडों में लागू कर दिया गया।
➻ डिग्गी निर्माण कार्यक्रम – नहरी क्षेत्रों में फसलों एवं कृषि गतिविधियों के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किसानों को डिग्गी निर्माण पर लागत का 50 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाता है।
➻ शून्य बजट प्राकृतिक कृषि योजना – राज्य बजट 2019-20 में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस योजना की घोषणा की गई। इस योजना के अंतर्गत बांसवाड़ा, टोंक एवं सिरोही जिलों की 36 ग्राम पंचायतों के लगभग 20 हजार किसानों को शामिल किया जाना प्रस्तावित किया गया।
- योजना के चार स्तंभ – जीवामृत, बीजामृत, आच्छादन, वाष्प
➻ राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति 2019
यह नीति 12 दिसंबर 2019 को जारी की गई थी।
प्रमुख उद्देश्य
- किसानों की आय में वृद्धि करना।
- किसान संगठनों की सहभागिता बढ़ाना।
- फसल कटाई के बाद होने वाली हानियों को कम करना।
- विशिष्ट फसलों के मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करना।
- कृषि निर्यात को बढ़ावा देना।
➻ राजीव गाँधी किसान बीज उपहार योजना – इस योजना का प्रारम्भ 22 अक्टूबर 2022 को किया गया। योजना के अंतर्गत निगम से बीज खरीदने वाले किसानों को राज्य के प्रत्येक जिले में 51 उपहार लॉटरी के माध्यम से प्रदान किए जाते हैं। इस योजना में प्रथम उपहार के रूप में ट्रैक्टर दिया जाता है।
➻ कृषक उपहार योजना – इस योजना का प्रारम्भ 1 जनवरी 2022 से किया गया।
➻ किसान कल्याण कोष – किसान कल्याण कोष की स्थापना 16 दिसंबर 2019 को की गई।
❖ जैविक खेती (ऑर्गेनिक खेती)
जैविक खेती में गोबर खाद, हरी खाद तथा फसलों को रोगों से बचाने के लिए प्राकृतिक विधियों का उपयोग किया जाता है। इस खेती पद्धति का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के प्रयोग को कम करना है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| देश का प्रथम जैविक राज्य | सिक्किम |
| जैविक खेती अपनाने वाला राजस्थान का पहला जिला | डूंगरपुर |
| राजस्थान की पहली ऑर्गेनिक मंडी | डूंगरपुर |
| राजस्थान का पहला जैविक गाँव | घाटी गाँव (उदयपुर) |
❖ राजस्थान के कृषि जलवायु प्रदेश
भारत के 15 कृषि जलवायु प्रदेशों में से दो कृषि जलवायु प्रदेश राजस्थान में स्थित हैं—
- अरावली-मालवा पठारी प्रदेश (8वाँ)
- पश्चिमी राजस्थान प्रदेश (14वाँ)
जलवायु एवं कृषि परिस्थितियों के आधार पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने राजस्थान को 10 कृषि जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया है।
राजस्थान के 10 कृषि जलवायु क्षेत्र –
| क्षेत्र | जिले | औसत वर्षा | प्रमुख कृषि उपजें |
|---|---|---|---|
| शुष्क पश्चिमी मैदानी क्षेत्र (IA) | बाड़मेर, बालोतरा, जोधपुर, फलौदी | 20-37 सेमी | बाजरा, मोठ, तिल, गेहूं, सरसों, जीरा |
| उत्तर पश्चिमी सिंचित मैदानी क्षेत्र (IB) | गंगानगर, हनुमानगढ़ | 10-35 सेमी | कपास, ग्वार, गेहूं, सरसों, चना, किन्नू, गन्ना |
| अति शुष्क आंशिक सिंचित पश्चिमी मैदानी क्षेत्र (IC) | जैसलमेर, बीकानेर, आंशिक चूरू | 10-35 सेमी | बाजरा, मोठ, ग्वार, गेहूं, सरसों, चना |
| अंतःस्थलीय जलोत्सरण के अंतःवर्ती मैदानी क्षेत्र (IIA) | सीकर, चूरू, झुंझुनूं, नागौर, डीडवाना कुचामन | 30-50 सेमी | बाजरा, ग्वार, दालें, सरसों, चना |
| लूनी नदी का अंतवर्ती मैदानी क्षेत्र (IIB) | पाली, जालौर, सिरोही | 30-50 सेमी | बाजरा, ग्वार, तिल, गेहूं, सरसों, जीरा |
| अर्धशुष्क पूर्वी मैदानी क्षेत्र (IIIA) | अजमेर, ब्यावर, टोंक, जयपुर, कोटपूतली बहरोड़, खैरथल तिजारा, दौसा | 50-70 सेमी | बाजरा, ग्वार, ज्वार, गेहूं, सरसों, चना |
| बाढ़ प्रभावित पूर्वी मैदानी क्षेत्र (IIIB) | अलवर, भरतपुर, डीग, करौली, धौलपुर, सवाईमाधोपुर | 50-70 सेमी | बाजरा, ग्वार, मूंगफली, गेहूं, जौ, सरसों, चना |
| अर्ध या उप आर्द्र दक्षिणी मैदानी क्षेत्र (IVA) | भीलवाड़ा, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, उदयपुर | 50-90 सेमी | मक्का, दालें, ज्वार, गेहूं, चना |
| आर्द्र दक्षिणी मैदानी क्षेत्र (IVB) | डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, सलूंबर | 50-110 सेमी | मक्का, ज्वार, चावल, उड़द, गेहूं, चना |
| आर्द्र दक्षिणी पूर्वी मैदानी क्षेत्र (V) | कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ | 65-100 सेमी | ज्वार, सोयाबीन, गेहूं, सरसों |
महत्वपूर्ण तथ्य –
- अति शुष्क आंशिक सिंचित पश्चिमी मैदानी क्षेत्र (IC) राजस्थान का सबसे बड़ा कृषि जलवायु प्रदेश है।
- आर्द्र दक्षिणी मैदानी क्षेत्र (IVB) राजस्थान का सबसे छोटा कृषि जलवायु प्रदेश है।
❖ कृषि के प्रकार
कृषि क्षेत्र में अलग-अलग प्रकार की गतिविधियों के आधार पर कृषि के विभिन्न रूप विकसित हुए हैं। इन कृषि प्रकारों को विशेष नामों से जाना जाता है।
| कृषि का प्रकार | संबंधित कार्य |
|---|---|
| विटी कल्चर (Viti Culture) | अंगूर की खेती |
| पिस्सी कल्चर (Pisciculture) | मछली पालन |
| एपी कल्चर (Apiculture) | मधुमक्खी पालन |
| फ्लोरी कल्चर (Floriculture) | फूलों की खेती |
| हार्टी कल्चर (Horticulture) | फलों एवं बागवानी की खेती |
| वर्मी कल्चर (Vermiculture) | केंचुए से खाद बनाना |
| सेरी कल्चर (Sericulture) | रेशम कीट पालन |
| ओलवी कल्चर (Olive Culture) | जैतून की खेती |
❖ राजस्थान की प्रमुख कृषि मंडियाँ
राजस्थान में विभिन्न कृषि उत्पादों के लिए विशेष मंडियाँ स्थापित हैं, जहाँ संबंधित फसलों का व्यापार प्रमुख रूप से किया जाता है।
| कृषि उत्पाद | प्रमुख मंडी |
|---|---|
| किन्नू एवं माल्टा | गंगानगर |
| टमाटर | बस्सी (जयपुर) |
| प्याज | अलवर |
| अमरूद | सवाईमाधोपुर |
| मिर्च | टोंक |
| ईसबगोल | भीनमाल (जालौर) |
| मेहन्दी एवं सोनामुखी | सोजत (पाली) |
| अश्वगंधा | झालरापाटन (झालावाड़) |
| संतरा | भवानी मंडी (झालावाड़) |
| आंवला | चौमू (जयपुर) |
❖ कृषि से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु
- कृषि बजट – राजस्थान का प्रथम कृषि बजट तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा 23 फरवरी 2022 को प्रस्तुत किया गया।
राजस्थान में भूमि जोत संबंधी तथ्य –
- कृषि गणना 2015-16 के अनुसार राजस्थान में कुल प्रचलित भूमि जोतों की संख्या 76.55 लाख है।
| विवरण | संख्या |
|---|---|
| कुल प्रचलित भूमि जोत | 76.55 लाख |
| पुरुष प्रचलित कृषि जोत | 68.66 लाख |
| महिला प्रचलित भूमि जोत | 7.75 लाख |
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य—
- वर्ष 2015-16 में राजस्थान में भू-जोतों का औसत आकार 2.73 हेक्टेयर था।
- वर्ष 2015-16 में कुल जोतों का क्षेत्रफल 208.73 लाख हेक्टेयर था।
- वर्ष 2024-25 में राजस्थान में खेती का क्षेत्र (शुद्ध बोया गया क्षेत्र) 53.10% है।
➻ प्रमुख कृषि एवं अनुसंधान संस्थान
- केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान
(National Research Centre for Arid Horticulture)- स्थान – बीछवाल, बीकानेर
- स्थापना – 1993
- मरुस्थलीय आयुर्विज्ञान केन्द्र
(DMRC – Desert Medicine Research Centre)
- स्थापना – 27 जून 1984
- स्थान – जोधपुर
- स्थापना – भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा
❖ उत्कृष्टता केन्द्र (Centre of Excellence)
राजस्थान में विभिन्न फसलों एवं कृषि गतिविधियों के विकास के लिए उत्कृष्टता केन्द्र स्थापित किए गए हैं।
| उत्कृष्टता केन्द्र | स्थान |
|---|---|
| आम उत्कृष्टता केन्द्र | खेमरी (धौलपुर) |
| अमरूद उत्कृष्टता केन्द्र | देवडावास (टोंक) |
| अनार उत्कृष्टता केन्द्र | ढिढोल (बस्सी – जयपुर) |
| ड्रैगन (पिताया) उत्कृष्टता केन्द्र | ढिढोल (बस्सी – जयपुर) |
| मक्का उत्कृष्टता केन्द्र | उदयपुर |
| सीताफल उत्कृष्टता केन्द्र | चित्तौड़गढ़ |
| खजूर उत्कृष्टता केन्द्र | सगरा भोजका (जैसलमेर) |
| लहसुन उत्कृष्टता केन्द्र | बारां (बजट 2025 में घोषणा) |
❖ कृषि से संबंधित प्रमुख अधिनियम
राजस्थान में कृषि एवं भूमि व्यवस्था से संबंधित प्रमुख अधिनियम निम्न हैं—
| अधिनियम | वर्ष |
|---|---|
| राजस्थान जागीर उन्मूलन अधिनियम | 1952 |
| राजस्थान काश्तकारी अधिनियम | 1955 |
| जमींदारी और बिस्वेदारी उन्मूलन अधिनियम | 1959 |
| कृषि उपज मंडी अधिनियम | 1961 |
कृषि प्रशासन एवं अन्य महत्वपूर्ण तथ्य –
- राजस्थान में जमाबन्दी एवं गिरदावरी की सत्यापित एवं सामान्य नकल प्राप्त करने हेतु ‘धरा ऐप’ विकसित किया गया है।
- राजस्थान राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम की स्थापना वर्ष 2010 में की गई थी।
(1) बजट 2024-25 में कृषि क्षेत्र से संबंधित घोषणाएँ
बजट 2024-25 में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से संबंधित महत्वपूर्ण घोषणाएँ की गईं—
| स्थान | घोषणा |
|---|---|
| अनूपगढ़ – श्रीगंगानगर | मिनी फूड पार्क की स्थापना |
| सांचौर – जालौर | एग्रो फूड पार्क की स्थापना |
| बांसवाड़ा | Centre of Excellence For Maize की स्थापना |
| भरतपुर | Centre of Excellence for Honey Beekeeping की स्थापना |
(2) बजट 2025-26 की प्रमुख कृषि घोषणाएँ एवं योजनाएँ
राजस्थान बजट 2025-26 में कृषि, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि अनुसंधान तथा किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के उद्देश्य से अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएँ की गईं।
| क्षेत्र | प्रमुख घोषणा |
|---|---|
| उत्कृष्टता केन्द्र | बारां में लहसुन उत्कृष्टता केन्द्र (Centre of Excellence for Garlic) की स्थापना की घोषणा। |
| खाद्य प्रसंस्करण | अनूपगढ़ (श्रीगंगानगर) में मिनी फूड पार्क स्थापित किया जाएगा। |
| खाद्य प्रसंस्करण | सांचौर (जालौर) में एग्रो फूड पार्क स्थापित किया जाएगा। |
| कृषि अनुसंधान | बांसवाड़ा में Centre of Excellence for Maize स्थापित किया जाएगा। |
| मधुमक्खी पालन | भरतपुर में Centre of Excellence for Honey Beekeeping स्थापित किया जाएगा। |
| बागवानी विकास | फल, सब्जी एवं उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने हेतु बागवानी क्षेत्र के विस्तार पर जोर दिया गया। |
| कृषि मूल्य संवर्धन | कृषि प्रसंस्करण एवं कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देने की दिशा में विशेष प्रावधान किए गए। |
| किसान आय वृद्धि | किसानों की आय बढ़ाने तथा कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन के लिए नई पहल प्रस्तावित की गईं। |
महत्वपूर्ण बिंदु
- बजट 2025-26 में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता दी गई।
- कृषि उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन पर विशेष बल दिया गया।
- बागवानी एवं मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने के लिए नए उत्कृष्टता केन्द्रों की घोषणा की गई।
(3) बजट 2026-27 की प्रमुख कृषि घोषणाएँ एवं योजनाएँ
राजस्थान बजट 2026-27 में कृषि, सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण, सौर ऊर्जा तथा किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। बजट में कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएँ की गई हैं।
| क्षेत्र | प्रमुख घोषणा |
|---|---|
| ब्याज मुक्त फसल ऋण | लगभग 35 लाख किसानों को ₹25,000 करोड़ तक के ब्याज मुक्त फसल ऋण उपलब्ध कराने का प्रावधान। |
| कृषि सब्सिडी | कृषि एवं किसानों के लिए विभिन्न प्रकार की सब्सिडी तथा सहायता मदों पर लगभग ₹42,191 करोड़ व्यय का अनुमान। |
| सौर कृषि पंप | PM-कुसुम योजना के अंतर्गत 50,000 सौर पंप स्थापित करने का लक्ष्य। |
| सूक्ष्म सिंचाई | राज्य में लगभग 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई उपकरणों के दायरे में लाने का लक्ष्य। |
| कृषि यंत्रीकरण | किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी उपलब्ध कराने हेतु 500 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे। |
| सिंचाई अवसंरचना | सिंचाई परियोजनाओं, नहरों एवं जल संरचनाओं के विकास के लिए ₹11,300 करोड़ से अधिक का प्रावधान। |
| बीज वितरण | किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराने हेतु सीड मिनी किट वितरण कार्यक्रम जारी रहेगा। |
| डिजिटल कृषि | राज-AIMS (Digital Agriculture Mission) के माध्यम से AI एवं सैटेलाइट आधारित कृषि सलाह उपलब्ध कराने की योजना। |
| जलवायु अनुकूल कृषि | किसानों को जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों के लिए प्रोत्साहित करने हेतु कार्बन क्रेडिट पायलट परियोजना शुरू की जाएगी। |
| GI एवं कृषि विपणन | Mission Raj GIFT के माध्यम से GI टैग वाले उत्पादों और उनके विपणन को बढ़ावा दिया जाएगा। |
अन्य महत्वपूर्ण बिंदु
- राज्य सरकार ने कृषि, पशुपालन एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बजट की प्राथमिकताओं में शामिल किया है।
- कृषि एवं सहायक गतिविधियों पर बजटीय व्यय में वृद्धि का प्रावधान किया गया है।
- सिंचाई, सौर ऊर्जा आधारित कृषि और कृषि यंत्रीकरण पर विशेष बल दिया गया है।
