राजस्थान में सूखा – अकाल

राजस्थान में सूखा – अकाल

वर्षा की कमी के कारण उत्पन्न होने वाली जल की कमी को सूखा कहा जाता है। जब सूखे की स्थिति के कारण भोजन, पशुओं के लिए चारे तथा पीने के पानी की कमी उत्पन्न हो जाती है, तब उसे अकाल कहा जाता है।

➻ राजस्थान में सूखा एवं अकाल की स्थिति

  • राजस्थान देश के उन राज्यों में शामिल है जहाँ समय-समय पर सूखा और अकाल की स्थिति उत्पन्न होती रही है। विभिन्न वर्षों में प्रभावित जिलों और जनसंख्या के आँकड़े इस स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं।
वर्ष प्रभावित जिले
2002-03 32 जिले
2004-05 31 जिले
2009-10 27 जिले
2019-20 21 जिले
2020-21 6 जिले
2021-22 10 जिले
2022-23 1 जिला
2010-11 2 जिले

सर्वाधिक प्रभावित जनसंख्या

वर्ष प्रभावित जनसंख्या
2002-03 447.80 लाख
2009-10 429.13 लाख

न्यूनतम प्रभावित जनसंख्या

वर्ष प्रभावित जनसंख्या
2022-23 2.36 लाख
2010-11 13.67 लाख

राजस्थान में अकाल से संबंधित प्रसिद्ध कहावत

राजस्थान में अकाल के संबंध में एक प्रसिद्ध कहावत प्रचलित है —

“तीजो कुरियो आठवों काल”

इसका अर्थ है कि प्रत्येक तीसरे वर्ष कुरिया (अर्द्धअकाल) तथा प्रत्येक आठवें वर्ष भयंकर अकाल पड़ता है।

अकाल के संबंध में एक प्रसिद्ध दोहा भी प्रचलित है —

“पग पूगल धड़ कोटड़े, बाहु बाड़मेर, जाये लादे जोधपुर, ठावौ जैसलमेर”

इसका अर्थ है कि अकाल के पैर पूगल (बीकानेर) में, धड़ कोटड़ा (जैसलमेर) में, भुजाएँ बाड़मेर में तथा तलाश करने पर यह जोधपुर में भी मिल जाता है और जैसलमेर में तो इसका स्थायी ठिकाना माना जाता है।

त्रिकाल

सबसे भयंकर अकाल को त्रिकाल कहा जाता है। इस स्थिति में अन्न (भोजन), तृण (घास-चारा) तथा जल तीनों की गंभीर कमी हो जाती है।

राजस्थान के प्रमुख अकाल:-

अकाल वर्ष
चालीसा अकाल 1783 ई.
पंचकाल 1812-13 ई.
सहसा भदुसा अकाल 1843-44 ई.
छप्पनियां अकाल 1899-1900 ई. (विक्रम संवत 1956)

सूखे के प्रकार

  1. मौसमी सूखा – जब किसी क्षेत्र में मौसमी वर्षा दीर्घकालिक औसत से 75 प्रतिशत कम हो जाती है, तब उसे मौसमी सूखा कहा जाता है।
  2. जल विज्ञान सूखा – जब पानी का अभाव हो जाए, जलाशय सूख जाएँ तथा भू-जल स्तर कम हो जाए, तब यह स्थिति जल विज्ञान सूखा कहलाती है।
  3. कृषि सूखा – जब फसलों और पशुओं के चारे की कमी उत्पन्न हो जाती है, तब उसे कृषि सूखा कहा जाता है।

राजस्थान में सूखे की पुनरावृत्ति

राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में सूखे की पुनरावृत्ति अलग-अलग अंतराल पर होती है।

अवधि जिले
8 वर्ष में एक बार सूखा भरतपुर, धौलपुर
3 वर्ष में एक बार सूखा जैसलमेर, जोधपुर, बाड़मेर, जालौर, सिरोही

राजस्थान में सूखा एवं अकाल पड़ने के कारण

राजस्थान में सूखा और अकाल पड़ने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—

  • अनियमित, अपर्याप्त तथा अनिश्चित वर्षा।
  • भौगोलिक बनावट, क्योंकि राज्य का 61 प्रतिशत भाग मरुस्थल में स्थित है।
  • तापमान की अधिकता।
  • वनस्पति की कमी।

➻ सूखा एवं अकाल से निपटने के लिए विभाग

  • राजस्थान में सूखा एवं अकाल जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग कार्यरत है।
  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 को राजस्थान में 1 अगस्त 2007 से लागू किया गया।

प्रमुख योजनाएँ एवं कार्यक्रम

➻ सूखा सम्भाव्य क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP)

  • प्रारम्भ : 1974-75
  • केन्द्र एवं राज्य की वित्तीय भागीदारी : 75:25 प्रतिशत
  • उद्देश्य : फसलों के उत्पादन में वृद्धि, मिट्टी एवं नमी का संरक्षण, वृक्षारोपण तथा जल संसाधनों का विकास करना।
  • यह कार्यक्रम राज्य के 11 जिलों में संचालित किया गया था।
  • वर्तमान में इस कार्यक्रम को समाप्त कर दिया गया है।

➻ मरू विकास कार्यक्रम (DDP – Desert Development Program)

  • प्रारम्भ : 1977-78
  • मुख्य उद्देश्य : मरुस्थल के विस्तार को रोकना, भूमि उत्पादकता बढ़ाना, संसाधनों का विकास करना, वन विकास तथा चारागाह विकास करना।
  • 1 अप्रैल 1999 से यह कार्यक्रम केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा 75:25 के अनुपात में संचालित किया जा रहा था।
  • यह कार्यक्रम राज्य के 16 जिलों में चलाया जा रहा था।
  • वर्तमान में इसे समाप्त कर दिया गया है।

➻ संशोधित/परिवर्तित क्षेत्र विकास कार्यक्रम

  • प्रारम्भ : 1978-79
  • यह कार्यक्रम राज्य के 13 जिलों में प्रारम्भ किया गया।

➻ डांग क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम

  • प्रारम्भ : 1994-95
  • यह कार्यक्रम राज्य के 8 जिलों — भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर, कोटा, बूंदी, बारां तथा झालावाड़ में प्रारम्भ किया गया।

➻ मेवात क्षेत्र विकास कार्यक्रम

  • प्रारम्भ : 1987
  • यह कार्यक्रम अलवर तथा भरतपुर जिलों में संचालित किया गया।

➻ मगरा क्षेत्र विकास कार्यक्रम

  • प्रारम्भ : 2005-06
  • यह कार्यक्रम राज्य के पाँच जिलों अर्थात् अजमेर, भीलवाड़ा, पाली, चित्तौड़गढ़ तथा राजसमंद के मगरा क्षेत्र में संचालित किया गया।
  • यह शत-प्रतिशत राज्य वित्त पोषित योजना है।

➻ सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम

  • प्रारम्भ : 1993-94
  • यह कार्यक्रम केन्द्र सरकार की 100 प्रतिशत सहायता से प्रारम्भ किया गया।
  • यह कार्यक्रम बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर तथा गंगानगर जिलों में संचालित किया जा रहा है।

महत्वपूर्ण बिन्दु

  • देश के 142 डेजर्ट ब्लॉक में से 85 डेजर्ट ब्लॉक राजस्थान में स्थित हैं।
  • मरू विकास बोर्ड की स्थापना वर्ष 1966 में की गई।

राजस्थान में सहकारिता

राजस्थान में सहकारी आन्दोलन की शुरुआत वर्ष 1904 में अजमेर से हुई। इसके बाद अक्टूबर 1905 में भिनाय (अजमेर) में राज्य की प्रथम सहकारी समिति की स्थापना की गई।

राजस्थान में सहकारी साख समितियों का त्रि-स्तरीय ढाँचा है।

1. राजस्थान राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड, जयपुर

  • यह सहकारिता के क्षेत्र में राज्य का शीर्ष बैंक है।
  • मुख्यालय : जयपुर
  • स्थापना : 14 अक्टूबर 1953
  • यह अल्पकालीन (5 से 15 माह) बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराता है।

2. केन्द्रीय सहकारी बैंक

  • इन्हें जिला सहकारी बैंक भी कहा जाता है।
  • ये 3 से 5 वर्ष की अवधि के लिए मध्यमकालीन ऋण उपलब्ध कराते हैं।

3. प्राथमिक साख समितियाँ

  • इन्हें ग्राम सेवा सहकारी समिति भी कहा जाता है।

➻ राजस्थान सहकारी शिक्षा और प्रबन्ध संस्थान

  • स्थापना : अप्रैल 1994
  • स्थान : झालानाडूंगरी (जयपुर)

➻ राजस्थान राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक

  • स्थापना : 26 मार्च 1957
  • स्थान : जयपुर
  • यह बैंक किसानों को दीर्घकालीन अवधि (5 से 15 वर्ष) के लिए ऋण उपलब्ध कराती है।

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